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                <title>Smart City - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भोपाल मास्टर प्लान पर दिशा बैठक में बवाल, विधायक और जनपद अध्यक्ष आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[मास्टर प्लान लागू करने को लेकर कांग्रेस विधायकों और जनपद अध्यक्ष के बीच गरमागरम बहस, भाजपा विधायक ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल; सांसद ने मुख्यमंत्री से जल्द चर्चा का भरोसा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/ruckus-in-disha-meeting-on-bhopal-master-plan-mla-and/article-58424"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच हुई नोकझोंक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर तीखी टिप्पणियां कीं और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में हो रही देरी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मास्टर प्लान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शहर का विकास इसी तरह चलता रहा तो भोपाल का संतुलित विकास संभव नहीं हो पाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मास्टर प्लान लंबित होने के कारण शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप किया। उनके बीच में बोलने और उंगली दिखाकर अपनी बात रखने पर विधायक आरिफ मसूद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह सांसद से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस तरह बोलना उचित नहीं है। मसूद ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा मास्टर प्लान किस काम का है, जो वर्षों बाद भी लागू नहीं हो पा रहा। इस पर प्रमोद सिंह राजपूत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को "औकात में रहकर बात करने" की नसीहत दी। दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस चलती रही। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी माहौल शांत कराने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ समय तक दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वह केवल सांसद से संवाद कर रहे थे और जनपद अध्यक्ष का इस तरह बीच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यशैली से गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होती है। विधायक आतिफ अकील भी इस मुद्दे पर मसूद के समर्थन में दिखाई दिए। बाद में दोनों विधायक बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के नाम पर भोपाल की मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर लिफ्ट खराब रहती हैं, सामुदायिक भवनों की कमी है और सार्वजनिक स्थानों के विकास पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि अधिक निवेशक आगे आएं और परियोजना की आय बढ़ सके। उनका मानना था कि वर्तमान स्वरूप में बड़े प्लॉटों की बिक्री नहीं हो पा रही है, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस तरह की समस्याएं उठा रहे हैं तो निश्चित रूप से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में भोपाल की महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें समय पर ठीक नहीं हो पातीं, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों और समस्याओं की अलग-अलग समीक्षा कर उनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह करेंगे। सांसद ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कई विकास कार्यों में टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जो सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। बैठक के दौरान भोपाल की झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए "भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण" गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाने तथा भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर में बनेगी देश की सबसे बड़ी स्वामी विवेकानंद प्रतिमा, काम अंतिम चरण में</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड-85 में तेजी से चल रहा निर्माण, महापौर ने किया निरीक्षण, अगले महीने भव्य अनावरण की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/countrys-largest-swami-vivekananda-statue-will-be-built-in-indore/article-57510"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/indore-swami-vivekananda-statue.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर में देश की सबसे बड़ी स्वामी विवेकानंद प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। शहर के वार्ड क्रमांक-85 में निर्माणाधीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और प्रतिमा के लिए तैयार किए जा रहे विशाल पेडेस्टल का निर्माण लगभग पूरा होने की ओर है। बुधवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ मौके पर पहुंचकर पूरे कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और तय समयसीमा की विस्तार से जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। नगर निगम के अनुसार प्रतिमा का निर्माण निर्धारित योजना के अनुसार किया जा रहा है। इस समय सबसे अधिक ध्यान प्रतिमा के आधार यानी पेडेस्टल को मजबूत और सुरक्षित बनाने पर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने महापौर को बताया कि आधार निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और अब अंतिम चरण का काम तेजी से किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान महापौर ने निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए क्योंकि यह परियोजना केवल इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण बनने जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने निर्माण स्थल पर मौजूद इंजीनियरों और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने परियोजना से जुड़े हर चरण की जानकारी ली और पूछा कि किन-किन कार्यों को अभी पूरा किया जाना बाकी है। निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि सभी काम निर्धारित समय के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे। यदि मौसम या अन्य किसी कारण से कोई बड़ी बाधा नहीं आती है तो अगले महीने प्रतिमा के भव्य अनावरण की तैयारी पूरी कर ली जाएगी। नगर निगम का कहना है कि अनावरण कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की योजना भी बनाई जा रही है। स्वामी विवेकानंद देश के उन महान व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं जिन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। उनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। नगर निगम का मानना है कि इतनी विशाल प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं होगी, बल्कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों से जोड़ने का भी माध्यम बनेगी। शहर आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक प्रमुख आकर्षण बनने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के बाद महापौर ने वार्ड क्रमांक-84 में निर्माणाधीन शासकीय स्कूल का भी दौरा किया। वहां उन्होंने भवन निर्माण की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं प्राथमिकता में हैं और इन्हें समय पर पूरा करना जरूरी है। स्कूल भवन बनने के बाद आसपास के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। महापौर ने कहा कि इंदौर लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। शहर में सड़क, शिक्षा, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक और प्रेरणादायक परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना था कि स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा शहर की नई पहचान बनेगी और आने वाले वर्षों में यह स्थान पर्यटन और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना इंदौर की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या समय रहते दूर की जा सके। सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है और विशेषज्ञों की देखरेख में निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, हरियाली और नागरिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा ताकि यह स्थान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके। शहर के कई नागरिकों ने भी इस परियोजना का स्वागत किया है। उनका मानना है कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। ऐसे में उनकी विशाल प्रतिमा नई पीढ़ी को प्रेरित करने के साथ-साथ इंदौर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर में अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई संगठनों का धरना, विकास में पिछड़ेपन का आरोप, चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/demand-to-make-arpa-par-area-a-separate-municipal-corporation/article-57043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में अरपा पार सरकंडा क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। गुरुवार को नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अरपा पार क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद विकास और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। इसी असंतोष के बीच बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अलग नगर निगम बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कहा कि यह मांग पिछले तीन दशकों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका आरोप था कि हर चुनाव के समय स्थानीय स्तर पर वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता। उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्थानीय विधायक ने अरपा पार क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अब जनता “जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” जैसे अभियानों के जरिए अपनी आवाज को और मजबूत करेगी। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण हुआ है, लेकिन इसके अनुपात में विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। कई लोगों का कहना था कि सड़क, जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं में लगातार कमी महसूस की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इस क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भीड़ में मौजूद लोगों का कहना था कि जब तक अलग नगर निगम का गठन नहीं होता, तब तक स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से नहीं हो पाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन को लेकर मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत 10 जुलाई को मानव श्रृंखला बनाने की घोषणा की गई है। इसके बाद दूसरे चरण में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और यदि मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो 15 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जा रहा है क्योंकि वर्षों से लगातार मांग के बावजूद कोई समाधान सामने नहीं आया है। उनका आरोप है कि क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिनमें श्याम मोहन दुबे, गौरव तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, दिलीप पाटिल, रामकुमार यादव, अमित सोनकर, अजय कापसे, कमल साहू और अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा दिया जाए ताकि प्रशासनिक कामकाज में तेजी आए और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में दूर-दराज के क्षेत्रों तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि अरपा पार क्षेत्र में कुल 24 वार्ड शामिल हैं, जो वर्तमान नगर निगम व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल के बावजूद अलग प्रशासनिक इकाई नहीं होने से विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अलग नगर निगम का गठन होता है तो योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी और तेज होगा। साथ ही नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>90 करोड़ से बना अत्याधुनिक बांस घाट श्मशान, संचालन ईशा फाउंडेशन को सौंपा</title>
                                    <description><![CDATA[पटना के बांस घाट श्मशान में आधुनिक सुविधाओं के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था, सरकार ने संचालन ईशा फाउंडेशन को दिया, शुल्क और लीज को लेकर भी चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/state-of-the-art-bamboo-ghat-cremation-operation-built-with-rs-90-crores/article-57012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/patna-bans-ghat.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पटना के गंगा तट स्थित बांस घाट श्मशान घाट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर नया स्वरूप दिया गया है। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को अब संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को सौंप दिया गया है। सरकार की ओर से यह जिम्मेदारी बिना किसी शुल्क के दी गई है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार की सेवा निशुल्क नहीं होगी। उपलब्ध व्यवस्थाओं के अनुसार अंतिम संस्कार कराने वाले लोगों को 3500 से 5000 रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ सकता है। वहीं शहर के अन्य सरकारी श्मशान घाटों पर पारंपरिक व्यवस्था के तहत काफी कम शुल्क लिया जाता है। इसी वजह से इस परियोजना और इसकी संचालन व्यवस्था को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैले इस आधुनिक श्मशान घाट का निर्माण पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से कराया गया है। पहले यहां का श्मशान परिसर काफी छोटा था, लेकिन अब इसे विस्तार देकर आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। परिसर में एक समय में 18 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। इसके लिए इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, आधुनिक वुड क्रीमेशन ओवन और पारंपरिक चिता स्थल तीनों प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुन सकें। श्मशान परिसर में चार आधुनिक इलेक्ट्रिक ओवन लगाए गए हैं, जिनमें कम समय में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसके अलावा छह विशेष वुड क्रीमेशन ओवन भी तैयार किए गए हैं, जिनमें पारंपरिक चिता की तुलना में कम लकड़ी का उपयोग होता है और प्रदूषण भी कम फैलता है। वहीं आठ पारंपरिक चिता स्थलों की भी व्यवस्था रखी गई है, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुविधाओं को देखते हुए यहां आने वाले लोगों के लिए दो वातानुकूलित प्रतीक्षालय भी बनाए गए हैं। शवों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक मोर्चरी रूम तैयार किया गया है, जिसमें फ्रीजर की व्यवस्था उपलब्ध है। परिसर के भीतर अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक सामग्री के लिए अलग दुकानें बनाई गई हैं। यहां कफन, पूजन सामग्री, लकड़ी, घी, कपूर, अगरबत्ती और अन्य जरूरी सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगा, जिससे परिजनों को अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। इस परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार हैं। लगभग 42 फीट ऊंचे इन दोनों प्रवेश और निकास द्वारों पर कांस्य से निर्मित ओम का प्रतीक स्थापित किया गया है। परिसर के भीतर दो कृत्रिम जलाशय भी बनाए गए हैं, जहां अस्थि विसर्जन और स्नान की व्यवस्था की गई है। इन तालाबों में पाइपलाइन के माध्यम से गंगा का जल पहुंचाया जाता है ताकि सीधे नदी में भीड़ और प्रदूषण दोनों को कम किया जा सके। दोनों जलाशयों के बीच भगवान शिव की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जो पूरे परिसर को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करती है। श्मशान की दीवारों पर जीवन, मृत्यु और मानव जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाती कलात्मक पेंटिंग बनाई गई हैं। राजा हरिश्चंद्र की कथा सहित कई धार्मिक और प्रेरणादायक चित्रों को भी उकेरा गया है। प्रशासन का कहना है कि इन चित्रों का उद्देश्य शोकाकुल परिवारों को जीवन के दर्शन और मानवीय मूल्यों का संदेश देना है। परिसर में हजारों पौधे लगाए गए हैं और हरियाली विकसित की गई है ताकि वातावरण शांत और स्वच्छ बना रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए यहां ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लोग वेबसाइट या व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इसके साथ ही मुक्ति रथ की बुकिंग और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जैसी सुविधाएं भी एकीकृत की जा रही हैं। इससे अंतिम समय में परिजनों को होने वाली परेशानियों को कम करने का प्रयास किया गया है इसी बीच राज्य सरकार ने पटना के दीघा क्षेत्र में बिहार का पहला एलपीजी आधारित शवदाह गृह विकसित करने की योजना भी शुरू कर दी है। इस परियोजना का संचालन भी ईशा फाउंडेशन के सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए लगभग 2.11 एकड़ जमीन 33 वर्ष की लीज पर नाममात्र एक रुपये में उपलब्ध कराई गई है। यहां एलपीजी आधारित आधुनिक फर्नेस लगाए जाएंगे, जिनमें पारंपरिक धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अंतिम संस्कार कराया जाएगा। इसके अलावा मुंगेर जिले के तारापुर क्षेत्र में भी ईशा फाउंडेशन को करीब 15.01 एकड़ जमीन 99 वर्ष की लीज पर एक रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर देने का प्रस्ताव सामने आया है। सरकार के अनुसार इस भूमि पर सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से जुड़ा परिसर विकसित किया जाएगा। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सरकारी भूमि और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठा रहा है। बिहार सरकार का कहना है कि राज्य में कुल 40 आधुनिक शवदाह गृह विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से कई का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही उन्हें आम लोगों के लिए शुरू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक सम्मानजनक, स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित बनाना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर मेट्रो का दूसरा फेज तैयार, 21 जून से नए ट्रैक पर दौड़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे लोकार्पण, लाखों यात्रियों को मिलेगा फायदा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2cf375974d1/article-55792"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-metro-phase-2-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। येलो लाइन के दूसरे फेज को हरी झंडी मिलने के बाद अब 20 जून को इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 21 जून से आम लोग नए रूट पर मेट्रो की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इस विस्तार के साथ इंदौर मेट्रो न केवल अपने नेटवर्क को और मजबूत करेगी, बल्कि भोपाल मेट्रो की तुलना में विकास की रफ्तार में भी आगे निकलती दिखाई दे रही है। मेट्रो के नए कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। मेट्रो का नया रूट सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक रहेगा। यह कॉरिडोर इंदौर के कई प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और आईटी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार इस रूट से सीधे तौर पर 4 से 6 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, जबकि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़ने के बाद यह संख्या 8 से 10 लाख यात्रियों तक पहुंच सकती है। शहर के जिन इलाकों से यह मेट्रो गुजरेगी, वहां प्रतिदिन लाखों लोग निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी घटने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंदौर के तेजी से विकसित हो रहे आईटी और कॉरपोरेट हब को जोड़ता है। टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों के कैंपस इसी कॉरिडोर के आसपास स्थित हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट, एसईजेड, आईटी पार्क, होटल, शैक्षणिक संस्थान और कई कॉरपोरेट कार्यालय भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन के शुरुआती दिनों में प्रतिदिन 25 से 40 हजार यात्री इस रूट का उपयोग कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में जब सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्र और विकसित होंगे, तब यह संख्या एक लाख यात्रियों प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। लोकार्पण से पहले भोपाल स्थित मेट्रो मुख्यालय में लगातार बैठकें चल रही हैं। मेट्रो प्रबंधन किराया, टाइमिंग और ट्रेनों के फेरों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पूरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। नए फेज के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबे नेटवर्क पर मेट्रो सेवाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टेशन संचालन, टिकटिंग व्यवस्था और फीडर सेवाओं पर भी काम किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर स्टेशन-2, सुपर कॉरिडोर स्टेशन-1, भौंरासला चौराहा, एमआर-10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा जैसे स्टेशन शामिल होंगे। ये सभी इलाके शहर के प्रमुख यातायात और व्यावसायिक केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में मेट्रो के संचालन से यात्रियों को रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भोपाल मेट्रो परियोजना पर भी तेजी से काम जारी है, लेकिन निर्माण की जटिलताओं के कारण उसका दूसरा फेज इंदौर से पीछे चल रहा है। भोपाल में ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन पर कार्य प्रगति पर है। यहां सुभाष नगर से एम्स तक का प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि अगले चरण में अंडरग्राउंड रूट का निर्माण किया जा रहा है। करीब 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग और दो भूमिगत स्टेशन इस परियोजना का हिस्सा हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में करीब 6,241 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना अब बढ़कर 10,033 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई लागत से निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और अगले दो वर्षों में परियोजना का स्वरूप और स्पष्ट दिखाई देगा। इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज का शुभारंभ शहर के सार्वजनिक परिवहन ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि आईटी सेक्टर, व्यापारिक गतिविधियों और शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:36:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM मोहन यादव ने किया 8 मंजिला भोपाल नगर निगम मुख्यालय का उद्घाटन, एक ही जगह होंगे सभी काम</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में 8 मंजिला अटल भवन का CM मोहन यादव ने लोकार्पण किया। 43 करोड़ की लागत से बनी बिल्डिंग में सभी नगर निगम विभाग एक जगह होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-inaugurates-8-storey-bhopal-municipal-corporation-headquarters/article-52841"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t132309.822.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल के तुलसी नगर सेकंड स्टॉप इलाके में बुधवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नगर निगम की नई 8 मंजिला इमारत का लोकार्पण किया। यह भव्य भवन अब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">अटल भवन</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">के नाम से जाना जाएगा और करीब 43 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। भोपाल नगर निगम मुख्यालय अब तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिखरा हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब एक ही छत के नीचे पूरी नगर सरकार काम करेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इसे शहर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव बताया और कहा कि इससे जनता के कामों में तेजी आएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई बिल्डिंग को ग्रीन कॉन्सेप्ट पर तैयार किया गया है और इसे प्रदेश की पहली ऐसी नगरीय निकाय इमारत बताया जा रहा है जिसमें जियोथर्मल तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है। पार्किंग क्षेत्र में लगाए गए सोलर पैनलों से करीब 300 किलोवाट बिजली उत्पादन की व्यवस्था है। इसी मौके पर नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्राउंड फ्लोर पर जनसुविधा केंद्र बनाया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां टैक्स से लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवाह पंजीकरण और बिल्डिंग परमिशन जैसे कई काम एक ही जगह पर हो सकेंगे। पहले इन कामों के लिए लोगों को आईएसबीटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माता मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाहपुरा और फतेहगढ़ जैसे अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि इस भव्य इमारत को लेकर कुछ खामियां भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआती प्लानिंग में मीटिंग हॉल का प्रावधान ही नहीं किया गया था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद अब कलेक्टर से 0.25 एकड़ अतिरिक्त जमीन मांगी गई है और इसके लिए करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च अनुमानित है। बिल्डिंग के सामने सोलर पैनल लगाए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी दिशा उत्तर-दक्षिण होने की वजह से बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। भवन निर्माण की जिम्मेदारी अलग-अलग समय पर तीन कमिश्नरों के कार्यकाल में पूरी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब इसे पूरी तरह से चालू किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन शुरुआती स्तर पर कुछ तकनीकी और डिजाइन संबंधी सुधारों की जरूरत महसूस की जा रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आठ मंजिला इस भवन में विभागों का बंटवारा भी काफी व्यवस्थित तरीके से किया गया है। नीचे के फ्लोर पर जनसंपर्क</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैक्स काउंटर और नागरिक सेवाएं होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ऊपर की मंजिलों पर भवन अनुज्ञा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलकार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीवेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईटी और स्मार्ट सिटी जैसे महत्वपूर्ण विभाग रखे गए हैं। सबसे ऊपरी मंजिल पर कमिश्नर का कार्यालय और स्मार्ट सिटी से जुड़े मुख्य काम होंगे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 13:40:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल जनगणना से बदलेगा पता सिस्टम, हर घर को मिलेगी यूनिक लोकेशन आईडी</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर में डिजिटल जनगणना के तहत हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी मिलेगी। इससे एंबुलेंस, डिलीवरी और ड्रोन सेवाएं तेज और आसान होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/address-system-will-change-due-to-digital-census-every-house/article-52774"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(70).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर में इस बार होने वाली डिजिटल जनगणना सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं रहने वाली। इस प्रक्रिया के साथ शहर के एड्रेस सिस्टम में बड़ा बदलाव शुरू हो रहा है। पहली बार हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी दी जाएगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे हर मकान की अलग डिजिटल पहचान बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक जनगणना के दौरान प्रगणक विशेष मोबाइल एप के जरिए घर-घर पहुंचकर मकानों की लोकेशन अक्षांश और देशांतर के आधार पर दर्ज कर रहे हैं। यानी अब सिर्फ मोहल्ला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गली और मकान नंबर के भरोसे पता नहीं चलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर घर का सटीक डिजिटल एड्रेस तैयार होगा। नगर निगम क्षेत्र के हजारों मकान और संपत्तियां इस दायरे में लाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा लोकेशन डेटा ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी पते की सटीक पहचान तुरंत हो सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डिजिटल जनगणना का सबसे सीधा असर इमरजेंसी सेवाओं पर दिखेगा। अभी एंबुलेंस</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फायर ब्रिगेड या पुलिस को कई बार सही पता ढूंढने में वक्त लग जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर नई कॉलोनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपार्टमेंट और बिना स्पष्ट पते वाले इलाकों में। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कंट्रोल रूम से सीधे सटीक लोकेशन भेजी जा सकेगी और टीम बिना भटके मौके तक पहुंच सकेगी। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इमरजेंसी हालात में सबसे अहम माना जाता है। यही सिस्टम ऑनलाइन डिलीवरी नेटवर्क के लिए भी राहत देगा। अभी डिलीवरी एजेंट को कई बार ग्राहक को फोन कर रास्ता पूछना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यूनिक लोकेशन आईडी और अपडेटेड जीपीएस मैपिंग के बाद यह झंझट काफी हद तक खत्म हो सकता है। भविष्य में ड्रोन डिलीवरी जैसी सेवाओं के लिए भी यही डिजिटल एड्रेस बेस काम करेगा। माना जा रहा है कि शहरों में लॉजिस्टिक नेटवर्क को इससे सीधा फायदा मिलेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रशासनिक स्तर पर भी इस डिजिटल जनगणना को काफी अहम माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इससे सिर्फ जनसंख्या का आंकड़ा नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संपत्तियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किरायेदारों और शहरी ढांचे का व्यवस्थित रिकॉर्ड भी तैयार होगा। किस वार्ड में कितने मकान हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहां किरायेदार ज्यादा हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन इलाकों में सड़क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीवरेज या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत ज्यादा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका डेटा पहले से ज्यादा साफ तरीके से सामने आएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे शहरी प्लानिंग और संसाधनों के वितरण में आसानी होगी। साथ ही संपत्ति रिकॉर्ड व्यवस्थित होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कई छोटे विवाद भी कम हो सकते हैं। बिलासपुर में शुरू हो रही यह व्यवस्था आने वाले समय में दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि डिजिटल जनगणना अब सिर्फ लोगों की गिनती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहर की डिजिटल मैपिंग का आधार बनती दिख रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:54:13 +0530</pubDate>
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