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                <title>NDA - दैनिक जागरण</title>
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                <title>टीएमसी में बड़ी टूट, 20 सांसदों ने NCPI में विलय कर NDA को समर्थन दिया</title>
                                    <description><![CDATA[ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बागी सांसदों ने नई राजनीतिक राह चुनी; चर्चा में आई छोटी पार्टी NCPI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-mps-split.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों का एक साथ अलग होना पार्टी की ताकत को सीधे प्रभावित करता है। सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सदस्यता बचाने की थी। यदि वे सीधे किसी अन्य दल में शामिल होते या एनडीए का समर्थन करने का ऐलान करते, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से उन्होंने एक अलग रणनीति अपनाई और सामूहिक रूप से एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना। चूंकि सांसदों की संख्या दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है, इसलिए दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत उन्हें राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिस पार्टी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया है, वह है नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई। राजनीतिक हलकों में यह नाम अब तक बहुत कम लोगों ने सुना था, लेकिन टीएमसी सांसदों के विलय के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी का अब तक न कोई सांसद था और न कोई विधायक, वह एक झटके में लोकसभा में 20 सांसदों वाली पार्टी बनने का दावा कर रही है। एनसीपीआई का गठन 20 जनवरी 2023 को किया गया था। यह एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। पार्टी का पंजीकरण पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन इसकी सक्रियता मुख्य रूप से त्रिपुरा में देखने को मिली। गठन के समय पार्टी ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की आवाज बताने का प्रयास किया था। इसके चुनावी संदेशों में दलबदल की राजनीति का विरोध भी प्रमुख रूप से शामिल था। यही वजह है कि अब टीएमसी से आए सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में बताया जाता है। पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू हैं, जबकि संगठनात्मक गतिविधियों में उनके सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक बहुत सीमित आर्थिक सहयोग मिला है और इसके संसाधन भी अपेक्षाकृत छोटे स्तर के रहे हैं। एनसीपीआई ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लड़ा था। उस चुनाव में पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की कोशिश की थी, लेकिन कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। अंततः पार्टी सीमित सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई और उसे कोई सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी ने खुद को राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास जारी रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टीएमसी सांसदों के इस कदम के पीछे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को भी एक कारण माना जा रहा है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग राय दिखाई दे रही थी। अब सांसदों के इस बड़े समूह के अलग होने के बाद यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस राजनीतिक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि उनका समूह भविष्य में एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इस घटनाक्रम का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>TMC में बड़ी टूट के बीच ममता ने कल्याण बनर्जी को बनाया चीफ व्हिप</title>
                                    <description><![CDATA[20 बागी सांसदों के NDA समर्थन के दावे के बाद ममता बनर्जी का बड़ा कदम, लोकसभा स्पीकर को भेजा पत्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-made-kalyan-banerjee-the-chief-whip-amid-major-rift/article-55444"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और सांसदों की बगावत के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को पार्टी का नया चीफ व्हिप नियुक्त कर दिया है। मंगलवार को इस संबंध में लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजा गया और अनुरोध किया गया कि इस नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ चुका है और कई सांसद नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता लोकसभा में उसके सांसदों की एकजुटता को लेकर है। पार्टी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों के अलग रुख अपनाने का दावा किया गया है। बागी सांसदों का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA को समर्थन देने का फैसला किया है। इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से स्थिति को संभालने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी रणनीति के तहत कल्याण बनर्जी को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक दिन पहले बागी सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुने जाने का दावा किया था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भी भेजा था। बताया गया कि इस पत्र में बागी सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद थे और उन्होंने अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में बैठने की अनुमति मांगी थी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संसदीय राजनीति में चीफ व्हिप की भूमिका काफी अहम होती है। पार्टी लाइन को लागू करवाना, सांसदों के बीच समन्वय बनाए रखना और महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकजुटता सुनिश्चित करना इसी पद की जिम्मेदारी होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काकोली घोष पहले ही पार्टी छोड़ चुकी हैं, लेकिन उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह अब भी खुद को लोकसभा में मुख्य सचेतक मानती हैं। उनके बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह दशकों से पार्टी के साथ जुड़ी रही हैं और संघर्ष के रास्ते से आगे बढ़ी हैं। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी के रूप में भी देखा गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं ने बागी सांसदों पर तीखे हमले किए हैं। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ लोगों की वफादारी केवल सत्ता तक सीमित रहती है और राजनीतिक दबाव के सामने उनके सिद्धांत कमजोर पड़ जाते हैं। वहीं कल्याण बनर्जी ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक ताकतों के सामने उनकी सबसे बड़ी ताकत जनता और पार्टी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अभी भी बंगाल में मजबूत स्थिति में है और कार्यकर्ताओं का समर्थन नेतृत्व के साथ बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक संकट केवल सांसदों तक सीमित नहीं है। इससे पहले राज्य की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला था, जब बड़ी संख्या में विधायकों के अलग गुट बनाने की खबर सामने आई। पार्टी के भीतर लगातार बढ़ते असंतोष ने नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा दोनों स्तरों पर इस तरह की घटनाएं पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गतिविधियां तेज रहीं। बागी सांसदों की कई बैठकें हुईं।  कुछ बैठकें गोपनीय स्थानों पर आयोजित की गईं, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी दौरान कुछ सांसदों की वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मुलाकात की खबरें भी सामने आईं। इन मुलाकातों ने राजनीतिक अटकलों को और मजबूत किया। हालांकि आधिकारिक तौर पर इन बैठकों को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी इसी बीच दिल्ली पहुंचे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका दौरा केवल विपक्षी गठबंधन की बैठकों तक सीमित नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर उभर रहे संकट का आकलन करना भी इसका हिस्सा था। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व बागी सांसदों को मनाने में कितना सफल होता है या फिर यह असंतोष और बड़ा रूप लेता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिमंत सरमा दूसरी बार बने असम के CM, जनता के बीच ‘मामा’ नाम से क्यों हैं सबसे ज्यादा मशहूर</title>
                                    <description><![CDATA[असम CM हिमंत बिस्वा सरमा को ‘मामा’ नाम कैसे मिला? जानें इसकी दिलचस्प कहानी और उनकी लोकप्रियता की वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/himanta-sarma-became-the-cm-of-assam-for-the-second/article-53189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t135514.582.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है क्योंकि हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NDA <span lang="hi" xml:lang="hi">की प्रचंड जीत के बाद जब हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। खास बात यह है कि राज्य के कई हिस्सों में लोग उन्हें नाम से नहीं बल्कि प्यार से </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर बुलाते हैं। असम में उनकी लोकप्रियता इस हद तक पहुंच चुकी है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उन्हें इसी नाम से पहचानते हैं। जालुकबाड़ी सीट से भी उन्होंने एक बार फिर करीब </span>89<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिमंत बिस्वा सरमा का यह </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला नाम यूं ही नहीं पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी कहानी काफी दिलचस्प मानी जाती है। बताया जाता है कि इसकी शुरुआत असम के कुछ स्कूलों और बच्चों के बीच बातचीत से हुई थी। शुरुआती दौर में माजुली इलाके के कुछ बच्चों ने उन्हें मजाकिया और अपनापन जताते हुए </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहना शुरू किया। धीरे-धीरे यह नाम सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे राज्य में फैल गया। उस समय शिक्षा मंत्री रहते हुए और बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए साइकिल जैसी योजनाओं पर काम किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह जुड़ाव और बढ़ गया। एक चुनावी रैली के दौरान जब उन्होंने बच्चों से सीधे पूछा कि क्या उन्हें भी साइकिल चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जवाब में बच्चों की खुशी और उत्साह ने इस नाम को और मजबूती दे दी। इसके बाद कई जगहों पर बच्चे उनसे पूछने लगे</span>—“<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा हमें साइकिल कब मिलेगी</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं से यह उपनाम आम लोगों की जुबान पर चढ़ गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय के साथ उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती गई जो सीधे जनता से जुड़ता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना औपचारिक दूरी के लोगों की बात सुनता है और समाधान की कोशिश करता है। यही वजह रही कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द सिर्फ एक उपनाम नहीं रहा बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। असम के कई वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं जिनमें बच्चे उन्हें गले लगाते और </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पुकारते नजर आते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की जनसंपर्क शैली ने उनकी लोकप्रियता को जमीन पर और मजबूत किया है। कई जगहों पर सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी उन्हें इसी नाम से संबोधित करने लगे और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा की गारंटी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे नारे तक चल पड़े।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक दृष्टि से देखें तो हिमंत बिस्वा सरमा का यह सफर काफी अहम माना जाता है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2015 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने असम की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया। </span>2016 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भाजपा सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम रही और बाद में </span>2021 <span lang="hi" xml:lang="hi">में वह खुद मुख्यमंत्री बने। विश्लेषकों का कहना है कि उनकी </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">वाली छवि ने उन्हें एक सख्त प्रशासक के साथ-साथ एक पारिवारिक और सहज नेता के रूप में स्थापित किया है। भारतीय राजनीति में </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दीदी</span>’, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अम्मा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दादा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे उपनाम पहले से ही लोकप्रिय रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब असम में </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम भी इसी परंपरा में जुड़ गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जनता और नेता के बीच भावनात्मक रिश्ते को दर्शाता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिमंता बिस्वा सरमा बने बीजेपी विधायक दल के नेता, इस दिन लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[असम में हिमंता बिस्वा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। वे 12 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पीएम मोदी भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/himanta-biswa-sarma-becomes-leader-of-bjp-legislature-party-and/article-53051"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t133744.166.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम में राजनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। बीजेपी ने डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से विधायक दल और एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी साफ हो गया है कि हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर असम की सत्ता संभालने जा रहे हैं। पार्टी के अंदर हुई अहम बैठक में उनके नाम पर बिना किसी विरोध के मुहर लगी। अब वे 12 मई को असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी पुष्टि की गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह कार्यक्रम और ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक बीजेपी विधायक दल की यह बैठक काफी अहम रही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। बैठक में औपचारिक प्रक्रिया के बाद नेता का चुनाव हुआ और सभी विधायकों ने एकमत होकर हिमंता बिस्वा सरमा के नाम का समर्थन किया। बताया जा रहा है कि 6 मई को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब नई सरकार के गठन के साथ उनका दोबारा सीएम बनना लगभग तय हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पार्टी के भीतर भी इसे निरंतरता का फैसला माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में इस बार बीजेपी गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने अकेले 82 सीटों पर जीत दर्ज की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सहयोगी दल असम गण परिषद (</span>AGP) <span lang="hi" xml:lang="hi">और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (</span>BPF) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने 10-10 सीटें हासिल की हैं। कुल मिलाकर गठबंधन के पास 102 सीटें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जनादेश सरकार की नीतियों और संगठन की जमीनी पकड़ को दर्शाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी भरोसे के साथ पार्टी ने नेतृत्व में कोई बदलाव न करते हुए फिर से सरमा पर भरोसा जताया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिमंता बिस्वा सरमा का सियासी सफर भी काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने 90 के दशक में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AASU) <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए राजनीति में कदम रखा था और बाद में कांग्रेस से जुड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आए। 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद वे पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेहद करीबी माने जाते थे। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम विभागों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक पकड़ मजबूत की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन 2015 में कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा और वे नॉर्थ ईस्ट की राजनीति में एक मजबूत रणनीतिक चेहरा बनकर उभरे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बीजेपी में आने के बाद उन्हें </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEDA <span lang="hi" xml:lang="hi">का संयोजक बनाया गया और उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी विस्तार में अहम भूमिका निभाई। 2016 में असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने में उनका बड़ा योगदान रहा। इसके बाद 2021 के चुनाव में जब पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। अब एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा को नेतृत्व सौंपा जाना यह संकेत देता है कि पार्टी उनके कामकाज और संगठनात्मक क्षमता पर पूरा भरोसा जता रही है। 12 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह इसी राजनीतिक यात्रा का अगला बड़ा अध्याय माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पटना में पीएम मोदी ने किया रोड शो, आज सम्राट कैबिनेट का होगा बड़ा विस्तार</title>
                                    <description><![CDATA[पटना में सम्राट कैबिनेट का विस्तार, PM मोदी का रोड शो, गांधी मैदान में 32 मंत्री लेंगे शपथ, बीजेपी-जेडीयू समेत NDA नेताओं की मौजूदगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-did-a-road-show-in-patna-today-there/article-52835"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t120214.198.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पटना में आज सुबह से ही माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में डूबा नजर आया। सम्राट कैबिनेट विस्तार को लेकर राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह भारी भीड़ भी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक रोड शो कर रहे हैं और इसी दौरान सड़क के दोनों तरफ खड़े लोगों ने फूलों से उनका स्वागत किया। कई जगहों पर ढोल-नगाड़ों की आवाज भी सुनाई दी और समर्थकों में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। पीएम मोदी का यह रोड शो कैबिनेट विस्तार से पहले एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक हलचल काफी तेज रही और सुबह से ही नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया था। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 22 दिन बाद आज उनकी सरकार का कैबिनेट विस्तार किया जा रहा है। इस विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी और अब गांधी मैदान में एक बड़े समारोह के जरिए 32 नए मंत्री शपथ ले रहे हैं। इनमें बीजेपी से 15</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेडीयू से 13</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि </span>LJP(R) <span lang="hi" xml:lang="hi">से 2 मंत्री शामिल हैं। इसके अलावा </span>HAM <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>RLM <span lang="hi" xml:lang="hi">से एक-एक विधायक को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गांधी मैदान में आयोजित इस मेगा इवेंट में राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी भी चर्चा में है। मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गृह मंत्री अमित शाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त रखी है और हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग भी की गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह से ही गांधी मैदान के बाहर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और जैसे-जैसे शपथ ग्रहण का समय नजदीक आया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">माहौल और ज्यादा गर्म हो गया। कई कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी करते नजर आए। वहीं रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की एक झलक पाने के लिए लोग घंटों सड़क किनारे खड़े रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी व्यवस्था शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि ट्रैफिक पर इसका असर साफ देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:20:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार में मंत्रियों का शपथ ग्रहण आज, गांधी मैदान में 27 MLA लेंगे शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[पटना के गांधी मैदान में बिहार कैबिनेट विस्तार आज, 27 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी-जेडीयू कोटे और पूरी सूची देखें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/swearing-in-of-ministers-in-bihar-27-mlas-will-take/article-52831"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t115010.498.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिहार में आज का दिन राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में दोपहर 12:10 बजे एनडीए सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है। इस पूरे कार्यक्रम को लेकर प्रशासन से लेकर पार्टी स्तर तक पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। जानकारी के मुताबिक कुल 27 विधायक आज मंत्री पद की शपथ लेंगे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ कुछ चुनिंदा उपमुख्यमंत्रियों ने पहले ही शपथ ले ली थी। इस शपथ ग्रहण को लेकर सुबह से ही गांधी मैदान और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती देखने को मिल रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बार के बिहार कैबिनेट विस्तार में बीजेपी और जेडीयू के बीच लगभग बराबरी का फॉर्मूला देखने को मिल रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अंतिम सूची में कुछ नामों को लेकर हल्की चर्चाएं भी बनी हुई थीं। बीजेपी कोटे से कुल 16 लोगों को मंत्री बनाया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मुख्यमंत्री सहित कई पुराने और कुछ नए चेहरे शामिल हैं। पहली बार मंत्री बनने वालों में नंदकिशोर राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिथिलेश तिवारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंजीनियर शैलेंद्र कुमार और रामचंद्र प्रसाद जैसे नाम चर्चा में हैं। वहीं विजय कुमार सिन्हा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिलीप जायसवाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रामकृपाल यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केदार गुप्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रमा निषाद और श्रेयसी सिंह जैसे नेताओं को भी कैबिनेट में जगह मिली है। बताया जा रहा है कि पार्टी ने इस बार क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखकर सूची तैयार की है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी तरफ जेडीयू के खाते में 15 मंत्री पद आए हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दो डिप्टी सीएम भी शामिल बताए जा रहे हैं। जेडीयू की ओर से श्रवण कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक चौधरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेसी सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मदन सहनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जमा खान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुनील कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीला मंडल और रत्नेश सदा जैसे पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ नए नामों में निशांत कुमार और श्वेता गुप्ता जैसे नेताओं को लेकर चर्चा तेज रही। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि जेडीयू कोटे का एक मंत्री पद फिलहाल खाली रखा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे बाद में भरा जा सकता है। इसके अलावा </span>LJP(R), HAM <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>RLM <span lang="hi" xml:lang="hi">कोटे से भी एक-एक मंत्री शामिल किए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे गठबंधन में सभी सहयोगी दलों को संतुलन देने की कोशिश साफ नजर आती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने के लिए गांधी मैदान में बड़े स्तर पर मंच सजाया गया है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Narendra Modi <span lang="hi" xml:lang="hi">और केंद्रीय गृह मंत्री </span>Amit Shah <span lang="hi" xml:lang="hi">समेत एनडीए के कई शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। पीएम मोदी के आगमन से पहले एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक मेगा रोड शो की भी तैयारी की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे लेकर प्रशासन ने ट्रैफिक रूट में कई बदलाव किए हैं। बुधवार शाम को ही अमित शाह पटना पहुंच चुके थे और उन्होंने पार्टी नेताओं से मुलाकात के साथ-साथ कुछ स्थानीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ मंत्री पदों का बंटवारा नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले समय की रणनीति का भी संकेत देता है। खासकर लोकसभा और आगामी विधानसभा समीकरणों को देखते हुए सभी दल अपने-अपने स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश में हैं। आज के शपथ ग्रहण के बाद बिहार की राजनीति में एक नई तस्वीर साफ तौर पर सामने आने की उम्मीद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि कई सीटों पर खाली स्थान छोड़े जाने से आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:50:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बिहार राजनीति में नई पारी की शुरुआत, नीतीश के बेटे निशांत भी लेंगे मंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार कैबिनेट विस्तार कल होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/beginning-of-new-innings-in-bihar-politics-nitishs-son-nishant/article-52792"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(79).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिहार की सियासत से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार को होने जा रहा है और इस विस्तार की सबसे ज्यादा चर्चा जेडीयू नेता निशांत कुमार को लेकर है। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी कल मंत्री पद की शपथ लेंगे। बिहार कैबिनेट विस्तार से पहले पटना के सियासी गलियारों में इसे बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। जेडीयू के भीतर लंबे समय से यह चर्चा थी कि पार्टी अब नई पीढ़ी को आगे लाने की तैयारी में है और निशांत की एंट्री उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में एनडीए सरकार बनी थी। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद भाजपा नेता सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया और राज्य में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ। फिलहाल सम्राट चौधरी की कैबिनेट में जेडीयू की ओर से सिर्फ दो वरिष्ठ चेहरे विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद शामिल हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। ऐसे में कल होने वाला बिहार कैबिनेट विस्तार राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जेडीयू कोटे से कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। इनमें भगवान सिंह कुशवाहा का नाम लगभग तय बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कुछ और विधायकों को भी फोन कर तैयार रहने को कहा गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निशांत कुमार को लेकर दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पहले सक्रिय जिम्मेदारी लेने से इनकार किया था। उन्होंने संकेत दिया था कि वह फिलहाल संगठन और जनसंपर्क पर ध्यान देंगे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार का दौरा करेंगे और सीधे मंत्री पद की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते। लेकिन अब कहा जा रहा है कि जेडीयू नेतृत्व ने उन्हें मना लिया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी चाहती है कि नीतीश कुमार के बाद संगठन और सरकार दोनों में एक भरोसेमंद चेहरा सामने आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए निशांत को सीधे सरकार में लाने का फैसला लिया गया। पटना में इसे सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जेडीयू की नई राजनीतिक लाइन के तौर पर देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:43:33 +0530</pubDate>
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