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                <title>Government Order - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government Order RSS Feed</description>
                
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                <title>केंद्र का नया निर्देश: सरकारी कार्यक्रमों में पहले वंदे मातरम्, फिर होगा जन-गण-मन</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक शब्द, सही उच्चारण और निर्धारित क्रम का पालन अनिवार्य बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/centres-new-instructions-first-vande-mataram-and-then-jana-gana-mana-in/article-58450"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vande-mataram.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन-गण-मन के गायन और वादन को लेकर एक बार फिर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों शामिल किए जाते हैं, वहां पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन-गण-मन प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह व्यवस्था पहले से निर्धारित नियमों के अनुरूप है और सभी संबंधित विभागों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। 9 जुलाई को जारी इस पत्र की जानकारी अब सामने आई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों का अपना राज्य गीत है, वहां भी निर्धारित क्रम में पहले राष्ट्रगीत और फिर राष्ट्रगान का पालन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल लागू करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।</p>
<p>निर्देश में राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हमेशा उनके आधिकारिक और मूल शब्दों के साथ ही गाए या बजाए जाएं। उच्चारण, प्रस्तुति और समय से जुड़े तय मानकों का भी पालन किया जाना जरूरी होगा। इसके लिए दोनों की आधिकारिक प्रतियां मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं ताकि किसी तरह की त्रुटि या भ्रम की स्थिति न बने। मंत्रालय ने संबंधित विभागों और संस्थानों से कहा है कि कार्यक्रम आयोजित करते समय इन्हीं अधिकृत संस्करणों का उपयोग किया जाए। बताया जा रहा है कि यह दूसरा अवसर है जब केंद्र सरकार ने इस विषय पर राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले 28 जनवरी को भी इसी संबंध में आदेश जारी किया गया था। उस समय स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से करने, वंदे मातरम् के दौरान सभी लोगों के खड़े रहने और पूरे छह अंतरे गाने की बात कही गई थी। छह अंतरों को गाने की कुल अवधि लगभग तीन मिनट दस सेकंड बताई गई थी, जबकि पहले सामान्य तौर पर केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे। हालांकि, सिनेमाघरों को इन नियमों से अलग रखा गया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना या दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इसी तरह यदि किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाता है, तो उस दौरान दर्शकों के लिए खड़ा होना आवश्यक नहीं माना जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश के इतिहास में विशेष स्थान रहा है। इसे साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में इसे शामिल किया गया। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सार्वजनिक मंच से वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख नारा भी बना। संस्कृत भाषा के इस वाक्यांश का अर्थ है, "हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं।" आजादी के बाद इसे राष्ट्रगीत का दर्जा मिला और तब से यह राष्ट्रीय समारोहों और विशेष अवसरों पर सम्मानपूर्वक गाया जाता है। हाल के वर्षों में भी वंदे मातरम् राष्ट्रीय आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की थीम भी वंदे मातरम् रखी गई थी। संस्कृति मंत्रालय ने इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष झांकी प्रस्तुत की थी, जिसे मंत्रालयों और विभागों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार भी मिला। वहीं, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिली थी। विभिन्न दलों ने इसके इतिहास, महत्व और प्रस्तुति को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी चर्चा हुई थी, जिसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े संदर्भ भी सामने आए थे। हालांकि, केंद्र सरकार के ताजा निर्देश प्रशासनिक स्तर पर तय प्रोटोकॉल के पालन पर केंद्रित हैं। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीतों के सम्मान से जुड़े नियमों का एक समान अनुपालन देशभर में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, डीएसपी समेत 15 अधिकारियों की नई तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[गृह विभाग ने जारी किए तबादला और पदस्थापना आदेश, पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-police-new-posting-of-15-officers/article-58408"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य पुलिस प्रशासन में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) और 13 सहायक सेनानियों (असिस्टेंट कमांडेंट) की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय पदोन्नति एवं छानबीन समिति की अनुशंसा के आधार पर अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी पदस्थापनाएं अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संतुलित तथा सुचारू बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। समय-समय पर पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना की प्रक्रिया प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार की जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में राज्य पुलिस सेवा के पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें विशेष शाखा से जुड़े अधिकारियों के साथ सहायक सेनानी पद पर पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि नई नियुक्तियों से विभिन्न इकाइयों में कार्यों के बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार उप पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा) सविता सिंह परिहार को पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर से स्थानांतरित कर विशेष शाखा भिलाई में पदस्थ किया गया है। वहीं अर्नोल्ड संतरी बड़ा, जो वर्तमान में जशपुर से संबद्ध रहते हुए पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में कार्यरत थे, उन्हें विशेष शाखा बिलासपुर में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाग ने 13 सहायक सेनानियों की भी नई पदस्थापना की है। इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न जिलों और बटालियनों में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष शाखा पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के संकलन, विश्लेषण और संवेदनशील मामलों की निगरानी का कार्य करती है। ऐसे में इस शाखा में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई पदस्थापनाओं से विशेष शाखा की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग में समय-समय पर किए जाने वाले स्थानांतरण और पदस्थापन न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि अधिकारियों को नई परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ती है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पुलिस बल के प्रशिक्षण, संसाधनों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की नई पदस्थापना को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी अपने अनुभव का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में इन नियुक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी पदस्थापनाएं प्रशासनिक आधार पर की गई हैं और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इनमें बदलाव भी किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र ही अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंचायत सचिवों के तबादलों पर नई सख्त गाइडलाइन जारी, गृहग्राम में पोस्टिंग पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिवों के लिए नई स्थानांतरण नीति लागू, 10 साल से अधिक पदस्थ कर्मचारियों का प्राथमिकता से होगा ट्रांसफर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-strict-guidelines-issued-on-transfers-of-panchayat-secretaries-ban/article-55559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchayat-secretary-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई और सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। तबादला सीजन के बीच जारी इस आदेश के बाद अब राज्य की हजारों पंचायतों में कार्यरत सचिवों की तैनाती व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई नीति के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही यदि किसी सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुने जाते हैं तो ऐसी स्थिति में संबंधित सचिव का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश में यह निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। राज्य में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं, जिन पर इस नई नीति का सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक केवल जिले के भीतर ही पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद ही लागू होंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया 1 जून से प्रभावी मानी जाएगी। सभी स्थानांतरण आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला और अंतरजिला स्तर पर स्थानांतरण की विस्तृत प्रक्रिया भी तय कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस निर्णय के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और स्थानीय स्तर की समस्याएं प्रमुख कारण बताई जा रही हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी, जो आज पंचायत सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उस समय कई मामलों में सरपंच, उपसरपंच या प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों को ही नियुक्त किया गया था। इसके कारण कई जगहों पर हितों के टकराव और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का मानना है कि कई मामलों में जनप्रतिनिधि और सचिवों के बीच पारिवारिक संबंधों या व्यक्तिगत समीकरणों के कारण कार्य निष्पक्ष तरीके से प्रभावित हुआ है। जांचों में भी कई बार यह पाया गया कि कुछ स्थानों पर सरपंच, उपसरपंच और सचिवों की मिलीभगत से वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने यह सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया है ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई गाइडलाइन के अनुसार कुछ परिस्थितियों में स्थानांतरण को अनिवार्य किया गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है, तो वहां से तत्काल स्थानांतरण किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी सचिव को उसके गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जाएगा। साथ ही जो सचिव 10 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पंचायत में कार्यरत हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर तबादला किया जाएगा। यदि स्थानांतरण की सीमा से अधिक ऐसे सचिव पाए जाते हैं जो लंबे समय से एक ही जगह कार्यरत हैं, तो सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का पहले स्थानांतरण किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्थिरता के साथ-साथ निष्पक्ष कार्य प्रणाली को बढ़ावा देना बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी स्थानांतरण संभव होगा। इनमें भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी सचिवों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से निर्देश मिलने पर भी तबादला किया जा सकता है। ऐसे सभी मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त या पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंभीर मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई में कोई देरी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरजिला स्थानांतरण को लेकर नीति में स्पष्ट किया गया है कि यह केवल स्वैच्छिक आधार पर ही किया जाएगा। महिला पंचायत सचिवों को विशेष सुविधा दी गई है, जिसके तहत विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं अपने पति, ससुराल या माता-पिता के जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव भी अपने मूल जिले में स्थानांतरण के लिए पात्र होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानांतरण के लिए आवेदन वर्तमान पदस्थ जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को देना होगा। इसके बाद रिक्त पदों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। यदि संबंधित जिले में पद खाली होता है तो प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे। स्थानांतरण के बाद संबंधित सचिव को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा और यह सुविधा केवल एक बार ही दी जाएगी। नई नीति के लागू होने के बाद पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:58:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक जून से पांच जून के बीच थानों में बड़े पैमाने पर होंगे तबादले, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए सख्त निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने नया आदेश जारी किया है। अब किसी भी पुलिसकर्मी की एक थाने में अधिकतम पोस्टिंग 5 साल और दोबारा तैनाती नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-will-be-large-scale-transfers-in-police-stations-between/article-53984"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-police-transfers--2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में पुलिस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नए निर्देशों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी पुलिसकर्मी की एक ही थाने में तैनाती की अवधि पांच साल से ज्यादा नहीं होगी। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कर्मचारी किसी थाने में पहले से तैनात रह चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो दोबारा उस थने में नहीं लौटेगा। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के थानों में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षक से उप निरीक्षक स्तर तक की नियुक्तियों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि किसी पुलिसकर्मी को एक ही थाने में एक पद पर अधिकतम चार साल तक रखा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कुल मिलाकर उसकी सेवा का समय पांच साल से अधिक नहीं हो सकता। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ही पुलिस अनुभाग में अलग-अलग पदों पर भी कुल कार्यकाल दस साल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यह कदम लंबे समय से एक ही जगह काम कर रहे पुलिसकर्मियों के मुद्दों को हल करने के लिए उठाया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह आदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस आयुक्तों और इंदौर-भोपाल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भेजा है। निर्देश में कहा गया है कि सभी जिलों में थाने में तैनात कर्मचारियों की तत्काल समीक्षा की जाए और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">1<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच स्थानांतरण के आदेश जारी किए जाएं। इसके बाद </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून तक सभी स्थानांतरित पुलिसकर्मियों को नई तैनाती वाले थानों में जॉइन करना होगा। मतलब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी प्रक्रिया को बहुत कम समय में निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आदेश के पीछे एक ही थाने में लंबे समय तक बचे रहने वाले कर्मचारियों की कार्यशैली और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल भी एक बड़ा कारण हैं। कई बार एक ही जगह ज्यादा समय रहने से कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब यह रोटेशन नीति सख्ती से लागू की जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आदेश में कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारियों से संबंधित सभी लंबित जांच और मामलों की जानकारी नए थाना प्रभारियों को दी जाएगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी स्तर पर जांच या कामकाज पर कोई असर न पड़े। इसके साथ सभी जिलों को </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक पूरी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस निर्णय के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ये माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई जिलों में थानों की कार्यप्रणाली और टीमों में बड़े बदलाव होंगे। प्रशासनिक स्तर पर इसे एक सुधारात्मक कदम माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पुलिसिंग सिस्टम को और अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP की नई तबादला नीति जारी, टारगेट पूरे नहीं करने वालों पर होगी पहले कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश सरकार ने नई तबादला नीति 2026 जारी की। लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले प्राथमिकता से होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mps-new-transfer-policy-released-first-action-will-be-taken/article-53985"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-transfer-policy-2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश सरकार ने शुक्रवार को नई तबादला नीति 2026 पेश की। इस बार की नीति में सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रावधान की हो रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि जो अधिकारी और कर्मचारी तय लक्ष्य पूरे नहीं करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका तबादला प्राथमिकता के आधार पर होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके अनुसार 1 जून से 15 जून 2026 तक राज्यभर में तबादलों की प्रक्रिया चलेगी। उम्मीद है कि इस बार काफी संख्या में प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई नीति के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन साल पूरे होने के बाद बाहर भेजा जा सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ये नियम तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों पर भी लागू होंगे। लेकिन सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन साल की अवधि पूरी होना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी का प्रदर्शन खराब पाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या उसने वित्तीय वर्ष के लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे तय समय से पहले भी हटाया जा सकता है। यही कारण है कि इस बार कई विभागों में प्रदर्शन आधारित तबादलों की चर्चा जोरों पर है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि केवल समय अवधि के आधार पर तबादले न किए जाएं। गंभीर शिकायतें</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट के आदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्त पदों की जरूरत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पदोन्नति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रतिनियुक्ति से वापसी जैसे मामलों में भी तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्त पद भरने के नाम पर लंबी चेन बनाकर तबादले करने पर पाबंदी रहेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बार की नीति में महिला कर्मचारियों और रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को राहत दी गई है। जिनकी सेवानिवृत्ति में एक साल या उससे कम समय बचा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका सामान्यतः तबादला नहीं किया जाएगा। अविवाहित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का भी प्रावधान है। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पोस्टिंग देने के लिए आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंतिम फैसला प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से होगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है। कैंसर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसे मामलों में चिकित्सा बोर्ड की सिफारिश पर स्थानांतरण किया जा सकेगा। 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि वे चाहें तो स्थानांतरण ले सकेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने कर्मचारी संगठनों के नेताओं को भी राहत दी है। मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी चार साल तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तबादले से छूट रहेगी। वहीं दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर वित्तीय अनियमितता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें तुरंत संबंधित पद से हटाने का प्रावधान भी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नीति में यह भी कहा गया है कि शासन की हाई प्रायोरिटी योजनाओं में लगे कर्मचारियों के तबादले कम से कम किए जाएं। जबकि जिन अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें कार्यपालिक पद पर नहीं रखा जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन जारी होंगे और 15 जून के बाद जारी आदेश अमान्य माने जाएंगे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस नीति को प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना ये है कि विभाग किस स्तर पर प्रदर्शन के आधार पर कार्रवाई करते हैं और आने वाले दिनों में किन अफसरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बदलती हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में तबादलों पर नई व्यवस्था तय, कल CM मोहन यादव कैबिनेट में लगेगी मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में तबादला नीति 2026 को बुधवार को कैबिनेट मंजूरी दे सकती है। प्रशासनिक और स्वैच्छिक ट्रांसफर नियमों में बदलाव संभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-system-on-transfers-in-madhya-pradesh-will-be-approved/article-53805"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-transfer-policy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>MP Transfer Policy 2026:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश में काफी समय से इंतजार कर रही तबादला नीति को </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव ने प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा कर ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब इसे मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से हरी झंडी मिल जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके बाद विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा। इस बार की तबादला नीति में सबसे ज्यादा बातचीत स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के अलग-अलग लिमिट को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले की नीतियों में कुल कर्मचारियों का एक सीमित प्रतिशत ही ट्रांसफर किया जा सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तरह के तबादले शामिल होते थे। कई बार जरूरी पद खाली होने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं हो पाता था। इस बार सरकार उस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक आधार पर तबादलों की गुंजाइश बढ़ाने पर सहमति बनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग नियम बनाने की तैयारी है। मंत्री विजय शाह ने पिछली कैबिनेट बैठक में स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट को खत्म करने का सुझाव दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अगली बैठक में पूरी नीति का प्रस्ताव लाया जाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक स्थगित होने के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब बुधवार सुबह </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मंत्रालय में बैठक होने जा रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की क्षेत्रीय परिषद बैठक में व्यस्त रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उस दिन भी कैबिनेट नहीं हो पाई। अब ये उम्मीद की जा रही है कि बुधवार की बैठक में तबादला नीति के साथ कुछ और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। कर्मचारियों के बीच नई नीति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। कई विभागों में पिछले कई महीनों से ट्रांसफर रुके हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कर्मचारी नई सूची का इंतजार कर रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि इस बार सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति अलग रखने की योजना है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हर साल होता आया है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनजातीय कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और राजस्व विभाग भी अलग गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से अलग कोई विभाग नीति नहीं बना सकेगा। प्रस्ताव में ये भी शामिल किया गया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले के भीतर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की मंजूरी से किए जाएंगे। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति जरूरी होगी। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले एक साल में ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में फिर से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है। अब राज्य मंत्री जरूरतमंदों के लिए </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए तक की सहायता राशि मंजूर कर सकेंगे। इससे पहले ये सीमा </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए थी। कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह राशि पहले ही </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए कर दी गई थी। </span>11 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले को आगामी प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:58:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल में सस्टेनेबिलिटी पर जोर, सरकारी दफ्तरों में खर्च कम करने के आदेश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए दफ्तरों में बिजली, कागज और संसाधनों की खपत कम करने के नए निर्देश जारी किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/emphasis-on-sustainability-in-west-bengal-orders-issued-to-reduce/article-53761"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-sustainability-government-order.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने सस्टेनेबिलिटी को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सरकारी दफ्तरों में बिजली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कागज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अन्य संसाधनों के उपयोग पर बढ़ती सख्ती लागू होगी। हाल ही में दिए गए आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक खर्चों को कम करने और कार्य को ज्यादा प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया जाएगा। ये निर्देश कोलकाता समेत सभी विभागों तक पहुंचा दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ खर्चों में कटौती नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सरकारी सिस्टम की दक्षता बढ़ाना भी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई विभागों में लंबे समय से बिजली की खपत और कागज के अति उपयोग को लेकर चिंता जताई जा रही थी। अब इस आदेश के बाद दफ्तरों में प्रिंटिंग को सीमित करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल फाइलिंग को बढ़ावा देने और बेवजह लाइट-एसी चलाने जैसी आदतों पर रोक लगाने की बात की गई है। आज सुबह से ही दफ्तरों में इस पर हलचल देखने को मिली। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यह बदलाव अचानक आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे मानते हैं कि धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाएगी। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक स्तर पर इसे आवश्यक कदम माना जा रहा है ताकि सरकारी खर्चों पर नियंत्रण रखा जा सके।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सस्टेनेबिलिटी अभियान के तहत आने वाले महीनों में और भी कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। खासकर बड़े सरकारी दफ्तरों में एनर्जी ऑडिट कराने की योजना भी बनाई जा रही है। यह भी बताया गया है कि जिन विभागों में संसाधनों की खपत अधिक मिलेगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी यह सिर्फ एक दिशा-निर्देश के रूप में लागू किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आगे इसे मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि डिजिटल सिस्टम के बढ़ने से काम करना आसान होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों पर निर्भरता भी बढ़ेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे संभालना जरूरी होगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:19:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 43 IAS अफसरों का बड़ा तबादला, कई कलेक्टर बदले</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में 43 IAS अधिकारियों का तबादला, कई जिलों के कलेक्टर बदले गए। निहारिका बारिक को गृह-जेल विभाग की जिम्मेदारी मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-transfer-of-43-ias-officers-in-chhattisgarh-many-collectors/article-52799"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(83).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">IAS <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रांसफर के तहत 43 भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span>IAS) <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में कई सीनियर अफसरों की जिम्मेदारियां बदल दी गई हैं और कुछ को नए विभागों की कमान सौंपी गई है। इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा निहारिका बारिक को लेकर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें गृह और जेल विभाग की अहम जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही कई जिलों के कलेक्टर भी बदल दिए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के इस फैसले में ऊर्जा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंचायत एवं ग्रामीण विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला एवं बाल विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोक निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गृह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज कल्याण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सहकारिता जैसे कई अहम विभाग शामिल हैं। इन विभागों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। बताया जा रहा है कि यह पूरी कवायद प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने और कामकाज में तेजी लाने के उद्देश्य से की गई है। कुछ अधिकारियों को प्रमोशन के बाद नई जिम्मेदारियां दी गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ का स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक रोटेशन के तहत किया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव लंबे समय से प्रस्तावित था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर अब अंतिम मुहर लगाई गई है। हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिलों के स्तर पर हुए बदलावों ने भी स्थानीय प्रशासन को प्रभावित किया है। कई प्रमुख जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आने वाले दिनों में विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था पर असर देखने को मिल सकता है। जिन अफसरों को नई जिम्मेदारी मिली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे जल्द ही कार्यभार संभालने की उम्मीद की जा रही है। वहीं जिन अधिकारियों का तबादला हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें नए स्थान पर तुरंत जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक हलकों में इस फेरबदल को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं और माना जा रहा है कि आने वाले समय में इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय कार्यशैली पर साफ दिखाई देगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:34:40 +0530</pubDate>
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