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                <title>Administration - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दतिया में धारा-163 लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक; प्रशासन अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट विवाद के बाद हुए बवाल और हाईवे जाम की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे दतिया अनुभाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन, रैली और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/section-163-imposed-in-datia-ban-on-meetings-and-processions/article-58471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-163.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी है। यह आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे चक्का जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। आदेश लागू होने के बाद अब बिना प्रशासन की अनुमति कोई भी सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, भाला, फरसा, चाकू या अन्य घातक हथियार लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य सार्वजनिक प्रसारण उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर, नारे, भाषण या अन्य माध्यमों से ऐसी किसी भी सामग्री के प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं से भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने अपने आदेश में हाल ही में झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए चक्का जाम का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार 10 जुलाई की रात हुए प्रदर्शन के दौरान लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। आदेश के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि यह आदेश पुलिस, होमगार्ड, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ और अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों पर उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान लागू नहीं होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। धारा-163 लागू होने के बाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर कलेक्टर निवास में देर रात लगी आग, शॉर्ट-सर्किट की आशंका; एक घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते आग बुझाई, कोई जनहानि नहीं; पार्किंग शेड, फर्नीचर और विद्युत उपकरणों को नुकसान, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fire-broke-out-late-night-in-raipur-collectors-residence-suspicion/article-57951"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-collector-residence.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह के सरकारी निवास परिसर में रविवार देर रात अचानक आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पार्किंग शेड, फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग दो से ढाई बजे के बीच लगी। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक परिसर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई देने पर वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और पुलिस कंट्रोल रूम को भी जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया। करीब एक घंटे तक लगातार पानी की बौछारें और अन्य अग्निशमन उपकरणों का उपयोग कर आग को नियंत्रित किया गया। इसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट-सर्किट माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विद्युत प्रणाली में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फॉरेंसिक निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आग की चपेट में आने से कलेक्टर निवास परिसर का पार्किंग शेड सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इसके अलावा वहां रखे कुछ फर्नीचर, विद्युत उपकरण, वायरिंग और अन्य सामग्री भी जल गई। नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की टीम को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सभी क्षतिग्रस्त वस्तुओं का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि बिजली चालू रहती तो आग और अधिक फैल सकती थी या किसी अन्य दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती थी। बिजली विभाग की टीम ने बाद में पूरे परिसर की वायरिंग और विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग बुझाने के कार्य का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग लगने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि परिसर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित हों। इसके बाद आग को आसपास के हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया गया। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आग बुझाने का कार्य पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने भी बताया कि देर रात अचानक दमकल वाहनों के सायरन सुनाई दिए, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग, फायर सेफ्टी सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों की जांच बेहद आवश्यक होती है। समय-समय पर फायर ऑडिट कराने से इस प्रकार की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रायपुर कलेक्टर निवास में लगी आग भले ही समय रहते नियंत्रित कर ली गई, लेकिन इस घटना ने सरकारी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर, नियमित फायर ऑडिट और विद्युत उपकरणों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देकर इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले, शहडोल-शाजापुर समेत कई जिलों में नई जिम्मेदारियां</title>
                                    <description><![CDATA[रुचि वर्धन मिश्रा बनीं भोपाल ग्रामीण की आईजी, सागर और नर्मदापुरम रेंज को भी मिले नए आईजी, राज्य सरकार ने देर रात जारी किए तबादला आदेश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/9-ips-officers-transferred-in-madhya-pradesh-new-responsibilities-in/article-57824"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-ips-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 9 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। गृह विभाग की ओर से देर रात जारी आदेशों में कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस बदलाव के तहत शहडोल और शाजापुर जिलों के पुलिस अधीक्षक भी बदल दिए गए हैं। संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि प्रियंका शुक्ला को शाजापुर जिले की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा भोपाल ग्रामीण, सागर और नर्मदापुरम में नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की भी पदस्थापना की गई है। माना जा रहा है कि यह प्रशासनिक बदलाव कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा पुलिस व्यवस्था में बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तबादला सूची के अनुसार रुचि वर्धन मिश्रा को भोपाल ग्रामीण जोन का नया आईजी बनाया गया है। वह अब तक पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन के पद पर कार्यरत थीं। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें राजधानी से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं मिथिलेश शुक्ला को सागर रेंज का आईजी नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में नर्मदापुरम जोन के आईजी के रूप में कार्य कर रहे थे और सागर रेंज का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास था। हिमानी खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद सागर रेंज का आईजी पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के जरिए संचालित किया जा रहा था। अब सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करते हुए मिथिलेश शुक्ला की नियमित पदस्थापना कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी क्रम में चंद्रशेखर सोलंकी को नर्मदापुरम जोन का नया आईजी बनाया गया है। वह फिलहाल इंदौर एसएएफ रेंज में पदस्थ थे। उनके स्थानांतरण के साथ नर्मदापुरम जोन को नया नेतृत्व मिल गया है। वहीं हरि नारायणचारी मिश्रा को पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह आईजी एससीआरबी के पद पर कार्यरत थे। पुलिस मुख्यालय में प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आईजी प्रशासन का दायित्व पुलिस विभाग की कई अहम व्यवस्थाओं से जुड़ा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जारी आदेशों में जिला स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं प्रियंका शुक्ला को शाजापुर जिले की कमान सौंपी गई है। इससे पहले शाजापुर के पुलिस अधीक्षक रहे यशपाल सिंह राजपूत का तबादला पुलिस अधीक्षक रेल, इंदौर के पद पर किया गया है। दूसरी ओर शहडोल के पुलिस अधीक्षक रहे रामजी श्रीवास्तव को पुलिस अकादमी भौंरी में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) के पद पर भेजा गया है। इन बदलावों के बाद दोनों जिलों में नए नेतृत्व के साथ पुलिस व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">तबादला आदेश में सिमाला प्रसाद को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें खरगोन रेंज का डीआईजी बनाया गया है। सिमाला प्रसाद इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और पुलिस जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस अहम पद पर नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने केवल नियमित तबादले ही नहीं किए, बल्कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) आदर्श कटियार को उनकी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ स्पेशल डीजी दूरसंचार, पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसके अलावा आईजी इंदौर ग्रामीण जोन अनुराग को आईजी एसएएफ इंदौर रेंज और आईजी आरएपीटीसी इंदौर का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है। इन अतिरिक्त प्रभारों को विभागीय कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में समय-समय पर इस तरह के प्रशासनिक बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। सरकार विभिन्न जिलों और रेंजों में अधिकारियों की कार्यशैली, अनुभव और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियां तय करती है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि समय पर किए गए तबादले प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करते हैं। नई तैनाती के बाद अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की चुनौती होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश में हाल के महीनों में कई जिलों में अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे में नए अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी रणनीति बनाकर पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। खासकर शहडोल, शाजापुर, भोपाल ग्रामीण, सागर और नर्मदापुरम जैसे क्षेत्रों में नई नियुक्तियों के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:35 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य प्रदेश पुलिस में अवकाश प्रक्रिया हुई डिजिटल, अब eHRMS से ऑनलाइन होगी छुट्टी मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की सभी 120 पुलिस इकाइयों में ई-लीव मॉड्यूल लागू, एक लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी घर बैठे कर सकेंगे ऑनलाइन अवकाश आवेदन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/leave-process-in-madhya-pradesh-police-has-become-digital-now/article-57715"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश पुलिस विभाग ने अपने प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी छुट्टी के लिए कागजी आवेदन देने की बजाय ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने 1 जुलाई 2026 से eHRMS (इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) का ई-लीव मॉड्यूल पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत पुलिस विभाग की सभी 120 इकाइयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी eHRMS पोर्टल या मोबाइल एप के जरिए अवकाश के लिए आवेदन कर सकेंगे। छुट्टी की मंजूरी, उसकी स्थिति और पूरी प्रक्रिया अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। विभाग का मानना है कि इससे अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस कर्मचारियों को छुट्टी के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कर्मचारी अपने मोबाइल या कंप्यूटर से लॉगिन कर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित लीव क्लर्क उसे डिजिटल माध्यम से सक्षम अधिकारी तक भेजेगा। इसके बाद अधिकारी भी ऑनलाइन ही आवेदन पर अनुशंसा और स्वीकृति देंगे। कर्मचारी अपने लॉगिन के माध्यम से यह भी देख सकेंगे कि उनका आवेदन किस स्तर पर लंबित है या उसे स्वीकृति मिल चुकी है। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक देरी की संभावना काफी कम हो जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय के अनुसार eHRMS के ई-लीव मॉड्यूल का उपयोग फिलहाल प्रदेश सरकार के कुछ विभागों में ही किया जा रहा है, लेकिन पुलिस विभाग इस प्रणाली का सबसे अधिक उपयोग करने वाले विभागों में शामिल हो गया है। वर्तमान में लगभग 1,01,928 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस डिजिटल सुविधा से जुड़ चुके हैं। विभाग का कहना है कि सभी कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी पहले से ही सिस्टम में दर्ज की जा चुकी है। इसमें प्रत्येक कैडर के अनुसार अवकाश के प्रकार, पात्रता और उपलब्ध छुट्टियों का पूरा विवरण भी शामिल है। इससे आवेदन करते समय किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस ऑनलाइन प्रणाली को सीधे पूरे प्रदेश में लागू नहीं किया गया था। पहले इसे कुछ चुनिंदा इकाइयों में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB), कार्मिक शाखा, विशेष शाखा, पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल और 25वीं वाहिनी भोपाल में ई-लीव मॉड्यूल का ट्रायल किया गया। इन इकाइयों से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर तकनीकी सुधार किए गए। परीक्षण सफल रहने के बाद अब इसे प्रदेश की सभी लगभग 120 पुलिस इकाइयों में लागू कर दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग ने बताया कि सेवा प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने की प्रक्रिया जुलाई 2025 से ही शुरू कर दी गई थी। इस दौरान विभाग ने पुराने मैनुअल रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप देने का अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं की स्कैनिंग कर उनका पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित किया गया। इस काम में मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) की भी मदद ली गई। विभाग के अनुसार एक लाख से अधिक सेवा पुस्तिकाओं का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण किया जा चुका है और लगभग सभी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी eHRMS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केवल अवकाश प्रबंधन ही नहीं, बल्कि सेवा संबंधी अन्य रिकॉर्ड को भी डिजिटल बनाया जा रहा है। इसी दिशा में 23 मार्च 2026 से eHRMS का ऑर्डर बुक (O.B.) मॉड्यूल भी लागू किया गया है। इसके माध्यम से पुलिस विभाग में जारी होने वाले सभी महत्वपूर्ण सेवा आदेश ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। पहले कर्मचारियों को कई बार पुराने आदेशों या सेवा संबंधी दस्तावेजों के लिए कार्यालयों में संपर्क करना पड़ता था, लेकिन अब आवश्यक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर आसानी से देखा जा सकेगा। इससे दस्तावेजों के संरक्षण और रिकॉर्ड प्रबंधन में भी काफी सुधार आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी। ऑनलाइन सिस्टम के कारण आवेदन की निगरानी भी आसान होगी और किसी स्तर पर फाइल लंबे समय तक लंबित रहने की संभावना घटेगी। साथ ही कर्मचारियों को अपने अवकाश की स्थिति जानने के लिए अलग से कार्यालयों में संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरी जानकारी उनके लॉगिन पर उपलब्ध रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर प्रशासन का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास व्यवस्था को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/administrations-emphasis-on-rehabilitation-of-affected-families-action-taken-to/article-57418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद पूरे इलाके में दिनभर हलचल का माहौल बना रहा। सुबह करीब चार बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम की टीम और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया गया। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने खुले स्थानों पर दिन और रात बिताई। इनमें महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल थे। प्रभावित लोगों का कहना है कि अचानक शुरू हुई कार्रवाई के कारण उन्हें अपना सामान समेटने और वैकल्पिक व्यवस्था करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों के पास ही बैठे रहे। कुछ लोग मलबे के बीच अपने घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की कोशिश करते दिखाई दिए। कई महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब रहने की सुरक्षित जगह और बच्चों की देखभाल की है। बारिश का मौसम शुरू होने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं है और उन्हें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाओं के साथ पुनर्वास की आवश्यकता है। रात में कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान कई लोगों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्वास के लिए जो मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वे बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि 12 से 14 सदस्यों वाले परिवारों को एक ही कमरा आवंटित किया जा रहा है। साथ ही बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से इन व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा दिया गया था कि बरसात के मौसम तक किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं होगी। कार्रवाई शुरू होने के बाद कई ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी भी जताई। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयान दिए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान को नियमानुसार की गई कार्रवाई बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए विरोध की स्थिति भी बनी। कई ग्रामीण अपने परिवारों के साथ मौके पर ही बैठ गए और कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने लोगों को वहां से हटाया ताकि अभियान प्रभावित न हो। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहा और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाती रही। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। इस बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में पात्र परिवारों को बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रभावित लोगों के सामान को भी नगर निगम की टीम की मदद से नए स्थान तक पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">दिनभर चली कार्रवाई के दौरान कई भावुक दृश्य भी सामने आए। कुछ बच्चे अपने टूटे हुए घरों के सामने बैठे दिखाई दिए, जबकि कई परिवार अपने सामान के साथ खुले में इंतजार करते रहे। प्रभावित लोगों का कहना है कि सुबह से उन्हें भोजन बनाने का अवसर नहीं मिला और छोटे बच्चों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर प्रशासनिक टीम की ओर से मौके पर मौजूद लोगों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए बरसात के मौसम में इस तरह की कार्रवाई पर चिंता जताई। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था की मांग की। दूसरी ओर प्रशासन ने दोहराया कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आवास आवंटन की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। नकटी गांव में कार्रवाई के बाद हालात सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन का ध्यान पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर है, जबकि प्रभावित परिवार बेहतर आवास और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कबीर जयंती पर रायपुर में मांस-मटन बिक्री पर रोक, उल्लंघन पर होगी जब्ती</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने जारी किए सख्त निर्देश, होटल और रेस्टोरेंट भी निगरानी के दायरे में, स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे शहर में करेंगी निरीक्षण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a42378c29b81/article-57313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kabir-jayanti.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कबीर जयंती के अवसर पर सोमवार 29 जून को मांस-मटन की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। रायपुर नगर निगम ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए पूरे नगर निगम क्षेत्र में सभी पशुवध गृहों और मांस-मटन की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मौके पर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी दुकान, होटल या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान में मांस-मटन की बिक्री या परोसने की पुष्टि होती है तो संबंधित सामग्री जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। नगर निगम की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह फैसला नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के पालन में लिया गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कबीर जयंती के दिन धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शहर में मांस-मटन के विक्रय पर रोक लगाने का निर्णय किया गया है। आदेश पूरे नगर निगम क्षेत्र में प्रभावी रहेगा और सभी संबंधित व्यापारियों को इसका पालन करना अनिवार्य होगा। निगम अधिकारियों ने बताया कि पहले ही संबंधित दुकानदारों और पशुवध गृह संचालकों को इसकी जानकारी दे दी गई है ताकि किसी तरह की परेशानी की स्थिति पैदा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग इस दौरान विशेष निगरानी रखेगा। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई केवल मांस-मटन की दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शहर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की जाएगी। यदि किसी स्थान पर मांसाहारी भोजन बेचते या परोसते हुए पाया गया तो मौके पर ही सामग्री जब्त की जाएगी और संचालक के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई होगी। निगम का कहना है कि आदेश का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लागू करना नहीं बल्कि उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना भी है। नगर निगम ने सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों और स्वच्छता निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सुबह से लेकर देर शाम तक अलग-अलग टीमें बाजारों, व्यावसायिक इलाकों और प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों का दौरा करेंगी। अधिकारी यह भी देखेंगे कि कहीं बंद दुकान के नाम पर अवैध रूप से बिक्री तो नहीं की जा रही। यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाएगी। निगम ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं आदेश का उल्लंघन होता दिखाई दे तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें। बताया जा रहा है कि पिछले वर्षों में भी विशेष अवसरों पर इस तरह के प्रतिबंध लागू किए जाते रहे हैं और अधिकांश व्यापारियों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन किया है। इस बार भी नगर निगम को उम्मीद है कि व्यापारी और होटल संचालक नियमों का सम्मान करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक अवसरों पर शांति और व्यवस्था बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध केवल कबीर जयंती के दिन प्रभावी रहेगा। इसके बाद सामान्य दिनों की तरह मांस-मटन की बिक्री पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार की जा सकेगी। हालांकि प्रतिबंध के दौरान किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे दिन सक्रिय रहेंगी और कार्रवाई की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजेंगी। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों और व्यापारियों का सहयोग जरूरी है। शहर में जारी इस आदेश के बाद मांस-मटन कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने भी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई दुकानदारों ने पहले ही ग्राहकों को सूचना देना शुरू कर दिया है कि कबीर जयंती के दिन उनकी दुकानें बंद रहेंगी। वहीं होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भी अपने मेन्यू में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि लोगों के सहयोग से आदेश का शांतिपूर्ण तरीके से पालन होगा और पूरे दिन किसी तरह की अप्रिय स्थिति सामने नहीं आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मृत्युभोज में घी के मालपुए नहीं बने तो 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के समर्थन में खड़े लोगों पर भी कार्रवाई, पीड़ितों ने जिला प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/social-boycott-of-43-families-if-ghee-malpuas-are-not/article-57013"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sirohi-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव से सामाजिक बहिष्कार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परंपराओं और सामाजिक दबाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गांव के एक गरीब परिवार ने आर्थिक तंगी के चलते मृत्युभोज में घी के मालपुए बनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद समाज के कुछ पंचों ने न केवल उस परिवार का बल्कि उनका समर्थन करने वाले 43 अन्य परिवारों का भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब गांव में उन्हें राशन तक नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय दुकानदार सामान देने से मना कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक कुओं से पानी भरने पर भी रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, गांव के लोगों से बातचीत तक बंद कर दी गई है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें खेतों में मजदूरी भी नहीं मिल रही, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है और पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक परिवार में मृत्यु के बाद आयोजित होने वाले मृत्युभोज में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण घी के मालपुए नहीं बनाए गए। परिवार ने समाज के लोगों से सादा भोजन स्वीकार करने का आग्रह किया था, लेकिन कथित तौर पर कुछ पंच इस बात से नाराज हो गए। इसके बाद पंचायत बुलाकर सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया गया। पीड़ितों का कहना है कि जिन्होंने इस फैसले का विरोध किया या गरीब परिवार का समर्थन किया, उन्हें भी दंडित कर दिया गया। देखते ही देखते कुल 43 परिवार इस बहिष्कार की चपेट में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रभावित परिवारों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार का असर केवल रिश्तों तक सीमित नहीं है बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। महिलाओं और बच्चों को भी गांव में उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों का कहना है कि जरूरत का सामान खरीदने के लिए उन्हें दूसरे गांवों का रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी बंद होने से आर्थिक स्थिति और खराब होती जा रही है। कुछ लोगों ने बताया कि छोटे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। गांव में सामाजिक दूरी बनाए रखने का दबाव इतना अधिक है कि कई लोग चाहकर भी इन परिवारों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने पहले स्थानीय स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसके बाद सभी प्रभावित परिवार सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच का भरोसा दिया है। उधर, यह मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इस तरह का सामाजिक दबाव उचित नहीं है और किसी भी परंपरा के नाम पर लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाएं न केवल प्रभावित परिवारों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं बल्कि समाज में भय और असमानता का माहौल भी पैदा करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि राजस्थान में सामाजिक बहिष्कार को रोकने के लिए 'राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम, 2019' लागू है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना दंडनीय अपराध माना गया है। कानून का उद्देश्य ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जिला प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप करेगा और उन्हें सामान्य जीवन जीने का अधिकार वापस मिलेगा। गांव में भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई लोग चाहते हैं कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकले, जबकि पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें केवल सामाजिक सम्मान ही नहीं बल्कि अपने बुनियादी अधिकार भी वापस चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:29:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>12 साल पुराने आदेश की अनदेखी पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर का फैसला रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व मंडल के 2014 के आदेश का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, जिम्मेदार अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-strict-on-ignoring-12-year-old-order-collectors/article-56998"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-high-court-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही और अदालती आदेशों की अनदेखी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने राजस्व मंडल के करीब 12 साल पुराने आदेश का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर द्वारा जारी एक आदेश को निरस्त कर दिया और आदेश के पालन में अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब किसी सक्षम अदालत ने राजस्व मंडल के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है, तब उसके क्रियान्वयन में वर्षों की देरी को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इसे प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी का उदाहरण माना। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि राजस्व मंडल ने 20 मई 2014 को अपना आदेश पारित किया था, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी उसका प्रभावी पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी न्यायिक आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते। यदि किसी आदेश पर कोई स्थगन नहीं है, तो उसका समयबद्ध तरीके से पालन करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी कहा कि आदेशों के पालन में अनावश्यक देरी न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता को प्रभावित करती है और इससे आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला एडवेंचर वाइल्ड लाइफ रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राजस्व मंडल के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पहले भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। उस समय भी न्यायालय ने प्रशासन को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया और बाद में कलेक्टर की ओर से नया आदेश जारी कर दिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को प्रशासन को 45 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बाद भी निर्धारित समय में आदेश लागू नहीं किया गया। इसके बजाय 27 फरवरी 2026 को कलेक्टर की ओर से एक नया आदेश जारी किया गया, जिसमें यह स्पष्ट करने की बात कही गई कि मामले में कहीं कोई अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही लंबित तो नहीं है। न्यायालय ने इस प्रक्रिया को अनावश्यक बताया और कहा कि जब मूल आदेश पर किसी भी अदालत की ओर से रोक नहीं थी, तब इस तरह की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं बनता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित पैनल वकील ने भी अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि राजस्व मंडल के 2014 के आदेश पर किसी भी सक्षम न्यायालय ने कोई अंतरिम राहत या स्थगन आदेश जारी नहीं किया है। इस स्वीकारोक्ति के बाद अदालत ने माना कि आदेश के पालन में हुई देरी पूरी तरह प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही का परिणाम है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी केवल औपचारिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर अपने दायित्व से बच नहीं सकते। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक और अर्धन्यायिक संस्थाओं द्वारा दिए गए आदेशों का सम्मान करना प्रशासनिक अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। यदि किसी आदेश को चुनौती नहीं दी गई है या उस पर रोक नहीं लगी है, तो उसका तत्काल पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में देरी से न केवल संबंधित पक्षों को नुकसान होता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता भी प्रभावित होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">न्यायालय ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत का मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। इसलिए ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है ताकि भविष्य में न्यायालय के आदेशों के पालन में अनावश्यक देरी न हो। यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। इससे स्पष्ट होता है कि अदालतें अब न्यायिक आदेशों के पालन में होने वाली देरी को गंभीरता से देख रही हैं। साथ ही यह निर्णय उन लोगों के लिए भी राहत का संकेत है, जो वर्षों तक अपने अधिकारों के लिए न्यायालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह निर्णय ऐसे मामलों में मिसाल बन सकता है, जहां प्रशासनिक स्तर पर आदेशों के पालन में अनावश्यक देरी होती है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून के शासन में न्यायालय के आदेश सर्वोपरि हैं और उनका समय पर पालन सुनिश्चित करना हर संबंधित अधिकारी का कर्तव्य है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:24:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आदिवासी जमीन सौदे पर कार्रवाई तेज, SDM का ट्रांसफर; जनजाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[6.60 करोड़ की बताई जा रही जमीन 6 लाख में खरीदने के आरोप, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मुख्य सचिव और कलेक्टर को नोटिस भेजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/action-on-tribal-land-deal-intensified-transfer-of-sdm-tribal/article-56077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhindwara-land-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। मामले में कार्रवाई करते हुए जुन्नारदेव की तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर का स्थानांतरण बैतूल कर दिया गया है। इससे पहले उन्हें उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय अटैच किया गया था। प्रशासनिक आदेश जारी होने के महज दो दिन बाद ही तबादले की कार्रवाई होने से इस पूरे घटनाक्रम को जमीन विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी मूल्यवान जमीन का सौदा इतनी कम कीमत पर कैसे हो गया। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला तामिया क्षेत्र के एक प्रमुख व्यू पॉइंट के आसपास स्थित आदिवासी जमीन से जुड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस जमीन की बाजार कीमत करीब 6.60 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जबकि इसका सौदा मात्र 6 लाख रुपए में किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि जमीन खरीदने वालों में प्रशासनिक अधिकारियों के परिजन और उनसे जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता, उस समय के बीएमओ तथा प्रभारी तहसीलदार की पत्नी के नाम पर जमीन का पंजीयन हुआ। यही वजह है कि मामला केवल जमीन सौदे तक सीमित नहीं रहा बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और पद के दुरुपयोग जैसे सवाल भी उठने लगे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित आदिवासी परिवार को काफी समय तक इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनकी जमीन का नामांतरण हो चुका है। मामले की चर्चा बढ़ने के बाद जब दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो कई तथ्यों ने प्रशासन को भी असहज कर दिया। सूत्रों के अनुसार जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया और दस्तावेजों की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस पर संज्ञान लिया। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, छिंदवाड़ा कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया किस आधार पर हुई, क्या नियमों का पालन किया गया और आदिवासी भूमि से जुड़े कानूनी प्रावधानों का कितना पालन हुआ। आयोग का हस्तक्षेप इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसकी जांच का दायरा और बढ़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार आयोग ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संवैधानिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(ए) के अंतर्गत आयोग को विशेष अधिकार प्राप्त हैं और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों पर समयबद्ध और तथ्यात्मक रिपोर्ट देने का दबाव बढ़ गया है। उधर जिले में नई प्रशासनिक व्यवस्था भी लागू कर दी गई है। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टर राजनंदिनी सिंह को जुन्नारदेव एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में सामान्य कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। हालांकि जमीन विवाद की जांच और आयोग की कार्रवाई फिलहाल चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में कानून काफी सख्त हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस कार्रवाई से नाराज युवक पानी टंकी पर चढ़ा, आत्महत्या की धमकी से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[मारपीट और जबरन पैसे लेने के आरोप लगाकर इंसाफ की मांग, तेज बारिश के बीच घंटों टंकी पर डटा रहा युवक; प्रशासन मनाने में जुटा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/angered-by-the-police-action-a-young-man-climbed-on/article-55616"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/hardibazar-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हरदीबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम नेवसा में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवक गांव की ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गया और आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। युवक पुलिस कार्रवाई से नाराज बताया जा रहा है। उसने पुलिस पर मारपीट करने और जबरन पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना की खबर फैलते ही गांव में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को भी तत्काल मौके पर पहुंचना पड़ा। कई घंटों तक चले घटनाक्रम के दौरान अधिकारी युवक को समझाने का प्रयास करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार नेवसा निवासी रफीक मोहम्मद ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में यह कदम उठाया। बताया जा रहा है कि वह गुरुवार सुबह गांव की पानी टंकी पर चढ़ गया और ऊपर से ही अपनी मांगें रखने लगा। उसका कहना था कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगा। इस दौरान इलाके में तनाव का माहौल बना रहा और लोगों की निगाहें टंकी पर टिकी रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक रफीक मोहम्मद और दीपेश निर्मलकर ने हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों का दावा है कि कुछ दिन पहले पुलिस उन्हें ग्राम सिरली के पास से पकड़कर थाने ले गई थी। वहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उनसे 23 हजार 500 रुपए भी ले लिए गए। इन आरोपों को लेकर दोनों युवकों में नाराजगी थी और इसी के विरोध में रफीक ने पानी टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुवार सुबह से ही मौसम खराब था और बीच-बीच में तेज बारिश भी हो रही थी। इसके बावजूद युवक टंकी से नीचे उतरने को तैयार नहीं था। वह ऊपर से लगातार अपनी बात दोहराता रहा और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा। ग्रामीणों का कहना था कि युवक मानसिक दबाव में दिखाई दे रहा था और अपनी शिकायतों को लेकर काफी आक्रोशित था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई। नए तहसीलदार विमल खांडेकर समेत कई अधिकारी गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने पहले परिजनों को आगे कर युवक को समझाने की कोशिश की। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गांव के वरिष्ठ लोगों की मदद भी ली गई ताकि युवक को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की थी। थाना प्रभारी के मुताबिक दोनों युवक कथित तौर पर जुआ गतिविधियों से जुड़े हुए थे और सूचना मिलने पर उनके खिलाफ धारा 151 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई थी। उन्होंने मारपीट और पैसे लेने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने किसी प्रकार की गैरकानूनी कार्रवाई नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि गांव के कुछ लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाल के दिनों में पुलिस द्वारा कई लोगों को पूछताछ के नाम पर घरों से उठाकर थाने ले जाया गया है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि यदि किसी के खिलाफ शिकायत थी तो उसके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना के बाद गांव में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने एक अन्य युवक अनवर अली का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वह कई दिनों से घर नहीं लौटा है और उसके परिवार वाले भी चिंतित हैं। हालांकि इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद युवक के टंकी पर चढ़े रहने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। अधिकारियों को आशंका थी कि कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया और लोगों को टंकी के करीब जाने से रोका गया। लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे थे। कुछ लोग युवक की मांगों को गंभीरता से लेने की बात कह रहे थे, जबकि कुछ का मानना था कि कानून हाथ में लेने के बजाय शिकायत के लिए वैधानिक रास्ता अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 13:55:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>साय कैबिनेट की अहम बैठक आज, ट्रांसफर नीति और CM हेल्पलाइन पर फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[नवा रायपुर में हुई बैठक में तबादलों से रोक हटाने, किसानों से जुड़े प्रस्तावों और CM हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत पर चर्चा, कई बड़े फैसलों की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/important-meeting-of-sai-cabinet-today-decision-on-transfer-policy/article-55392"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sai-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रही। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित इस बैठक को सरकार की प्रशासनिक और जनहित से जुड़ी योजनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा तबादलों पर लगी रोक और नई ट्रांसफर नीति को लेकर रही। लंबे समय से अधिकारी और कर्मचारी स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही तबादलों का रास्ता खोल सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक नई स्थानांतरण नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर तबादले शुरू हो सकते हैं।</p>
<p>प्रदेश में पिछले कुछ समय से तबादलों पर लगी रोक के कारण कई विभागों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे थे। कई कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय से अपनी पसंद या जरूरत के अनुसार स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कैबिनेट का यह फैसला प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार नई नीति में पारदर्शिता और जरूरत आधारित स्थानांतरण को प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। बैठक शुरू होने से पहले मंत्रालय परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा रही और विभिन्न विभागों के कर्मचारी फैसले का इंतजार करते नजर आए।</p>
<p>बैठक के एजेंडे में खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों को भी अहम स्थान दिया गया। आगामी खरीफ विपणन वर्ष को देखते हुए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा की गई। इसके अलावा कस्टम मिलिंग नीति और किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए सरकार खेती से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दे रही है। सूत्रों के मुताबिक किसानों के हित में कुछ नए प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, जिनकी घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है।</p>
<p>इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत रही। सुशासन तिहार के समापन के बाद सरकार ने लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए इस नई व्यवस्था को लागू करने का फैसला किया है। अब आम नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर कॉल कर अपनी समस्याएं और शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। इसके साथ ही वेब पोर्टल, मोबाइल एप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत होगा।</p>
<p>सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिकायतें और सुझाव प्राप्त हुए थे। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में इन फीडबैक पर भी चर्चा हुई है। सरकार विभिन्न जिलों से मिले सुझावों का अध्ययन कर प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोगों ने सड़क, बिजली, पानी, राजस्व और अन्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे। ऐसे में सरकार इन समस्याओं के समाधान को लेकर भी रणनीति तैयार कर सकती है।</p>
<p>बैठक में कर्मचारियों, उद्योगों और विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुछ नई पहल पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि बैठक समाप्त होने तक सभी फैसलों की आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई थी, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि आज लिए जाने वाले फैसले आने वाले महीनों में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं की दिशा तय कर सकते हैं।</p>
<p>सरकार एक ओर जहां प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को भी प्राथमिकता देने के संकेत दे रही है। यही वजह है कि साय कैबिनेट की इस बैठक को केवल नियमित सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के मंच के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक निर्णयों पर टिकी हुई है, जिनका असर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, किसानों और आम नागरिकों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:56:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कांकेर में 56 सरपंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, चक्काजाम करने की चेतावनी दी</title>
                                    <description><![CDATA[कांकेर के अंतागढ़ ब्लॉक में 56 सरपंचों ने फंड और विकास कार्यों की मांग को लेकर इस्तीफा दिया, धरना जारी, चक्काजाम की चेतावनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/56-sarpanches-in-kanker-gave-mass-resignation-and-warned-of/article-53862"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kanker-antagarh-sarpanch-association-protest-demonstration.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पंचायत व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विरोध देखने को मिला है। अंतागढ़ ब्लॉक की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है। फंड की कमी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">महीनों से मानदेय न मिलना और विकास कार्यों का ठप होना सरपंचों की नाराज़गी की वजह बनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चलते वे पिछले कुछ दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। गुरुवार को स्थिति और बिगड़ गई जब सरपंच संघ ने चक्काजाम की चेतावनी दे दी। इस पूरे घटनाक्रम के चलते इलाके में हलचल मच गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी बेचैनी देखी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतागढ़ ब्लॉक के गोल्डन चौक पर सरपंच 18 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। धरने में शामिल जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले साल से पंचायतों में किसी भी नए विकास कार्य को मंजूरी नहीं मिली है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और गांवों में सड़क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। सरपंचों का कहना है कि वे प्रशासन को लगातार ज्ञापन और पत्र भेजते रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हालात यह हैं कि ग्रामीण अब पंचायत प्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे हैं और उनके पास जवाब नहीं है। कुछ सरपंचों ने यहां तक कहा है कि बिना बजट और स्वीकृति के गांवों का काम चलाना मुश्किल हो गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धरने के दौरान सरपंचों ने प्रशासन पर पंचायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर जल्द फंड जारी नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारियों ने सरपंच संघ से बातचीत की कोशिशें शुरू कर दी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीणों में भी इस मुद्दे पर नाराज़गी बढ़ती जा रही है। कई गांवों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरपंच संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना सकते हैं और सड़क पर उतरकर चक्काजाम भी कर सकते हैं। इस समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांकेर का अंतागढ़ इलाका राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:05 +0530</pubDate>
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