<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/fasting-rituals/tag-12108" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Fasting Rituals - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/12108/rss</link>
                <description>Fasting Rituals RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मई 2026 में पूर्णिमा व्रत: तिथि, पूजा समय, महत्व और संपूर्ण विधि</title>
                                    <description><![CDATA[30 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा पूर्णिमा व्रत, जो भगवान विष्णु और शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/purnima-vrat-date-puja-time-importance-and-complete-method-in/article-54349"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/purnima-vrat-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूर्णिमा व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाने वाला व्रत है, जिसे शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि यानी पूर्ण चंद्रमा के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में मई माह की पूर्णिमा 30 मई, शनिवार को पड़ रही है, जिसे भक्तगण विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और उपवास के साथ मनाएंगे। यह दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन सत्यनारायण व्रत और पूजा का आयोजन भी किया जाता है, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">30 मई 2026 को पूर्णिमा तिथि दोपहर 11:58 बजे से शुरू होकर 31 मई 2026 को दोपहर 02:15 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा का दिन चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा का प्रतीक होता है और इस दिन प्रकृति तथा मानव शरीर पर विशेष आध्यात्मिक प्रभाव माना जाता है। इस दिन भक्त सुबह से ही व्रत की तैयारी करते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं, जो चंद्र दर्शन के बाद पूजा और प्रसाद ग्रहण करके पूर्ण किया जाता है। कुछ भक्त कठोर उपवास रखते हैं जिसमें वे पूरे दिन बिना भोजन और जल के रहते हैं, जबकि कुछ लोग केवल एक सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं जिसमें नमक और दाल का प्रयोग नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल लेकिन आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भक्त प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूरे दिन ईश्वर के नाम का स्मरण करते हैं। सूर्यास्त के बाद जब चंद्रमा का दर्शन होता है, तब विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भक्त अपने घर या मंदिर में भगवान विष्णु और शिव की आराधना करते हैं। इस अवसर पर सत्यनारायण कथा का पाठ भी किया जाता है, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। पूजा के दौरान दीप जलाए जाते हैं, मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और भगवान को फल, मिठाई तथा अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है, जिसमें भक्त पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की ऊर्जा शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। विशेष रूप से सत्यनारायण पूजा को इस दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्णिमा व्रत का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में भी मिलता है और इसे पुण्य प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, स्वास्थ्य और शांति का संचार होता है। इसके अलावा यह व्रत मानसिक संतुलन को भी बढ़ाता है और आध्यात्मिक ऊर्जा को मजबूत करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति का प्रभाव मानव शरीर और मानसिक अवस्था पर पड़ता है, जिससे ध्यान और साधना के लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार 30 मई 2026 का पूर्णिमा व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन भक्तों के लिए आस्था, उपवास और ईश्वर भक्ति का विशेष संगम प्रस्तुत करता है। भगवान विष्णु और शिव की आराधना के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है तथा भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/purnima-vrat-date-puja-time-importance-and-complete-method-in/article-54349</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/purnima-vrat-date-puja-time-importance-and-complete-method-in/article-54349</guid>
                <pubDate>Wed, 27 May 2026 17:07:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/purnima-vrat-2026-%281%29.jpg"                         length="85846"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कब रखा जाएगा वट पूर्णिमा व्रत? जानें सही तारीख, महत्व और पूजा विधि पूरी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[वट पूर्णिमा व्रत 2026 की तारीख 29 जून तय की गई है। जानें इसका महत्व, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/when-will-vat-purnima-fast-be-observed-know-the-exact/article-52809"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(87).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Vat Purnima <span lang="hi" xml:lang="hi">2026</span> Date: <span lang="hi" xml:lang="hi">वट पूर्णिमा व्रत 2026 को लेकर महिलाओं में अभी से ही तैयारियां और चर्चा शुरू हो गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। वट पूर्णिमा व्रत 2026 इस बार जून के आखिर में पड़ रहा है और पंचांग के अनुसार इसकी तिथि 29 जून तय की गई है। बताया जा रहा है कि इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास की स्थिति होने के कारण वट सावित्री और वट पूर्णिमा के बीच समय का अंतर भी ज्यादा रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लोगों में थोड़ी उलझन भी देखी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पंचांग की गणना के मुताबिक पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 को तड़के 3 बजकर 7 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 30 जून की सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदयकाल की मान्यता के अनुसार वट पूर्णिमा व्रत 29 जून को ही रखा जाएगा। कई ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार का व्रत विशेष माना जा रहा है क्योंकि तिथि और नक्षत्रों का संयोग अलग तरह का बन रहा है। महाराष्ट्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यह परंपरा काफी धूमधाम से निभाई जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वट पूर्णिमा व्रत का महत्व धार्मिक दृष्टि से काफी गहरा माना जाता है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप और समर्पण से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी कथा से यह व्रत जुड़ा हुआ है। इसी कारण महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। सुबह से ही महिलाएं स्नान करके साफ वस्त्र पहनती हैं और कई जगहों पर लाल या पीले कपड़ों को शुभ माना जाता है। 16 श्रृंगार करने की परंपरा भी देखी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि यह हर क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से निभाई जाती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूजा की प्रक्रिया में वट वृक्ष के नीचे दीप जलाने से लेकर कच्चा सूत लपेटने तक की परंपरा निभाई जाती है। कई महिलाएं बांस की टोकरी में फल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुमकुम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज और अन्य पूजन सामग्री लेकर जाती हैं। वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा लपेटने की परंपरा को बहुत शुभ माना जाता है। इसके बाद वृक्ष पर तिलक किया जाता है और चने-गुड़ का प्रसाद अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद महिलाएं अपने पति के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेती हैं और कई जगहों पर पति को पंखा झलने की भी परंपरा निभाई जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सम्मान और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/when-will-vat-purnima-fast-be-observed-know-the-exact/article-52809</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/when-will-vat-purnima-fast-be-observed-know-the-exact/article-52809</guid>
                <pubDate>Thu, 07 May 2026 09:39:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD-%2887%29.jpg"                         length="184152"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        