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                <title>Trinamool Congress - दैनिक जागरण</title>
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                <title>TMC नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, फालता थाने पर हमले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश का आरोप, हिंसक प्रदर्शन मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-jahangir-khans-wife-arrested-for-attack-on-falta/article-56486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sarina-bibi-arrested.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान से जुड़े मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह हुई इस गिरफ्तारी के बाद इलाके में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पुलिस का आरोप है कि सरीना बीबी ने फालता पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में समर्थकों को इकट्ठा कर विरोध प्रदर्शन कराया था और इसी दौरान पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों पर हमला करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने में उनकी भूमिका सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें डायमंड हार्बर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा मामला 16 जून को फालता थाने के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक बड़ी संख्या में थाने के बाहर जमा हो गए थे। इसी दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल कानून व्यवस्था बाधित की बल्कि पुलिस हिरासत में मौजूद जहांगीर खान को छुड़ाने की भी कोशिश की। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य वीडियो फुटेज की जांच शुरू की थी। इन्हीं फुटेज के आधार पर कई लोगों की पहचान की गई और अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जहांगीर खान का नाम पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। वह दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में टीएमसी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम कई बार चर्चा में आया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह पेश किया था और सार्वजनिक सभाओं में कई बार फिल्म का चर्चित संवाद दोहराया था। इसी वजह से वह स्थानीय स्तर पर काफी चर्चित हो गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि चुनाव के बाद हालात तेजी से बदले। फालता विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। चुनाव आयोग को मतदान रद्द कर दोबारा वोटिंग करानी पड़ी थी। दोबारा मतदान से ठीक पहले जहांगीर खान ने चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की और उसी समय से जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देने लगे। इस बीच उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप भी सामने आए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फालता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में अवैध वसूली, धमकी देने, लोगों को डराने और महिलाओं को गैंगरेप की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। आरोप लगने के बाद वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहे। पुलिस का कहना है कि वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार 8 जून को पश्चिम बंगाल पुलिस ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक वह देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें राज्य में लाया गया और पूछताछ शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें फालता क्षेत्र में कई जगहों पर ले जाकर घटनास्थलों की पहचान कराई। इसी दौरान उनकी सार्वजनिक परेड भी कराई गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में जहांगीर खान लोगों के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। एक वीडियो में वह हथकड़ी लगाए नजर आए, जबकि दूसरे वीडियो में उनकी कमर में रस्सी बंधी हुई थी। इन तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन का कहना था कि यह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">फालता थाने पर हुए हमले के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। इसके बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान का अभियान शुरू किया। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि जांच अभी जारी है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ जनता का विरोध खुलकर सामने आया है। कहीं नेताओं का घेराव किया गया तो कहीं उन पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगे। ऐसे माहौल में जहांगीर खान और उनकी पत्नी से जुड़ा यह मामला राज्य की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। सरीना बीबी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फालता थाने पर हुए हमले और हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>तृणमूल के 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ एनसीपीआई में किया विलय</title>
                                    <description><![CDATA[एनसीपीआई में शामिल होकर बगावती सांसदों ने साधा संवैधानिक दांव, भाजपा से सीधा जुड़ाव टालने के पीछे भी रही राजनीतिक रणनीति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/20-trinamool-mps-left-the-party-and-merged-with-ncpi/article-56133"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/trinamool-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय करने के फैसले ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पहली नजर में यह फैसला चौंकाने वाला लग सकता है क्योंकि जिस पार्टी में इन सांसदों ने विलय किया है, वह राष्ट्रीय स्तर पर लगभग अज्ञात राजनीतिक संगठन मानी जाती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक और कानूनी रणनीति भी जुड़ी हुई बताई जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष एनसीपीआई में विलय का दावा पेश किया। यह संख्या तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है। यही आंकड़ा इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए यह रास्ता चुना, क्योंकि मौजूदा कानूनी व्यवस्था में केवल दो-तिहाई सदस्यों के साथ किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय ही उन्हें अयोग्यता से बचा सकता है। एनसीपीआई की बात करें तो यह पार्टी त्रिपुरा में पंजीकृत है, लेकिन अभी तक राष्ट्रीय राजनीति में उसका कोई बड़ा प्रभाव नहीं रहा है। वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीमित स्तर पर चुनाव लड़ा था और उसे बेहद कम वोट मिले थे। इसके बावजूद अब अचानक यह पार्टी लोकसभा में 20 सांसदों के साथ चर्चा के केंद्र में आ गई है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बागी सांसदों ने इतनी छोटी पार्टी को ही क्यों चुना। शुरुआत में सांसदों के बीच अलग राजनीतिक समूह बनाने पर भी चर्चा हुई थी। लेकिन दल-बदल कानून की मौजूदा व्यवस्था के तहत ऐसा करना आसान नहीं था। यदि सांसद अलग समूह बनाते तो उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता था। यही वजह रही कि उन्होंने विलय का विकल्प चुना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संविधान की दसवीं अनुसूची यानी एंटी-डिफेक्शन लॉ की पृष्ठभूमि इस फैसले को समझने में अहम भूमिका निभाती है। जब यह कानून 1985 में लागू हुआ था तब इसमें एक-तिहाई विधायकों या सांसदों के समर्थन से अलग समूह बनाने की छूट थी। लेकिन बाद के वर्षों में इस प्रावधान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ। कई राज्यों और केंद्र की राजनीति में नेताओं ने बार-बार दल बदलकर सरकारों की दिशा बदल दी। इसे देखते हुए वर्ष 2003 में कानून में संशोधन किया गया और अलग समूह बनाने वाली व्यवस्था समाप्त कर दी गई। संशोधन के बाद केवल एक ही रास्ता बचा, जिसमें किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद या विधायक किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय कर सकते हैं। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने का फैसला किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पूरी तरह संवैधानिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया। इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें सामने आती रही थीं कि बागी सांसद भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे सीधे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे भी राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस और भाजपा पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही हैं। ऐसे में यदि सांसद सीधे भाजपा में शामिल हो जाते तो उनके निर्वाचन क्षेत्रों में इसका नकारात्मक संदेश जा सकता था। दूसरी ओर भाजपा के लिए भी इतने बड़े समूह को सीधे पार्टी संरचना में समायोजित करना आसान नहीं होता। पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी असंतोष पैदा हो सकता था। एनसीपीआई का विकल्प इस लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया। यह पार्टी राजनीतिक रूप से छोटी है और उसका संगठनात्मक ढांचा सीमित है। ऐसे में बागी सांसद वहां अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रख सकते हैं। साथ ही वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को समर्थन देकर केंद्र की राजनीति में अपनी भूमिका भी कायम रख सकते हैं। इस घटनाक्रम का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ने से एनडीए को भी राजनीतिक लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से उन विधेयकों के संदर्भ में, जिनके लिए व्यापक समर्थन की आवश्यकता होती है। माना जा रहा है कि लोकसभा में संख्या बल बढ़ने से सरकार की रणनीतिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:09:23 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए</title>
                                    <description><![CDATA[धनुरहाट की सरपंच मंदिरा गेन का माफी मांगते वीडियो वायरल, कुछ ही दिनों में तृणमूल नेताओं को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
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                <title>ममता के साथ खड़ी हुईं महुआ, बोलीं- वही असली तृणमूल</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी की वैधता, पहचान और जनाधार ममता बनर्जी से जुड़ा; अभिषेक बनर्जी का भी किया बचाव, बीजेपी पर साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahua-moitra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी नेतृत्व के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान, वैधता और राजनीतिक ताकत उसकी संस्थापक ममता बनर्जी से जुड़ी हुई है और कोई भी बागी या अलग गुट खुद को “असली तृणमूल” नहीं कह सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">एक साक्षात्कार के दौरान महुआ मोइत्रा ने पार्टी में चल रहे असंतोष और कुछ नेताओं द्वारा अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक ममता बनर्जी सक्रिय राजनीति में हैं, तब तक तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान उन्हीं के साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना ममता बनर्जी ने की थी और जनता का जनादेश भी उसी नेतृत्व को मिला है। ऐसे में किसी भी बागी गुट का दावा राजनीतिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ मोइत्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दल इन घटनाओं को तृणमूल के कमजोर पड़ते जनाधार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे अस्थायी राजनीतिक परिस्थितियों का हिस्सा बता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की पहचान दो प्रमुख आधारों पर टिकी होती है—उसके संस्थापक नेता और चुनाव चिह्न। उनके अनुसार, बागी नेताओं के पास न तो पार्टी का मूल नेतृत्व है और न ही आधिकारिक चुनाव चिह्न, इसलिए वे तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक विरासत का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी का आकार छोटा या बड़ा होना अलग बात है, लेकिन इससे उसकी वैधता समाप्त नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कुछ नेताओं द्वारा अलग संसदीय समूह बनाने या बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। महुआ ने संकेत दिया कि ऐसी गतिविधियां राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो सकती हैं, लेकिन इससे पार्टी की मूल पहचान प्रभावित नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">साक्षात्कार के दौरान महुआ मोइत्रा ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का भी बचाव किया। हाल के समय में पार्टी की चुनौतियों और चुनावी झटकों के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराने वाली आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि यह एकतरफा दृष्टिकोण है। उनके मुताबिक अभिषेक ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई संरचनात्मक बदलाव किए हैं और पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में कठिन समय आने पर नेतृत्व को निशाना बनाना आसान होता है, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल होती है। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर जो ढांचा तैयार किया है, उसने पार्टी को मजबूत बनाने में योगदान दिया है। इसलिए उन्हें केवल नकारात्मक दृष्टि से देखना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती सक्रियता पर भी टिप्पणी की। महुआ ने आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में कुछ नेताओं का मुख्य उद्देश्य अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चल रहे राजनीतिक अभियानों के पीछे व्यक्तिगत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी काम कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधारात्मक स्तर पर वह बीजेपी को अपना प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानती हैं और भविष्य में भी उनकी राजनीति का केंद्र यही रहेगा। उनके अनुसार देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुलतावादी सोच की रक्षा के लिए मजबूत विपक्ष की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में चाहे जितनी भी चुनौतियां हों, फिर भी यह बीजेपी के खिलाफ संघर्ष का सबसे मजबूत मंच है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में बने रहने का उनका उद्देश्य केवल सत्ता नहीं बल्कि वैचारिक संघर्ष है। इसलिए वे पार्टी छोड़ने या राजनीतिक जीवन से दूर होने की किसी संभावना को नहीं देखतीं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक वापसी को लेकर भी महुआ ने विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर मजबूती हासिल कर सकती है और बंगाल की राजनीति में अपना प्रभाव कायम रख सकती है। उनके मुताबिक पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ मोइत्रा का यह बयान केवल व्यक्तिगत निष्ठा का प्रदर्शन नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक स्पष्ट संदेश भी है। ऐसे समय में जब पार्टी को अंदरूनी असंतोष और बाहरी राजनीतिक दबाव दोनों का सामना करना पड़ रहा है, वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक एकजुटता संगठन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महुआ मोइत्रा के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व को ही पार्टी की असली पहचान और भविष्य का आधार मानता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बड़ी बगावत: 58 विधायकों ने बनाया अलग गुट, ऋतब्रत बनर्जी बने विधायक दल के नेता</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल, ममता बनर्जी की पार्टी में सबसे बड़ा आंतरिक संकट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-split.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अभूतपूर्व बगावत देखने को मिली है। पार्टी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को 58 बागी विधायकों ने अपना नेता चुन लिया है। इस कदम ने न केवल TMC के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया है, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना भी पैदा कर दी है। बुधवार को बागी विधायकों के समूह ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपा। इस पत्र में ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता घोषित किया गया है। इसके अलावा जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता तथा अखरुज्जमान को चीफ व्हिप नियुक्त किया गया है। हालांकि बागी गुट ने अभी भी ममता बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष माना है, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और उनके फैसलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। यही मुद्दा इस पूरे राजनीतिक संकट का मुख्य कारण माना जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>फर्जी हस्ताक्षर विवाद से शुरू हुआ संकट</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस राजनीतिक बगावत की शुरुआत उस समय हुई जब विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि नेता प्रतिपक्ष के चयन संबंधी प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से लगाए गए हैं।अभिषेक बनर्जी के लेटरहेड पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी। दोनों विधायकों का आरोप था कि इस प्रस्ताव में उनकी सहमति के बिना उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों विधायकों को अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए TMC से निष्कासित कर दिया। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा और धीरे-धीरे कई विधायक उनके समर्थन में आ गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>58 विधायकों का समर्थन, बढ़ी TMC की मुश्किलें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">58 विधायकों का एक साथ अलग गुट बनाना TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह केवल कुछ नेताओं की नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम है। बागी विधायकों का दावा है कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी की जा रही है और महत्वपूर्ण निर्णय कुछ चुनिंदा नेताओं तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा और संगठनात्मक ढांचे में पारदर्शिता की कमी है। यही वजह है कि उन्होंने विधायक दल के भीतर अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ममता बनर्जी ने सभी कमेटियां भंग कीं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की सभी पार्टी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन के व्यापक पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह फैसला बागी गुट की ताकत को सीमित करने और संगठन पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कमेटियों के भंग होने से संगठनात्मक स्तर पर शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और नए नेतृत्व को सामने लाने का रास्ता खुल सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या बागी विधायक TMC पर दावा कर सकते हैं?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बागी विधायक विधायक दल के भीतर अलग गुट बनाकर नेता और चीफ व्हिप जैसे पद हासिल कर सकते हैं, लेकिन पार्टी संगठन और चुनाव चिह्न पर उनका सीधा दावा अभी आसान नहीं होगा। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून और चुनाव आयोग के नियम इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 91वें संविधान संशोधन के अनुसार यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक अलग होने का फैसला करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। इसके बाद यह प्रश्न उठता है कि पार्टी का वास्तविक नियंत्रण किसके पास है। चुनाव आयोग इस स्थिति में कई पहलुओं की जांच करता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव आयोग किन आधारों पर फैसला करता है?</strong></h5>
<ol style="text-align:justify;">
<li>पार्टी संगठन का समर्थन किसके पास है।</li>
<li>राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारिणी किस गुट के साथ है।</li>
<li>पार्टी संविधान क्या कहता है।</li>
<li>चुने हुए जनप्रतिनिधियों का बहुमत किसके पक्ष में है।</li>
</ol>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं मानकों के आधार पर चुनाव आयोग तय करता है कि पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर किसका अधिकार होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक घटनाक्रम?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र की राजनीति से कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) दोनों बड़े विभाजन का सामना कर चुकी हैं। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा गुट अलग हुआ था। इसके बाद 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में NCP का विभाजन हुआ। दोनों मामलों में अलग हुए गुटों ने पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा किया था। पश्चिम बंगाल में भी वैसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि TMC का संगठनात्मक ढांचा और नेतृत्व शैली महाराष्ट्र की पार्टियों से अलग मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी विधायकों के दावों से सियासत गरमाई</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी से निकाले गए विधायकों ने बहुमत समर्थन का दावा किया, आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं बागी नेता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते असंतोष और बागी सुरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मानते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या टीएमसी के भीतर चल रहा असंतोष आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिजू दत्ता का कहना है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक उनके विचारों से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। बागी गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि उनके पास दो-तिहाई बहुमत का समर्थन है तो उन्हें ही पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि माना जाना चाहिए। साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी नए दावे सामने आए हैं। बागी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व के सवाल पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार शाम को कोलकाता स्थित विधायक आवास में हुई एक बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। बैठक में निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के साथ कई अन्य विधायक भी मौजूद बताए गए। हालांकि बैठक में शामिल विधायकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस बैठक ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया गया। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने इस मामले पर आपत्ति जताई थी और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। निष्कासन के बाद दोनों नेता लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों को भी प्रतिक्रिया देने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब सामने आ रहा है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने यहां तक कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे के अनुसार आगे बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व ने बागी नेताओं के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं और पार्टी संगठन पूरी तरह मजबूत है। उनका दावा है कि कुछ नेताओं के व्यक्तिगत असंतोष को पूरे संगठन की राय नहीं माना जा सकता। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और जनाधार के बल पर पहले की तरह एकजुट बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होकर नया गुट बनाते हैं तो संवैधानिक और कानूनी स्तर पर कई प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। ऐसे मामलों में दलबदल कानून, निर्वाचन आयोग के नियम और पार्टी संगठन की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई गुट खुद को मूल पार्टी बताता है तो चुनाव आयोग को यह तय करना होता है कि संगठन, कार्यकारिणी और निर्वाचित प्रतिनिधियों का वास्तविक समर्थन किसके साथ है। ऐसे मामलों में कई बार कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं और अंतिम निर्णय में लंबा समय लग सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने संगठन में मतभेदों की चर्चा को बढ़ावा दिया है। पार्टी की बैठकों में अपेक्षा से कम विधायकों की उपस्थिति, कुछ नेताओं के इस्तीफे और सार्वजनिक मंचों पर उठे सवालों ने नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह असंतोष सीमित स्तर तक है या वास्तव में संगठन के भीतर बड़ा बदलाव आकार ले रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:53:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के ठिकानों पर छापा, 80 लाख कैश बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के घर और ऑफिस पर छापेमारी में 80 लाख रुपये कैश और राहत सामग्री बरामद हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-dipankar-bhattacharyas-premises-raided-80-lakh-cash-recovered/article-54230"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/dipankar-bhattacharya-tmc-leader-raids-₹80-lakh-cash.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में दीपांकर भट्टाचार्य के कुछ ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद हुए। ये कार्रवाई सोमवार देर रात की गई। सुनने में आया है कि दीपांकर भट्टाचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले बादुरिया म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सरकारी राहत सामग्री के गबन और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसी वजह से ये छापेमारी की गई। पुलिस ने उनके घर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टी ऑफिस और एक कंप्यूटर सेंटर की तलाशी ली। कार्रवाई के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आज उन्हें कोर्ट में पेश करने की तैयारी हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब पुलिस टीम कंप्यूटर सेंटर पहुंची तो वहां ताला लगा था। इसके बाद अधिकारियों को ताला तोड़कर अंदर जाना पड़ा। तलाशी के दौरान अलग-अलग जगहों से बड़ी मात्रा में कैश मिल गया। कुछ सूत्रों का कहना है कि मौके पर बरामद की गई रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला। पुलिस को राहत सामग्री भी मिली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कथित तौर पर सरकारी वितरण के लिए रखा गया था। अधिकारियों के मुताबिक पूरे मामले में दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां अब देख रही हैं कि ये रकम कहां से आई और इसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है। सरकार बदलने के बाद कई स्थानीय नेताओं और अधिकारियों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता दिखा है। इस क्रम में यह कार्रवाई भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इलाके में देर रात तक पुलिस की मौजूदगी बनी रही और आसपास के लोग इस मामले पर चर्चा करते रहे। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि छापेमारी कई घंटों तक चली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुलिस टीम लगातार दस्तावेजों की जांच करती रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं मुर्शिदाबाद जिले में प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता पुलिस के डीसी रैंक अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर दोबारा छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि ईडी की टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ सुबह उनके घर पहुंची। अधिकारियों ने घर के आस-पास और परिसर में मौजूद तालाब तक की निगरानी की है। सूत्रों के अनुसार घर के चारों ओर लगे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरों की भी छानबीन की जा रही है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों मामलों में जांच जारी है और एजेंसियां दस्तावेजों के आधार पर अगली कार्रवाई कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>शपथ लेते ही जोरासांको पहुंचे शुभेंदु अधिकारी, बोले- अब सभी लोगों का CM हूं</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेते ही जोरासांको ठाकुरबाड़ी पहुंचकर रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/as-soon-as-he-took-the-oath-shubhendu-adhikari-reached/article-52995"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t163323.663.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपना पहला संदेश राज्य की जनता को दिया। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने हैं। शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। शपथ लेने के तुरंत बाद अधिकारी सबसे पहले रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास जोरासांको ठाकुरबाड़ी पहुंचे। वहां उन्होंने कविगुरु को पुष्पांजलि अर्पित की और गीत गाकर श्रद्धांजलि दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने औपचारिक सरकारी कामकाज शुरू करने से पहले यही कार्यक्रम तय किया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह दिन सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य को नई दिशा देने और विकास की राह पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उनकी सरकार की है। अधिकारियों के अनुसार शपथ समारोह के बाद जोरासांको ठाकुरबाड़ी में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। वहां बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी पहुंचे। शुभेंदु अधिकारी ने कहा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, “<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं अब सिर्फ किसी पार्टी का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे बंगाल के लोगों का मुख्यमंत्री हूं।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है और उनकी सरकार सभी वर्गों के लिए काम करेगी। बंगाल में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए राजनीतिक माहौल भी काफी गर्म नजर आ रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने स्वामी विवेकानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">चरैवेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरैवेति</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का उल्लेख करते हुए लोगों से नए बंगाल के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी अब राज्य में संगठन और प्रशासन दोनों स्तर पर तेजी से बदलाव की तैयारी में है। चुनाव नतीजों के बाद भी राज्य में राजनीतिक बयानबाजी जारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अधिकारी ने विपक्ष को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने </span>207 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसको </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें मिलीं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:56:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के PA की गोली मारकर हत्या, गाड़ी रोक 10 राउंड फायरिंग की</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या, हमले में ड्राइवर घायल, जांच में जुटी पुलिस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/suvendu-adhikaris-father-shot-dead-in-bengal-police-investigation-underway/article-52824"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(96).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के नॉर्थ </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">24<span lang="hi" xml:lang="hi"> परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में बुधवार रात उस वक्त सनसनी फैल गई जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात रात करीब </span>10:30<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे की बताई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब चंद्रनाथ रथ (</span>42) <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता से अपने घर मध्यमग्राम लौट रहे थे। अचानक हुई इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था और इसमें हमलावरों ने बेहद प्रोफेशनल तरीके से वारदात को अंजाम दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि चंद्रनाथ रथ उस समय अपनी स्कॉर्पियो कार में ड्राइविंग सीट के बगल में बैठे थे। गाड़ी में उनके साथ ड्राइवर बुद्धदेब बेरा और एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। कोलकाता से लगभग </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">20<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर दूर डोलतला और मध्यमग्राम के बीच अचानक एक कार ने उनकी गाड़ी का पीछा करते हुए रास्ता रोक दिया। जैसे ही स्कॉर्पियो रुकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी समय एक बाइक पर सवार हमलावर वहां पहुंचा और उसने वाहन की बाईं तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार करीब </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> राउंड गोलियां चलाई गईं। इस हमले में चंद्रनाथ रथ को चार गोलियां लगीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से दो सीने को पार कर गईं और एक गोली पेट में लगी। वहीं ड्राइवर बुद्धदेब बेरा भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद हमलावर मौके पर गाड़ी छोड़कर बाइक से फरार हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां डॉक्टरों ने चंद्रनाथ रथ को मृत घोषित कर दिया। ड्राइवर की हालत नाजुक बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है। पुलिस ने मौके से वह कार जब्त कर ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्कॉर्पियो का रास्ता रोका गया था। जांच में सामने आया है कि कार पर लगा नंबर प्लेट फर्जी था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि हमलावर पहले से पूरी तैयारी के साथ आए थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फोरेंसिक टीम की शुरुआती जांच में एक और अहम बात सामने आई है। माना जा रहा है कि हमले में ग्लॉक </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">47X <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी आधुनिक पिस्टल का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस तरह के हथियार आम तौर पर संगठित अपराध या प्रशिक्षित शूटरों के पास ही देखे जाते हैं। घटना के तरीके को देखते हुए इसे किसी प्रोफेशनल साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। हमलावर बाइक पर हेलमेट पहनकर आए थे और बाइक पर कोई नंबर प्लेट भी नहीं थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनकी पहचान फिलहाल मुश्किल बनी हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस वारदात के कुछ ही घंटे बाद बशीरहाट इलाके में एक और फायरिंग की घटना सामने आई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भाजपा कार्यकर्ता रोहित रॉय गंभीर रूप से घायल हो गए। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक स्तर पर भी माहौल गर्म हो गया है। सुवेंदु अधिकारी ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए कहा है कि पिछले कुछ दिनों से चंद्रनाथ रथ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और यह हमला </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों की रेकी के बाद किया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और इसकी सीबीआई जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि बिना जांच के किसी पर आरोप लगाना सही नहीं है। फिलहाल पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और कई टीमें जांच में जुटी हुई हैं। इस घटना के बाद मध्यमग्राम और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:29:56 +0530</pubDate>
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