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                <title>Operation Sindoor - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Operation Sindoor RSS Feed</description>
                
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                <title>जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त, जनरल धीरज सेठ बने भारतीय सेना के नए प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाला। सेवानिवृत्ति से पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना की उपलब्धियों और ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/general-upendra-dwivedi-retired-general-dheeraj-seth-becomes-the-new/article-57410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/general-dheeraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय सेना में मंगलवार को नेतृत्व परिवर्तन का महत्वपूर्ण दिन रहा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपने कार्यकाल को पूरा करने के बाद आर्मी चीफ के पद से सेवानिवृत्त हो गए। पद छोड़ने से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने सेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर चुनौती का मजबूती, संतुलन और पूरी सतर्कता के साथ सामना किया। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी मोर्चों पर सेना ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप खुद को लगातार तैयार रखा। अपने विदाई संबोधन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारी, समन्वय और त्वरित कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत सेना की तैनाती पूरी मजबूती के साथ जारी रही, जबकि पश्चिमी मोर्चे पर भी सैनिकों ने अनुशासन और संयम के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति फिलहाल स्थिर जरूर है, लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और सीमा पर चौकसी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने साझा रणनीति, बेहतर समन्वय और आपसी विश्वास के साथ कई अहम जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने इस दौरान जवानों, अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेना की सफलता केवल नेतृत्व की नहीं बल्कि प्रत्येक सैनिक की निष्ठा, समर्पण और अनुशासन का परिणाम होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी भारतीय सेना इसी पेशेवर भावना के साथ देश की सुरक्षा करती रहेगी। सेवानिवृत्ति के साथ ही जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाल लिया। करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल सेठ को भारतीय सेना का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उन्होंने दिसंबर 1986 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आर्मी चीफ बनने से पहले वह उप सेना प्रमुख के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। सैन्य रणनीति, सीमा प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में प्रमुख स्थान हासिल रहा है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल धीरज सेठ सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अपने सैन्य करियर में XXI स्ट्राइक कोर और III कोर जैसी महत्वपूर्ण सैन्य संरचनाओं की कमान भी संभाली थी। ऐसे माहौल में पले-बढ़े जनरल धीरज सेठ ने भी सेना में लंबी और सफल सेवा दी है। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा उन्हें खेलों में भी गहरी रुचि है। टेनिस और गोल्फ उनके पसंदीदा खेलों में शामिल हैं। उनकी पत्नी का नाम कोमल सेठ है और वे कई सामाजिक एवं सैन्य कल्याण गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं। जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं जब भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन युद्ध और संयुक्त सैन्य अभियानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नए सेना प्रमुख के सामने पारंपरिक सैन्य तैयारियों के साथ भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सेना को और अधिक सक्षम बनाने की जिम्मेदारी होगी। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पद छोड़ते समय नए सेना प्रमुख के प्रति पूरा विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैनिक और सक्षम नेता हैं। उन्हें भरोसा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए नई उपलब्धियां हासिल करेगी। नेतृत्व परिवर्तन की इस प्रक्रिया को भारतीय सेना की मजबूत संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, जहां अनुभव, अनुशासन और निरंतरता के साथ जिम्मेदारियों का हस्तांतरण किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर होगा अमर सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सेना और वायुसेना के छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से जारी, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' में होंगे दर्ज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/for-the-first-time-the-names-of-six-martyrs-of/article-57015"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/operation-sindoor-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैन्य कर्मियों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उन जवानों की सूची जारी की है, जिन्होंने मई 2025 में चलाए गए इस सैन्य अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। इन सभी वीर सैनिकों के नाम अब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' पर हमेशा के लिए अंकित किए जाएंगे। इसे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े शहीदों को पहली औपचारिक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि माना जा रहा है। सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार शहीद होने वालों में भारतीय सेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह तथा भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इन छह सैन्यकर्मियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके नाम अब उन हजारों वीर सैनिकों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिनकी स्मृति राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए सुरक्षित रखी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र' स्वतंत्रता के बाद देश के लिए शहीद हुए सैनिकों को समर्पित है। यहां ग्रेनाइट की गोलाकार दीवारों पर प्रत्येक शहीद सैनिक का नाम, रैंक और यूनिट अंकित की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह जवानों के नाम भी अब इसी स्मारक का स्थायी हिस्सा बनेंगे। इससे पहले सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन सैन्य कर्मियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि अभियान का उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था, किसी नागरिक या सैन्य ठिकाने पर हमला करना नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी सैन्य गतिविधियां शुरू हुईं। सीमा पर भारी गोलाबारी, ड्रोन हमले और हवाई गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। लगभग चार दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष के दौरान सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय रहीं। बाद में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी और 10 मई को संघर्ष विराम लागू हुआ। 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। 'सिंदूर' भारतीय परंपरा में विवाहित महिलाओं का प्रतीक माना जाता है। इस अभियान का नाम उन परिवारों की पीड़ा और बलिदान का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खोया था। रक्षा मंत्रालय ने भी इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की सटीक, संयमित और दृढ़ सैन्य प्रतिक्रिया बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह सैनिकों के नाम दर्ज होना केवल सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी है। हर वर्ष हजारों लोग इस स्मारक पर पहुंचकर देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर के इन शहीदों का नाम भी उसी गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहेगा। हाल ही में सरकार ने वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न सैन्य अभियानों में शहीद हुए सभी सैनिकों की सूची भी जारी की, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीरों के नाम शामिल हैं। इस कदम को सैन्य इतिहास के दस्तावेजीकरण और शहीदों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेना और वायुसेना के इन जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण की मिसाल के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO का दावा, पाकिस्तान ने खुद लगाई थी युद्ध रोकने की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/on-the-anniversary-of-operation-sindoor-former-dgmo-claimed-that/article-52853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t152330.898.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की पहली बरसी पर पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और रणनीति दोनों को बदलकर रख दिया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान पूरी तरह दबाव में आ गया था और आखिर में उसी ने भारत से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जवाबी हमला नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की सैन्य क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समन्वय और तकनीकी ताकत का बड़ा प्रदर्शन था। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। सेना की तरफ से दावा किया गया कि कार्रवाई इतनी सटीक थी कि भारतीय सेना के किसी बड़े सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचा। ऑपरेशन सिंदूर अब एक साल बाद भी सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने कहा कि इस पूरे अभियान में भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की थीं। इनमें 7 कार्रवाई सेना और 2 एयरफोर्स की ओर से की गईं। उन्होंने खास तौर पर स्वदेशी रक्षा तकनीक का जिक्र किया और कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सिस्टम ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में मदद की। उनके मुताबिक यह पहली बार था जब जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर इतनी समन्वित रणनीति देखने को मिली। उन्होंने कहा कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युद्ध क्षमता का हिस्सा बन चुका है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर यूनिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सुरक्षा संगठन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी वजह से कार्रवाई तेज और सटीक बनी रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से उस दौरान ड्रोन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल और भारी गोलाबारी की कोशिश हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारतीय सेना ने तुरंत जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा था। </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में पाकिस्तान और </span>POK <span lang="hi" xml:lang="hi">में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दावा किया गया कि इस दौरान 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह भी कहा कि 10 मई को पाकिस्तान के </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सीधे संपर्क कर संघर्ष खत्म करने की बात कही थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अब दुनिया में सैन्य और रणनीतिक योजना के एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गोल्ड स्टैंडर्ड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान खत्म नहीं हुआ है और भारत भविष्य में भी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इसी तरह जवाब देता रहेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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