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                <title>Indian Army - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Indian Army RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शोपियां एनकाउंटर में लश्कर कमांडर जाकिर अहमद ढेर, पांच दिन बाद मिली बड़ी सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी हिट लिस्ट में था शामिल, शोपियां के चनापोरा इलाके में सेना, पुलिस और CRPF का संयुक्त ऑपरेशन जारी, एक अन्य आतंकी की तलाश तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lashkar-commander-zakir-ahmed-killed-in-shopian-encounter-big-success/article-58166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/shopian-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान के बीच सुरक्षाबलों को अहम सफलता मिली है। पांच दिनों से लगातार चल रहे संयुक्त ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया। बुधवार को चनापोरा इलाके से उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, जाकिर उन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल था, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद तैयार किया गया था। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। हालांकि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि सुरक्षाबलों को आशंका है कि लश्कर का एक और आतंकी लतीफ भट अब भी इलाके में छिपा हो सकता है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान लगातार जारी है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। शनिवार शाम खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि चनापोरा क्षेत्र में कुछ आतंकवादी छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआती दौर में आतंकियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग की गई, जिसके बाद ऑपरेशन को और व्यापक बनाया गया। घने जंगलों, बागानों और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार तलाशी चलती रही। सुरक्षाबलों ने संभावित भागने के सभी रास्तों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए और रात के समय निगरानी के लिए विशेष उपकरणों तथा रोशनी की व्यवस्था भी की गई। कई दिनों की सघन तलाश के बाद बुधवार को जाकिर अहमद गनी का शव बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार शव की पहचान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त अभियान में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की कई इकाइयों के अलावा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ की बटालियनें शामिल रहीं। आतंकवाद विरोधी अभियानों में विशेषज्ञ मानी जाने वाली सेना की विक्टर फोर्स ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षाबलों ने गांवों, बागानों और आसपास के इलाकों में लगातार तलाशी लेते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह खुफिया इनपुट के आधार पर संचालित किया गया और नागरिकों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि कोई आतंकी बचकर निकल न सके। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर अहमद गनी कुलगाम जिले के मतलहामा गांव का रहने वाला था। वह पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसका संबंध पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क से भी रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पहले भी उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी थी और अक्टूबर 2025 में अदालत के माध्यम से नोटिस जारी किया गया था। हाल के महीनों में उसका नाम पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी सामने आया था। यही कारण था कि पहलगाम हमले के बाद जिन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची सुरक्षा एजेंसियों ने तैयार की थी, उनमें जाकिर का नाम प्रमुखता से शामिल था।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक जाकिर के मारे जाने से दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार वह वर्ष 2024 से संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था। वहीं लतीफ भट पिछले वर्ष संगठन में शामिल हुआ था और उसके भी इलाके में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण सुरक्षाबल पूरे क्षेत्र में अभियान जारी रखे हुए हैं। पुलिस और सेना का कहना है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक तलाशी अभियान जारी रहेगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ लगातार बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न अभियानों में कई शीर्ष आतंकवादी मारे गए हैं और उनके ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र को भी चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि कई इलाकों में आतंकियों के मददगारों के खिलाफ भी अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जाकिर अहमद गनी के मारे जाने के बाद पहलगाम हमले के बाद तैयार की गई 14 आतंकियों की सूची में शामिल अब तक नौ आतंकवादी ढेर किए जा चुके हैं। बाकी बचे आतंकियों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी आतंकी संगठन को घाटी में दोबारा मजबूत होने का मौका नहीं दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सैम मानेकशॉ का नेतृत्व मंत्र: प्रोफेशनल नॉलेज और नैतिक साहस से बनता है असली लीडर</title>
                                    <description><![CDATA[‘सैम बहादुर’ मानते थे कि ज्ञान के बिना आत्मविश्वास अधूरा है और सच बोलने की हिम्मत के बिना नेतृत्व कमजोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/sam-manekshaws-leadership-mantra-professional-knowledge-and-moral-courage-make/article-58108"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/daily-walking-benefits-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत के सबसे प्रसिद्ध सैन्य नेताओं में शामिल फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का जीवन केवल युद्ध कौशल और सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके विचार नेतृत्व, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण की बड़ी सीख देते हैं। उन्हें प्यार से ‘सैम बहादुर’ के नाम से जाना जाता है। उनका मानना था कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने और एक बेहतर लीडर बनने के लिए दो गुण सबसे जरूरी हैं—प्रोफेशनल नॉलेज यानी अपने काम की गहरी समझ और मोरल करेज यानी नैतिक साहस। सैम मानेकशॉ हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि केवल पद मिलने से कोई व्यक्ति नेता नहीं बन जाता। नेतृत्व हासिल करने के लिए मेहनत, अनुभव और लगातार सीखने की जरूरत होती है। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को अपने काम की पूरी जानकारी होती है, वही मुश्किल परिस्थितियों में सही फैसले ले सकता है और दूसरों का भरोसा जीत सकता है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/leadership-lessons.jpg" alt="leadership lessons" width="1366" height="1979"></img></p>
<p>उनकी नजर में ज्ञान किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत होता है। चाहे सेना हो, व्यापार हो, प्रशासन हो या कोई दूसरा क्षेत्र, अपने काम में विशेषज्ञता हासिल करना जरूरी है। उनका मानना था कि अगर कोई व्यक्ति अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र को ठीक से नहीं समझता तो वह लंबे समय तक सम्मान और विश्वास हासिल नहीं कर सकता। सैम मानेकशॉ खुद इसका उदाहरण थे। भारतीय सेना में लंबे करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों का सामना किया और अपने अनुभव से रणनीतियां बनाईं। उनकी सैन्य समझ और निर्णय लेने की क्षमता ने उन्हें एक अलग पहचान दी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी भूमिका को आज भी नेतृत्व और रणनीति के शानदार उदाहरण के तौर पर देखा जाता है। उनका दूसरा बड़ा जीवन मंत्र था—मोरल करेज यानी नैतिक साहस। सैम मानेकशॉ मानते थे कि एक अच्छे नेता के पास सच बोलने की हिम्मत होनी चाहिए। कई बार नेतृत्व की स्थिति में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो आसान नहीं होते, लेकिन सही और गलत के बीच अंतर समझकर सही बात कहने वाला व्यक्ति ही वास्तविक नेता बन सकता है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/sam-manekshaw-professional-knowledge.jpg" alt="Sam Manekshaw professional knowledge" width="1366" height="2068"></img></p>
<p>वह हमेशा अपने अधिकारियों और साथियों को सलाह देते थे कि किसी भी दबाव में गलत बात का समर्थन नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, हर बात पर सहमति जताने वाला व्यक्ति शायद कुछ समय के लिए लोगों को खुश कर सकता है, लेकिन लंबे समय में उसका सम्मान कम हो जाता है। सैम मानेकशॉ का मानना था कि ‘यस मैन’ बनने की आदत व्यक्ति के विकास को रोक देती है। एक अच्छे पेशेवर को अपनी राय रखने का साहस होना चाहिए। अगर कोई फैसला गलत नजर आ रहा है तो उसे सम्मानपूर्वक अपनी बात रखनी चाहिए। यही आदत किसी व्यक्ति को बेहतर निर्णय लेने वाला बनाती है। उनके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास और स्पष्ट सोच दिखाई देती थी। वह अपनी बात सीधे और प्रभावी तरीके से रखने के लिए जाने जाते थे। हालांकि, उनके अंदर अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी उतनी ही मजबूत थी। उनका मानना था कि साहस का मतलब केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सही समय पर सही बात कहना होता है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/sam-bahadur.jpg" alt="Sam Bahadur" width="1366" height="769"></img></p>
<p>आज के दौर में सैम मानेकशॉ की ये सीख केवल सेना तक सीमित नहीं है। नौकरी, बिजनेस, शिक्षा या व्यक्तिगत जीवन में भी ये सिद्धांत उतने ही महत्वपूर्ण हैं। किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अपने काम की जानकारी होना और सही फैसलों के लिए खड़े होने का साहस रखना जरूरी है। युवाओं के लिए सैम मानेकशॉ का जीवन यह संदेश देता है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि लगातार सीखने, मेहनत करने और अपने मूल्यों पर कायम रहने से हासिल होती है। ज्ञान व्यक्ति को सक्षम बनाता है और नैतिक साहस उसे भरोसेमंद नेता बनाता है। सैम बहादुर का नेतृत्व दर्शन आज भी लोगों को प्रेरणा देता है। उनका विश्वास था कि एक सच्चा नेता वही होता है जो अपने काम में माहिर हो, कठिन परिस्थितियों में शांत रहे और जरूरत पड़ने पर बिना डर के सच बोल सके। यही दो गुण किसी भी व्यक्ति को सामान्य से असाधारण बना सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:38:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त, जनरल धीरज सेठ बने भारतीय सेना के नए प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाला। सेवानिवृत्ति से पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना की उपलब्धियों और ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/general-upendra-dwivedi-retired-general-dheeraj-seth-becomes-the-new/article-57410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/general-dheeraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय सेना में मंगलवार को नेतृत्व परिवर्तन का महत्वपूर्ण दिन रहा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपने कार्यकाल को पूरा करने के बाद आर्मी चीफ के पद से सेवानिवृत्त हो गए। पद छोड़ने से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने सेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर चुनौती का मजबूती, संतुलन और पूरी सतर्कता के साथ सामना किया। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी मोर्चों पर सेना ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप खुद को लगातार तैयार रखा। अपने विदाई संबोधन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारी, समन्वय और त्वरित कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत सेना की तैनाती पूरी मजबूती के साथ जारी रही, जबकि पश्चिमी मोर्चे पर भी सैनिकों ने अनुशासन और संयम के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति फिलहाल स्थिर जरूर है, लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और सीमा पर चौकसी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने साझा रणनीति, बेहतर समन्वय और आपसी विश्वास के साथ कई अहम जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने इस दौरान जवानों, अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेना की सफलता केवल नेतृत्व की नहीं बल्कि प्रत्येक सैनिक की निष्ठा, समर्पण और अनुशासन का परिणाम होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी भारतीय सेना इसी पेशेवर भावना के साथ देश की सुरक्षा करती रहेगी। सेवानिवृत्ति के साथ ही जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाल लिया। करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल सेठ को भारतीय सेना का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उन्होंने दिसंबर 1986 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आर्मी चीफ बनने से पहले वह उप सेना प्रमुख के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। सैन्य रणनीति, सीमा प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में प्रमुख स्थान हासिल रहा है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल धीरज सेठ सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अपने सैन्य करियर में XXI स्ट्राइक कोर और III कोर जैसी महत्वपूर्ण सैन्य संरचनाओं की कमान भी संभाली थी। ऐसे माहौल में पले-बढ़े जनरल धीरज सेठ ने भी सेना में लंबी और सफल सेवा दी है। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा उन्हें खेलों में भी गहरी रुचि है। टेनिस और गोल्फ उनके पसंदीदा खेलों में शामिल हैं। उनकी पत्नी का नाम कोमल सेठ है और वे कई सामाजिक एवं सैन्य कल्याण गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं। जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं जब भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन युद्ध और संयुक्त सैन्य अभियानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नए सेना प्रमुख के सामने पारंपरिक सैन्य तैयारियों के साथ भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सेना को और अधिक सक्षम बनाने की जिम्मेदारी होगी। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पद छोड़ते समय नए सेना प्रमुख के प्रति पूरा विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैनिक और सक्षम नेता हैं। उन्हें भरोसा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए नई उपलब्धियां हासिल करेगी। नेतृत्व परिवर्तन की इस प्रक्रिया को भारतीय सेना की मजबूत संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, जहां अनुभव, अनुशासन और निरंतरता के साथ जिम्मेदारियों का हस्तांतरण किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:19 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर होगा अमर सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सेना और वायुसेना के छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से जारी, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' में होंगे दर्ज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/for-the-first-time-the-names-of-six-martyrs-of/article-57015"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/operation-sindoor-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैन्य कर्मियों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उन जवानों की सूची जारी की है, जिन्होंने मई 2025 में चलाए गए इस सैन्य अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। इन सभी वीर सैनिकों के नाम अब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' पर हमेशा के लिए अंकित किए जाएंगे। इसे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े शहीदों को पहली औपचारिक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि माना जा रहा है। सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार शहीद होने वालों में भारतीय सेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह तथा भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इन छह सैन्यकर्मियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके नाम अब उन हजारों वीर सैनिकों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिनकी स्मृति राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए सुरक्षित रखी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र' स्वतंत्रता के बाद देश के लिए शहीद हुए सैनिकों को समर्पित है। यहां ग्रेनाइट की गोलाकार दीवारों पर प्रत्येक शहीद सैनिक का नाम, रैंक और यूनिट अंकित की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह जवानों के नाम भी अब इसी स्मारक का स्थायी हिस्सा बनेंगे। इससे पहले सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन सैन्य कर्मियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि अभियान का उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था, किसी नागरिक या सैन्य ठिकाने पर हमला करना नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी सैन्य गतिविधियां शुरू हुईं। सीमा पर भारी गोलाबारी, ड्रोन हमले और हवाई गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। लगभग चार दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष के दौरान सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय रहीं। बाद में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी और 10 मई को संघर्ष विराम लागू हुआ। 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। 'सिंदूर' भारतीय परंपरा में विवाहित महिलाओं का प्रतीक माना जाता है। इस अभियान का नाम उन परिवारों की पीड़ा और बलिदान का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खोया था। रक्षा मंत्रालय ने भी इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की सटीक, संयमित और दृढ़ सैन्य प्रतिक्रिया बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह सैनिकों के नाम दर्ज होना केवल सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी है। हर वर्ष हजारों लोग इस स्मारक पर पहुंचकर देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर के इन शहीदों का नाम भी उसी गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहेगा। हाल ही में सरकार ने वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न सैन्य अभियानों में शहीद हुए सभी सैनिकों की सूची भी जारी की, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीरों के नाम शामिल हैं। इस कदम को सैन्य इतिहास के दस्तावेजीकरण और शहीदों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेना और वायुसेना के इन जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण की मिसाल के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले आर्मी चीफ, 30 जून से संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने नियुक्ति को दी मंजूरी, मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद संभालेंगे भारतीय सेना की जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lieutenant-general-dheeraj-seth-will-be-the-next-army-chief/article-55856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhiraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है और उसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। इस घोषणा के बाद सैन्य और रणनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धीरज सेठ फिलहाल उप सेना प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने इसी वर्ष 1 अप्रैल को यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना में उप सेना प्रमुख का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद पर रहते हुए धीरज सेठ सेना के संचालन, रणनीतिक योजनाओं, सैन्य तैयारियों और आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है और धीरज सेठ इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में सेना की कई मौजूदा योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है। उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी सीमा और रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य तैनाती तक, उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया है। लंबे अनुभव और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने करियर के दौरान धीरज सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं। सेना के भीतर यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इन कमानों के तहत बड़े सैन्य क्षेत्र और रणनीतिक संचालन आते हैं। वे उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में कई अहम पदों पर कार्य किया और सेना की क्षमता वृद्धि तथा भविष्य की रणनीतिक जरूरतों से जुड़े कार्यक्रमों में भी योगदान दिया। धीरज सेठ का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अंगोला में भी सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मिशन में काम करने का अनुभव किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे विभिन्न देशों की सेनाओं के साथ समन्वय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है। यही अनुभव उन्हें एक व्यापक दृष्टिकोण वाला सैन्य अधिकारी बनाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शैक्षणिक दृष्टि से भी धीरज सेठ का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी और देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में उच्च प्रशिक्षण हासिल किया। वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में उन्होंने अध्ययन किया। इसके अलावा फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी पूरा किया। उनकी उपलब्धियों की सूची भी काफी लंबी है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कई बार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें प्रतिष्ठित ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान मिला था। जूनियर कमांड कोर्स सहित कई सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें अपने कोर्स का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल भी प्रदान किया गया था। यह उपलब्धियां उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धीरज सेठ सेना की परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सेना की दो प्रमुख और महत्वपूर्ण संरचनाओं XXI स्ट्राइक कोर तथा III कोर की कमान संभाली थी। ऐसे में सैन्य वातावरण और अनुशासन धीरज सेठ के जीवन का हिस्सा बचपन से ही रहा है। माना जाता है कि परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा धीरज सेठ खेलों में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद है। उनके सहयोगियों के अनुसार वे अनुशासित जीवनशैली और संतुलित नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी कोमल सेठ विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। भारतीय सेना ऐसे समय में नए नेतृत्व का स्वागत करने जा रही है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। सीमा सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक, साइबर सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सेना के सामने हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजौरी के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई शुरू, 2-3 आतंकियों के घिरे होने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। दोरिमाल जंगल में 2-3 आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/encounter-begins-between-security-forces-and-terrorists-in-the-forests/article-54059"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rajouri-indian-army-jammu-&amp;-kashmir-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से शुक्रवार दोपहर एक बड़ी खबर आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां दोरिमाल के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हो रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाके में 2 से 3 आतंकियों के छिपे होने की संभावना जताई गई है। सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सेना और अन्य सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खबर है कि तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। देर शाम तक इलाके में गोलीबारी चलती रही। फिलहाल पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है और अतिरिक्त जवान भी तैनात किए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ऑपरेशन एक बेहद संवेदनशील इलाके में चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जंगल और पहाड़ों की वजह से आतंकियों को छिपने में आसानी होती है। सुरक्षा बल लगातार ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों से इलाके की निगरानी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आतंकियों के एक छोटे समूह की सक्रियता की पहले से जानकारी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक किसी आतंकी के मारे जाने या किसी जवान के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर स्थानीय लोगों को भी जंगल की तरफ जाने से रोका गया है। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को बड़ी सतर्कता से चला रही हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस साल फरवरी में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">White Knight Corps <span lang="hi" xml:lang="hi">ने किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क खत्म करने का दावा किया था। उस समय सेना ने कई आतंकियों को मार गिराने की जानकारी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें जैश से जुड़े आतंकी सैफुल्लाह का नाम भी शामिल था। हाल के महीनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। पिछले सप्ताह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहते हुए कि अगर आतंकवाद को समर्थन जारी रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। इस समय राजौरी में चल रही मुठभेड़ पर पूरे इलाके की नजर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां ऑपरेशन खत्म होने तक लगातार जानकारी हासिल कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने भारत को दिया बड़ा रक्षा तोहफा, बढ़ेगी सैन्य ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने भारत को Apache हेलीकॉप्टर और M777 तोपों के लिए 428 मिलियन डॉलर का रक्षा सपोर्ट पैकेज मंजूर किया, जिससे सेना की क्षमता बढ़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-gave-a-big-defense-gift-to-india-military-strength/article-53779"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-us-defence-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका ने भारत के साथ अपनी रक्षा भागीदारी को मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत के लिए 428 मिलियन डॉलर से अधिक का सपोर्ट और मेंटेनेंस पैकेज मंजूर किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">अटैक हेलीकॉप्टर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। ये सभी सेवाएं </span>Foreign Military Sales (FMS) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम के तहत प्रदान की जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदार देशों को सैन्य उपकरण और सपोर्ट देने के लिए उपयोग करता है। बताया जा रहा है कि इस पैकेज में </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम के लिए लगभग 198.2 मिलियन डॉलर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपों के लिए करीब 230 मिलियन डॉलर का दीर्घकालिक मेंटेनेंस सपोर्ट शामिल है। यह डील उस समय सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को लेकर पहले से ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों के लिए जो सपोर्ट पैकेज मंजूर हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें सिर्फ मशीनरी या पार्ट्स नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट की पूरी व्यवस्था शामिल है। इसमें इंजीनियरिंग सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिकेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेनिंग और फील्ड सपोर्ट जैसी सेवाएं दी जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भारतीय सेना के </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">बेड़े की ऑपरेशनल क्षमता लंबे समय तक मजबूत बनी रहे। इस प्रोग्राम में अमेरिका की दो बड़ी कंपनियाँ </span>Boeing <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Lockheed Martin <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख ठेकेदार के रूप में काम कर रही हैं। इस सपोर्ट से </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों की सर्विसिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेंटेनेंस और मिशन रेडीनेस में काफी सुधार की उम्मीद है। ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील ऑपरेशनों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही है। इसलिए इस नए पैकेज से इनकी उपलब्धता और तकनीकी निर्भरता दोनों में संतुलन आने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 </span>Ultra-Light Howitzers <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए लगभग 230 मिलियन डॉलर का लॉन्ग-टर्म सपोर्ट पैकेज भी मंजूर हुआ है। इसमें स्पेयर पार्ट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपेयर सर्विस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फील्ड सर्विस प्रतिनिधि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और डिपो स्तर का सपोर्ट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इस डील में ब्रिटेन की </span>BAE Systems <span lang="hi" xml:lang="hi">को मुख्य ठेकेदार बनाया गया है। </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपें भारतीय सेना के लिए खासकर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भारी तोपों की तैनाती मुश्किल होती है। लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्वी सीमाओं तक इनकी तैनाती ने सेना की मारक क्षमता को सटीक और तेज बना दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह सौदा भारत की मौजूदा और भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये उम्मीद जताई गई है कि इस सहयोग से भारत की रक्षा प्रणालियों में तकनीकी मजबूती आएगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और अधिक स्थिर होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11 दिन की कठोर साधना में लीन बाबा बागेश्वर, सेना के जवानों से की मुलाकात, तस्वीरें वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[बद्रीनाथ धाम में बाबा बागेश्वर की 11 दिन की कठिन साधना चर्चा में। बर्फीले पहाड़ों में तपस्या और जवानों से मुलाकात की तस्वीरें वायरल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/baba-bageshwar-engrossed-in-rigorous-meditation-for-11-days-met/article-53775"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/baba-bageshwar-himalayan-spiritual-practice.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित बद्रीनाथ धाम फिर से चर्चा का केंद्र बन गया है। इसकी वजह पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यहां 10 हजार फीट से ऊपर की ऊंचाई पर 11 दिनों तक कठिन साधना कर रहे हैं। बर्फीली हवाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम ऑक्सीजन और कठिन भौगोलिक स्थिति के बीच उनकी तपस्या सबके लिए एक चर्चा का विषय बन गई है। कहा जा रहा है कि उन्होंने साधना स्थल पर एक छोटी कुटिया बनाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां वो सीमित सुविधाओं के साथ ध्यान और पूजा कर रहे हैं। इस दौरान स्थानीय लोग और साधु-संतों का आना-जाना भी लगा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरा माहौल बहुत ही शांत और आध्यात्मिक बताया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह साधना 11 दिनों की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो 21 मई को खत्म होने वाली है। इस दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंडित शास्त्री ने न केवल ध्यान और तप पर ध्यान केंद्रित किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारतीय सेना के जवानों से भी मुलाकात की। सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों से उनकी मुलाकात काफी सहज और आत्मीय रही। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत के दौरान उन्होंने जवानों का हालचाल पूछा और दुर्गम परिस्थितियों में उनकी देश के प्रति समर्पण की सराहना भी की। इस पूरी घटना के बारे में स्थानीय स्तर पर चर्चा भी तेज हो गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इतनी ऊंचाई पर साधना और सैनिकों से मुलाकात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों ही लोगों के लिए आकर्षण का विषय बन गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी साधना से जुड़ी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। बागेश्वर धाम सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इन तस्वीरों को साझा किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद लोग लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच साधना करते हुए और साधु-संतों से बातचीत करते हुए उनकी तस्वीरें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैल चुकी हैं। इन पोस्ट को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">बद्रीनाथ एकात्मय साधना</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भगवान विष्णु की आराधना और हिमालय की उच्च चेतना के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति और मोक्ष की दिशा में प्रयास करने की बात की गई है। हालांकि इसे आध्यात्मिक और व्यक्तिगत साधना का हिस्सा बताया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सोशल मीडिया पर इसके बारे में कई चर्चाएं भी चल रही हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय लोगों का मानना है कि बद्रीनाथ धाम का यह इलाका पहले से आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस तरह की साधनाएं यहां की पवित्रता और चर्चा दोनों को बढ़ाती हैं। मौसम की कठिनाईयों के बावजूद वहां गतिविधियां जारी हैं और साधना के पूरे समय की प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोग लगातार तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:20:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत को मिला नया CDS, लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि को नया CDS नियुक्त किया। जानिए उनका सैन्य करियर और CDS पद की अहमियत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-gets-new-cds-lieutenant-general-ns-raja-subramani-will/article-53012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t175604.209.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कार्यभार संभालने की तारीख से अगले आदेश तक सैन्य मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। इस नियुक्ति के बाद रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े हलकों में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है। मौजूदा </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को खत्म हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एन एस राजा सुब्रमणि यह जिम्मेदारी संभालेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि लंबे समय से सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। फिलहाल वह 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के तौर पर तैनात हैं। इससे पहले उन्होंने सेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में भी काम किया। जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक वह इस पद पर रहे। वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक उन्होंने केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाली थी। सेना के भीतर रणनीतिक योजना और ऑपरेशनल मामलों में उनका अनुभव काफी बड़ा माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद देश की सुरक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अधिकारी थल सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु सेना और नौसेना के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता है। रक्षा मामलों में सरकार को सलाह देने के साथ-साथ संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार करने में भी </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">की बड़ी भूमिका होती है। भारत में इस पद की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इसके बाद देश के पहले </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल बिपिन रावत बने थे। हालांकि दिसंबर 2021 में हेलिकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई थी। बाद में जनरल अनिल चौहान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बताया जाता है कि कारगिल युद्ध के बाद ही इस पद की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की गई थी। उस दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद रक्षा मामलों के जानकारों और समितियों ने सुझाव दिया था कि एक ऐसा सैन्य अधिकारी होना चाहिए जो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रख सके और बड़े फैसलों में एकीकृत दृष्टिकोण दे सके। इसी सोच के बाद </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद बनाया गया। अब लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि के सामने भी यही बड़ी जिम्मेदारी होगी कि बदलते सुरक्षा हालात में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और मजबूत हो सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO का दावा, पाकिस्तान ने खुद लगाई थी युद्ध रोकने की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/on-the-anniversary-of-operation-sindoor-former-dgmo-claimed-that/article-52853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t152330.898.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की पहली बरसी पर पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और रणनीति दोनों को बदलकर रख दिया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान पूरी तरह दबाव में आ गया था और आखिर में उसी ने भारत से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जवाबी हमला नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की सैन्य क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समन्वय और तकनीकी ताकत का बड़ा प्रदर्शन था। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। सेना की तरफ से दावा किया गया कि कार्रवाई इतनी सटीक थी कि भारतीय सेना के किसी बड़े सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचा। ऑपरेशन सिंदूर अब एक साल बाद भी सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने कहा कि इस पूरे अभियान में भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की थीं। इनमें 7 कार्रवाई सेना और 2 एयरफोर्स की ओर से की गईं। उन्होंने खास तौर पर स्वदेशी रक्षा तकनीक का जिक्र किया और कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सिस्टम ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में मदद की। उनके मुताबिक यह पहली बार था जब जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर इतनी समन्वित रणनीति देखने को मिली। उन्होंने कहा कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युद्ध क्षमता का हिस्सा बन चुका है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर यूनिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सुरक्षा संगठन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी वजह से कार्रवाई तेज और सटीक बनी रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से उस दौरान ड्रोन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल और भारी गोलाबारी की कोशिश हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारतीय सेना ने तुरंत जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा था। </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में पाकिस्तान और </span>POK <span lang="hi" xml:lang="hi">में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दावा किया गया कि इस दौरान 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह भी कहा कि 10 मई को पाकिस्तान के </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सीधे संपर्क कर संघर्ष खत्म करने की बात कही थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अब दुनिया में सैन्य और रणनीतिक योजना के एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गोल्ड स्टैंडर्ड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान खत्म नहीं हुआ है और भारत भविष्य में भी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इसी तरह जवाब देता रहेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:34 +0530</pubDate>
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