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                <title>PoK - दैनिक जागरण</title>
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                <description>PoK RSS Feed</description>
                
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                <title>PoK में आरक्षित सीटों को लेकर बवाल, 46 प्रदर्शनकारियों की मौत; 1100 से ज्यादा गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[शरणार्थी सीटें खत्म करने की मांग पर उग्र हुआ आंदोलन, पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का विरोध तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-over-reserved-seats-in-pok-46-protesters-died-more/article-55832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pok-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले चार दिनों से जारी आंदोलन ने गंभीर रूप ले लिया है। आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर शुरू हुआ विरोध अब व्यापक जनआंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, आंदोलन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 1100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालात ऐसे हैं कि कई शहरों में बाजार, स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद पड़े हैं। इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विवाद की जड़ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। लंबे समय से स्थानीय संगठनों का एक वर्ग इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। उनका तर्क है कि इन सीटों के कारण स्थानीय जनता के राजनीतिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले ने तब नया मोड़ लिया जब PoK सुप्रीम कोर्ट ने 7 जून को दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए आरक्षण समाप्त करने की मांगों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसे किसी सरकारी रियायत की तरह खत्म नहीं किया जा सकता। अदालत के इस फैसले के बाद जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आंदोलन को और तेज कर दिया। संगठन ने फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, धरना और जनसभाओं का आह्वान किया, जिसके बाद हालात लगातार बिगड़ते चले गए। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, पुंछ और रावलकोट जैसे कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंदोलन केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक नीतियों और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दों का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है। रिपोर्टों के मुताबिक, रेंजर्स और फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के जवानों को संवेदनशील इलाकों में भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था, लेकिन आंदोलनकारी इसे दमनात्मक कार्रवाई बता रहे हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों की भी खबरें सामने आई हैं। इस बीच प्रशासन ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के कई नेताओं के खिलाफ राजद्रोह के मामले दर्ज किए हैं। संगठन से जुड़े प्रमुख नेताओं शौकत नवाज मीर, ख्वाजा मेहरान और अन्य कार्यकर्ताओं पर सरकार विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। इससे आंदोलनकारियों में और नाराजगी बढ़ी है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया। प्रतिबंध के बावजूद संगठन के समर्थक विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर चुके हैं। रावलकोट में JAAC के नेता उमर नजीर कश्मीरी का एक भाषण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में सरकार और सेना की आलोचना करते हुए घाटी से सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की। खास बात यह रही कि इंटरनेट प्रतिबंधों के बावजूद उनका भाषण लाइव प्रसारित हुआ। स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा है कि प्रसारण के लिए सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक का उपयोग किया गया हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन का असर आम लोगों के जीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बाजार बंद होने और परिवहन प्रभावित होने के कारण दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई हैं और शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। PoK की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड सहित कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए, जहां लोगों ने पाकिस्तानी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। न्यूयॉर्क में भी कुछ समूहों ने विरोध दर्ज कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। भारत में भी इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। श्रीनगर सहित कश्मीर के कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन कर PoK में हुई मौतों पर चिंता जताई। विभिन्न सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्थाओं से मामले पर ध्यान देने की अपील भी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:39:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीओके में हिंसा से 27 लोगों की मौत, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[आरक्षित सीटों को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन पर प्रतिबंध के बाद भड़की हिंसा, पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की जान गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pok-violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जारी है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और सत्ता कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित रह जाती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो विभिन्न युद्धों और संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात हिंसा तक पहुंच गए।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव उस समय और बढ़ गया जब पीओके सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया। प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात तब ज्यादा बिगड़ गए जब संगठन के एक सदस्य की कथित पुलिस फायरिंग में मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को रावलकोट में स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और JAAC समर्थकों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों से हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग कर हालात को और बिगाड़ दिया। इस दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, वहीं बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियां हिंसा फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव दिखाई दे रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह हैं। पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले बढ़ता तनाव सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। बाकी सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में पीओके की राजनीति लगातार अस्थिर रही है। सरकारों में बदलाव, नेतृत्व संकट और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2021 के चुनावों के बाद बनी सरकार भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। कई प्रधानमंत्रियों को बीच कार्यकाल में पद छोड़ना पड़ा और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे माहौल में जनता के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 15:33:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO का दावा, पाकिस्तान ने खुद लगाई थी युद्ध रोकने की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/on-the-anniversary-of-operation-sindoor-former-dgmo-claimed-that/article-52853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t152330.898.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की पहली बरसी पर पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और रणनीति दोनों को बदलकर रख दिया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान पूरी तरह दबाव में आ गया था और आखिर में उसी ने भारत से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जवाबी हमला नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की सैन्य क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समन्वय और तकनीकी ताकत का बड़ा प्रदर्शन था। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। सेना की तरफ से दावा किया गया कि कार्रवाई इतनी सटीक थी कि भारतीय सेना के किसी बड़े सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचा। ऑपरेशन सिंदूर अब एक साल बाद भी सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने कहा कि इस पूरे अभियान में भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की थीं। इनमें 7 कार्रवाई सेना और 2 एयरफोर्स की ओर से की गईं। उन्होंने खास तौर पर स्वदेशी रक्षा तकनीक का जिक्र किया और कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सिस्टम ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में मदद की। उनके मुताबिक यह पहली बार था जब जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर इतनी समन्वित रणनीति देखने को मिली। उन्होंने कहा कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युद्ध क्षमता का हिस्सा बन चुका है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर यूनिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सुरक्षा संगठन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी वजह से कार्रवाई तेज और सटीक बनी रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से उस दौरान ड्रोन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल और भारी गोलाबारी की कोशिश हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारतीय सेना ने तुरंत जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा था। </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में पाकिस्तान और </span>POK <span lang="hi" xml:lang="hi">में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दावा किया गया कि इस दौरान 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह भी कहा कि 10 मई को पाकिस्तान के </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सीधे संपर्क कर संघर्ष खत्म करने की बात कही थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अब दुनिया में सैन्य और रणनीतिक योजना के एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गोल्ड स्टैंडर्ड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान खत्म नहीं हुआ है और भारत भविष्य में भी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इसी तरह जवाब देता रहेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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