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                <title>Police Department - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Police Department RSS Feed</description>
                
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                <title>छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, डीएसपी समेत 15 अधिकारियों की नई तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[गृह विभाग ने जारी किए तबादला और पदस्थापना आदेश, पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-police-new-posting-of-15-officers/article-58408"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य पुलिस प्रशासन में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) और 13 सहायक सेनानियों (असिस्टेंट कमांडेंट) की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय पदोन्नति एवं छानबीन समिति की अनुशंसा के आधार पर अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी पदस्थापनाएं अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संतुलित तथा सुचारू बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। समय-समय पर पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना की प्रक्रिया प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार की जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में राज्य पुलिस सेवा के पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें विशेष शाखा से जुड़े अधिकारियों के साथ सहायक सेनानी पद पर पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि नई नियुक्तियों से विभिन्न इकाइयों में कार्यों के बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार उप पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा) सविता सिंह परिहार को पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर से स्थानांतरित कर विशेष शाखा भिलाई में पदस्थ किया गया है। वहीं अर्नोल्ड संतरी बड़ा, जो वर्तमान में जशपुर से संबद्ध रहते हुए पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में कार्यरत थे, उन्हें विशेष शाखा बिलासपुर में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाग ने 13 सहायक सेनानियों की भी नई पदस्थापना की है। इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न जिलों और बटालियनों में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष शाखा पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के संकलन, विश्लेषण और संवेदनशील मामलों की निगरानी का कार्य करती है। ऐसे में इस शाखा में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई पदस्थापनाओं से विशेष शाखा की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग में समय-समय पर किए जाने वाले स्थानांतरण और पदस्थापन न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि अधिकारियों को नई परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ती है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पुलिस बल के प्रशिक्षण, संसाधनों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की नई पदस्थापना को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी अपने अनुभव का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में इन नियुक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी पदस्थापनाएं प्रशासनिक आधार पर की गई हैं और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इनमें बदलाव भी किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र ही अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>CM हेल्पलाइन में फर्जी शिकायतों का खेल, कुंवारे व्यक्ति की 20 साल की बेटी बताकर दर्ज कराया मामला</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के मऊगंज में 233 शिकायतों की जांच में बड़ा खुलासा, डायल-112 कर्मियों और पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने से उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-case-was-lodged-against-the-cm-helpline-by-pretending/article-56291"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश सरकार की सीएम हेल्पलाइन-181 आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था है। लेकिन रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने इस पूरी प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि शिकायतों के निपटारे का प्रतिशत बढ़ाने और रैंकिंग सुधारने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज कर उनका समाधान भी दिखाया गया। जांच में सामने आया कि कुल 233 शिकायतें केवल 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज की गई थीं। रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर कई शिकायतों में समान पैटर्न दिखाई दिया। कुछ मोबाइल नंबरों से कुछ ही मिनटों के अंतराल में लगातार कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, जबकि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं के नाम और शिकायतों की प्रकृति भी संदेह पैदा करने वाली मिली। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिकायतें वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया नाम के व्यक्ति से जुड़ा सामने आया। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर उनके नाम से दर्ज शिकायत में दावा किया गया था कि उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका चौरसिया स्कूल जाने के बाद लापता हो गई है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। लेकिन जब संबंधित व्यक्ति तक पहुंचकर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उनकी अभी तक शादी ही नहीं हुई है। ऐसे में 20 वर्षीय बेटी होने का सवाल ही नहीं उठता। इस खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। इसी तरह अन्य कई शिकायतों में भी विसंगतियां सामने आईं। कुछ शिकायतों में पत्नी के लापता होने, बच्चों के गुम होने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने, चोरी, मारपीट और पुलिस कार्रवाई नहीं होने जैसे आरोप दर्ज किए गए थे। लेकिन जांच के दौरान कई शिकायतकर्ताओं के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह शिकायतों के विवरण से मेल नहीं खाती थी। इससे यह संदेह और गहरा गया कि शिकायतें वास्तविक नागरिकों द्वारा नहीं बल्कि किसी संगठित तरीके से दर्ज की गई हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दस्तावेजों की पड़ताल में डायल-112 चालक प्रवेश चतुर्वेदी, डायल-112 कर्मचारी कृष्णा कुशवाहा और हवलदार विवेक यादव के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि मामले के सामने आने के बाद संबंधित पक्षों ने सीधे तौर पर किसी भी अनियमितता से इनकार किया है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज विवरण और उपलब्ध दस्तावेज कई सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शिकायतों के पैटर्न और दर्ज किए गए विवरणों की गहन जांच की आवश्यकता है। सीएम हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था की सफलता उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि शिकायतें फर्जी तरीके से दर्ज की जाती हैं या उनके समाधान के आंकड़े कृत्रिम रूप से बढ़ाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर वास्तविक शिकायतकर्ताओं पर पड़ता है। ऐसे मामलों में न केवल व्यवस्था की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि कई शिकायतों में घटना का विवरण सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शिकायत दर्ज कराने के लिए आमतौर पर घटना की पूरी जानकारी, शिकायतकर्ता की पहचान और अन्य जरूरी विवरण देना होता है, लेकिन कई मामलों में यह जानकारी अधूरी या संदिग्ध पाई गई। कुछ शिकायतों में समान भाषा और एक जैसी शैली का इस्तेमाल भी देखने को मिला, जिससे संगठित तरीके से शिकायतें दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। मऊगंज से सामने आया यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल कुछ फर्जी शिकायतों का मामला है या फिर शिकायत निवारण प्रणाली के भीतर किसी बड़े खेल का हिस्सा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को मिले 60 नए SI, थानों में शुरू होगी व्यावहारिक ट्रेनिंग</title>
                                    <description><![CDATA[बेसिक प्रशिक्षण पूरा होने के बाद शहर के विभिन्न थानों में पदस्थापना, कानून और पुलिसिंग की बारीकियां सीखेंगे नए अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/raipur-police-commissionerate-gets-60-new-si-police-stations-practical/article-54735"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/_new-si-training.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को पुलिस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 60 नए उप निरीक्षक (एसआई) मिले हैं। बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इन सभी अधिकारियों को अब व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए शहर के विभिन्न थानों में पदस्थ किया गया है। इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। नए अधिकारियों की तैनाती ऐसे समय में की गई है जब पुलिस विभाग लगातार कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपराध नियंत्रण के लिए अपने संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन नए उप निरीक्षकों को शहर के अलग-अलग थानों में भेजा गया है, जहां वे अनुभवी अधिकारियों की देखरेख में कार्य करेंगे। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें थाना संचालन, अपराध अनुसंधान, शिकायतों के निराकरण, कानून-व्यवस्था प्रबंधन और जनता से जुड़े विभिन्न मामलों की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अकादमिक प्रशिक्षण के बाद यह चरण किसी भी नए अधिकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यहीं से उसे वास्तविक पुलिसिंग की समझ विकसित होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जारी आदेश के मुताबिक शहर के कई प्रमुख थानों में तीन-तीन उप निरीक्षकों की पदस्थापना की गई है। इनमें खम्हारडीह, खमतराई, कबीर नगर, गोलबाजार, मोहदापारा, कोतवाली, सिविल लाइन, टिकरापारा, पंडरी, पुरानी बस्ती, राजेंद्र नगर, डीडी नगर, उरला, तेलीबांधा, आमानाका, आजाद चौक और गंज थाना शामिल हैं। इन थानों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा होता है और नए अधिकारियों को व्यापक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा गुढ़ियारी, मुजगहन, सरस्वती नगर और देवेंद्र नगर थानों में दो-दो एसआई को प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया है। पुलिस विभाग का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने से अधिकारियों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलेगा। इससे भविष्य में वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना अधिक प्रभावी तरीके से कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशिक्षण के दौरान नए उप निरीक्षकों को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें अपराध की जांच प्रक्रिया, घटनास्थल निरीक्षण, साक्ष्य संग्रह, केस डायरी तैयार करने, न्यायालयीन प्रक्रियाओं और कानून की व्याख्या से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाएंगी। इसके साथ ही साइबर अपराध, महिला अपराध, सड़क सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बदलते समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है, इसलिए नए अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग तकनीकों की जानकारी देना आवश्यक माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह व्यावहारिक प्रशिक्षण किसी भी नए अधिकारी के करियर की मजबूत नींव तैयार करता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर विभिन्न मामलों पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे वे न केवल कानून की बारीकियां समझ सकेंगे बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित कर पाएंगे। जनता से सीधे संवाद और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को समझना भी इस प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में 60 नए एसआई की तैनाती को विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से बढ़ते कार्यभार और पुलिस बल की जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नए अधिकारियों के आने से थानों में कार्यों का बेहतर विभाजन हो सकेगा और लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से व्यावहारिक प्रशिक्षण को पुलिस सेवा का अहम हिस्सा बनाया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी भविष्य में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्य करेंगे, इसलिए शुरुआती दौर में उन्हें व्यापक अनुभव प्रदान करना आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहर के नागरिकों को भी इस कदम से लाभ मिलने की उम्मीद है। नए अधिकारियों की तैनाती से थानों में उपलब्ध पुलिस बल बढ़ेगा, जिससे शिकायतों के समाधान में तेजी आ सकती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनसुनवाई जैसे कार्यों में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है। पुलिस विभाग का लक्ष्य है कि प्रशिक्षित और सक्षम अधिकारियों के माध्यम से नागरिकों को बेहतर और प्रभावी पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। सभी नए उप निरीक्षक अपने-अपने निर्धारित थानों में रिपोर्ट कर चुके हैं और जल्द ही उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण शुरू होगा। आने वाले महीनों में यह प्रशिक्षण उनकी कार्यशैली और पेशेवर दक्षता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:16:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गोबरा नवापारा थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल निलंबित, अवैध शराब मामले में कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[संदिग्ध भूमिका और लापरवाही के आरोपों के बाद एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा का बड़ा एक्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/gobra-navapara-police-station-incharge-deepesh-jaiswal-suspended-action-in/article-54604"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/salman-khan-first-film-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर ग्रामीण जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच गोबरा नवापारा थाना प्रभारी निरीक्षक दीपेश जायसवाल को निलंबित कर दिया गया है। रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने यह कार्रवाई उस समय की है जब थाना क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। पुलिस विभाग के अनुसार मामले में थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं, जिसके बाद प्रारंभिक जांच के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में पिछले कई महीनों से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय लोगों और विभिन्न माध्यमों से यह जानकारी लगातार वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच रही थी कि क्षेत्र के कुछ हिस्सों में खुलेआम शराब का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। इस संबंध में थाना स्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश भी समय-समय पर दिए गए थे। इसके बावजूद अवैध कारोबार पूरी तरह नहीं रुक पाया, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला 29 मई को उस समय सामने आया जब रायपुर ACCU की देहात टीम ने गोबरा नवापारा क्षेत्र में स्थित लल्ला सोनवानी के ढाबे पर छापेमारी की। पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि ढाबे की आड़ में अवैध शराब का कारोबार संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में कथित तौर पर अवैध शराब की बिक्री होते पाए जाने की बात सामने आई। छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने मौके पर आवश्यक कार्रवाई की और संबंधित जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल भी मौके पर पहुंचे थे। यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार कार्रवाई के दौरान उनका व्यवहार संदिग्ध पाया गया। आरोप है कि उन्होंने आरोपी लल्ला सोनवानी से अलग जाकर एकांत में बातचीत की। इस घटनाक्रम के बाद उनकी भूमिका को लेकर संदेह पैदा हुआ और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के अनुसार किसी भी अवैध गतिविधि के खिलाफ कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारी से निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी की भूमिका पर संदेह उत्पन्न होता है तो उसकी जांच आवश्यक हो जाती है। इसी आधार पर मामले की प्रारंभिक समीक्षा की गई और प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों को गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने आदेश जारी करते हुए दीपेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर ग्रामीण से संबद्ध किया गया है। विभागीय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मामले की विस्तृत जांच पूरी होने तक यह कार्रवाई प्रभावी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साथ ही पूरे प्रकरण की प्रारंभिक जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अभिषेक झा को सौंपी गई है। उन्हें सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि अवैध शराब कारोबार पर नियंत्रण को लेकर थाना स्तर पर क्या प्रयास किए गए थे और कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी की भूमिका क्या रही। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के भीतर इस कार्रवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ राज्यभर में अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या संदिग्ध भूमिका को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गोबरा नवापारा और आसपास के क्षेत्रों में इस कार्रवाई की चर्चा भी तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ था। ऐसे में पुलिस प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होती है तो इससे कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मामले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सात दिन के भीतर आने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि थाना प्रभारी पर लगे आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस विभाग ने साफ कर दिया है कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:04:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक जून से पांच जून के बीच थानों में बड़े पैमाने पर होंगे तबादले, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए सख्त निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने नया आदेश जारी किया है। अब किसी भी पुलिसकर्मी की एक थाने में अधिकतम पोस्टिंग 5 साल और दोबारा तैनाती नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-will-be-large-scale-transfers-in-police-stations-between/article-53984"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-police-transfers--2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में पुलिस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नए निर्देशों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी पुलिसकर्मी की एक ही थाने में तैनाती की अवधि पांच साल से ज्यादा नहीं होगी। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कर्मचारी किसी थाने में पहले से तैनात रह चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो दोबारा उस थने में नहीं लौटेगा। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के थानों में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षक से उप निरीक्षक स्तर तक की नियुक्तियों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि किसी पुलिसकर्मी को एक ही थाने में एक पद पर अधिकतम चार साल तक रखा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कुल मिलाकर उसकी सेवा का समय पांच साल से अधिक नहीं हो सकता। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ही पुलिस अनुभाग में अलग-अलग पदों पर भी कुल कार्यकाल दस साल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यह कदम लंबे समय से एक ही जगह काम कर रहे पुलिसकर्मियों के मुद्दों को हल करने के लिए उठाया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह आदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस आयुक्तों और इंदौर-भोपाल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भेजा है। निर्देश में कहा गया है कि सभी जिलों में थाने में तैनात कर्मचारियों की तत्काल समीक्षा की जाए और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">1<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच स्थानांतरण के आदेश जारी किए जाएं। इसके बाद </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून तक सभी स्थानांतरित पुलिसकर्मियों को नई तैनाती वाले थानों में जॉइन करना होगा। मतलब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी प्रक्रिया को बहुत कम समय में निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आदेश के पीछे एक ही थाने में लंबे समय तक बचे रहने वाले कर्मचारियों की कार्यशैली और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल भी एक बड़ा कारण हैं। कई बार एक ही जगह ज्यादा समय रहने से कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब यह रोटेशन नीति सख्ती से लागू की जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आदेश में कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारियों से संबंधित सभी लंबित जांच और मामलों की जानकारी नए थाना प्रभारियों को दी जाएगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी स्तर पर जांच या कामकाज पर कोई असर न पड़े। इसके साथ सभी जिलों को </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक पूरी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस निर्णय के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ये माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई जिलों में थानों की कार्यप्रणाली और टीमों में बड़े बदलाव होंगे। प्रशासनिक स्तर पर इसे एक सुधारात्मक कदम माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पुलिसिंग सिस्टम को और अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिलाई में 200 रुपये रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुआ ट्रैफिक SI, लाइन अटैच किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[भिलाई में ट्रैफिक SI का 200 रुपए रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने SI को लाइन अटैच किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/traffic-si-line-attached-caught-on-camera-taking-bribe-of/article-52872"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t174106.629.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुर्ग जिले के भिलाई में पुलिस विभाग से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें से एक वीडियो में ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर युवक से 200 रुपए लेते नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह रकम चालान से बचाने के बदले ली गई।वीडियो सामने आने के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई और संबंधित ट्रैफिक </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SI <span lang="hi" xml:lang="hi">को लाइन अटैच कर दिया गया। वहीं दूसरा वीडियो भी चर्चा में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें एक कॉन्स्टेबल हत्या की कोशिश के मामले के आरोपी बताए जा रहे युवक से हाथ मिलाते और गले मिलते दिखाई दे रहा है। दोनों वीडियो को लेकर पुलिस महकमे में सवाल उठ रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि पहला वीडियो दुर्ग ट्रैफिक विभाग का है। इसमें ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर महेश्वर देवांगन सड़क किनारे खड़े दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक युवक उनसे बातचीत करता नजर आता है और फिर पैसे देता दिखाई देता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति यह भी कहता सुनाई दे रहा है कि चालान काटने के बजाय पैसे लिए जा रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक युवक से 200 रुपए लिए गए थे। वीडियो में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SI <span lang="hi" xml:lang="hi">युवक को पैसे गिनने के लिए कहते भी सुनाई पड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो फैलते ही लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। मामला बढ़ने के बाद ट्रैफिक विभाग ने कार्रवाई करते हुए महेश्वर देवांगन को लाइन अटैच कर दिया। ट्रैफिक टीआई टीडी चंद्रा ने इसकी पुष्टि की है। अधिकारियों के अनुसार मामले की विभागीय जांच भी की जा रही है और वीडियो की सत्यता की पड़ताल की जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरा वीडियो भिलाई के पावर हाउस रेलवे स्टेशन इलाके का बताया जा रहा है। इसमें छावनी थाना में पदस्थ कॉन्स्टेबल प्रमोद साहू एक युवक से मिलते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दोनों हाथ मिलाते और गले मिलते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि युवक बाबू खान है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके खिलाफ जामुल थाना में हत्या के प्रयास यानी धारा 307 के तहत मामला दर्ज है। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल जमानत पर बाहर है। स्थानीय लोगों के बीच यह वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रमोद साहू का हाल ही में बालोद से दुर्ग ट्रांसफर हुआ था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिख रहा युवक कौन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी जांच कराई जा रही है। अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि विभागीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दोनों वीडियो एक ही दिन सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग कार्रवाई को सही बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि सिर्फ लाइन अटैच करना काफी नहीं है। फिलहाल पुलिस अधिकारी पूरे मामले में जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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