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                <title>Inspirational Quotes - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Inspirational Quotes RSS Feed</description>
                
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                <title>महात्मा गांधी का जीवन मंत्र: स्वास्थ्य ही वास्तविक धन, सुखी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी</title>
                                    <description><![CDATA[बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के दौर में महात्मा गांधी का स्वास्थ्य पर दिया गया संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है, जितना उनके समय में था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/mahatma-gandhis-life-mantra-health-is-the-real-wealth-and/article-58449"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mahatma-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सादगी, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को जितना महत्व दिया, उतना ही जोर उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिया था। उनका प्रसिद्ध विचार, "स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, सोने और चांदी के टुकड़े नहीं", आज भी लोगों को यह समझाने का काम करता है कि जीवन में सबसे बड़ी पूंजी अच्छी सेहत है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव, अनियमित खानपान और भागदौड़ के दौर में यह संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। आज लोग आर्थिक सफलता, करियर और सुविधाओं के पीछे लगातार भाग रहे हैं, लेकिन इसी दौड़ में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि शरीर और मन स्वस्थ नहीं हैं, तो धन-दौलत और भौतिक सुविधाओं का आनंद लेना भी मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि गांधीजी के इस विचार को आज के समय में स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र माना जा रहा है। उनका मानना था कि व्यक्ति का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वह शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से स्वस्थ हो। उन्होंने अपने जीवन में प्राकृतिक जीवनशैली, नियमित दिनचर्या, संतुलित भोजन और आत्मसंयम को अपनाकर इसका उदाहरण भी प्रस्तुत किया।</p>
<p>गांधीजी का जीवन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि वह स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का भी एक बड़ा संदेश देता है। वे सादा भोजन करते थे, नियमित पैदल चलते थे और प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि सही आदतों की जरूरत होती है। आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब उनका यह संदेश लोगों को अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचने के लिए प्रेरित करता है। डॉक्टरों के अनुसार, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी कई समस्याएं अनियमित दिनचर्या और खराब खानपान से जुड़ी हुई हैं। यदि लोग समय पर भोजन करें, पर्याप्त नींद लें, रोजाना कुछ समय व्यायाम या पैदल चलने के लिए निकालें और तनाव को नियंत्रित रखने का प्रयास करें, तो कई बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। गांधीजी भी आत्मअनुशासन को स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी कुंजी मानते थे। उनका विश्वास था कि संयमित जीवन व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी संतुलित रखता है। यही कारण है कि उनके विचार आज केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए इसी तरह की सलाह देते हैं।</p>
<p>आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में गांधीजी का संदेश याद दिलाता है कि स्वस्थ शरीर के बिना जीवन का संतुलन बनाए रखना कठिन है। मानसिक स्वास्थ्य भी आज बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवन केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति भी उतनी ही जरूरी है। नियमित योग, ध्यान, संतुलित भोजन, पर्याप्त आराम और परिवार के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गांधीजी का जीवन भी आत्मचिंतन, धैर्य और सकारात्मक सोच का उदाहरण रहा है। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि सरल जीवन और उच्च विचार व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाते हैं। यही सोच आज भी लोगों को प्रेरित करती है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन भी है। बदलती दुनिया में जहां भौतिक उपलब्धियों को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं गांधीजी का यह विचार याद दिलाता है कि यदि स्वास्थ्य साथ नहीं है, तो बाकी उपलब्धियां अधूरी रह जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने व्यस्त जीवन में स्वास्थ्य को सबसे पहली प्राथमिकता दें, नियमित दिनचर्या अपनाएं, संतुलित खानपान रखें और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए समय निकालें। यही आदतें लंबे समय तक बेहतर जीवन की आधारशिला बन सकती हैं और महात्मा गांधी के इस अमर संदेश को व्यवहार में उतारने का सबसे अच्छा तरीका भी यही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरिवंश राय बच्चन का जीवन मंत्र: अतीत को छोड़िए, वर्तमान को संवारिए, तभी भविष्य बनेगा बेहतर</title>
                                    <description><![CDATA['जो बीत गई सो बात गई' केवल कविता नहीं, बल्कि जीवन जीने का ऐसा दर्शन है जो निराशा से बाहर निकलकर नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/life-mantra-of-harivansh-rai-bachchan-leave-the-past-cherish/article-58311"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/harivansh-rai-bachchan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">हिंदी साहित्य के महान कवि हरिवंश राय बच्चन केवल अपनी कविताओं के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन को देखने के सकारात्मक नजरिए के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में जीवन का गहरा अनुभव, संघर्ष, उम्मीद और आगे बढ़ने का संदेश मिलता है। उनकी सबसे प्रसिद्ध पंक्तियों में से एक "जो बीत गई सो बात गई" आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि जीवन जीने का ऐसा दर्शन है, जो इंसान को अतीत के दुखों से बाहर निकलकर वर्तमान में बेहतर जीवन जीने की सीख देता है। हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे पल आते हैं, जब वह किसी असफलता, रिश्ते के टूटने, आर्थिक नुकसान या किसी प्रियजन के बिछड़ने के कारण दुखी हो जाता है। कई लोग वर्षों तक उन्हीं यादों में उलझे रहते हैं और वर्तमान का आनंद लेना भूल जाते हैं। हरिवंश राय बच्चन का संदेश यही है कि जो समय निकल गया, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए बीती बातों पर लगातार दुख मनाने की बजाय वर्तमान को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी प्रसिद्ध पंक्तियां—</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>"जो बीत गई सो बात गई,<br />जीवन में एक सितारा था,<br />माना वह बेहद प्यारा था,<br />वह डूब गया तो डूब गया..."</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इन पंक्तियों में जीवन का गहरा सत्य छिपा हुआ है। बच्चन जी बताते हैं कि जीवन में कई बार हमें अपने सबसे प्रिय लोगों, अवसरों या सपनों को खोना पड़ता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जीवन वहीं रुक जाए। जैसे आकाश टूटे हुए तारों के लिए हमेशा शोक नहीं मनाता, उसी तरह इंसान को भी आगे बढ़ना सीखना चाहिए। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि लोग अपने अतीत की गलतियों और दुखों को बार-बार याद करते रहते हैं। सोशल मीडिया के दौर में लोग दूसरों की सफलता देखकर खुद की असफलताओं से तुलना करने लगते हैं। ऐसे समय में बच्चन जी का जीवन मंत्र पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक दिखाई देता है। उनका संदेश हमें सिखाता है कि हर दिन एक नई शुरुआत का अवसर लेकर आता है। सकारात्मक सोच का मतलब यह नहीं कि जीवन में कठिनाइयां नहीं आएंगी। बल्कि इसका अर्थ यह है कि कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखी जाए। हरिवंश राय बच्चन ने अपने जीवन में भी कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके अनुभव उनकी कविताओं में साफ दिखाई देते हैं। यही वजह है कि उनकी रचनाएं आज भी हर पीढ़ी को प्रेरित करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी असफलताओं को लगातार याद करता रहेगा, तो वह नए अवसरों को पहचान नहीं पाएगा। सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो गिरकर दोबारा उठने का साहस रखते हैं। बच्चन जी की कविता हमें यही विश्वास दिलाती है कि हर अंत के बाद एक नई शुरुआत संभव है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए खुद को माफ करना भी जरूरी होता है। कई लोग अपनी छोटी-छोटी गलतियों के लिए खुद को वर्षों तक दोषी मानते रहते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है। बच्चन जी की सीख यही है कि गलतियों से सीखिए, लेकिन उन्हें अपनी पहचान मत बनने दीजिए। हर नया दिन खुद को बेहतर बनाने का मौका देता है। उनकी कविता यह भी सिखाती है कि समय किसी के लिए नहीं रुकता। इसलिए समय के साथ चलना ही समझदारी है। अगर इंसान केवल पीछे मुड़कर देखता रहेगा, तो वह सामने मौजूद अवसरों को खो देगा। जीवन का असली आनंद वर्तमान में जीने में है। आज मोटिवेशनल किताबों, सेमिनारों और लाइफ कोचिंग में जो बातें बताई जाती हैं, उनका सार हरिवंश राय बच्चन ने दशकों पहले अपनी कविताओं में सरल भाषा में कह दिया था। यही कारण है कि उनकी रचनाएं समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अतीत की घटनाओं को स्वीकार करना और वर्तमान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। जब व्यक्ति वर्तमान में जीना सीख जाता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है और जीवन में संतुलन बना रहता है। हरिवंश राय बच्चन का जीवन मंत्र केवल साहित्य प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो किसी कारणवश निराश या परेशान है। उनकी सीख हमें याद दिलाती है कि बीते हुए कल को बदला नहीं जा सकता, लेकिन आज के फैसले हमारे आने वाले कल को जरूर बेहतर बना सकते हैं। इसलिए अतीत की बेड़ियों से बाहर निकलकर वर्तमान को पूरी ऊर्जा, सकारात्मकता और आत्मविश्वास के साथ जीना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:39:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गौतम बुद्ध के अनमोल विचार, जो जीवन को देंगे नई दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[गौतम बुद्ध के प्रेरणादायक विचार जानिए, जो जीवन में शांति, सत्य, प्रेम और आत्मसंयम की राह दिखाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/precious-thoughts-of-gautam-buddha-which-will-give-new-direction/article-53374"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t175706.787.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भगवान बुद्ध को दुनिया शांति</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करुणा और आत्मज्ञान का प्रतीक माना जाता है। उनके विचार आज भी मुश्किल हालातों में लोगों को सही दिशा दिखाते हैं। कहा जाता है कि गौतम बुद्ध ने इंसान को खुद को समझने और अपने भीतर झांकने का संदेश दिया। इसलिए उनके उपदेश आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितने सदियों पहले थे। जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम और आत्मसंयम के बारे में उनके विचार लोगों के लिए प्रेरणाश्रोत बन चुके हैं। गौतम बुद्ध के ये अनमोल विचार सिर्फ धार्मिक संदेश नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने की सीख भी देते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गौतम बुद्ध कहते हैं कि जीवन की हजारों लड़ाइयों को जीतने से ज्यादा जरूरी खुद पर विजय पाना है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जो व्यक्ति खुद को जीत लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जीत कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने सत्य को सबसे बड़ा बताया और कहा कि जैसे सूर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रमा और सत्य को लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। बुद्ध के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी लक्ष्य तक पहुंचना ही सबकुछ नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस सफर को सही तरीके से तय करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि बुराई को बुराई से खत्म नहीं किया जा सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घृणा को केवल प्रेम ही समाप्त कर सकता है। सत्य के रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति की सबसे बड़ी गलती यही होती है कि वह या तो शुरुआत नहीं करता या फिर बीच में ही रुक जाता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जाता है कि गौतम बुद्ध वर्तमान में जीने पर जोर देते थे। उनका मानना था कि अगर इंसान भविष्य की चिंता और बीते समय के पछतावे में उलझा रहेगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह कभी खुश नहीं रह पाएगा। उन्होंने खुशियों को बांटने की सलाह देते हुए कहा कि जैसे एक दीपक से हजारों दीप जलाए जा सकते हैं और उसकी रोशनी कम नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही खुशियां बांटने से बढ़ती हैं। बुद्ध ने ज्ञान हासिल करने की बजाय उसे अपने जीवन में उतारने को जरूरी बताया। उनके अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ किताबें पढ़ने या अच्छी बातें सुनने से कुछ नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक इंसान उन बातों को अपने व्यवहार में न लाए। क्रोध के बारे में भी उन्होंने एक गहरी बात कही। बुद्ध के अनुसार गुस्सा उस जलते हुए कोयले की तरह है जिसे हम किसी दूसरे पर फेंकना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबसे पहले यह हमें ही जलाता है। इसलिए उन्होंने मौन और शांति को सबसे बड़ी ताकत माना। उनका कहना था कि क्रोध में बोले गए हजारों गलत शब्दों से बेहतर है एक शांत शब्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जीवन में सुकून ला सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:17:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हर इंसान को याद रखनी चाहिए चाणक्य की ये जरूरी बातें, धोखे और पछतावे से बचेंगे जिंदगीभर </title>
                                    <description><![CDATA[चाणक्य नीति की ऐसी बातें जानिए जो रिश्तों, सफलता और जीवन में सही फैसले लेने में मदद करती हैं और धोखे से बचाती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/every-person-should-remember-these-important-things-of-chanakya-he/article-52873"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t175221.286.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी लोगों के बीच उतनी ही चर्चा में रहती हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी सदियों पहले थीं। वजह साफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी बातें सीधे जीवन के व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिश्तों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सफलता और इंसान की सोच पर चोट करती हैं। चाणक्य ने अपनी नीतियों में ऐसे लोगों से दूरी बनाने की सलाह दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सामने मीठा बोलते हैं लेकिन पीछे नुकसान पहुंचाते हैं। उनका मानना था कि बुरे आचरण वाले लोगों की संगत धीरे-धीरे इंसान को भी बर्बादी की तरफ ले जाती है। उन्होंने साफ कहा कि जो व्यक्ति गलत लोगों से मित्रता करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह जल्दी नष्ट हो जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चाणक्य नीति में परिवार और संतोष को भी सुखी जीवन का सबसे बड़ा आधार बताया गया है। उनके अनुसार जिस व्यक्ति का बेटा आज्ञाकारी हो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवनसाथी समझदार हो और जो धन को लेकर संतुष्ट रहता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए यही धरती स्वर्ग जैसी है। वहीं दिखावटी मित्रों को लेकर भी उन्होंने चेतावनी दी थी। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना उस घड़े से की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके ऊपर दूध भरा हो लेकिन भीतर जहर छिपा हो। मतलब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर मीठा बोलने वाला व्यक्ति आपका शुभचिंतक नहीं होता। चाणक्य ने </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अति</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी किसी भी चीज की अधिकता से भी बचने की बात कही। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अधिक सौंदर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिक अभिमान और जरूरत से ज्यादा दान भी कई बार संकट का कारण बन जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चाणक्य की बातों में मुश्किल समय को लेकर भी गहरी सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि संकट आने से पहले डरना स्वाभाविक है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब मुश्किल सामने आ जाए तो पूरी ताकत से उसका सामना करना चाहिए। यही बुद्धिमानी है। उन्होंने कुछ कामों को पूरी तरह निरर्थक भी बताया। जैसे समुद्र में बारिश होना या तृप्त व्यक्ति को दोबारा भोजन कराना। उनके मुताबिक हर काम समय और परिस्थिति देखकर करना चाहिए। चाणक्य ने आत्मबल को सबसे बड़ी ताकत माना। उनका कहना था कि बादल का पानी सबसे शुद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मबल सबसे बड़ा बल और अन्न सबसे प्रिय वस्तु है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यौवन और जीवन को उन्होंने अस्थिर बताया। चाणक्य के अनुसार इस संसार में अगर कुछ स्थायी है तो वह धर्म और अच्छे कर्म हैं। लोगों को प्रभावित करने को लेकर भी उन्होंने व्यवहारिक नीति दी। उनका कहना था कि लालची व्यक्ति को धन से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिमानी को विनम्रता से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूर्ख को उसकी पसंद के अनुसार और विद्वान को सच बोलकर प्रभावित किया जा सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने शेर का उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे काम छोटा हो या बड़ा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुरुआत से पूरी ताकत लगानी चाहिए। आधे मन से किया गया काम अक्सर असफलता देता है। चाणक्य ने एक और जरूरी बात कही कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी आर्थिक हानि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक दुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घर की कमजोरियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपमान या किसी के द्वारा ठगे जाने की बात हर किसी को नहीं बतानी चाहिए। उनका मानना था कि हर व्यक्ति आपकी परेशानी समझे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह जरूरी नहीं। कई लोग इसका गलत फायदा भी उठा सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:09:54 +0530</pubDate>
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