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                <title>Education Department - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Education Department RSS Feed</description>
                
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                <title>स्कूल में नशे में धुत मिले हेडमास्टर, जमीन पर लेटकर की गाली-गलौज; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[सूरजपुर के प्राथमिक विद्यालय का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, अभिभावकों में नाराजगी; शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/headmaster-found-drunk-in-school-lying-on-the-ground-and/article-58381"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surajpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कथित रूप से शराब के नशे में जमीन पर पड़े दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में वह अभद्र भाषा और गाली-गलौज करते भी नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो रामानुजनगर विकासखंड के शाल्ही गांव स्थित खोरखोरीपारा प्राथमिक विद्यालय का है। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले शिक्षक की पहचान प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरिनंदन सिंह के रूप में की जा रही है। वीडियो में वह कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल परिसर के भीतर जमीन पर लेटे हुए दिखाई देते हैं। आसपास मौजूद लोग जब उनका वीडियो बनाने लगते हैं तो वह गाली-गलौज करते हुए उन्हें धमकाते भी सुनाई देते हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई है और स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर लगे आरोपों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक समाज में सम्मानित स्थान रखते हैं और बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होती है। यदि कोई शिक्षक सार्वजनिक रूप से इस तरह के व्यवहार का प्रदर्शन करता है, तो उसका नकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों और पूरे समाज पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद गांव में नाराजगी का माहौल है। कई अभिभावकों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और संस्कार ग्रहण करने का स्थान होता है। ऐसे माहौल में यदि शिक्षक अनुशासनहीनता का परिचय देंगे तो शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। बताया जा रहा है कि वीडियो में कथित रूप से हेडमास्टर शराब के नशे में असंतुलित अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें संभालने का प्रयास भी किया, लेकिन वह गुस्से में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते रहे। वीडियो बनाने वालों को भी उन्होंने कथित तौर पर धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया। मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर रिपोर्ट तलब की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े तथ्यों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी विद्यालयों में अनुशासन और आचरण के मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:14:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में स्कूलों की एक समान टाइमिंग की मांग, शिक्षा सचिव को भेजा गया पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी मॉर्निंग शिफ्ट लागू करने की मांग उठाई, कहा- अलग-अलग समय से पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/letter-sent-to-education-secretary-demanding-uniform-timing-of-schools/article-58069"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के संचालन समय को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूल अलग-अलग समय पर संचालित हो रहे हैं, जिससे न केवल शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी लगातार दिक्कतें सामने आ रही हैं। संगठन ने विशेष रूप से शनिवार के दिन हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने का सुझाव दिया है ताकि पूरे शिक्षा तंत्र में समान व्यवस्था लागू हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन के अनुसार राज्य में युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) और संकुल व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को हायर सेकेंडरी स्कूलों से जोड़ा गया है। इसके कारण एक ही परिसर या संकुल के अंतर्गत कई स्तर के विद्यालय संचालित हो रहे हैं। लेकिन अलग-अलग समय पर स्कूल खुलने और बंद होने से समन्वय में परेशानी आ रही है। शिक्षकों, प्राचार्यों और कर्मचारियों को एक साथ बैठकर योजनाएं बनाने, समीक्षा बैठकें करने और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कक्षाओं में पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करना, परीक्षा संबंधी कार्य, छात्रवृत्ति प्रक्रिया, वित्तीय दस्तावेज तैयार करना, कार्यालयीन रिकॉर्ड का संधारण और अन्य प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं। इसके अलावा समय-समय पर संकुल स्तर और विभागीय बैठकों में भी शामिल होना आवश्यक होता है। अलग-अलग स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग होने के कारण इन सभी कार्यों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन का मानना है कि यदि शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी सुबह की पाली में संचालित किया जाए और सभी सरकारी स्कूलों का समय समान कर दिया जाए तो शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। इससे बैठकें आयोजित करना, लंबित रिपोर्ट तैयार करना, अगले सप्ताह की शैक्षणिक योजना बनाना और विभागीय निर्देशों का पालन करना अधिक व्यवस्थित तरीके से संभव होगा। संगठन का कहना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का भी मानना है कि एक समान समय व्यवस्था से विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। संकुल व्यवस्था के तहत कई कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अलग-अलग विद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी शामिल होते हैं। यदि सभी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी होगी तो ऐसे कार्यक्रमों का संचालन आसान होगा और अनावश्यक समय की बर्बादी भी नहीं होगी। साथ ही विभागीय निरीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समीक्षा बैठकें भी अधिक प्रभावी ढंग से आयोजित की जा सकेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कई बार अलग-अलग समय के कारण प्राचार्यों और शिक्षकों को अतिरिक्त समय तक स्कूल में रुकना पड़ता है। इससे कार्य का दबाव बढ़ता है और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। संगठन का कहना है कि यदि पूरे राज्य में एक समान समय व्यवस्था लागू की जाती है तो कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और विद्यालय प्रबंधन को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>16 जून से खुलेंगे स्कूल, निजी स्कूलों को अब तक नहीं मिली किताबें</title>
                                    <description><![CDATA[नए सत्र की तैयारी अधूरी, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव को लिखा पत्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/schools-will-open-from-june-16-private-schools-have-not/article-55292"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/school-reopen-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गर्मी की छुट्टियों के बाद प्रदेश के स्कूल 16 जून से दोबारा खुलने जा रहे हैं, लेकिन नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले ही पाठ्यपुस्तकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि अब तक उन्हें नई किताबों की आपूर्ति नहीं हो सकी है, जबकि स्कूल खुलने में कुछ ही दिन बाकी हैं। इस स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर जल्द से जल्द पुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि समय रहते किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं तो हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई नए सत्र की शुरुआत में ही प्रभावित हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निजी स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा सरकारी स्कूलों में किताबों की आपूर्ति का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन निजी स्कूलों के लिए अब तक कोई स्पष्ट व्यवस्था सामने नहीं आई है। स्कूल संचालकों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी विद्यार्थी और अभिभावक स्कूल खुलने से पहले किताबों की उपलब्धता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। ऐसे में नए सत्र की तैयारी प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों को अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे काम चलाने की आशंका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाई शुरू करानी होती है। इसके लिए पाठ्यपुस्तकों का समय पर मिलना बेहद जरूरी है। यदि किताबें देर से पहुंचती हैं तो शुरुआती सप्ताहों में पढ़ाई का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। कई निजी स्कूलों ने पहले ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली है और कक्षाओं के संचालन की तैयारी कर ली है, लेकिन किताबों की अनुपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच पुस्तक वितरण की व्यवस्था में अंतर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार सरकारी स्कूलों को संकुल स्तर पर ही किताबें पहुंचाई जा रही हैं, जिससे वहां वितरण प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो गई है। दूसरी ओर निजी स्कूलों को पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो से स्वयं किताबें प्राप्त करनी होंगी। इससे समय, संसाधन और अतिरिक्त खर्च का बोझ स्कूल प्रबंधन पर पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में स्थित निजी स्कूलों को किताबें लेने के लिए 150 से 200 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। दूरदराज के इलाकों में संचालित स्कूलों के लिए यह व्यवस्था और भी कठिन साबित हो सकती है। स्कूल संचालकों के अनुसार किताबों के परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों बढ़ जाएंगे। साथ ही यदि एक ही समय में बड़ी संख्या में स्कूल डिपो पहुंचते हैं तो वहां भी अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्कूल प्रबंधन का मानना है कि किताबों की उपलब्धता केवल स्कूलों की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विद्यार्थियों और अभिभावकों पर पड़ता है। कई परिवार पहले से ही नए सत्र की तैयारी में स्कूल फीस, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री पर खर्च कर रहे हैं। ऐसे में यदि किताबें समय पर नहीं मिलतीं तो उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अभिभावकों का भी कहना है कि स्कूल खुलने के बाद बच्चों को पढ़ाई शुरू करने के लिए किताबों की आवश्यकता होती है और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग पर निजी स्कूलों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों के लिए पुस्तक वितरण की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती है तो निजी स्कूलों के लिए भी समान व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि निजी स्कूलों के लिए अलग से वितरण शेड्यूल जारी किया जाए और जरूरत पड़ने पर संकुल स्तर पर ही किताबें उपलब्ध कराई जाएं ताकि स्कूलों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हमेशा महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती दिनों में ही पाठ्यक्रम की नींव रखी जाती है और यदि इस दौरान आवश्यक सामग्री उपलब्ध न हो तो पढ़ाई की गति प्रभावित होती है। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए किताबों की उपलब्धता बेहद जरूरी मानी जाती है।  निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षा विभाग के जवाब का इंतजार कर रहा है। स्कूल खुलने में अब बहुत कम समय बचा है और ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक पुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी करता है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो नए सत्र की शुरुआत में ही हजारों विद्यार्थियों को किताबों के बिना पढ़ाई करनी पड़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:46:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जंगल में छात्रा संग आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया शिक्षक, DEO ने जांच के बाद किया बर्खास्त</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के सरगुजा में छात्रा संग विवादित हालत में पकड़े गए संविदा शिक्षक को DEO ने बर्खास्त किया, जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/teacher-caught-in-objectionable-condition-with-student-in-forest-deo/article-53402"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-15t122809.485.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें एक स्कूल शिक्षक को कॉलेज छात्रा के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े जाने के बाद नौकरी से हटा दिया गया है। यह पूरा मामला अब सरगुजा शिक्षक मामले के रूप में चर्चा का विषय बन चुका है और शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना 20 अप्रैल की रात लगभग 1 बजे की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब कुछ युवकों ने सरमना के लंकाडांड जंगल के पास एक कार देखी। युवकों ने वहां कुछ संदिग्ध पाया और जब नजदीक गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्होंने पहचाना कि कार के अंदर स्वामी आत्मानंद स्कूल का संविदा शिक्षक सुरेश जायसवाल था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक कॉलेज छात्रा के साथ था। घटना के बाद युवकों ने मोबाइल से वीडियो बना लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और तेजी से चर्चा में आने लगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस मामले ने जैसे ही ध्यान आकर्षित किया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिति बहुत संवेदनशील हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग को सूचित किया गया और प्राथमिक जांच शुरू हुई। बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहे शिक्षक और वाहन की पहचान स्थानीय स्तर पर की गई। जांच टीम ने मामले की पड़ताल की और शिक्षक के बयान भी लिए। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूछताछ के दौरान शिक्षक यह स्पष्ट नहीं कर सका कि वह देर रात छात्रा के साथ क्यों वहां था। इसी दौरान यह भी सामने आया कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल चुका था और इस पर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी थीं। कुछ ने इस स्थिति पर सवाल उठाए हैं कि आखिर दोनों उस समय जंगल के किनारे क्या कर रहे थे। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि घटना केवल अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रह गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इससे स्कूल की छवि और शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जांच के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज हो गई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय ने इस मामले में गंभीर रुख अपनाया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षक को स्कूल से हटा कर उदयपुर बीईओ कार्यालय में अटैच कर दिया गया था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिर एक विस्तृत जांच के लिए एक टीम गठित की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें बतौली बीईओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीतापुर बीईओ और एक वरिष्ठ प्राचार्य शामिल थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वायरल वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वही शिक्षक है और वाहन भी उसी से संबंधित पाया गया। इसके बाद डीईओ ने कारण बताओ नोटिस जारी किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संतोषप्रद जवाब न मिलने पर संविदा नियुक्ति समाप्त करने का निर्णय लिया गया। शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि शिक्षण संस्थानों की गरिमा और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस मामले में सख्त कदम उठाए गए हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 13:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>जबलपुर में भारी स्कूल बैग पर सख्ती, पहली कक्षा का बस्ता 1078 ग्राम का हो, DPI के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[जबलपुर में भारी स्कूल बैग को लेकर प्रशासन सख्त हुआ। DPI ने स्कूलों को नेशनल बैग पॉलिसी लागू करने और तय वजन मानक मानने के निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strictness-on-heavy-school-bags-in-jabalpur-dpi-instructions-first/article-52914"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t135944.152.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबलपुर में बच्चों के भारी स्कूल बैग को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर सख्ती शुरू हो गई है। बाल संरक्षण आयोग और लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर कहा है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी का पालन कराया जाए। शुरुआती निर्देशों में साफ कहा गया है कि पहली कक्षा के बच्चे के स्कूल बैग का वजन 1078 ग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में छोटे बच्चों से जरूरत से ज्यादा किताबें और कॉपियां लाने को कहा जाता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बस्ते का वजन बढ़ जाता है। अधिकारियों के अनुसार इसका असर बच्चों के शारीरिक विकास पर पड़ रहा है। छोटे बच्चों में कमर दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंधों में दबाव और थकान जैसी शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए अब जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक डीपीआई की ओर से पहले भी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर स्कूलों में बैग का वजन जांचने के निर्देश दिए गए थे। समग्र शिक्षा अभियान और लोक शिक्षण संचालनालय की अपर परियोजना संचालक नंदा भलावे की तरफ से यह जानकारी मांगी गई थी कि निरीक्षण के दौरान छात्रों के बैग का वजन कितना पाया गया। हालांकि अब तक किसी बड़े स्कूल पर कार्रवाई या औपचारिक जांच की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि गर्मी की छुट्टियां शुरू होने के बाद रिपोर्ट मांगने से वास्तविक जांच पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि कई स्कूलों से केवल कागजी जानकारी भेजी जा सकती है। कुछ अभिभावकों ने भी कहा कि स्कूल बैग का वजन तय होना अच्छी पहल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसका पालन जमीन पर होना ज्यादा जरूरी है। कई निजी स्कूल अब भी बच्चों को अलग-अलग विषयों की पूरी किताबें रोज लाने के लिए कहते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डीपीआई के निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को बैग लाने की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए। वहीं पहली से बारहवीं तक हर कक्षा के लिए अधिकतम वजन तय किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों पर पढ़ाई का बोझ केवल मानसिक नहीं बल्कि शारीरिक रूप से भी बढ़ रहा है। बाल संरक्षण आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि कुछ निजी स्कूल अब भी नीति का सही पालन नहीं कर रहे हैं और छोटे बच्चों को भारी बस्ते के साथ स्कूल आने को मजबूर किया जा रहा है। आयोग ने इसे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। निर्देश में कहा गया है कि उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। तय मानकों के अनुसार कक्षा 2 के बैग का वजन 1080 ग्राम</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा 3 के लिए 1572 ग्राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा 4 के लिए 1804 ग्राम और कक्षा 5 के लिए 1916 ग्राम रखा गया है। वहीं छठी से आठवीं तक के छात्रों के लिए यह सीमा करीब 3 से 3.6 किलो तक तय की गई है। कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए 4 किलो से अधिक वजन नहीं रखने की बात कही गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए अधिकतम सीमा 3.5 किलो से 5 किलो तक रखी गई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:13:34 +0530</pubDate>
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