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                <title>Corruption - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Corruption RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीधी में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: नामांतरण के बदले 3 हजार की रिश्वत लेते तहसील का माल जमादार रंगे हाथ गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई, कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पकड़ा गया आरोपी; शिकायत के सत्यापन के बाद हुई कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/big-action-of-lokayukta-in-sidhi-tehsil-employee-arrested-red/article-58203"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lokayukta-rewa-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सीधी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त रीवा की टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गोपद बनास तहसील कार्यालय की नजारत एवं नकल शाखा में पदस्थ भृत्य (माल जमादार) दामोदर प्रसाद साकेत को पैतृक भूमि के नामांतरण के एवज में 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप किया। यह कार्रवाई बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित तहसील कार्यालय भवन के सामने की गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lokayukta-rewa-(1).mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">लोकायुक्त रीवा की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय सहित पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया। जैसे ही कर्मचारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी को मौके पर ही हिरासत में लेकर आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। शिकायतकर्ता नागेंद्र प्रसाद तिवारी, उम्र 66 वर्ष, ग्राम गाड़ा लोलर सिंह, तहसील गोपद बनास, जिला सीधी के निवासी हैं। उन्होंने अपनी पैतृक भूमि का वारिसान एवं वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने के लिए मध्यप्रदेश ऑनलाइन लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किया था। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे आवश्यक कार्रवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bribery-case.mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता का आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ माल जमादार दामोदर प्रसाद साकेत ने नामांतरण आदेश तहसीलदार से करवाने के बदले 3 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। आरोपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पैसे दिए नामांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से करने का फैसला किया। नागेंद्र प्रसाद तिवारी ने 1 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई और रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। निरीक्षक नरेश बेहरा और निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में टीम ने पूरी रणनीति तैयार की।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lokayukta-rewa.mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">बुधवार 8 जुलाई को शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार आरोपी से मिलने पहुंचे। जैसे ही आरोपी दामोदर प्रसाद साकेत ने शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपए की रिश्वत ली, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले उसका तकनीकी और गोपनीय सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर ही ट्रैप की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई, जिसके बाद आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lokayukta-rewa-(2).mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोकायुक्त संगठन समय-समय पर आम नागरिकों से भी अपील करता रहा है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तत्काल लोकायुक्त को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। गौरतलब है कि नामांतरण, सीमांकन, नक्शा, प्रतिलिपि और राजस्व से जुड़े अन्य मामलों में रिश्वत की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में लोकायुक्त द्वारा लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। सीधी में हुई इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में भी हलचल देखी गई। लोकायुक्त टीम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 17:36:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेलंगाना के DSP के पास 300 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति का खुलासा, एसीबी की कार्रवाई से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[16 ठिकानों पर छापेमारी के बाद गिरफ्तारी, रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई करोड़ों की संपत्तियां; डायरी से खुले कई अहम राज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/telangana-dsp-reveals-alleged-benami-property-worth-rs-300-crores/article-58130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/telangana-dsp.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़े पुलिस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। हैदराबाद में पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) संकीरेड्डी भीम रेड्डी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिन्हें कथित रूप से रिश्तेदारों, दोस्तों, सहयोगियों और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर खरीदा गया था। मामले की जांच पिछले कई दिनों से चल रही थी। एसीबी ने 2 जुलाई को डीएसपी से जुड़े 16 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति के रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच पूरी होने के बाद सोमवार देर शाम आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार सुबह उन्हें अदालत में पेश किया गया।</p>
<p>जांच एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान डीएसपी के कब्जे से करीब 3.60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोने के आभूषण, करीब 20 किलोग्राम चांदी के सामान और विभिन्न बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये की राशि मिली। हालांकि जांच का सबसे अहम हिस्सा वह निजी डायरी साबित हुई, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान भीम रेड्डी की हस्तलिखित एक निजी डायरी मिली, जिसमें उनकी संपत्तियों, निवेश, वित्तीय लेनदेन, देनदारियों और कथित बेनामीदारों के नाम दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस डायरी में कई ऐसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से एजेंसी को नई संपत्तियों और निवेश का पता चला।</p>
<p>जांच में यह भी खुलासा हुआ कि डीएसपी ने मई महीने में चारधाम यात्रा पर जाने से पहले इस डायरी की स्कैन कॉपी अपने दोनों बेटों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपनी वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ऐसा किया था। यही दस्तावेज अब जांच एजेंसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी अधिकारी ने तेलंगाना और कर्नाटक के कई शहरों में बड़ी संख्या में अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें कृषि भूमि, प्लॉट, आवासीय भवन, व्यावसायिक परिसरों और अन्य निवेश शामिल बताए जा रहे हैं। इन संपत्तियों का स्वामित्व सीधे उनके नाम पर नहीं था, बल्कि रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज किया गया था। एसीबी इन्हें कथित बेनामी संपत्ति मानकर उनकी कानूनी जांच कर रही है।</p>
<p>जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डायरी के आधार पर संपत्तियों की वास्तविक कीमत का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान लगभग 300 करोड़ रुपये का है, लेकिन विस्तृत जांच पूरी होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ भी सकता है। एजेंसी अब इन संपत्तियों से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, निवेश विवरण और आय के स्रोत की भी जांच कर रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोपी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्यरत रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित आय और घोषित संपत्ति के मुकाबले यह निवेश किस प्रकार किया गया। यदि आय के वैध स्रोत नहीं मिलते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>एसीबी का कहना है कि मामले में अभी कई वित्तीय लेनदेन की जांच बाकी है। कुछ संपत्तियों के दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तविक मालिक हैं या केवल नाम मात्र के बेनामीदार। इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही एसीबी का कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ यदि आय से अधिक संपत्ति की विश्वसनीय शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में नापतौल विभाग में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते रिटायर्ड इंस्पेक्टर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर के इशारे पर पेट्रोल पंप संचालक से रिश्वत लेने पहुंचे रिटायर्ड निरीक्षक को लोकायुक्त पुलिस ने रंगेहाथ पकड़ा। मामले में डिप्टी कंट्रोलर को भी मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-action-by-lokayukta-in-weights-and-measures-department-in/article-57755"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-lokayukta.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नापतौल विभाग से जुड़े एक रिश्वतखोरी मामले का खुलासा किया। लोकायुक्त की टीम ने विभाग के रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यह रकम विभाग के प्रभारी उप नियंत्रक (डिप्टी कंट्रोलर) नसीमुद्दीन के कथित निर्देश पर ली जा रही थी। कार्रवाई के बाद लोकायुक्त पुलिस ने नसीमुद्दीन को भी मामले का मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार शिकायत भोपाल के एमपी नगर जोन-2 स्थित प्रगति पेट्रोल पंप के संचालक अमित सिंह बघेल ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नापतौल विभाग की ओर से उनके पेट्रोल पंप के खिलाफ दर्ज प्रकरण समाप्त करने और सील किए गए तीन नोजल दोबारा चालू कराने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पूरे मामले की निगरानी शुरू की और ट्रैप की योजना बनाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार शुरुआत में चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में बातचीत के दौरान सौदा साढ़े तीन लाख रुपये में तय हुआ। तय राशि की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये देने का समय और स्थान निश्चित किया गया। लोकायुक्त की टीम पहले से ही पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थी। गुरुवार को फरियादी को पहले मनोहर डेयरी बुलाया गया। कुछ देर बाद रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल ने फोन कर उन्हें बोर्ड ऑफिस क्षेत्र के पास आने के लिए कहा। वहां से दोनों इंडियन कॉफी हाउस पहुंचे, जहां रिश्वत की पहली किस्त दी जानी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त पुलिस के अनुसार जैसे ही फरियादी ने एक लाख रुपये हरिप्रसाद पटेल को दिए और उन्होंने रकम अपनी कार में रखी, पहले से तैनात टीम ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी अजय मिश्रा और उनकी टीम ने किया।ट्रैप की कार्रवाई पूरी होने के बाद लोकायुक्त की दूसरी टीम जेके रोड स्थित नापतौल विभाग के कार्यालय पहुंची। यहां प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त के अनुसार शिकायत की पृष्ठभूमि जून महीने में हुई विभागीय कार्रवाई से जुड़ी है। निरीक्षण के दौरान नापतौल विभाग ने प्रगति पेट्रोल पंप के तीन नोजल सील कर दिए थे। विभाग का दावा था कि इन नोजलों से निर्धारित मात्रा से एक से पांच मिलीलीटर तक कम पेट्रोल निकल रहा था। हालांकि बाद में संबंधित कंपनी के अधिकृत जांच अधिकारी ने दोबारा परीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में नोजल निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके बावजूद पेट्रोल पंप संचालक का आरोप था कि केस समाप्त करने और नोजलों की दोबारा स्टैंपिंग कराने के लिए रिश्वत की मांग लगातार की जा रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हरिप्रसाद पटेल वर्ष 2023 में निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद वे विभागीय मामलों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेने तथा संदेश पहुंचाने का काम कर रहे थे। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे विभाग के कुछ मामलों में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में भी की जाएगी कि वे किन परिस्थितियों में विभागीय गतिविधियों से जुड़े रहे और किन-किन मामलों में उनकी भूमिका रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन सीधे तौर पर रिश्वत की बातचीत से बचते थे। शिकायत के अनुसार वे अलग-अलग स्थानों पर बुलाकर बातचीत करते थे, लेकिन रकम का जिक्र मौखिक रूप से करने के बजाय कागज पर लिखते और तुरंत उसे फाड़ या काट देते थे, ताकि भविष्य में कोई प्रत्यक्ष या ऑडियो साक्ष्य उपलब्ध न हो सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिश्वत मांगने का यह तरीका सबूत मिटाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप कार्रवाई के बाद संबंधित दस्तावेज, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वत मांगने की पूरी प्रक्रिया, बातचीत और विभागीय फाइलों की भी पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:41:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन, शिक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जुटे युवा</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी अभियान अब सड़कों तक पहुंचा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने खींचा ध्यान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cockroach-janata-partys-demonstration-at-jantar-mantar-youth-engaged-on/article-55065"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cockroach-janata-party.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार सुबह से अलग तरह का माहौल देखने को मिला, जब सोशल मीडिया पर चर्चा में रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थक बड़ी संख्या में यहां पहुंचने लगे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे इस अभियान ने पिछले कुछ दिनों में इंटरनेट पर काफी चर्चा बटोरी थी, लेकिन अब यह डिजिटल दुनिया से निकलकर जमीन पर दिखाई दिया। सुबह से ही जंतर-मंतर के आसपास युवाओं की भीड़ जुटने लगी थी। कई लोग हाथों में पोस्टर और बैनर लिए नजर आए, जबकि कुछ समूहों में बैठकर अपनी मांगों और मुद्दों पर चर्चा करते दिखाई दिए। प्रदर्शन को लेकर पहले से ही चर्चाएं तेज थीं और इसी वजह से मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शन के केंद्र में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके रहे, जिनके दिल्ली पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट साझा किए जा रहे थे। इससे पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि एयरपोर्ट पर उन्हें रोका जा सकता है या किसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि बाद में सामने आई तस्वीरों में उन्हें एयरपोर्ट से बाहर निकलते और वाहन से आगे बढ़ते देखा गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके समर्थकों के बीच उत्साह बढ़ गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभिजीत दीपके सीधे प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े, जहां पहले से मौजूद युवा उनका इंतजार कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध और जन आंदोलनों का केंद्र रहा है। संसद मार्ग के करीब स्थित यह स्थान कई बड़े आंदोलनों का गवाह बन चुका है। ऐसे में कॉकरोच जनता पार्टी का यहां प्रदर्शन करना भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारी लगातार गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चलता दिखाई दिया। युवाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी का नाम और उसकी शैली शुरू से ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रही है। व्यंग्य और मीम संस्कृति के जरिए शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे एक संगठित विरोध अभियान में बदलता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके समर्थक खुद को “कॉकरोच” कहकर संबोधित करते हैं और व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों को लेकर इस समूह की सक्रियता बढ़ी है। यही वजह है कि जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन को केवल एक इंटरनेट ट्रेंड के रूप में नहीं देखा जा रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौके पर मौजूद कई युवाओं का कहना था कि वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की मांग को लेकर यहां पहुंचे हैं। कुछ छात्रों ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी भी देखने को मिली। कई लोग रात में ही दिल्ली पहुंच गए थे ताकि सुबह से कार्यक्रम में शामिल हो सकें। जंतर-मंतर के आसपास दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई और माहौल लगातार सक्रिय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी सामाजिक या राजनीतिक अभियान की वास्तविक ताकत तब सामने आती है जब वह सोशल मीडिया की सीमाओं को पार कर जमीन पर लोगों को जोड़ने लगे। कॉकरोच जनता पार्टी के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या यह अभियान आगे चलकर एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले पाएगा या फिर यह सीमित दायरे तक ही रहेगा। फिलहाल इतना साफ दिखाई दे रहा है कि इस अभियान ने युवाओं के एक वर्ग का ध्यान अपनी ओर खींचा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनभर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नारेबाजी और चर्चा का दौर जारी रहा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसके मुद्दों को राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर कितनी गंभीरता से लिया जाता है। फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ ने इतना संकेत जरूर दे दिया है कि सोशल मीडिया से शुरू हुई यह आवाज अब वास्तविक दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:03:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में मनरेगा घोटाले का खुलासा, RTI कार्यकर्ता के नाम फर्जी मस्टर रोल जारी</title>
                                    <description><![CDATA[बिना तालाब निर्माण और मजदूरी के खाते में भुगतान दर्शाया गया, जांच में सचिव, उपयंत्री और सहायक यंत्री दोषी पाए गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a1a99b6636e4/article-54557"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/रीवा-में-मनरेगा-योजना-के-तहत-बड़ा-फर्जीवाड़ा-उजागर.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा जिले में मनरेगा योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गंगेव जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले कैथा गांव में एक आरटीआई कार्यकर्ता के नाम पर बिना उसकी जानकारी और सहमति के फर्जी मस्टर रोल जारी कर रोजगार दर्शाने का मामला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति के नाम पर मजदूरी दिखाई गई, उसके खेत में स्वीकृत कार्य शुरू तक नहीं हुआ था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसे रोजगार प्राप्त होना और भुगतान दर्ज कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद जिला पंचायत स्तर पर जांच कराई गई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राम कैथा निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में उनके खेत में तालाब निर्माण के लिए करीब 3.85 लाख रुपए की तकनीकी स्वीकृति दी गई थी। योजना के तहत खेत तालाब का निर्माण होना था, लेकिन लंबे समय तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। निर्माण कार्य नहीं होने से परेशान होकर उन्होंने 21 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई और काम शुरू कराने की मांग की। बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ करने के बजाय पंचायत स्तर पर एक अलग ही रास्ता अपनाया गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने शिकायत का निराकरण दिखाने के लिए हितग्राही के नाम पर ही फर्जी मस्टर रोल तैयार कर दिए और रिकॉर्ड में रोजगार दर्शा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला पंचायत की मनरेगा शाखा द्वारा कराई गई जांच में यह सामने आया कि मनरेगा पोर्टल पर शिवानंद द्विवेदी का नाम कई मस्टर रोल में दर्ज किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें करीब 20 दिनों तक रोजगार प्राप्त होना दर्शाया गया। हैरानी की बात यह रही कि उनके जॉब कार्ड पर मजदूरी भुगतान का विवरण भी दर्ज कर दिया गया था। दस्तावेजों में एक राशि का भुगतान और कुछ राशि बकाया होना भी प्रदर्शित किया गया। जबकि शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्होंने न तो किसी प्रकार की मजदूरी की और न ही उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया गया। जब जांच टीम ने पूरे रिकॉर्ड का परीक्षण किया तो कई विसंगतियां सामने आईं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के बाद जिला पंचायत के मनरेगा लेखाधिकारी ने संबंधित दस्तावेजों और पोर्टल की प्रविष्टियों का मिलान किया। इस दौरान पाया गया कि जिस निर्माण कार्य के नाम पर मजदूरी दर्शाई गई, उस स्थल पर वास्तविक रूप से कोई कार्य ही नहीं हुआ था। जब तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव से मजदूरी के प्रमाण मांगे गए तो वे कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। न तो कार्यस्थल की तस्वीरें उपलब्ध कराई जा सकीं और न ही मजदूरी मांगने से जुड़े कोई आवेदन या हस्ताक्षरयुक्त मस्टर रोल प्रस्तुत किए गए। इससे जांच अधिकारियों का संदेह और गहरा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि बिना काम हुए ही तकनीकी स्तर पर कार्य का मूल्यांकन और सत्यापन भी कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार उपयंत्री और सहायक यंत्री द्वारा ई-एमबी प्रणाली में ऑनलाइन सत्यापन किया गया, जबकि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि यदि स्थल पर काम नहीं हुआ था तो उसका मूल्यांकन और ऑनलाइन प्रमाणन कैसे किया गया, यह अपने आप में गंभीर अनियमितता का संकेत है। जांच में इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ग्राम पंचायत कैथा के सचिव महेश पटेल, तत्कालीन उपयंत्री प्रवीण पाण्डेय और तत्कालीन सहायक यंत्री निखिल मिश्रा को जिम्मेदार माना गया है। 31 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दी गई है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर भी इसकी समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस खुलासे के बाद जिले के मनरेगा विभाग में हलचल तेज हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता स्वयं आरटीआई कार्यकर्ता नहीं होता तो शायद यह मामला कभी सामने नहीं आता। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के ठिकानों पर छापा, 80 लाख कैश बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के घर और ऑफिस पर छापेमारी में 80 लाख रुपये कैश और राहत सामग्री बरामद हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-dipankar-bhattacharyas-premises-raided-80-lakh-cash-recovered/article-54230"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/dipankar-bhattacharya-tmc-leader-raids-₹80-lakh-cash.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में दीपांकर भट्टाचार्य के कुछ ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद हुए। ये कार्रवाई सोमवार देर रात की गई। सुनने में आया है कि दीपांकर भट्टाचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले बादुरिया म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सरकारी राहत सामग्री के गबन और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसी वजह से ये छापेमारी की गई। पुलिस ने उनके घर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टी ऑफिस और एक कंप्यूटर सेंटर की तलाशी ली। कार्रवाई के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आज उन्हें कोर्ट में पेश करने की तैयारी हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब पुलिस टीम कंप्यूटर सेंटर पहुंची तो वहां ताला लगा था। इसके बाद अधिकारियों को ताला तोड़कर अंदर जाना पड़ा। तलाशी के दौरान अलग-अलग जगहों से बड़ी मात्रा में कैश मिल गया। कुछ सूत्रों का कहना है कि मौके पर बरामद की गई रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला। पुलिस को राहत सामग्री भी मिली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कथित तौर पर सरकारी वितरण के लिए रखा गया था। अधिकारियों के मुताबिक पूरे मामले में दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां अब देख रही हैं कि ये रकम कहां से आई और इसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है। सरकार बदलने के बाद कई स्थानीय नेताओं और अधिकारियों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता दिखा है। इस क्रम में यह कार्रवाई भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इलाके में देर रात तक पुलिस की मौजूदगी बनी रही और आसपास के लोग इस मामले पर चर्चा करते रहे। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि छापेमारी कई घंटों तक चली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुलिस टीम लगातार दस्तावेजों की जांच करती रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं मुर्शिदाबाद जिले में प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता पुलिस के डीसी रैंक अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर दोबारा छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि ईडी की टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ सुबह उनके घर पहुंची। अधिकारियों ने घर के आस-पास और परिसर में मौजूद तालाब तक की निगरानी की है। सूत्रों के अनुसार घर के चारों ओर लगे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरों की भी छानबीन की जा रही है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों मामलों में जांच जारी है और एजेंसियां दस्तावेजों के आधार पर अगली कार्रवाई कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-dipankar-bhattacharyas-premises-raided-80-lakh-cash-recovered/article-54230</link>
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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में पटवारी रंगे हाथ हुआ गिरफ्तार, 5 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने किया ट्रैप</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा में लोकायुक्त ने पटवारी मनोज पांडे को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते ट्रैप किया। जमीन सीमांकन के बदले 15 हजार की मांग की गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/patwari-arrested-red-handed-in-rewa-lokayukta-traps-him-taking-bribe/article-53600"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rewa-lokayukta-bribery-scandal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रीवा में लोकायुक्त ट्रैप की बड़ी कार्रवाई सामने आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां खजुआ कला हल्के में पदस्थ एक पटवारी को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया। यह कार्रवाई शुक्रवार 16 मई 2026 को राजीव मार्ग स्थित निराला नगर इलाके में की गई। लोकायुक्त टीम की इस कार्रवाई के बाद पूरे राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि मामला जमीन के सीमांकन से जुड़ा हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पटवारी द्वारा लगातार पैसे की मांग की जा रही थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतकर्ता कमलेश पटेल निवासी ग्राम खजुआ कला ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में 13 मई को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके पिता की जमीन के सीमांकन विवाद को निपटाने और सीमा को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">बरकरार</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">रखने के एवज में हल्का पटवारी मनोज पांडे द्वारा 15 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। मामला सामने आने के बाद लोकायुक्त संगठन ने सत्यापन कराया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें आरोप सही पाए गए। इसी दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पटवारी पहले ही 10 हजार रुपये ले चुका था और बाकी 5 हजार की मांग लगातार कर रहा था। यह पूरा मामला रीवा लोकायुक्त ट्रैप कार्रवाई की वजह बना।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। योजना के तहत 16 मई को जैसे ही आरोपी पटवारी मनोज पांडे ने रिश्वत की अंतिम किश्त 5 हजार रुपये ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीम ने मौके पर ही उसे दबोच लिया। कार्रवाई राजीव मार्ग क्षेत्र में की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जैसे ही पैसे का लेन-देन पूरा हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकायुक्त टीम ने तुरंत घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आरोपी की पहचान मनोज पांडे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिता पी.एन. पांडे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र 52 वर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवासी वार्ड क्रमांक 9</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव मार्ग निराला नगर के रूप में हुई है। वह वर्तमान में खजुआ कला हल्के में पदस्थ था। लोकायुक्त ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7(क) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कार्रवाई का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया सहित 12 सदस्यीय टीम और स्वतंत्र गवाह भी मौजूद रहे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस तरह की ट्रैप कार्रवाई से व्यवस्था पर दबाव बनता है। लोकायुक्त संगठन ने भी स्पष्ट कहा है कि यदि किसी भी शासकीय कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है तो नागरिक सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले में आगे और खुलासे की संभावना जताई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 14:59:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में बड़ा घोटाला, 1.5 करोड़ की 92 टन गैस हुई चोरी, सुरक्षा करने वाला ही निकला मास्टरमाइंड</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ रुपये की 92 टन LPG गैस घोटाले का खुलासा। जिला खाद्य अधिकारी समेत तीन गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज और साजिश की जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-scam-in-chhattisgarh-92-tonnes-of-gas-worth-rs/article-53265"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t132924.830.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में एलपीजी गैस में हुए बड़े घोटाले ने प्रशासनिक विभाग में खलबली मचा दी है। यह मामला करीब 1.5 करोड़ रुपये की 92 टन एलपीजी गैस के कथित अवैध निपटान से जुड़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जिला खाद्य अधिकारी (</span>DFO) <span lang="hi" xml:lang="hi">अजय यादव मुख्य आरोपी हैं। पुलिस ने इस मामले में अजय यादव के साथ गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर के निवासी मनीष चौधरी को भी गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सारा खेल कुछ दिनों से काफी योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्य सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठाते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस सूत्रों और शुरुआती जांच के हिसाब से यह मामला दिसंबर 2025 में जब्त किए गए छह एलपीजी टैंकरों से जुड़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करते वक्त रोका गया था। बताया गया है कि 23 मार्च को अजय यादव और उनके साथियों ने इस गैस को बाजार में बेचने की योजना बनाई। गर्मी के बहाने सुरक्षा कारणों से इन टैंकरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की अनुमति कोर्ट से ली गई और 30 मार्च को इन्हें ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दिया गया। लेकिन यहीं से सारा मामला बदल गया। आरोप लग रहा है कि मात्र एक हफ्ते के भीतर इन टैंकरों से लगभग 92 मीट्रिक टन गैस संदिग्ध तरीके से निकालकर उसे अवैध रूप से बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में दस्तावेजों में हेराफेरी और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की बात भी सामने आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जांच टीम को शक और गहरा हुआ।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने मामले को दबाने के लिए फर्जी वजन रिकॉर्ड और जाली पंचनामा तैयार किए थे। ये देखना चौंकाने वाला है कि कई दस्तावेज कथित तौर पर उस समय के पहले ही तैयार कर लिए गए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब टैंकरों का वास्तविक वजन नहीं हुआ था। शुरुआत में इसे गैस लीकेज का मामला दिखाने की कोशिश भी की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। कॉल डिटेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल रिकॉर्ड और वैज्ञानिक पूछताछ के आधार पर पुलिस ने करीब 40 सदस्यीय टीम बनाकर इस पूरे नेटवर्क की जांच की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद इस रैकेटका खुलासा हुआ। आरोप है कि इस डील में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव की करीब 50 लाख रुपये की अवैध कमाई होने वाली थी। फिलहाल पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल थे और क्या इससे पहले भी ऐसी गतिविधियां हुई थीं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक सिस्टम में गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में एलपीजी गैस की हेराफेरी कैसे हुई और निगरानी व्यवस्था में कहां कमी रह गई। जांच अभी चल रही है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 13:42:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा तहसील कार्यालय में रिश्वत लेते बाबू गिरफ्तार, 80 हजार मांगने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के त्योंथर तहसील कार्यालय में लोकायुक्त ने बाबू अनिल त्रिपाठी को 9500 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। 80 हजार मांगने का आरोप।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/babu-arrested-for-taking-bribe-in-rewa-tehsil-office-accused/article-52919"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t141933.899.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रीवा जिले के त्योंथर तहसील कार्यालय में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लोकायुक्त की टीम ने एक बाबू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी बाबू की पहचान अनिल कुमार त्रिपाठी के रूप में हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो तहसील कार्यालय में पदस्थ बताया जा रहा है। लोकायुक्त टीम ने उसे 9500 रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बाबू पर एक जमीन संबंधी प्रकरण में फैसला पक्ष में करवाने और बेदखली की कार्रवाई रोकने के नाम पर 80 हजार रुपए मांगने का आरोप है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता अजय मिश्रा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो त्योंथर तहसील के ग्राम डाढाकला के रहने वाले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ समय से तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। उनका कहना है कि मामले के निराकरण के लिए लगातार पैसों की मांग की जा रही थी। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेदखल करने का डर दिखाकर दबाव भी बनाया जा रहा था। परेशान होकर उन्होंने 4 मई को लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया था कि तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू अनिल त्रिपाठी द्वारा काम के बदले रिश्वत मांगी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोकायुक्त संगठन ने शिकायत मिलने के बाद मामले का सत्यापन कराया। अधिकारियों के अनुसार जांच में रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद पूरी कार्रवाई की योजना बनाई गई। गुरुवार 7 मई को लोकायुक्त रीवा की टीम ने तहसीलदार कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की। इसी दौरान आरोपी बाबू को 9500 रुपए लेते हुए पकड़ लिया गया। कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि कुछ देर के लिए कार्यालय में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। वहां मौजूद कर्मचारी भी हैरान रह गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक आरोपी शुरुआत में पूरी रकम चाहता था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में किश्तों में पैसे लेने की बात सामने आई। लोकायुक्त टीम काफी देर से कार्यालय के आसपास निगरानी कर रही थी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय रकम आरोपी को सौंपी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीम ने तुरंत दबिश देकर उसे पकड़ लिया। मौके पर जरूरी दस्तावेजी कार्रवाई भी की गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोकायुक्त रीवा के उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने बताया कि शिकायत का सत्यापन कराने के बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की गई थी। आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7(क) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कार्रवाई में निरीक्षक एस. राम मरावी सहित 12 सदस्यीय टीम शामिल रही। स्वतंत्र शासकीय गवाहों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया पूरी की गई। बताया जा रहा है कि लोकायुक्त संगठन ने इस कार्रवाई के बाद आम लोगों से भी अपील की है कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी काम के बदले पैसे मांगता है तो तत्काल शिकायत करें।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उधर शिकायतकर्ता अजय मिश्रा का कहना है कि वे लगातार मानसिक दबाव में थे। उन्हें डर था कि अगर पैसे नहीं दिए तो जमीन से बेदखल करने की कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि कई बार दफ्तर आने-जाने के बाद भी काम नहीं हुआ और आखिरकार मजबूर होकर लोकायुक्त की मदद लेनी पड़ी। फिलहाल इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:47:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>चीन में भ्रष्टाचार पर हुई बड़ी कार्रवाई, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को दी गई मौत की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व रक्षा मंत्री वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा दी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सख्त कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-action-taken-against-corruption-in-china-two-former-defense/article-52920"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t143051.761.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चीन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने सबसे सख्त फैसलों में से एक लेते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद चीन की राजनीति और सैन्य गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों नेताओं को अलग-अलग मामलों में दोषी पाया गया था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस पूरे मामले पर खुद नजर रखी थी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">जीरो टॉलरेंस</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति के तहत कार्रवाई को मंजूरी दी गई। चीन में लंबे समय से सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इतने बड़े स्तर पर पूर्व रक्षा मंत्रियों के खिलाफ यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक वी फेंघे को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराया था। वहीं ली शांगफू पर रिश्वत लेने के साथ रिश्वत देने के भी आरोप साबित हुए। अदालत की सुनवाई के बाद दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। ली शांगफू को कुछ समय पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया गया था। वह 2024 में अचानक सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब हो गए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद उनके खिलाफ जांच की चर्चा शुरू हुई थी। बाद में उन पर आधिकारिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। वी फेंघे इससे पहले 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे थे। उनके बाद ली शांगफू को यह जिम्मेदारी दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनका कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। दोनों नेताओं का संबंध चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की मिसाइल और रॉकेट फोर्स से रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे चीन की सैन्य ताकत का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों पूर्व रक्षा मंत्री कभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते थे। दोनों केंद्रीय सैन्य आयोग में अहम भूमिका निभा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार शी जिनपिंग ने खुद वी फेंघे को रक्षा मंत्री बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई से यह संकेत गया है कि चीन में भ्रष्टाचार के मामलों में अब शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को भी राहत नहीं मिल रही। बीते कुछ वर्षों में चीन की सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाया गया है। कुछ मामलों में जांच अभी भी जारी बताई जा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि चीन की मिसाइल फोर्स के भीतर बड़े स्तर पर गड़बड़ियों और आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान के तहत अब तक लाखों सरकारी अधिकारियों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैन्य अफसरों और पार्टी नेताओं पर कार्रवाई हो चुकी है। चीन की सरकार इसे व्यवस्था सुधारने की कोशिश बता रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी मानते हैं। हालांकि चीन की तरफ से इस पूरे मामले पर यही कहा गया है कि कानून सभी के लिए बराबर है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:47:34 +0530</pubDate>
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