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                <title>Military News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ईरान का कुवैत–बहरीन में 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[खामेनेई का अमेरिका-इजराइल पर तीखा बयान, हर हमले का जवाब देने की चेतावनी, पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/irans-attack-on-8-american-bases-in-kuwait-bahrain-increases-tension/article-57260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-attack-kuwait-bahrain-us-bases.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े तनाव की चपेट में आता दिख रहा है। रविवार को ईरान की ओर से दावा किया गया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की तरफ से ईरान के ठिकानों पर की गई “दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई” के जवाब में की गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका या कुवैत और बहरीन की सरकारों की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जरूर बढ़ा दिया गया है। इन हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने भी हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद कुछ इलाकों में हलचल और दहशत जैसा माहौल देखने को मिला, हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि मामला तेजी से बढ़ते टकराव की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p>ईरान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह हमला एक जवाबी कार्रवाई थी और इसका मकसद अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का प्रतिकार करना था। ईरानी सेना ने दावा किया कि यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया गया। ईरान का यह भी कहना है कि अगर आगे भी उसकी सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह और सख्त जवाब देगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है और कूटनीतिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया हमलों को लेकर जिस तरह सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं और उन पर गर्व जताया है, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है। खामेनेई ने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान का हिसाब लिया जाएगा और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका यह बयान काफी आक्रामक माना जा रहा है और इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। खामेनेई पहले भी अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका बयान ज्यादा तीखा और सीधा माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि वह पहले हुए एक कथित अमेरिका-इजराइल हमले में घायल हुए थे, जिसके बाद से वे किसी सुरक्षित और गुप्त स्थान पर रह रहे हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरान के अंदर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में मौजूद सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। कुवैत और बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पश्चिम एशिया में पहले से ही कई तरह के तनाव मौजूद हैं और ऐसे में यह नया घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना सकता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच इस तरह के हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला बढ़ता रहा तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। पहले से ही इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। ऐसे में यह नया टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका में B-52 विमान हादसा, आठ लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयरबेस पर टेकऑफ के तुरंत बाद भीषण दुर्घटना, रूस में भी समान दिन Tu-22M3 क्रैश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/b-52-plane-crash-in-america-kills-eight-people/article-56040"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/b-52-crash.jpg" alt=""></a><br /><div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर सोमवार की सुबह एक बड़ा सैन्य हादसा सामने आया, जब अमेरिकी वायुसेना का B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान एक नियमित परीक्षण मिशन पर था और उड़ान भरते ही वह संतुलन खो बैठा और रनवे के करीब ही आग के गोले में बदल गया। हादसा इतना तेज था कि आसपास मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अमेरिकी वायुसेना ने बाद में पुष्टि की कि विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई है। यह घटना दक्षिणी कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान क्षेत्र में स्थित इस महत्वपूर्ण एयरबेस पर हुई, जहां आमतौर पर परीक्षण और प्रशिक्षण उड़ानें होती रहती हैं। हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार उठता देखा गया, जो कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों और सैन्य कर्मियों के अनुसार विस्फोट के बाद रनवे के आसपास का हिस्सा पूरी तरह जलकर काले मलबे में तब्दील हो गया। कुछ वीडियो फुटेज में देखा गया कि आग इतनी भीषण थी कि विमान का लगभग कोई बड़ा ढांचा पहचान में नहीं आ रहा था। अधिकारियों ने तुरंत क्षेत्र को सील कर दिया और सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। एयर फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह हादसा बेहद गंभीर था और इसे “unsurvivable” यानी बचाव की कोई संभावना नहीं वाला हादसा माना गया है। इस घटना ने अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था और पुराने रणनीतिक विमानों की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विमान में मौजूद आठ लोगों में सैन्य अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और रक्षा ठेकेदार शामिल थे। इनमें विमान निर्माता कंपनी बोइंग के दो कर्मचारी भी बताए जा रहे हैं, जो परीक्षण प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। एयरबेस प्रशासन के मुताबिक यह उड़ान रडार मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत की जा रही थी, जिसका उद्देश्य पुराने बमवर्षक विमानों की तकनीकी क्षमता को अपडेट करना था। लेकिन टेकऑफ के तुरंत बाद ही कुछ तकनीकी गड़बड़ी या परिचालन त्रुटि के कारण विमान नीचे गिर गया। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह हादसा तकनीकी खराबी, इंजन फेल्योर या किसी अन्य कारण से हुआ है। अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। घटना के बाद एडवर्ड्स एयरबेस पर सभी गतिविधियां रोक दी गईं और रनवे को भारी नुकसान के चलते बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच टीमों को मलबे के निरीक्षण के लिए भेजा गया है, लेकिन आग की तीव्रता के कारण कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो चुके हैं। यह भी सामने आया है कि B-52 विमान अमेरिकी वायुसेना का एक पुराना लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बमवर्षक है, जिसे दशकों से लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। यह विमान भारी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता रखता है और लंबी दूरी तक बिना रुके उड़ान भर सकता है। इसके बावजूद इसकी उम्र और तकनीकी संरचना को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दिन दुनिया के दूसरे हिस्से में रूस से भी एक समान सैन्य घटना की खबर आई, जहां Tu-22M3 रणनीतिक बॉम्बर विमान साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार विमान में सवार चालक दल ने समय रहते पैराशूट से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली और उन्हें किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है। यह विमान एक घने जंगल वाले इलाके के पास गिरा, जहां स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं तुरंत पहुंचीं। राहत की बात यह रही कि जमीन पर किसी नागरिक या बुनियादी ढांचे को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। रूसी अधिकारियों ने बताया कि विमान बिना किसी युद्धक भार के नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में विमान को तेजी से नीचे गिरते और फिर आग के बड़े गुबार में बदलते देखा गया, हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना स्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया गया है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ही दिन अमेरिका और रूस के रणनीतिक बमवर्षक विमानों से जुड़ी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। दोनों ही विमान अपने-अपने देशों की रणनीतिक ताकत के प्रतीक माने जाते हैं और दशकों से सेवा में हैं। B-52 अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ माना जाता है, जबकि Tu-22M3 रूस की लंबी दूरी की हवाई हमले की क्षमता का अहम हिस्सा है। हालांकि दोनों देशों ने पिछले कई वर्षों से इन विमानों को आधुनिक बनाने की कोशिश की है, फिर भी इनके पुराने डिजाइन और लगातार बढ़ते परिचालन दबाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे हादसे न केवल तकनीकी खामियों की ओर इशारा करते हैं बल्कि यह भी दिखाते हैं कि पुराने प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कितनी जोखिमभरी हो सकती है। </p>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले आर्मी चीफ, 30 जून से संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने नियुक्ति को दी मंजूरी, मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद संभालेंगे भारतीय सेना की जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lieutenant-general-dheeraj-seth-will-be-the-next-army-chief/article-55856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhiraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है और उसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। इस घोषणा के बाद सैन्य और रणनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धीरज सेठ फिलहाल उप सेना प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने इसी वर्ष 1 अप्रैल को यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना में उप सेना प्रमुख का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद पर रहते हुए धीरज सेठ सेना के संचालन, रणनीतिक योजनाओं, सैन्य तैयारियों और आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है और धीरज सेठ इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में सेना की कई मौजूदा योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है। उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी सीमा और रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य तैनाती तक, उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया है। लंबे अनुभव और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने करियर के दौरान धीरज सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं। सेना के भीतर यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इन कमानों के तहत बड़े सैन्य क्षेत्र और रणनीतिक संचालन आते हैं। वे उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में कई अहम पदों पर कार्य किया और सेना की क्षमता वृद्धि तथा भविष्य की रणनीतिक जरूरतों से जुड़े कार्यक्रमों में भी योगदान दिया। धीरज सेठ का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अंगोला में भी सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मिशन में काम करने का अनुभव किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे विभिन्न देशों की सेनाओं के साथ समन्वय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है। यही अनुभव उन्हें एक व्यापक दृष्टिकोण वाला सैन्य अधिकारी बनाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शैक्षणिक दृष्टि से भी धीरज सेठ का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी और देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में उच्च प्रशिक्षण हासिल किया। वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में उन्होंने अध्ययन किया। इसके अलावा फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी पूरा किया। उनकी उपलब्धियों की सूची भी काफी लंबी है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कई बार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें प्रतिष्ठित ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान मिला था। जूनियर कमांड कोर्स सहित कई सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें अपने कोर्स का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल भी प्रदान किया गया था। यह उपलब्धियां उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धीरज सेठ सेना की परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सेना की दो प्रमुख और महत्वपूर्ण संरचनाओं XXI स्ट्राइक कोर तथा III कोर की कमान संभाली थी। ऐसे में सैन्य वातावरण और अनुशासन धीरज सेठ के जीवन का हिस्सा बचपन से ही रहा है। माना जाता है कि परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा धीरज सेठ खेलों में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद है। उनके सहयोगियों के अनुसार वे अनुशासित जीवनशैली और संतुलित नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी कोमल सेठ विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। भारतीय सेना ऐसे समय में नए नेतृत्व का स्वागत करने जा रही है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। सीमा सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक, साइबर सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सेना के सामने हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:24 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट सुरक्षित; ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री सुरक्षा मिशन के दौरान हुआ हादसा, अमेरिकी सेना ने शुरू की जांच; मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच घटना ने खींचा दुनिया का ध्यान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-apache-helicopter-crashes-near-the-strait-of-hormuz-pilot/article-55453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-helicopter-crash.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका का एक अपाचे हेलिकॉप्टर होर्मुज स्ट्रेट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना सोमवार की बताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेलिकॉप्टर क्रैश होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई है। हालांकि दुर्घटना के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल था और नियमित ऑपरेशन के दौरान हादसे का शिकार हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा चुका है। अपाचे हेलिकॉप्टरों के अलावा MQ-9 रीपर ड्रोन, F/A-18 और F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी लगातार निगरानी और सुरक्षा मिशन में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि अपाचे हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल खासतौर पर छोटी हथियारबंद नौकाओं और ड्रोन खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस हेलिकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण गिरा या फिर किसी बाहरी हमले का शिकार हुआ। हालांकि अभी तक किसी हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य इकाइयों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच ईरान और इजराइल के बीच फिर से बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। करीब दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद हालात कुछ सामान्य होते दिखाई दे रहे थे, लेकिन पिछले 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इजराइल की ओर करीब 30 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके जवाब में इजराइली सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तनाव बढ़ने के बाद भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। भारतीय दूतावास ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं और सुरक्षा स्थिति को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर यमन के हूती विद्रोहियों ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। हूती समूह ने रेड सी में इजराइल से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने रूट्स की समीक्षा कर रही हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। तेल बाजार पर भी इस तनाव का सीधा असर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों के दाम ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।  यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेदों की खबरें भी चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने नेतन्याहू से ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई से बचने को कहा है। हालांकि दोनों देशों की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ट्रम्प ने इतना जरूर कहा कि भविष्य में ईरान के साथ जो भी समझौता होगा, उसमें सभी पक्षों को सहयोग करना होगा। अमेरिकी हेलिकॉप्टर हादसे और ईरान-इजराइल तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत को मिला नया CDS, लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि को नया CDS नियुक्त किया। जानिए उनका सैन्य करियर और CDS पद की अहमियत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-gets-new-cds-lieutenant-general-ns-raja-subramani-will/article-53012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t175604.209.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कार्यभार संभालने की तारीख से अगले आदेश तक सैन्य मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। इस नियुक्ति के बाद रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े हलकों में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है। मौजूदा </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को खत्म हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एन एस राजा सुब्रमणि यह जिम्मेदारी संभालेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि लंबे समय से सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। फिलहाल वह 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के तौर पर तैनात हैं। इससे पहले उन्होंने सेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में भी काम किया। जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक वह इस पद पर रहे। वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक उन्होंने केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाली थी। सेना के भीतर रणनीतिक योजना और ऑपरेशनल मामलों में उनका अनुभव काफी बड़ा माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद देश की सुरक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अधिकारी थल सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु सेना और नौसेना के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता है। रक्षा मामलों में सरकार को सलाह देने के साथ-साथ संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार करने में भी </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">की बड़ी भूमिका होती है। भारत में इस पद की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इसके बाद देश के पहले </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल बिपिन रावत बने थे। हालांकि दिसंबर 2021 में हेलिकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई थी। बाद में जनरल अनिल चौहान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बताया जाता है कि कारगिल युद्ध के बाद ही इस पद की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की गई थी। उस दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद रक्षा मामलों के जानकारों और समितियों ने सुझाव दिया था कि एक ऐसा सैन्य अधिकारी होना चाहिए जो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रख सके और बड़े फैसलों में एकीकृत दृष्टिकोण दे सके। इसी सोच के बाद </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद बनाया गया। अब लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि के सामने भी यही बड़ी जिम्मेदारी होगी कि बदलते सुरक्षा हालात में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और मजबूत हो सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:26:02 +0530</pubDate>
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