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                <title>Defence News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, INS त्रिकंड ने समुद्री लुटेरों की साजिश की नाकाम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर हमले की कोशिश भारतीय नौसेना ने समय रहते विफल कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-navys-major-operation-in-the-gulf-of-aden-ins/article-57707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ins-trikand.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। बुधवार रात भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर समुद्री डाकुओं ने कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड की त्वरित कार्रवाई के चलते उनका मंसूबा सफल नहीं हो सका। नौसेना के पहुंचते ही लुटेरे मौके से फरार हो गए। इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष कमांडो दस्ते मार्कोस (MARCOS) ने जहाज पर चढ़कर पूरी तलाशी ली और जहाज को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> MV Golden Arsenal एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज है, जो 1 जुलाई को यमन के अदन बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। जहाज पर कुल 21 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अदन की खाड़ी में डीजिबूती से करीब 300 नॉटिकल मील पूर्व-उत्तर-पूर्व की दिशा में यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों ने तेज रफ्तार छोटी नौकाओं के जरिए जहाज के करीब पहुंचकर उस पर चढ़ने की कोशिश की। हालात अचानक बिगड़ते देख चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया और खुद को जहाज के सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। चालक दल ने सुरक्षित स्थान से रेडियो संचार प्रणाली के जरिए तत्काल मदद की गुहार लगाई। संकट संदेश मिलते ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंड बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। जैसे ही युद्धपोत हमलावरों के करीब पहुंचा, समुद्री लुटेरों ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए वहां से भागना ही बेहतर समझा। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय युद्धपोत की तेज प्रतिक्रिया और उसकी मौजूदगी ने संभावित समुद्री डकैती की घटना को पूरी तरह विफल कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस कमांडो हेलीकॉप्टर और तेज नौकाओं की मदद से व्यापारी जहाज पर पहुंचे। कमांडो ने जहाज के हर हिस्से की गहन तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हमलावर जहाज पर छिपा न हो। जांच पूरी होने के बाद जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। नौसेना ने बताया कि चालक दल के सभी 21 सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा आगे जारी रखने की स्थिति में है। जहाज पर मौजूद कार्गो भारत के लिए रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कार्गो की प्रकृति या उसके गंतव्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है, विशेषकर उन समुद्री मार्गों पर जहां समुद्री डकैती की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब INS त्रिकंड ने समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया हो। बीते दो महीनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें इस युद्धपोत ने समय रहते हस्तक्षेप कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षित बचाया है। इससे पहले 19 जून को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Fareeda से संकट संदेश मिलने पर भी INS त्रिकंड ने तत्काल कार्रवाई की थी और संभावित समुद्री डकैती को विफल कर दिया था। उस समय भी भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा 27 मई को भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने भी पश्चिमी हिंद महासागर में MV Mashallah नामक व्यापारी जहाज के पास संदिग्ध समुद्री डकैती की गतिविधियों को विफल किया था। उस अभियान में नौसेना ने हेलीकॉप्टर, निगरानी उपकरणों और बोर्डिंग टीम की मदद से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली थी। समय पर की गई कार्रवाई के कारण संभावित खतरा टल गया और व्यापारी जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना लगातार यह दोहराती रही है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्राथमिक सुरक्षा साझेदार' और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का उद्देश्य केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त, जनरल धीरज सेठ बने भारतीय सेना के नए प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाला। सेवानिवृत्ति से पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना की उपलब्धियों और ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/general-upendra-dwivedi-retired-general-dheeraj-seth-becomes-the-new/article-57410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/general-dheeraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय सेना में मंगलवार को नेतृत्व परिवर्तन का महत्वपूर्ण दिन रहा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपने कार्यकाल को पूरा करने के बाद आर्मी चीफ के पद से सेवानिवृत्त हो गए। पद छोड़ने से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने सेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर चुनौती का मजबूती, संतुलन और पूरी सतर्कता के साथ सामना किया। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी मोर्चों पर सेना ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप खुद को लगातार तैयार रखा। अपने विदाई संबोधन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारी, समन्वय और त्वरित कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत सेना की तैनाती पूरी मजबूती के साथ जारी रही, जबकि पश्चिमी मोर्चे पर भी सैनिकों ने अनुशासन और संयम के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति फिलहाल स्थिर जरूर है, लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और सीमा पर चौकसी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने साझा रणनीति, बेहतर समन्वय और आपसी विश्वास के साथ कई अहम जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने इस दौरान जवानों, अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेना की सफलता केवल नेतृत्व की नहीं बल्कि प्रत्येक सैनिक की निष्ठा, समर्पण और अनुशासन का परिणाम होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी भारतीय सेना इसी पेशेवर भावना के साथ देश की सुरक्षा करती रहेगी। सेवानिवृत्ति के साथ ही जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाल लिया। करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल सेठ को भारतीय सेना का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उन्होंने दिसंबर 1986 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आर्मी चीफ बनने से पहले वह उप सेना प्रमुख के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। सैन्य रणनीति, सीमा प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में प्रमुख स्थान हासिल रहा है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल धीरज सेठ सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अपने सैन्य करियर में XXI स्ट्राइक कोर और III कोर जैसी महत्वपूर्ण सैन्य संरचनाओं की कमान भी संभाली थी। ऐसे माहौल में पले-बढ़े जनरल धीरज सेठ ने भी सेना में लंबी और सफल सेवा दी है। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा उन्हें खेलों में भी गहरी रुचि है। टेनिस और गोल्फ उनके पसंदीदा खेलों में शामिल हैं। उनकी पत्नी का नाम कोमल सेठ है और वे कई सामाजिक एवं सैन्य कल्याण गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं। जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं जब भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन युद्ध और संयुक्त सैन्य अभियानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नए सेना प्रमुख के सामने पारंपरिक सैन्य तैयारियों के साथ भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सेना को और अधिक सक्षम बनाने की जिम्मेदारी होगी। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पद छोड़ते समय नए सेना प्रमुख के प्रति पूरा विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैनिक और सक्षम नेता हैं। उन्हें भरोसा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए नई उपलब्धियां हासिल करेगी। नेतृत्व परिवर्तन की इस प्रक्रिया को भारतीय सेना की मजबूत संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, जहां अनुभव, अनुशासन और निरंतरता के साथ जिम्मेदारियों का हस्तांतरण किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर होगा अमर सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सेना और वायुसेना के छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से जारी, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' में होंगे दर्ज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/for-the-first-time-the-names-of-six-martyrs-of/article-57015"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/operation-sindoor-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैन्य कर्मियों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उन जवानों की सूची जारी की है, जिन्होंने मई 2025 में चलाए गए इस सैन्य अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। इन सभी वीर सैनिकों के नाम अब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' पर हमेशा के लिए अंकित किए जाएंगे। इसे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े शहीदों को पहली औपचारिक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि माना जा रहा है। सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार शहीद होने वालों में भारतीय सेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह तथा भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इन छह सैन्यकर्मियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके नाम अब उन हजारों वीर सैनिकों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिनकी स्मृति राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए सुरक्षित रखी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र' स्वतंत्रता के बाद देश के लिए शहीद हुए सैनिकों को समर्पित है। यहां ग्रेनाइट की गोलाकार दीवारों पर प्रत्येक शहीद सैनिक का नाम, रैंक और यूनिट अंकित की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह जवानों के नाम भी अब इसी स्मारक का स्थायी हिस्सा बनेंगे। इससे पहले सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन सैन्य कर्मियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि अभियान का उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था, किसी नागरिक या सैन्य ठिकाने पर हमला करना नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी सैन्य गतिविधियां शुरू हुईं। सीमा पर भारी गोलाबारी, ड्रोन हमले और हवाई गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। लगभग चार दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष के दौरान सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय रहीं। बाद में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी और 10 मई को संघर्ष विराम लागू हुआ। 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। 'सिंदूर' भारतीय परंपरा में विवाहित महिलाओं का प्रतीक माना जाता है। इस अभियान का नाम उन परिवारों की पीड़ा और बलिदान का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खोया था। रक्षा मंत्रालय ने भी इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की सटीक, संयमित और दृढ़ सैन्य प्रतिक्रिया बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह सैनिकों के नाम दर्ज होना केवल सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी है। हर वर्ष हजारों लोग इस स्मारक पर पहुंचकर देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर के इन शहीदों का नाम भी उसी गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहेगा। हाल ही में सरकार ने वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न सैन्य अभियानों में शहीद हुए सभी सैनिकों की सूची भी जारी की, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीरों के नाम शामिल हैं। इस कदम को सैन्य इतिहास के दस्तावेजीकरण और शहीदों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेना और वायुसेना के इन जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण की मिसाल के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक कमांड से हटाया ‘इंडो’, भारत की भूमिका पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[2018 में चीन को संतुलित करने की रणनीति के तहत जोड़ा गया था ‘इंडो’, अब नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड करने पर विशेषज्ञों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-removes-indo-from-indo-pacific-command-questions-raised-on-indias/article-56234"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-pacific-command.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांड में से एक के नाम में बड़ा बदलाव करते हुए ‘इंडो’ शब्द हटा दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) को फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) के नाम से जाना जाएगा। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कदम अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत है और क्या इससे भारत की रणनीतिक भूमिका को लेकर कोई नया संदेश जा रहा है। वर्ष 2018 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड किया था। उस समय यह फैसला केवल एक नाम परिवर्तन नहीं माना गया था, बल्कि इसे अमेरिका की नई एशिया रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया था। अमेरिका ने तब स्पष्ट किया था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर अब एक-दूसरे से जुड़े रणनीतिक क्षेत्र बन चुके हैं। ऐसे में भारत को क्षेत्रीय संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था में प्रमुख भागीदार के रूप में देखा जा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने नाम परिवर्तन की घोषणा करते हुए कहा था कि हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इसकी भूमिका बेहद अहम हो चुकी है। इसी सोच के तहत कमांड के नाम में ‘इंडो’ शब्द जोड़ा गया था ताकि भारत और हिंद महासागर क्षेत्र की बढ़ती अहमियत को दर्शाया जा सके।अब आठ साल बाद इस फैसले को पलटते हुए अमेरिका ने फिर से पुराना नाम अपनाने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है और इसका सैन्य विरासत से गहरा संबंध रहा है। मंत्रालय के अनुसार यह नाम कई महत्वपूर्ण अभियानों, युद्धों और सैन्य उपलब्धियों का प्रतीक है। इसलिए इसे वापस लाने का फैसला किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पेंटागन ने साफ किया है कि केवल नाम बदला गया है। कमांड की जिम्मेदारियों, अधिकार क्षेत्र, सैन्य रणनीति और संचालन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ इस कदम को केवल औपचारिक बदलाव मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि कूटनीति और सुरक्षा नीति में प्रतीकों का भी बड़ा महत्व होता है और ऐसे फैसले अक्सर व्यापक रणनीतिक संकेत देते हैं। जब 2018 में ‘इंडो’ शब्द जोड़ा गया था, तब अमेरिका चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर काफी चिंतित था। उस समय भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रीय साझेदार माना जा रहा था। क्वाड जैसे मंचों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करना और चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान बदलाव से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अमेरिका अब अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे ट्रम्प प्रशासन की नई विदेश नीति सोच से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका अब अपने संसाधनों और सैन्य फोकस को अलग तरीके से व्यवस्थित करना चाहता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी रणनीतिक बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है। इस फैसले पर भारत में भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी आदेश की तस्वीर साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या यह क्वाड के भविष्य के लिए कोई संकेत है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील साबित हो सकती है। थरूर की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और सामरिक साझेदारियों पर लगातार चर्चा हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूएस पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कमांडों में गिनी जाती है। इसका क्षेत्र एशिया-प्रशांत के विशाल हिस्से तक फैला हुआ है। यह कमांड चीन, उत्तर कोरिया, दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की निगरानी करती है। इसी वजह से इसके नाम में होने वाला बदलाव भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। आने वाले महीनों में अमेरिका की विदेश और सुरक्षा नीति के अन्य फैसलों पर नजर रखनी होगी। तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह कदम केवल ऐतिहासिक नाम की वापसी है या फिर इसके पीछे कोई व्यापक रणनीतिक सोच काम कर रही है। फिलहाल अमेरिका ने यह जरूर कहा है कि उसके सहयोगी देशों के साथ संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रतिबद्धताओं में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बावजूद भारत, क्वाड और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े देशों में इस फैसले को लेकर चर्चा जारी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:39:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले आर्मी चीफ, 30 जून से संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने नियुक्ति को दी मंजूरी, मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद संभालेंगे भारतीय सेना की जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lieutenant-general-dheeraj-seth-will-be-the-next-army-chief/article-55856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhiraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है और उसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। इस घोषणा के बाद सैन्य और रणनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धीरज सेठ फिलहाल उप सेना प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने इसी वर्ष 1 अप्रैल को यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना में उप सेना प्रमुख का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद पर रहते हुए धीरज सेठ सेना के संचालन, रणनीतिक योजनाओं, सैन्य तैयारियों और आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है और धीरज सेठ इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में सेना की कई मौजूदा योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है। उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी सीमा और रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य तैनाती तक, उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया है। लंबे अनुभव और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने करियर के दौरान धीरज सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं। सेना के भीतर यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इन कमानों के तहत बड़े सैन्य क्षेत्र और रणनीतिक संचालन आते हैं। वे उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में कई अहम पदों पर कार्य किया और सेना की क्षमता वृद्धि तथा भविष्य की रणनीतिक जरूरतों से जुड़े कार्यक्रमों में भी योगदान दिया। धीरज सेठ का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अंगोला में भी सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मिशन में काम करने का अनुभव किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे विभिन्न देशों की सेनाओं के साथ समन्वय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है। यही अनुभव उन्हें एक व्यापक दृष्टिकोण वाला सैन्य अधिकारी बनाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शैक्षणिक दृष्टि से भी धीरज सेठ का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी और देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में उच्च प्रशिक्षण हासिल किया। वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में उन्होंने अध्ययन किया। इसके अलावा फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी पूरा किया। उनकी उपलब्धियों की सूची भी काफी लंबी है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कई बार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें प्रतिष्ठित ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान मिला था। जूनियर कमांड कोर्स सहित कई सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें अपने कोर्स का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल भी प्रदान किया गया था। यह उपलब्धियां उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धीरज सेठ सेना की परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सेना की दो प्रमुख और महत्वपूर्ण संरचनाओं XXI स्ट्राइक कोर तथा III कोर की कमान संभाली थी। ऐसे में सैन्य वातावरण और अनुशासन धीरज सेठ के जीवन का हिस्सा बचपन से ही रहा है। माना जाता है कि परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा धीरज सेठ खेलों में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद है। उनके सहयोगियों के अनुसार वे अनुशासित जीवनशैली और संतुलित नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी कोमल सेठ विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। भारतीय सेना ऐसे समय में नए नेतृत्व का स्वागत करने जा रही है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। सीमा सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक, साइबर सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सेना के सामने हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:24 +0530</pubDate>
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                <title>असम के जोरहाट एयरबेस पर AN-32 विमान हादसे का शिकार, जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा, वायुसेना ने गठित की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी; नुकसान और हताहतों की जानकारी का इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/investigation-ordered-into-the-victim-of-an-32-plane-crash-at/article-55823"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/an-32-crash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के तुरंत बाद पूरे एयरबेस को सील कर दिया गया और बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिए गए। भारतीय वायुसेना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के गठन का आदेश दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे में कोई जनहानि हुई है या नहीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-32 भारतीय वायुसेना की 43 स्क्वाड्रन का हिस्सा था और वह कार्गो लेकर उड़ान भर रहा था। हादसा उस समय हुआ जब विमान जोरहाट के रोरिया क्षेत्र स्थित वायुसेना स्टेशन पर उतरने की प्रक्रिया में था। लैंडिंग के दौरान अचानक कुछ गड़बड़ी हुई और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के बाद एयरबेस परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत सक्रिय किया गया। भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि AN-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की जा रही है। जांच का उद्देश्य हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम सुझाना होगा। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं और स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के समय एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। इसके कुछ ही क्षण बाद दुर्घटनास्थल के आसपास धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने लगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि एयरबेस की दिशा से उठते धुएं को दूर से भी देखा जा सकता था। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस मौके की ओर रवाना हुईं। वायुसेना की अग्निशमन टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एम. रावत ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हालांकि देर शाम तक किसी आधिकारिक बयान में यह नहीं बताया गया कि विमान में मौजूद चालक दल या अन्य कर्मियों की स्थिति क्या है। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्घटना के बाद एयरबेस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पूरे स्टेशन को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने तक हादसे से जुड़ी जानकारी नियंत्रित तरीके से ही साझा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब कुछ महीने पहले ही असम में भारतीय वायुसेना का एक सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मार्च में हुए उस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई थी। वह विमान भी जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन से नियमित उड़ान पर रवाना हुआ था और बाद में संपर्क टूटने के बाद करबी आंगलोंग जिले के पहाड़ी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। लगातार दूसरी बड़ी घटना ने वायुसेना के विमानों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी को लेकर चर्चा तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">AN-32 विमान भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सोवियत संघ में विकसित इस विमान को विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया था। यह विमान ऊंचाई वाले इलाकों, गर्म मौसम और सीमित रनवे वाली जगहों पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से इस विमान का उपयोग सैनिकों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और दूरदराज के क्षेत्रों तक सामग्री पहुंचाने के लिए करती रही है। तकनीकी रूप से AN-32 लगभग 7.5 टन तक का कार्गो ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें करीब 50 यात्रियों या 42 पैराट्रूपर्स को भी ले जाया जा सकता है। यही कारण है कि यह विमान भारतीय सैन्य अभियानों और राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि या किसी अन्य कारण से हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-इजराइल संघर्ष फिर भड़का, होर्मुज में 24 भारतीय नाविक फंसे</title>
                                    <description><![CDATA[दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद फिर शुरू हुई सैन्य कार्रवाई, मिसाइल हमलों से बढ़ा तनाव; भारतीय नाविकों ने वीडियो जारी कर मदद की अपील की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-israel-conflict-flares-up-again-24-indian-sailors-stranded-in/article-55316"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-israel-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के करीब दो महीने बाद ईरान और इजराइल के बीच सैन्य संघर्ष दोबारा शुरू हो गया है। रविवार देर रात ईरान ने इजराइल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य और रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर संभावित बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है।</p>
<p>ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दूसरी ओर इजराइल ने दावा किया है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि दोनों देशों की ओर से नुकसान के वास्तविक आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p>इस बीच सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय नाविकों को लेकर बढ़ गई है। ओमान के तट के पास एक जहाज पर हमले की खबर सामने आने के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने दावा किया है कि जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार हैं। संगठन के मुताबिक नाविकों ने वीडियो संदेश जारी कर तत्काल सहायता की मांग की है। बताया जा रहा है कि जहाज ऐसे क्षेत्र में मौजूद है जहां हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा खतरे लगातार बढ़े हैं। हालांकि भारतीय अधिकारियों की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मामले पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो ऊर्जा बाजारों पर इसका असर दिखाई दे सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।</p>
<p>संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान, इराक और सीरिया ने अपने हवाई क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान ने अपने पश्चिमी हिस्से का एयरस्पेस अगली सूचना तक बंद कर दिया है। इराक ने 72 घंटे और सीरिया ने 12 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्षेत्रीय हवाई यातायात पर असर पड़ने की संभावना है। कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदलने शुरू कर दिए हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी लगातार चर्चा में है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे दो ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया है। यह लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। वहीं ईरान ने अमेरिका पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए हैं।</p>
<p>ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका के बार-बार बदलते रुख के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार और विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने की मांग दोहराई है। राजनीतिक और सैन्य तनाव एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ रही हैं।</p>
<p>बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही वहां मौजूद भारतीयों को स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है, खासकर उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जो क्षेत्र में काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजौरी के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई शुरू, 2-3 आतंकियों के घिरे होने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। दोरिमाल जंगल में 2-3 आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/encounter-begins-between-security-forces-and-terrorists-in-the-forests/article-54059"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rajouri-indian-army-jammu-&amp;-kashmir-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से शुक्रवार दोपहर एक बड़ी खबर आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां दोरिमाल के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हो रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाके में 2 से 3 आतंकियों के छिपे होने की संभावना जताई गई है। सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सेना और अन्य सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खबर है कि तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। देर शाम तक इलाके में गोलीबारी चलती रही। फिलहाल पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है और अतिरिक्त जवान भी तैनात किए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ऑपरेशन एक बेहद संवेदनशील इलाके में चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जंगल और पहाड़ों की वजह से आतंकियों को छिपने में आसानी होती है। सुरक्षा बल लगातार ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों से इलाके की निगरानी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आतंकियों के एक छोटे समूह की सक्रियता की पहले से जानकारी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक किसी आतंकी के मारे जाने या किसी जवान के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर स्थानीय लोगों को भी जंगल की तरफ जाने से रोका गया है। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को बड़ी सतर्कता से चला रही हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस साल फरवरी में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">White Knight Corps <span lang="hi" xml:lang="hi">ने किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क खत्म करने का दावा किया था। उस समय सेना ने कई आतंकियों को मार गिराने की जानकारी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें जैश से जुड़े आतंकी सैफुल्लाह का नाम भी शामिल था। हाल के महीनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। पिछले सप्ताह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहते हुए कि अगर आतंकवाद को समर्थन जारी रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। इस समय राजौरी में चल रही मुठभेड़ पर पूरे इलाके की नजर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां ऑपरेशन खत्म होने तक लगातार जानकारी हासिल कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत को मिला नया CDS, लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि को नया CDS नियुक्त किया। जानिए उनका सैन्य करियर और CDS पद की अहमियत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-gets-new-cds-lieutenant-general-ns-raja-subramani-will/article-53012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t175604.209.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कार्यभार संभालने की तारीख से अगले आदेश तक सैन्य मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। इस नियुक्ति के बाद रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े हलकों में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है। मौजूदा </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को खत्म हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एन एस राजा सुब्रमणि यह जिम्मेदारी संभालेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि लंबे समय से सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। फिलहाल वह 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के तौर पर तैनात हैं। इससे पहले उन्होंने सेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में भी काम किया। जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक वह इस पद पर रहे। वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक उन्होंने केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाली थी। सेना के भीतर रणनीतिक योजना और ऑपरेशनल मामलों में उनका अनुभव काफी बड़ा माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद देश की सुरक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अधिकारी थल सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु सेना और नौसेना के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता है। रक्षा मामलों में सरकार को सलाह देने के साथ-साथ संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार करने में भी </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">की बड़ी भूमिका होती है। भारत में इस पद की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इसके बाद देश के पहले </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल बिपिन रावत बने थे। हालांकि दिसंबर 2021 में हेलिकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई थी। बाद में जनरल अनिल चौहान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बताया जाता है कि कारगिल युद्ध के बाद ही इस पद की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की गई थी। उस दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद रक्षा मामलों के जानकारों और समितियों ने सुझाव दिया था कि एक ऐसा सैन्य अधिकारी होना चाहिए जो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रख सके और बड़े फैसलों में एकीकृत दृष्टिकोण दे सके। इसी सोच के बाद </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद बनाया गया। अब लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि के सामने भी यही बड़ी जिम्मेदारी होगी कि बदलते सुरक्षा हालात में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और मजबूत हो सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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