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                <title>Medical College - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Medical College RSS Feed</description>
                
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                <title>मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पांच मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई। याचिका में भर्ती नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया और पूर्व की गई भर्तियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-bans-direct-recruitment-of-deans-in-medical-colleges/article-57740"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-medical-college-dean.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में डीन पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने 18 मई 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 30 जून को जस्टिस विशाल धागत की एकलपीठ ने सुनाया। अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित भर्ती प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और अब सरकार को भर्ती नियमों के अनुरूप अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। यह मामला रीवा के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मनोज इंदुलकर द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में दावा किया गया कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा भर्ती नियम, 2023 के अनुसार डीन का पद शत-प्रतिशत पदोन्नति से भरा जाना निर्धारित है। ऐसे में इन पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करना नियमों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एल.सी. पाटनी ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि जब सेवा नियम स्पष्ट रूप से पदोन्नति का प्रावधान करते हैं, तब प्रत्यक्ष भर्ती की प्रक्रिया शुरू करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। इन दलीलों पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट के इस आदेश का सीधा असर प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा। इनमें नए मेडिकल कॉलेज बुधनी, छतरपुर और दमोह के अलावा दो अन्य कॉलेज भी शामिल हैं, जहां डीन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी। इन संस्थानों में प्रशासनिक नेतृत्व की नियुक्ति अब न्यायालय के अंतिम निर्णय तक प्रभावित रह सकती है। नए मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए डीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया रुकने से विभाग को वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखनी पड़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर एसोसिएशन (पीएमटीए) ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा सेवा भर्ती नियमों में डीन का पद पूरी तरह पदोन्नति का पद निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद सरकार ने सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया, जो नियमों की भावना के अनुरूप नहीं था। उनका कहना है कि वरिष्ठ शिक्षकों को उनके अनुभव और सेवा के आधार पर पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतिम सुनवाई में भी अदालत सेवा नियमों को ध्यान में रखते हुए निर्णय देगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले को और दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि इसी बीच सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 30 जून को सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन के विधिक अभिमत के आधार पर जारी किए गए। विधिक राय में कहा गया कि पदोन्नति नियम-2025 पर किसी भी न्यायालय द्वारा अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इसलिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित कर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसी सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। ऐसे में एक ओर सरकार पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखने की बात कर रही है, जबकि दूसरी ओर चिकित्सा शिक्षा विभाग में डीन पदों पर सीधी भर्ती को लेकर न्यायिक विवाद खड़ा हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद वर्ष 2024 में हुई डीन की सीधी नियुक्तियां भी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। प्रदेश के 13 ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेजों में डीन के पदों को दो वर्ष पहले वैधानिक कारणों का हवाला देकर शासकीय घोषित किया गया था। इसके बाद नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए कुल 19 डीन पदों पर सीधी भर्ती की गई थी। वर्तमान में इनमें से दो पद रिक्त बताए जा रहे हैं, जबकि तीन नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने वाले हैं। इन्हीं पांच रिक्त पदों को भरने के लिए 18 मई 2026 को नया भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। अब अदालत द्वारा इस विज्ञापन पर रोक लगाए जाने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि सेवा नियमों में वास्तव में पदोन्नति का ही प्रावधान है, तो पहले की गई सीधी नियुक्तियों की वैधानिक स्थिति क्या होगी। हालांकि इस संबंध में अभी अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की है और यह विषय भविष्य की सुनवाई में सामने आ सकता है। अब इस मामले में राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा। सरकार यह स्पष्ट करेगी कि किन परिस्थितियों और कानूनी आधार पर डीन पदों के लिए सीधी भर्ती का निर्णय लिया गया। इसके बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और सेवा भर्ती नियमों का परीक्षण करेगी। यदि अदालत यह मानती है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव संभव हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:58:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉक्टर्स डे पर रीवा में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल बोले- डॉक्टरों का पेशा जीवन को सार्थक बनाने वाला, समाज में भगवान जैसा सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान, दो पुस्तकों का हुआ विमोचन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/on-doctors-day-deputy-chief-minister-rajendra-shukla-said-in/article-57537"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm-(2).mp4" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">डॉक्टर्स डे के अवसर पर रीवा स्थित श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा सेवा, मानवता और समाज के प्रति डॉक्टरों के समर्पण को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री <strong>राजेंद्र शुक्ल</strong> ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का पेशा केवल एक रोजगार नहीं, बल्कि मानव जीवन को बचाने और उसे नई उम्मीद देने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज में डॉक्टरों को भगवान के समान सम्मान इसलिए मिलता है क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों में भी लोगों के जीवन की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करते हैं।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm-(2).mp4" controls=""></video>
<p>उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी रूप में डॉक्टरों की सेवाओं का लाभ लेता है। जब कोई व्यक्ति बीमारी, दुर्घटना या गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझता है, तब सबसे पहले डॉक्टर ही उसकी उम्मीद बनते हैं। यही कारण है कि चिकित्सा सेवा को समाज में सबसे सम्मानजनक और जिम्मेदारी भरा कार्य माना जाता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का दायित्व केवल उपचार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वे मरीजों और उनके परिवारों में विश्वास और आत्मबल भी जगाते हैं।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.20-pm.mp4" controls=""></video>
<p>कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पुस्तकों <strong>"दिल की बात"</strong> और <strong>"बच्चों में बढ़ता दृष्टि दोष"</strong> का विधिवत विमोचन किया गया। इन पुस्तकों का लेखन वरिष्ठ चिकित्सक <strong>डॉ. बी.डी. त्रिपाठी</strong> और <strong>डॉ. नेहा त्रिपाठी</strong> ने किया है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने इन पुस्तकों को चिकित्सा जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि सरल भाषा में तैयार की गई ऐसी पुस्तकें आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी विषयों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेंगी। <strong>"दिल की बात"</strong> पुस्तक में हृदय रोगों, उनके कारणों, बचाव और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। वहीं <strong>"बच्चों में बढ़ता दृष्टि दोष"</strong> पुस्तक में वर्तमान समय में बच्चों में तेजी से बढ़ रही आंखों की समस्याओं, डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग, समय पर जांच और उचित देखभाल के बारे में उपयोगी जानकारी दी गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पुस्तकें जनजागरूकता अभियान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm-(1).mp4" controls=""></video>
<p>कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण चिकित्सा क्षेत्र में लंबे समय से उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान समारोह भी रहा। विभिन्न विशेषज्ञताओं से जुड़े डॉक्टरों को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं, चिकित्सा अनुसंधान, मरीजों के प्रति समर्पण और समाज में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले चिकित्सकों ने इसे अपने पूरे चिकित्सा जीवन के लिए प्रेरणादायक बताया और भविष्य में भी सेवा कार्य को उसी समर्पण के साथ जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन डॉक्टरों की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण आज भी चिकित्सा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक, आधुनिक उपकरण और उन्नत उपचार पद्धतियां तभी प्रभावी होती हैं जब उनके पीछे सेवा भाव और मरीज के प्रति समर्पण की भावना हो। उन्होंने युवाओं से भी चिकित्सा क्षेत्र को सेवा का माध्यम मानकर आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना था कि डॉक्टर बनना केवल एक पेशा चुनना नहीं बल्कि समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना है। आने वाले समय में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित और संवेदनशील डॉक्टरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/whatsapp-video-2026-07-01-at-3.00.19-pm.mp4" controls=""></video>
<p>कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने, संतुलित आहार अपनाने और नियमित व्यायाम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कई गंभीर बीमारियों से केवल जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से बचा जा सकता है। लोगों को स्वास्थ्य संबंधी छोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भी डॉक्टरों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा केवल शरीर का उपचार नहीं करती, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी लोगों को नई ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सेवा, करुणा और सकारात्मक सोच किसी भी डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान होती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज के शिक्षक, मेडिकल छात्र, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान डॉक्टरों की सेवा भावना, चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियों और स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर सार्थक चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने भी वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम चिकित्सा सेवा के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना। डॉक्टरों के अनुभव और आमजन की जागरूकता मिलकर ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे आयोजन चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों का उत्साह बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी सेवा और समर्पण की प्रेरणा देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:51:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता का नवीनीकरण किया, अब 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आगामी सत्र में 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह निर्णय प्रदेश के उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर संस्थानों में प्रवेश का सपना देखते हैं। एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी आदेश के बाद सिम्स प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है। मान्यता के नवीनीकरण का अर्थ है कि संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाओं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमित रूप से 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मंजूरी नहीं बल्कि संस्थान की गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि है। उन्होंने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अस्पताल में व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के विद्यार्थियों को बाहर के राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश का प्रयास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सिम्स की 150 सीटों का नवीनीकरण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर स्थित सिम्स लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां न केवल एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार भी होता है। मेडिकल छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के उपचार की वास्तविक प्रक्रिया को भी करीब से सीखते हैं। यही व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग समय-समय पर सभी मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन करता है। इस दौरान फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, अनुसंधान सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की जाती है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों की मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है। सिम्स का इस प्रक्रिया में सफल होना संस्थान की निरंतर प्रगति का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल शिक्षा का विस्तार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ना या उनकी मान्यता का नवीनीकरण होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक माना जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिलता है। सीटों की निरंतर उपलब्धता से प्रतिस्पर्धा के बीच योग्य छात्रों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में संस्थान में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऐसे निर्णय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बनाते हैं। अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार होने से भविष्य में सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>छत्तीसगढ़ के 5 नए मेडिकल कॉलेजों को NMC से नहीं मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और जरूरी दस्तावेजों की कमी के चलते राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पांच प्रस्तावित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के आवेदन खारिज किए, 250 नई एमबीबीएस सीटों पर फिलहाल लगा विराम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bbc754f70f/article-55720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-medical-colleges.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को बड़ा झटका लगा है। राज्य में प्रस्तावित पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिल पाई है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज कर दिए हैं, जिसके चलते इस शैक्षणिक सत्र से शुरू होने वाली 250 नई एमबीबीएस सीटों का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। इस फैसले के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की तैयारियों और योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन पांच मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली है, वे कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित थे। प्रत्येक कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव रखा गया था। यदि इन संस्थानों को मंजूरी मिल जाती तो राज्य में मेडिकल शिक्षा का दायरा और बढ़ता तथा बड़ी संख्या में छात्रों को इसका लाभ मिलता। प्रदेश में हर साल हजारों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में शामिल होते हैं। सीटों की सीमित संख्या के कारण प्रतियोगिता काफी कठिन रहती है। ऐसे में 250 नई सीटें जुड़ने से छात्रों के लिए अवसर बढ़ सकते थे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई सीटों के जुड़ने से प्रवेश प्रक्रिया में कुछ राहत मिलती और कटऑफ पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता था। छत्तीसगढ़ में 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिनमें कुल 2330 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। राज्य सरकार लंबे समय से मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में काम कर रही थी और इन नए कॉलेजों को उसी योजना का हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनएमसी की टीम द्वारा तय मानकों के आधार पर आवेदन की समीक्षा की गई थी। जांच में पाया गया कि कई कॉलेजों में पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं था। कुछ स्थानों पर भवन निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं का काम अधूरा बताया गया। वहीं मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए जरूरी फैकल्टी और चिकित्सा संसाधनों की भी कमी सामने आई। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने कई प्रस्तावित कॉलेजों में केवल डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की थीं। नियमित शिक्षकों और विशेषज्ञ फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। मेडिकल शिक्षा में फैकल्टी की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक मानी जाती है और इसी क्षेत्र में सबसे अधिक कमी देखने को मिली। मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिला अस्पतालों में कार्यरत कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के रूप में पदस्थ करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन यह व्यवस्था एनएमसी के मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी गई। आयोग कॉलेजों में स्थायी और निर्धारित संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता को प्राथमिकता देता है। इस पूरे मामले में डॉक्टरों के लंबित प्रमोशन को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 296 डॉक्टर पदोन्नति के पात्र हैं, जबकि कई असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी समय पर पूरा नहीं किया गया। यदि इन पदोन्नतियों की प्रक्रिया पहले पूरी हो जाती तो नए कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति आसान हो सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों को इस बात का भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी मिल जाएगी। लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पिछले कुछ वर्षों से निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कर रहा है। वर्ष 2023 के बाद से निरीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया और अधिक कठोर हो गई है। ऐसे में केवल प्रस्ताव और प्रशासनिक मंजूरी के आधार पर मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिल सकती। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि जिन कॉलेजों के आवेदन खारिज हुए, उनमें से कुछ संस्थानों ने आवेदन के साथ हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट भी संलग्न नहीं किया था। यह दस्तावेज किसी भी मेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा माना जाता है। ऐसे में दस्तावेजी कमियों ने भी आवेदन पर नकारात्मक प्रभाव डाला। इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो राज्य में मेडिकल सीटों के बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। हर साल सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को दूसरे राज्यों या निजी संस्थानों का रुख करना पड़ता है। नई सीटें शुरू होने से उन्हें अतिरिक्त अवसर मिल सकते थे, लेकिन अब उन्हें अगले चरण की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन कमियों को दूर करना है। यदि इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जाए तो भविष्य में इन कॉलेजों को मान्यता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल कोहेफिजा में छात्रा-आत्महत्या के बाद मकान मालिक ने की खुदकुशी, उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल के कोहेफिजा में एमबीबीएस छात्रा और मकान मालिक की आत्महत्या से हड़कंप। परिजनों ने दबाव और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal-after-student-suicide-in-kohefiza-landlord-commits-suicide-serious/article-53043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t124519.491.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल के कोहेफिजा इलाके में एक पुरानी घटना ने शनिवार देर रात नया मोड़ ले लिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब एमबीबीएस छात्रा की आत्महत्या के तीन महीने बाद उसी मकान के मालिक ने भी आत्महत्या कर ली। इस मामले ने इलाके में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। मृतक की पहचान विजय राठौर के रूप में हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसी मकान के मालिक थे जहां छात्रा रोशनी किराए से रहती थी। परिजनों का कहना है कि लगातार चल रहे मानसिक दबाव और आरोप-प्रत्यारोप के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मकान मालिक की पत्नी करुणा राठौर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि छात्रा के परिजन लगातार उनके पति पर दबाव बना रहे थे और झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहे थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस भी बार-बार बयान के नाम पर थाने बुलाकर घंटों बैठाए रखती थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे परिवार मानसिक तनाव में आ गया था। पत्नी का दावा है कि विजय राठौर कई दिनों से परेशान थे और उन्होंने कई बार यह बात भी कही थी कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। शनिवार देर रात उन्होंने घर में ही आत्महत्या कर ली।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह मामला उसी घटना से जुड़ा है जिसमें फरवरी महीने में गांधी मेडिकल कॉलेज की 19 साल की छात्रा रोशनी का शव उसके किराए के कमरे के बाथरूम में मिला था। उस समय घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में पुलिस की फॉरेंसिक जांच में उसके मोबाइल से एक संदेश सामने आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सुसाइड नोट बताया गया। उसमें छात्रा ने नीट और एमबीबीएस की पढ़ाई के दबाव का जिक्र करते हुए माफी मांगी थी। पुलिस के अनुसार यह संदेश घटना से कुछ घंटे पहले खुद को भेजा गया था।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छात्रा की मौत के बाद मामला काफी संवेदनशील हो गया था। मेडिकल छात्रों और परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए कोहेफिजा थाने के बाहर देर रात तक प्रदर्शन भी किया था। हालात को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। हालांकि जांच के दौरान अब तक किसी तरह की प्रत्यक्ष हत्या के सबूत सामने नहीं आए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब मकान मालिक की आत्महत्या के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। उनकी पत्नी का कहना है कि उनके पति को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और इसी वजह से वह डिप्रेशन में चले गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रा के परिजन घर आकर दबाव बनाते थे और कार्रवाई की मांग करते हुए धमकी भरे तरीके से बात करते थे। परिवार का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने विजय राठौर को अंदर से तोड़ दिया था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि मृतक की बेटी बेंगलुरु में है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके आने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा और परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि दोनों घटनाओं को जोड़कर हर पहलू की जांच की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:15:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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