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                <title>Elections - दैनिक जागरण</title>
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                <title>केइको फुजीमोरी बनीं पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, संघर्षों से भरा जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[19 साल की उम्र में फर्स्ट लेडी बनीं केइको, जेल और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद मिली ऐतिहासिक जीत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/keiko-fujimori-becomes-perus-first-female-president-life-full-of/article-57063"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/keiko-fujimori.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पेरू ने इतिहास रच दिया है, जहां दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी देश की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गई हैं। 51 वर्षीय केइको ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की, जिसमें उन्हें लगभग 50.1% वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रोबर्टो सांचेज को 49.9% वोट हासिल हुए। 28 जुलाई को केइको राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। अब उनके सामने देश में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता जैसी गंभीर चुनौतियां होंगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>संघर्षों से भरा बचपन</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको फुजीमोरी का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से भरा रहा है। 1990 के दशक में जब उनके पिता अल्बर्टो फुजीमोरी पेरू के राष्ट्रपति थे, तब देश उग्रवादी संगठन “सेंडेरो लुमिनोसो” के हमलों से जूझ रहा था। उस दौरान राष्ट्रपति भवन और सरकारी संस्थान लगातार निशाने पर थे। सुरक्षा कारणों से केइको और उनके भाई-बहनों को लंबे समय तक बंकरों में रहना पड़ा। धमाकों और हमलों की आवाजें उनके बचपन का हिस्सा बन गई थीं। हालांकि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके पिता का सख्त नियम था कि किसी भी हालत में पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। यही अनुशासन केइको के जीवन की नींव बना।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>19 साल की उम्र में फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको ने अमेरिका की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 1994 में बड़ा बदलाव देखा। उनके माता-पिता के बीच विवाद बढ़ गया और परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया। उनकी मां सुजाना हिगुची ने पिता अल्बर्टो फुजीमोरी के सहयोगियों पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए। इस विवाद के कारण केइको को पढ़ाई बीच में छोड़कर पेरू लौटना पड़ा। सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्हें देश की फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी सौंपी गई, क्योंकि उनके पिता ने उनकी मां को इस पद से हटा दिया था। इस फैसले ने उन्हें दुनिया की सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी में शामिल कर दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>आलोचना और शुरुआती राजनीतिक अनुभव</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">फर्स्ट लेडी बनने के बाद केइको को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अनुभवहीन होने के कारण उन्हें “किशोरी फर्स्ट लेडी” कहा गया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अपने पसंदीदा गुलाबी रंग से सजवाया, जो चर्चा का विषय बना। हालांकि केइको ने इन आलोचनाओं को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया। यही शुरुआती अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>जेल से लेकर राजनीतिक वापसी तक का सफर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको फुजीमोरी का जीवन सिर्फ सत्ता और सफलता का नहीं बल्कि विवादों और संघर्षों का भी रहा है। वर्ष 2018 में उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और चुनावी फंडिंग से जुड़े मामलों में जेल जाना पड़ा। वे लगभग 13 महीने तक जेल में रहीं। इस दौरान उन्होंने अपनी दो बेटियों को पत्र लिखे, जिनमें उन्हें पढ़ाई, हिम्मत और परिवार के महत्व की सीख दी गई। इन पत्रों ने न केवल उनकी बेटियों को भावनात्मक सहारा दिया, बल्कि खुद केइको को भी कठिन समय में मानसिक शक्ति प्रदान की। रिहाई के बाद उन्होंने राजनीति में दोबारा सक्रिय भूमिका निभाई और लगातार जनता का समर्थन जुटाने में सफल रहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>राजनीतिक जीत और नई जिम्मेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले के बाद केइको फुजीमोरी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह उनकी चौथी कोशिश थी, जिसमें आखिरकार उन्हें सफलता मिली। अब राष्ट्रपति के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना होगा। उनकी जीत न केवल व्यक्तिगत संघर्षों की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। केइको फुजीमोरी का जीवन एक ऐसे सफर की कहानी है जिसमें बचपन का डर, पारिवारिक विवाद, राजनीतिक दबाव, जेल की सजा और अंततः ऐतिहासिक जीत शामिल है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>हिमंता बिस्वा सरमा बने बीजेपी विधायक दल के नेता, इस दिन लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[असम में हिमंता बिस्वा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। वे 12 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पीएम मोदी भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/himanta-biswa-sarma-becomes-leader-of-bjp-legislature-party-and/article-53051"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t133744.166.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम में राजनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। बीजेपी ने डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से विधायक दल और एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी साफ हो गया है कि हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर असम की सत्ता संभालने जा रहे हैं। पार्टी के अंदर हुई अहम बैठक में उनके नाम पर बिना किसी विरोध के मुहर लगी। अब वे 12 मई को असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी पुष्टि की गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह कार्यक्रम और ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक बीजेपी विधायक दल की यह बैठक काफी अहम रही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। बैठक में औपचारिक प्रक्रिया के बाद नेता का चुनाव हुआ और सभी विधायकों ने एकमत होकर हिमंता बिस्वा सरमा के नाम का समर्थन किया। बताया जा रहा है कि 6 मई को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब नई सरकार के गठन के साथ उनका दोबारा सीएम बनना लगभग तय हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पार्टी के भीतर भी इसे निरंतरता का फैसला माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में इस बार बीजेपी गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने अकेले 82 सीटों पर जीत दर्ज की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सहयोगी दल असम गण परिषद (</span>AGP) <span lang="hi" xml:lang="hi">और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (</span>BPF) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने 10-10 सीटें हासिल की हैं। कुल मिलाकर गठबंधन के पास 102 सीटें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जनादेश सरकार की नीतियों और संगठन की जमीनी पकड़ को दर्शाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी भरोसे के साथ पार्टी ने नेतृत्व में कोई बदलाव न करते हुए फिर से सरमा पर भरोसा जताया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिमंता बिस्वा सरमा का सियासी सफर भी काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने 90 के दशक में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AASU) <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए राजनीति में कदम रखा था और बाद में कांग्रेस से जुड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आए। 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद वे पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेहद करीबी माने जाते थे। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम विभागों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक पकड़ मजबूत की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन 2015 में कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा और वे नॉर्थ ईस्ट की राजनीति में एक मजबूत रणनीतिक चेहरा बनकर उभरे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बीजेपी में आने के बाद उन्हें </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEDA <span lang="hi" xml:lang="hi">का संयोजक बनाया गया और उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी विस्तार में अहम भूमिका निभाई। 2016 में असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने में उनका बड़ा योगदान रहा। इसके बाद 2021 के चुनाव में जब पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। अब एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा को नेतृत्व सौंपा जाना यह संकेत देता है कि पार्टी उनके कामकाज और संगठनात्मक क्षमता पर पूरा भरोसा जता रही है। 12 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह इसी राजनीतिक यात्रा का अगला बड़ा अध्याय माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:49:18 +0530</pubDate>
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