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                <title>South Asia - दैनिक जागरण</title>
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                <description>South Asia RSS Feed</description>
                
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                <title>E20 पेट्रोल पर भूटान का बड़ा फैसला, भारत से मांगा सिर्फ नॉर्मल पेट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने फ्यूल स्टोरेज, पानी रिसाव और पहाड़ी इलाकों में इंजन पर असर की आशंका जताई; भारत से एडवांस सूचना और लीक-प्रूफ टैंक की भी मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bhutans-big-decision-on-e20-petrol-asked-for-only-normal/article-57925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhutan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत सरकार जहां देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने इस ईंधन को लेने से फिलहाल इनकार कर दिया है। भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से स्पष्ट रूप से अनुरोध किया है कि जब तक भारत में सामान्य (बिना एथेनॉल मिश्रण वाला) पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उसे वही सप्लाई किया जाए। भूटान का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में E20 पेट्रोल का उपयोग उसके लिए तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। सरकार ने इस फैसले के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण देश का पुराना फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, अंडरग्राउंड टैंकों में पानी रिसने की समस्या और पहाड़ी इलाकों में वाहनों की परफॉर्मेंस को लेकर चिंता शामिल है। भूटान का मानना है कि इन परिस्थितियों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल वाहनों और ईंधन भंडारण व्यवस्था दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पुराना स्टोरेज सिस्टम बना सबसे बड़ी चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन को जमीन के नीचे बने स्टील के टैंकों में संग्रहित किया जाता है। कई स्थानों पर ये टैंक पुराने हो चुके हैं और उनमें पानी के रिसाव की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल में नमी को तेजी से सोखने की क्षमता होती है। यदि स्टोरेज टैंक में थोड़ी भी नमी या पानी मौजूद हो तो E20 पेट्रोल उसे अपने अंदर मिला सकता है। ऐसी स्थिति में ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा स्टील टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे भविष्य में रखरखाव की लागत अधिक हो सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पहाड़ी रास्तों पर प्रदर्शन को लेकर आशंका</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान का अधिकांश भूभाग पहाड़ी है, जहां तीखी चढ़ाइयों और घुमावदार सड़कों पर वाहन चलाने के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होती है। इससे कठिन पहाड़ी मार्गों पर इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि भारत सरकार और कई ऑटोमोबाइल निर्माता E20 को सुरक्षित बताते हैं, लेकिन भूटान का कहना है कि वह अपने स्थानीय भौगोलिक हालात और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस ईंधन को अपनाने के लिए तैयार नहीं है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में भी जारी है बहस</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देश में E20 पेट्रोल को लेकर पहले से ही चर्चा और बहस जारी है। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों ने दावा किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण माइलेज में कमी आती है और कुछ मामलों में इंजन के रखरखाव की लागत बढ़ जाती है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि E20 ईंधन से प्रदूषण कम होता है, विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। सरकार का यह भी दावा है कि E20 के कारण इंजन की कार्यक्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत से ही खरीदता है पूरा ईंधन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान अपनी पेट्रोल और डीजल की लगभग पूरी आवश्यकता भारत से पूरी करता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। वर्तमान में भूटान को उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में गलती से भी E20 पेट्रोल की आपूर्ति हो जाती है तो उसकी पहचान करना कठिन नहीं होगा। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में यदि पानी मिल जाए तो उसका रंग दूधिया दिखाई देने लगता है, जिससे परीक्षण के दौरान आसानी से पता लगाया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भविष्य के लिए पहले से सूचना की मांग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाया जाता है या सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया जाता है, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। इससे भूटान को अपने स्टोरेज सिस्टम और वितरण नेटवर्क में आवश्यक बदलाव करने का समय मिल सकेगा। इसके साथ ही भूटान ने लीक-प्रूफ और आधुनिक ईंधन भंडारण टैंक उपलब्ध कराने में भी भारत से सहयोग की अपेक्षा जताई है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद भविष्य में E20 जैसे ईंधन को अपनाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:42:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंधु जल विवाद पर बिलावल भुट्टो का नया बयान, भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री के ताजा बयान के बाद फिर चर्चा में आया सिंधु जल समझौता, जानिए भारत की रणनीति, कानूनी स्थिति और आगे की संभावनाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bilawal-bhuttos-new-statement-on-indus-water-dispute-what-does/article-57514"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilawal-bhutto.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सिंधु जल विवाद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के ताजा बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल सहयोग और सिंधु जल समझौते को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही कई मुद्दों पर संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि भारत की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय जल सुरक्षा और भविष्य की कूटनीतिक बातचीत के संदर्भ में अहम मान रहे हैं। सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल उपयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई थी। इस समझौते के अनुसार पूर्वी नदियों का अधिकांश जल उपयोग भारत के हिस्से में है, जबकि पश्चिमी नदियों के जल उपयोग से जुड़े अधिकारों का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को मिला है। इसके बावजूद भारत को पश्चिमी नदियों पर निर्धारित नियमों के तहत जलविद्युत परियोजनाएं और सीमित उपयोग की अनुमति भी प्राप्त है।</p>
<p>बिलावल भुट्टो के हालिया बयान के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर सिंधु जल समझौते को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान लगातार यह कहता रहा है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके कृषि क्षेत्र और पेयजल व्यवस्था की रीढ़ है। वहीं भारत का कहना रहा है कि वह समझौते के सभी प्रावधानों का पालन करते हुए अपने वैध अधिकारों का उपयोग करता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर तकनीकी और कानूनी स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है। सिंधु जल विवाद केवल पानी का विषय नहीं बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। भारत के उत्तरी राज्यों में सिंचाई, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन की कई परियोजनाएं इसी नदी प्रणाली से जुड़ी हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था भी इन नदियों पर काफी हद तक निर्भर करती है। इसलिए इस विषय पर दोनों देशों की ओर से दिए जाने वाले प्रत्येक सार्वजनिक बयान को गंभीरता से देखा जाता है।</p>
<p>भारत के लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सिंधु जल समझौता आज भी लागू है और इसकी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। यदि किसी तकनीकी या कानूनी विवाद की स्थिति बनती है तो उसके समाधान के लिए समझौते में पहले से निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बयान से समझौते की कानूनी स्थिति तत्काल प्रभावित नहीं होती, लेकिन राजनीतिक माहौल अवश्य प्रभावित हो सकता है। आने वाले वर्षों में जल संसाधनों का महत्व और बढ़ेगा। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बढ़ती आबादी और कृषि की बढ़ती जरूरतों के कारण दक्षिण एशिया में जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होता जा रहा है। ऐसे में सिंधु नदी प्रणाली से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और तकनीकी सहयोग के माध्यम से ही संभव माना जाता है।</p>
<p>भारत पिछले कुछ वर्षों से अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर लगातार काम कर रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं का विस्तार, सिंचाई व्यवस्था का आधुनिकीकरण, नदी प्रबंधन और जल संरक्षण जैसी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपने वैध अधिकारों का प्रभावी उपयोग करना भारत की दीर्घकालिक जल नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p>भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक बयान अक्सर राजनीतिक संदेश भी होते हैं। ऐसे बयानों का उद्देश्य घरेलू राजनीति, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना या अपनी स्थिति स्पष्ट करना भी हो सकता है। इसलिए किसी भी टिप्पणी का मूल्यांकन उसके व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में किया जाता है। व्यापार और आर्थिक दृष्टि से भी स्थिर क्षेत्रीय संबंध महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग का माहौल बनने से निवेश, ऊर्जा परियोजनाओं, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं लंबे समय तक तनाव बने रहने से विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग पर भी असर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:58:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-पाक की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों देशों के प्रमुख लोगों ने संवाद, शांति और आपसी रिश्तों को मजबूत करने की अपील की, युवाओं के भविष्य और क्षेत्रीय विकास पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/117-celebrities-from-india-and-pakistan-wrote-letters-to-pm/article-57509"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-pakistan-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने एक संयुक्त पहल करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखा है। इस पत्र में दोनों नेताओं से आपसी संवाद को आगे बढ़ाने, बातचीत का रास्ता अपनाने और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की अपील की गई है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और विकास तभी संभव है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़े और दोनों देश आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस संयुक्त पत्र में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि लंबे समय से जारी तनाव के कारण विकास, व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सहयोग जैसी कई संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया है कि वे भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे कदम उठाएं, जिनसे विश्वास का माहौल बने और दोनों देशों के बीच संवाद की नई शुरुआत हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संयुक्त पहल में भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने भाग लिया है। इनमें पूर्व नौकरशाह, पूर्व राजनयिक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, राजनीतिक हस्तियां और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ लोग शामिल हैं। भारत की ओर से 61 लोगों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से 56 लोगों ने इस पहल का समर्थन किया है, जिनमें पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कई पूर्व अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग शामिल हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और ऐसे में किसी भी प्रकार का तनाव पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का हिस्सा होता है। उनका कहना है कि बातचीत का उद्देश्य मतभेदों को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का रास्ता तैयार करना होता है। पत्र में दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक सहयोग, खेल प्रतियोगिताओं और नागरिक स्तर पर संवाद को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि जब आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा तो आपसी विश्वास भी मजबूत होगा और लंबे समय से चली आ रही दूरियां कम करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस पत्र पर अभी तक भारत या पाकिस्तान की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न मुद्दों को लेकर चुनौतीपूर्ण रहे हैं। इसके बावजूद समय-समय पर अलग-अलग मंचों से शांति और संवाद की पहल की मांग उठती रही है। इस बार भी दोनों देशों की प्रमुख हस्तियों ने साझा रूप से यह संदेश देने की कोशिश की है कि क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए संवाद का रास्ता खुला रहना जरूरी है। इस तरह की नागरिक पहलें सरकारों के बीच औपचारिक बातचीत का विकल्प नहीं होतीं, लेकिन वे सकारात्मक माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभा सकती हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर फिर दी चेतावनी, पानी रोकने पर भारत को धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का विरोध दोहराया, जल अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज तेज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pakistan-again-warns-on-indus-water-treaty-threatens-india-if/article-57359"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तानी जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश हुई तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीं इस्लामाबाद ने दावा किया कि सिंधु जल संधि अब भी पूरी तरह प्रभावी है और भारत इसे एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने सोमवार को इस्लामाबाद में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह को प्रभावित करना चाहता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को बहाल करने का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।<br /><img alt="9k="></img></p>
<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है और यह कानूनी रूप से अब भी लागू है। उनके अनुसार भारत इस संधि को न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न समाप्त कर सकता है और न ही इसकी शर्तों में बदलाव कर सकता है। पाकिस्तानी मंत्रियों ने यह भी बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें जल विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके जल अधिकार सुरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी कई बार कह चुके हैं कि पानी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान इस विषय को वैश्विक स्तर पर उठाने की भी तैयारी कर रहा है।<br /><br /></p>
<p>इससे पहले 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इसी मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी थी। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान को अपनी जल सुरक्षा पर खतरा महसूस हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि हाल के महीनों में इस मामले में हुए सभी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। भारत का यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला माना गया।<br /><br /><img alt="Z"></img></p>
<p>सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल के उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिला, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज का उपयोग भारत के हिस्से में आया। पिछले छह दशकों से अधिक समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बनी रही। पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। वहां की लगभग 90 प्रतिशत सिंचित कृषि भूमि को इसी नदी तंत्र से पानी मिलता है। कृषि क्षेत्र पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका असर खेती, बिजली उत्पादन, उद्योग और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय और जलविद्युत परियोजनाएं भी इसी नदी प्रणाली पर आधारित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:09:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों का दावा, 36 नागरिकों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान सरकार ने महिलाओं और बच्चों समेत 36 लोगों के मारे जाने का दावा किया, पाकिस्तान बोला- हालिया आतंकी हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a423786ad3d6/article-57312"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/afghanistan-pakistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। तालिबान सरकार ने सोमवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से किए गए सीमा-पार हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 36 नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 163 लोग घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का कहना है कि पक्तिया, पक्तिका और कुनर प्रांतों में कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी जनहानि और संपत्ति का नुकसान हुआ। दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन आरोपों के बीच अपनी कार्रवाई को हाल के आतंकी हमलों के जवाब में चलाया गया खुफिया-आधारित सैन्य अभियान बताया है। तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बीती रात हुए हमलों में 36 नागरिकों की मौत हुई है और 163 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि हमलों में तीन रिहायशी मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। उनके मुताबिक मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगान प्रशासन ने इस घटना को नागरिक आबादी पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।<br /><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">फितरत ने आरोप लगाया कि पक्तिया प्रांत के चमकनी जिले के मंडोखेल गांव में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक नागरिक के घर को निशाना बनाया। इस हमले में एक बुजुर्ग और एक बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जब गांव के लोग घायलों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे तो उसी स्थान पर दूसरी बार भी बमबारी की गई। तालिबान प्रशासन का दावा है कि इस दूसरी कार्रवाई में 28 ग्रामीणों की मौत हो गई और 158 लोग घायल हो गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। तालिबान सरकार ने यह भी कहा कि पक्तिका प्रांत के गियान जिले के वालुस्त गांव में भी एक घर पर हमला किया गया। इस घटना में छह लोगों की मौत होने का दावा किया गया है, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे बताए गए हैं। वहीं कुनर प्रांत के मनोगई जिले के बारोलो गांव में भी एक रिहायशी मकान को नुकसान पहुंचा। इस हमले में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन मकान पूरी तरह तबाह हो गया और परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ की गई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर सीमावर्ती क्षेत्र में सुनियोजित सैन्य अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और कराची में हुए आतंकी हमलों के बाद यह कार्रवाई आवश्यक हो गई थी। पाकिस्तान का दावा है कि उसका निशाना केवल आतंकी ठिकाने थे, न कि आम नागरिक।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">सीमा पर बढ़े तनाव की एक बड़ी वजह हाल में पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ हमला भी माना जा रहा है। कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय पर शनिवार रात हमला हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार हमलावरों ने एक वाहन से मुख्य द्वार को टक्कर मारी, जिसके बाद गोलीबारी और विस्फोट हुए। इस हमले में तीन अर्द्धसैनिक जवान और तीन हमलावर मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया था। कराची हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अलग हुए एक संगठन ने ली है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की सीमा से संचालित आतंकी संगठन उसके भीतर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई बार सीमा पार गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक असर सीमावर्ती गांवों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ता है, जिन्हें बार-बार विस्थापन और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत नहीं हुई तो सीमा पर हालात और जटिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पहले कई मौकों पर दोनों पक्षों से संयम बरतने और विवादों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की अपील कर चुका है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अफगानिस्तान में हुए इन हमलों ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालिबान सरकार नागरिकों के मारे जाने की बात कह रही है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:55:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ख्वाजा आसिफ ने जल सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा सकता है। संधि निलंबन के बाद दोनों देशों के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/tension-increases-again-on-indus-water-treaty-big-statement-of/article-56609"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indus-water-treaty-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनावपूर्ण बयानबाजी सामने आई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा है कि यदि पाकिस्तान को यह महसूस होता है कि उसकी जल सुरक्षा को खतरा पहुंच रहा है तो स्थिति गंभीर हो सकती है और देश अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर चल रही बहस फिर चर्चा में आ गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पानी किसी भी देश के लिए जीवनरेखा की तरह होता है और यदि इस पर असर पड़ता है तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। हालांकि बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हाल के महीनों में इस विषय पर हुए सभी तकनीकी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। इसके बावजूद उनका बयान पाकिस्तान में जल संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दरअसल अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और आतंकवाद से जुड़े मामलों पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में तैयार इस समझौते को दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में गिना जाता रहा है। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। इनमें सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का अधिकांश जल पाकिस्तान को दिया गया, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर भारत को अधिकार मिला। कई युद्धों और राजनीतिक तनावों के बावजूद यह संधि दशकों तक लागू रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान की जल व्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। देश की लगभग 90 प्रतिशत सिंचित कृषि भूमि को पानी इसी नदी तंत्र से मिलता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है और ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है। ऐसे में पानी की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी का असर सीधे खाद्य उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है। पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में पानी की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई प्रमुख नहरों में पानी का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच चुका है। नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64 प्रतिशत से अधिक पानी की कमी दर्ज की गई है, जबकि राइस कैनाल और दादू कैनाल में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले मौसम में फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान के कई बड़े बांध और हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी नदी के जल प्रवाह पर निर्भर करती हैं। मंगल और तारबेला जैसे प्रमुख जलाशयों में पानी की उपलब्धता कम होने की आशंका जताई जा रही है। यदि जल स्तर में लगातार गिरावट आती है तो बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है और पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि को लेकर उसका रुख स्पष्ट है। भारत लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी ढांचे के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करता। इसी कारण भारत ने पहलगाम हमले के बाद कड़ा रुख अपनाया। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि जल संसाधनों का मुद्दा आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है। दक्षिण एशिया में बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और सीमित जल स्रोतों के कारण पानी को लेकर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए जल प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता एक बड़ा विषय बना रहेगा। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी इस मुद्दे को और जटिल बना रही है। सिंधु जल संधि को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है। पाकिस्तान अपनी जल सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है, जबकि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख पर कायम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:38:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत में अग्नि-6 MIRV टेस्ट पर पाकिस्तान की चिंता, जहीर काजमी ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के MIRV अग्नि मिसाइल टेस्ट पर पाकिस्तान ने जताई चिंता। जहीर काजमी ने क्षेत्रीय असंतुलन और वैश्विक रणनीति पर उठाए सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistans-concern-over-agni-6-mirv-test-in-india-zaheer-kazmi/article-53055"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t143525.955.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत द्वारा </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">MIRV <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक हलचल तेज हो गई है। 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किए गए इस परीक्षण ने न सिर्फ भारत की मिसाइल क्षमता को नई ऊंचाई दी है बल्कि पड़ोसी देशों की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। इसी को लेकर पाकिस्तान के स्ट्रैटजिक प्लान्स डिवीजन के आर्म्स कंट्रोल एडवाइजर जहीर काजमी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भारत अब ऐसी दिशा में आगे बढ़ चुका है जहां उसकी क्षमताएं वैश्विक स्तर पर किसी भी लक्ष्य को प्रभावित कर सकती हैं और इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया काफी सीमित दिख रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस परीक्षण में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">MIRV) <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक का इस्तेमाल किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक ही मिसाइल को कई वारहेड्स के साथ अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता देता है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (</span>DRDO) <span lang="hi" xml:lang="hi">के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षण सफल रहा और कई पेलोड्स ने हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाया। विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक भारत की सामरिक क्षमता को नई दिशा देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अब एक ही मिसाइल से कई रणनीतिक ठिकानों को एक साथ प्रभावित किया जा सकता है। यह क्षमता अब तक केवल कुछ चुनिंदा देशों जैसे अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चीन और फ्रांस के पास ही मानी जाती थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहीर काजमी ने इस विकास पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि रणनीतिक संतुलन में बड़ा बदलाव है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत की बढ़ती अंतरमहाद्वीपीय क्षमता का वास्तविक उद्देश्य क्या है और क्या इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ेगा। उनके अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी देश अक्सर पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं पर सवाल उठाते हैं लेकिन भारत के मामलों में उतनी सख्ती नहीं दिखाई जाती। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की तकनीकें क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को बदल सकती हैं और इससे दक्षिण एशिया में हथियारों की प्रतिस्पर्धा बढ़ने का खतरा रहता है।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत की ओर से हालांकि इस परीक्षण को पूरी तरह वैज्ञानिक और रक्षा तकनीक के विकास का हिस्सा बताया गया है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DRDO <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह परीक्षण देश की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि </span>MIRV <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षमता किसी भी देश की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे संभावित खतरे की स्थिति में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:10:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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