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                <title>Property Dispute - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Property Dispute RSS Feed</description>
                
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                <title>वक्फ संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- ऐसे मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल ही करेगा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, ट्रिब्यूनल को दो महीने में फैसला करने का निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-big-decision-in-waqf-property-dispute-said/article-57132"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/waqf-property-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों की सुनवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों के निपटारे के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल ही सक्षम और वैधानिक मंच है। अदालत ने कहा कि जब वक्फ अधिनियम के तहत विवादों के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था उपलब्ध है, तब सीधे हाईकोर्ट में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मामला पहले से ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है तो वहीं उसकी सुनवाई होगी और उसी मंच पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया है कि लंबित मामले का कानून के अनुसार दो महीने के भीतर निपटारा किया जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता मोहम्मद अजमल खान ने कवर्धा स्थित जामा मस्जिद मुस्लिम ट्रस्ट की वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि वक्फ संपत्ति के मुतवल्ली यानी प्रबंधक की ओर से नियमों के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है, जिससे वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने कथित अवैध निर्माण को रोकने के लिए पहले ही आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण को रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण उन्हें न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता पहले ही वक्फ अधिनियम की धारा 83(2) के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल में आवेदन प्रस्तुत कर चुके थे। हालांकि उस समय ट्रिब्यूनल में आवश्यक कोरम उपलब्ध नहीं होने के कारण मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। मामले में राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड की ओर से अदालत में कहा गया कि वक्फ अधिनियम के तहत इस प्रकार के विवादों के निपटारे के लिए विशेष रूप से ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। अब ट्रिब्यूनल पूरी तरह कार्यशील है और संबंधित मामला पहले से वहीं लंबित है। इसलिए हाईकोर्ट को इस स्तर पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। उनका तर्क था कि जब कानून ने किसी विशेष विवाद के लिए अलग मंच निर्धारित किया है तो उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड के तर्कों से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि वक्फ अधिनियम में स्पष्ट रूप से ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों की सुनवाई और निर्णय का अधिकार दिया गया है। इसलिए हाईकोर्ट समानांतर रूप से इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपना पक्ष वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष ही रखें। साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि यदि मामला अभी भी लंबित है तो कानून के अनुरूप उसकी सुनवाई कर दो महीने के भीतर निर्णय दिया जाए। अदालत ने माना कि न्याय में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और यदि ट्रिब्यूनल अब कार्यशील है तो मामले का शीघ्र निपटारा किया जाना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस विवाद के गुण-दोष यानी मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्य, साक्ष्य और कानूनी प्रश्न ट्रिब्यूनल के समक्ष विचार के लिए खुले रहेंगे। ट्रिब्यूनल स्वतंत्र रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड और कानून के आधार पर अपना निर्णय देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह फैसला भविष्य में वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि जहां किसी विशेष कानून के तहत विवाद निपटाने के लिए वैधानिक मंच उपलब्ध हो, वहां सीधे हाईकोर्ट का रुख करने के बजाय पहले उसी मंच पर न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इससे न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ भी कम होगा और विशेष मामलों का निपटारा विशेषज्ञ मंचों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। वक्फ संपत्तियों को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में संपत्ति के प्रबंधन, उपयोग, निर्माण कार्य और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई तरह के कानूनी प्रश्न उठते हैं। वक्फ अधिनियम इन्हीं विवादों के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल की व्यवस्था करता है ताकि मामलों का त्वरित और विधिसम्मत निपटारा हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>संजय कपूर की संपत्ति विवाद में नया मोड़, EPF से पैसे निकालने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[करिश्मा कपूर के बच्चों की फीस संकट के बीच प्रिया सचदेव पहुंचीं कोर्ट, संपत्ति फ्रीज मामले में नोटिस जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/new-twist-in-sanjay-kapoors-property-dispute-demand-to-withdraw/article-54338"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/sanjay-kapur-case.jpg" alt=""></a><br /><p>करिश्मा कपूर के पूर्व पति और बिजनेसमैन संजय कपूर के निधन के बाद उनकी संपत्ति और वसीयत को लेकर शुरू हुआ कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में करिश्मा कपूर के बच्चों और संजय कपूर की वर्तमान पत्नी प्रिया सचदेव के बीच संपत्ति के अधिकारों को लेकर अदालत में सुनवाई जारी है। इसी बीच अब प्रिया कपूर ने कोर्ट में एक नई याचिका दायर करते हुए संजय कपूर के EPF (Employee Provident Fund) खाते से पैसे निकालने की अनुमति मांगी है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा किया जा सके।</p>
<p>यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब अदालत ने संजय कपूर की सभी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया। इसमें बैंक खाते, शेयर, निवेश, और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद किसी भी प्रकार की निकासी या ट्रांसफर पर रोक लग गई है।</p>
<p>प्रिया सचदेव की याचिका पर 26 मई को सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने कोर्ट से 30 अप्रैल के आदेश में आंशिक संशोधन की मांग की। उनके वकीलों ने दलील दी कि EPF खाते से निकाले जाने वाले धन का उपयोग केवल करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा की शिक्षा और आवश्यक खर्चों के लिए किया जाएगा। वकीलों के अनुसार, यह कदम बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए जरूरी है।</p>
<p>लाइव एंड लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिया कपूर ने कोर्ट के अंतरिम आदेश के कुछ हिस्सों में बदलाव की मांग की है। विशेष रूप से अनुच्छेद 79 के खंड B और D में संशोधन का अनुरोध किया गया है। इन खंडों में संपत्ति और वित्तीय नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध शामिल हैं।</p>
<p>इस बीच करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने पहले ही अदालत में याचिका दाखिल कर अपने पिता संजय कपूर की वसीयत को चुनौती दी है। उनका दावा है कि वसीयत में उनके अधिकारों को ठीक से शामिल नहीं किया गया है और दस्तावेज में कई विसंगतियां हैं। बच्चों ने आरोप लगाया है कि वसीयत में उनके नाम गलत तरीके से लिखे गए हैं, जिससे दस्तावेज की वैधता पर सवाल उठता है।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर, प्रिया सचदेव ने अदालत में एक वसीयत पेश की है, जिसमें दावा किया गया है कि संजय कपूर ने अपनी अधिकांश संपत्ति उनके नाम छोड़ी है। इस दावे के बाद विवाद और गहरा गया है, क्योंकि करिश्मा कपूर के बच्चे इसे फर्जी बता रहे हैं।</p>
<p>कोर्ट ने पहले सुनवाई के दौरान संजय कपूर की सभी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया था। इसके तहत न केवल बैंक खातों बल्कि कंपनी शेयर, कीमती संपत्तियों जैसे घड़ियां, आभूषण, पेंटिंग और यहां तक कि विदेशी खातों और क्रिप्टो संपत्तियों पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी भी संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है।</p>
<p>हालांकि कोर्ट ने बच्चों की शिक्षा और आवश्यक जीवन-यापन खर्चों के लिए सीमित राहत देने की बात कही थी। इसी वजह से अब प्रिया कपूर EPF से पैसे निकालने की अनुमति मांग रही हैं, ताकि बच्चों की फीस समय पर भरी जा सके। मामले की पृष्ठभूमि भी काफी जटिल है। करिश्मा कपूर और संजय कपूर की शादी 2003 में हुई थी और दोनों के दो बच्चे कियान और समायरा हैं। 13 साल बाद दोनों का तलाक हो गया था। इसके बाद संजय कपूर ने प्रिया सचदेव से शादी की थी। संजय कपूर का निधन 12 जून 2025 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।</p>
<p>तलाक के समय संजय कपूर ने लिखित रूप में बच्चों की शिक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी ली थी। इसी आधार पर करिश्मा कपूर के बच्चे अब अपनी शिक्षा खर्चों की जिम्मेदारी को लेकर कोर्ट पहुंचे हैं। समायरा, जो अमेरिका में पढ़ाई कर रही हैं, ने भी अदालत में कहा था कि पिछले कुछ महीनों से उनकी कॉलेज फीस नहीं भरी गई है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।</p>
<p>इस पर पहले की सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को फटकार भी लगाई थी और कहा था कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में देरी नहीं होनी चाहिए। उस समय प्रिया सचदेव के वकीलों ने आश्वासन दिया था कि बच्चों की फीस समय पर दी जाएगी, लेकिन संपत्ति फ्रीज होने के कारण अब भुगतान में अड़चन आ रही है। अब कोर्ट ने इस नई याचिका को स्वीकार करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है। अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है, जिसमें यह तय होगा कि EPF से पैसे निकालने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:44:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जांजगीर में खाट पर मिली खून से लथपथ लाशें, एक ही परिवार के चार लोगों की हुई हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[जांजगीर-चांपा के भवंतरा गांव में पति-पत्नी और नाती-नातिन की हत्या, खाट पर मिले शव। संपत्ति विवाद की आशंका, पुलिस जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/blood-soaked-bodies-found-on-cots-in-janjgir-four-people/article-53329"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t121748.359.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांजगीर-चांपा जिले के भवंतरा गांव में बुधवार देर रात हुई एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। एक ही परिवार के चार लोगों की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई और उनकी लाशें निर्माणाधीन मकान के अंदर खाट पर पड़ी मिलीं। मृतकों में पति-पत्नी और उनके नाती-नातिन शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह पूरा परिवार रात में वहीं नए मकान के भीतर ही सोया हुआ था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां निर्माण का काम चल रहा था। सुबह जब मिस्त्री वहां पहुंचा तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। खून से सनी चार लाशें देखकर उसने तुरंत गांव वालों को सूचना दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना की खबर फैलते ही भवंतरा गांव में भीड़ जमा हो गई और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि हत्या किसी धारदार हथियार से की गई है और वारदात सोते समय अंजाम दी गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच में संपत्ति विवाद को लेकर रंजिश की आशंका जताई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अधिकारी साफ कह रहे हैं कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मौके पर फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। निर्माणाधीन मकान के अंदर बिखरा खून और अस्त-व्यस्त सामान देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि वारदात अचानक और बेहद नजदीक से की गई हो सकती है। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और एक पड़ोसी को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लगातार पूछताछ चल रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच गांव में मातम जैसा माहौल है। मृतकों के परिजन लगातार रो-रोकर बेहाल हैं और किसी को यकीन ही नहीं हो रहा कि एक ही रात में पूरा परिवार खत्म हो गया। ग्रामीणों में भी डर और गुस्से का माहौल है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई लोग इसे पुरानी रंजिश या संपत्ति विवाद से जोड़कर देख रहे हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। एएसपी उमेश कश्यप ने बताया कि हत्या सोते समय धारदार हथियार से की गई है और हर एंगल से जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए संदिग्ध से पूछताछ कर रही है और जल्द ही मामले के खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन गांव में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस दर्दनाक घटना को लेकर सहमे हुए हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:25:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>हत्यारोपी को संपत्ति का हक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर दे दिया अहम फैसला, समझें</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हत्या का आरोपी मृतक की संपत्ति का वारिस नहीं हो सकता। जानें हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 और पूरा मामला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-supreme-court-explained-that-the-murderer-has-no-right/article-53057"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t150453.990.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संपत्ति विवाद और पारिवारिक रिश्तों के बीच बढ़ते आपराधिक मामलों में एक बड़ा सवाल अक्सर सामने आता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने ही परिजन की हत्या कर दे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या उसे उसकी जायदाद में हिस्सा मिलेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सवाल सिर्फ नैतिक नहीं बल्कि कानूनी दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस मुद्दे पर स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है कि हत्यारोपी किसी भी हाल में मृतक की संपत्ति का वारिस नहीं हो सकता।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह मामला उस समय चर्चा में आया जब कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची। विवाद बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले से जुड़ा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर अलग राय सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन शामिल थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति पर मृतक की हत्या या हत्या के लिए उकसाने का आरोप है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह उस संपत्ति पर किसी भी तरह का अधिकार नहीं जता सकता।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत केवल उन मामलों तक सीमित नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां वसीयत मौजूद नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन परिस्थितियों में भी लागू होगा जहां वसीयत के जरिए संपत्ति का बंटवारा किया गया हो। यहां तक कि अगर मामला अदालत में विचाराधीन हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भी आरोपी को संपत्ति से लाभ लेने का अधिकार नहीं मिलेगा। यह टिप्पणी कानून की व्याख्या के साथ-साथ नैतिकता और न्याय के सिद्धांतों को भी मजबूत करती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">1956 की धारा 25 इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्रावधान स्पष्ट रूप से कहता है कि जो व्यक्ति किसी हिंदू की हत्या करता है या हत्या में सहायता करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह उस व्यक्ति की संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कोई व्यक्ति अपने ही अपराध का लाभ न उठा सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कानून यह भी स्पष्ट करता है कि केवल हत्यारे को ही संपत्ति से वंचित किया जाता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उसकी संतानों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि वे अपराध में शामिल नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उत्तराधिकार से नहीं रोका जाता। इसका मतलब यह है कि अपराध का दंड व्यक्तिगत स्तर पर सीमित रहता है और निर्दोष परिवार के सदस्यों को इसका नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस फैसले के पीछे न्यायालय का तर्क केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिक पॉलिसी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे और कोई भी व्यक्ति अपने अपराध से लाभ न उठा सके।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे कई मामलों के लिए दिशा-निर्देशक साबित होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां संपत्ति विवाद और आपराधिक आरोप एक साथ जुड़े होते हैं। अदालत का यह रुख समाज में यह संदेश भी देता है कि कानून केवल अधिकार नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जिम्मेदारी और नैतिकता को भी बराबर महत्व देता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:10:11 +0530</pubDate>
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