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                <title>Lord Vishnu - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Lord Vishnu RSS Feed</description>
                
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                <title>18 जून 2026 का पंचांग: गुरुवार को शुभ योगों का संयोग, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल दिन</title>
                                    <description><![CDATA[आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि, धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक साधना के लिए दिन रहेगा विशेष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/almanac-of-june-18-2026-coincidence-of-auspicious-yogas-on/article-56237"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/18-june-2026-panchang.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">18 जून 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के अंतर्गत आता है। गुरुवार होने के कारण यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। आज का दिन आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पारिवारिक मंगल कार्यों के लिए अनुकूल रह सकता है। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है और कई लोग व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग ले सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार दिन की शुरुआत शुभ ऊर्जा के साथ मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करना, भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना और जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है। कई परिवार इस दिन विशेष पूजा का आयोजन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक गुरुवार को धार्मिक गतिविधियों का अलग महत्व देखा जाता है। मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता पाठ और भजन-कीर्तन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता लेकर आती है। आज कुछ शुभ योग भी बन रहे हैं, जिनका प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। धार्मिक कार्यों के अलावा शिक्षा, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े प्रयासों के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है। कई लोग नए कार्यों की योजना बनाने या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले पंचांग और शुभ मुहूर्त का सहारा लेते हैं। इसी कारण पंचांग का महत्व आज भी भारतीय समाज में बना हुआ है। विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की जानकारी लेने वालों की संख्या ऐसे दिनों में बढ़ जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग केवल तिथि और नक्षत्र की जानकारी भर नहीं देता, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के दिन चंद्रमा की स्थिति और ग्रहों की चाल को ध्यान में रखते हुए कई धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पंचांग की गणना में कुछ अंतर देखने को मिलता है, लेकिन इसके मूल सिद्धांत समान रहते हैं। यही वजह है कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग स्थानीय पंचांग के आधार पर अपने दैनिक और धार्मिक कार्यों की योजना बनाते हैं। गुरुवार को देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई लोग अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी गुरुवार को सदाचार, संयम और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज के पंचांग के अनुसार दिनभर कई शुभ समय ऐसे रहेंगे जिनमें पूजा, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं। सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। हालांकि राहुकाल और अन्य अशुभ कालखंडों का ध्यान रखने की भी सलाह दी जाती है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक मानी जाती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग पंचांग देखकर अपने महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करते हैं। पंचांग का उद्देश्य केवल भविष्य बताना नहीं बल्कि व्यक्ति को समय के महत्व और प्रकृति के साथ तालमेल का संदेश देना भी है। 18 जून 2026 का यह दिन श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। जो लोग आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह दिन विशेष महत्व रख सकता है। धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के माध्यम से लोग अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 00:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मई 2026 में पूर्णिमा व्रत: तिथि, पूजा समय, महत्व और संपूर्ण विधि</title>
                                    <description><![CDATA[30 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा पूर्णिमा व्रत, जो भगवान विष्णु और शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/purnima-vrat-date-puja-time-importance-and-complete-method-in/article-54349"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/purnima-vrat-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूर्णिमा व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाने वाला व्रत है, जिसे शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि यानी पूर्ण चंद्रमा के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में मई माह की पूर्णिमा 30 मई, शनिवार को पड़ रही है, जिसे भक्तगण विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और उपवास के साथ मनाएंगे। यह दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन सत्यनारायण व्रत और पूजा का आयोजन भी किया जाता है, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">30 मई 2026 को पूर्णिमा तिथि दोपहर 11:58 बजे से शुरू होकर 31 मई 2026 को दोपहर 02:15 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा का दिन चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा का प्रतीक होता है और इस दिन प्रकृति तथा मानव शरीर पर विशेष आध्यात्मिक प्रभाव माना जाता है। इस दिन भक्त सुबह से ही व्रत की तैयारी करते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं, जो चंद्र दर्शन के बाद पूजा और प्रसाद ग्रहण करके पूर्ण किया जाता है। कुछ भक्त कठोर उपवास रखते हैं जिसमें वे पूरे दिन बिना भोजन और जल के रहते हैं, जबकि कुछ लोग केवल एक सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं जिसमें नमक और दाल का प्रयोग नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल लेकिन आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भक्त प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूरे दिन ईश्वर के नाम का स्मरण करते हैं। सूर्यास्त के बाद जब चंद्रमा का दर्शन होता है, तब विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भक्त अपने घर या मंदिर में भगवान विष्णु और शिव की आराधना करते हैं। इस अवसर पर सत्यनारायण कथा का पाठ भी किया जाता है, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। पूजा के दौरान दीप जलाए जाते हैं, मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और भगवान को फल, मिठाई तथा अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है, जिसमें भक्त पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की ऊर्जा शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। विशेष रूप से सत्यनारायण पूजा को इस दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्णिमा व्रत का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में भी मिलता है और इसे पुण्य प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, स्वास्थ्य और शांति का संचार होता है। इसके अलावा यह व्रत मानसिक संतुलन को भी बढ़ाता है और आध्यात्मिक ऊर्जा को मजबूत करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति का प्रभाव मानव शरीर और मानसिक अवस्था पर पड़ता है, जिससे ध्यान और साधना के लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार 30 मई 2026 का पूर्णिमा व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन भक्तों के लिए आस्था, उपवास और ईश्वर भक्ति का विशेष संगम प्रस्तुत करता है। भगवान विष्णु और शिव की आराधना के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है तथा भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 17:07:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुवार को केले के पेड़ में चढ़ाएं ये 5 चीजें, गुरु ग्रह देंगे शुभ फल और खुलेंगे तरक्की के रास्ते</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुवार के दिन केले के पेड़ में हल्दी, गुड़, कौड़ी समेत 5 चीजें अर्पित करने से गुरु ग्रह मजबूत होने और तरक्की के रास्ते खुलने की मान्यता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/offer-these-5-things-to-a-banana-tree-on-thursday/article-53311"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t104720.329.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिंदू धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन मानते हैं। कहा जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और केले के पेड़ की सेवा करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है। ज्योतिषी इसे बहुत शुभ मानते हैं। गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करने से विवाह</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करियर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा भी करते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह स्नान के बाद पीले कपड़े पहनकर केले के पेड़ में जल चढ़ाना बहुत शुभ होता है। अगर इसमें हल्दी या केसर भी मिलाए जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका विशेष फल मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। पूजा करते समय माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाने की भी परंपरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे गुरु ग्रह की कृपा बनी रहती है और मानसिक तनाव भी घटता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुवार को चने की दाल और गुड़ भगवान विष्णु को अर्पित करना शुभ माना जाता है। कई लोग इसे केले के पेड़ की जड़ में भी अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और रुके हुए कामों में तेजी आती है। करियर में रुकावट झेल रहे लोगों को पीले कपड़े की जड़ में अर्पित करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे तरक्की के अवसर मिलते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शाम को केले के पेड़ के पास घी का दीपक जलाने की तो परंपरा है ही। कुछ लोग दीपक में सिक्का डालकर पूजा करते हैं और उस सिक्के को बाद में तिजोरी या पर्स में रख लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे धन संबंधी परेशानियां कम होंगी और आय में स्थिरता बनी रहेगी। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुवार को कौड़ी अर्पित करने का भी रिवाज है। पूजा के बाद उस कौड़ी को धन रखने वाले स्थान पर रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने का विश्वास है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक जानकारों का कहना है कि इन उपायों को श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ करना चाहिए। ये अंधविश्वास नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आस्था और परंपरा का हिस्सा हैं। कई लोग नियमित रूप से गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने का एक आसान तरीका मानते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 10:54:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>अपरा एकादशी व्रत कथा: सुनने मात्र से मिलता है 1 हजार गोदान जितना फल</title>
                                    <description><![CDATA[अपरा एकादशी व्रत कथा का महत्व, श्रीकृष्ण द्वारा बताई गई कथा और पद्म पुराण अनुसार इसका फल 1000 गोदान के बराबर पुण्य देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/just-by-listening-to-the-story-of-apara-ekadashi-fast/article-53248"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t105256.960.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस बार ये तिथि 13 मई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुधवार को मनाई जा रही है। धर्म के हिसाब से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये दिन भगवान विष्णु को समर्पित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस दिन व्रत-उपवास करने से जीवन में किए गए सभी पाप मिट जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वो जानबूझकर किए गए हों या अनजाने। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का माहौल रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और भक्त लोग भगवान विष्णु की विशेष आराधना में लगे रहते हैं। इस दिन का अपरा एकादशी व्रत कथा का विशेष महत्व है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका जिक्र पद्म पुराण में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस कथा का पाठ करने से हजार गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे सुनना और पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस व्रत से न सिर्फ आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता भी आती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक पौराणिक कथा के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी आती है और इसका क्या महत्व है। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि इसे अपरा एकादशी कहा जाता है और ये बेहद पुण्य देने वाली होती है। उन्होंने बताया कि जो इस दिन श्रद्धा से व्रत करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके बड़े पाप भी समाप्त हो जाते हैं। कथा में आगे कहा गया है कि चाहे वह ब्रह्महत्या जैसा दोष हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झूठी गवाही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छल-कपट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या धर्म विरुद्ध कर्म - अपरा एकादशी का व्रत इन सभी पापों का नाश करने की शक्ति रखता है। पद्म पुराण में इसे इतनी महत्ता दी गई है कि इसे करने वाले को अनेक तीर्थों के पुण्य के बराबर फल मिलता है। माघ मास में प्रयाग स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काशी में शिवरात्रि व्रत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गया में पिंडदान और बदरी-केदार के दर्शन जैसे पुण्य कर्मों के समान फल इस एकादशी के व्रत से प्राप्त होता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कथा में यह भी बताया गया है कि जो श्रद्धा से भगवान वामन और विष्णु जी की पूजा करता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सभी संकटों से मुक्त हो जाता है और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति करता है। कहा गया है कि अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से उतना ही पुण्य मिलता है जितना एक हजार गायों के दान से होता है। इसलिए यह दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत करने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास करते हैं और रात में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए कथा का श्रवण करते हैं। परंपरा के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दिन दान-पुण्य का भी खास महत्व होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जरूरतमंदों को भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएं देने से पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि अपरा एकादशी को देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग इसे आत्मशुद्धि और मोक्ष के साधन के रूप में देखते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कब है अपरा एकादशी? जानें व्रत का सही मुहूर्त और पारण समय</title>
                                    <description><![CDATA[अपरा एकादशी 2026 कब है? जानें 13 या 14 मई में सही तारीख, व्रत पारण समय, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/when-is-apara-ekadashi-know-the-exact-muhurat-and-paran/article-53081"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t095315.653.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Apara Ekadashi 2026:</strong> अपरा एकादशी धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व रखती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस साल लोगों में तारीख को लेकर थोड़ी उलझन है। कई लोग जानना चाहते हैं कि अपरा एकादशी 13 मई को मनाई जाएगी या 14 मई को। पंचांग के हिसाब से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुधवार को होगा। ये एकादशी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे जलक्रीड़ा एकादशी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अचला एकादशी और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पंचांग के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट पर होगी और इसका समापन 13 मई को दोपहर 1 बजकर 29 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को रखा जाएगा। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्रत का पारण 14 मई की सुबह किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 31 मिनट से 8 बजकर 14 मिनट तक बताया गया है। द्वादशी तिथि 14 मई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट तक रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए श्रद्धालुओं को इस समय के भीतर पारण कर लेना चाहिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपरा एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस एकादशी को पुराणों में विशेष फलदायी बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कई लोग इसे आर्थिक संकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक तनाव और ग्रह दोषों से राहत पाने के लिए भी करते हैं। ज्योतिष जानकारों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह व्रत मन की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने में मददगार होता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपरा एकादशी के दिन लोग सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र पहनते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पीले फूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुलसी दल और फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाते हैं। बहुत से लोग पूरी रात भजन-कीर्तन और विष्णु मंत्रों का जाप भी करते हैं। अगले दिन जरूरतमंदों को भोजन कराने और दान देने का भी विशेष महत्व है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक ग्रंथों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है और पुराने पापों का नाश होता है। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करते हैं। इस बार भी मंदिरों और विष्णु धामों में विशेष पूजा-पाठ की तैयारियां चल रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 10:13:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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