<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/economic-policy/tag-12834" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Economic Policy - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/12834/rss</link>
                <description>Economic Policy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>LPG सब्सिडी पर नया नियम, 7 दिन में जवाब नहीं दिया तो मिलना बंद जाएगा ये बड़ा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने LPG सब्सिडी नियम कड़े किए, आय जांच के बाद 7 दिन में जवाब नहीं देने पर सब्सिडी बंद होगी। जानें पूरा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t133605.638.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए सरकार ने नया और सख्त नियम लागू करने की योजना बनाई है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर दबाव के चलते यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब उन उपभोक्ताओं की पहचान की जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं लेकिन फिर भी </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां इनकम टैक्स विभाग के डेटा का सहारा ले रही हैं। कहा जा रहा है कि जिनकी सालाना आय करीब </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये या उससे अधिक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है। सबसे अहम बात ये है कि अगर किसी ग्राहक को आपत्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे केवल </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में जवाब देना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं तो सब्सिडी अपने आप बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं को मोबाइल से </span>SMS <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जाहिर है कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल कंपनियों ने उन ग्राहकों की सूची बनानी शुरू कर दी है जिनकी टैक्सेबल इनकम तय सीमा से ज्यादा पाई गई है। इन लोगों को मैसेज के जरिए बताया जा रहा है कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए पात्र नहीं माने जा सकते। संदेश में ये भी लिखा जा रहा है कि यदि किसी का डेटा गलत है या उनकी आय की जानकारी ठीक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। ये शिकायत टोल-फ्री नंबर या आधिकारिक पोर्टल पर की जा सकती है। अगर तय समय में किसी का जवाब नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं में चिंता भी दिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों में जिनके आय के रिकॉर्ड में कोई तकनीकी गलती हो सकती है या जिनके दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि ये कदम पूरी पारदर्शिता के साथ सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए उठाया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है। लगातार सब्सिडी पर होने वाले खर्च से राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नियंत्रित करने के लिए ये सख्ती जरूरी मानी जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब सब्सिडी को सिर्फ जरूरतमंद वर्ग तक सीमित करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग हो सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में और भी बदलाव देखने की चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि सरकार आयात खर्च कम करने के लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर भी निगरानी बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरा मामला देश की आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका प्रभाव सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब और रसोई पर पड़ सकता है.</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188</guid>
                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-12t133605.638.jpg"                         length="176878"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने क्यों की 1 साल तक सोना न खररदने की अपील? समझें वजह</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की एक साल सोना न खरीदने की अपील पर चर्चा तेज। जानें गोल्ड आयात, फॉरेक्स रिजर्व और आर्थिक असर का पूरा गणित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/why-did-pm-modi-appeal-not-to-buy-gold-for/article-53114"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t130237.512.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देश में सोने की खरीद को लेकर हाल ही में एक नई बहस शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्रा टालने की भी बात की। यह अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर टेंशन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि इस संदेश का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सोने का आयात महंगा साबित हो रहा है। देश में सोने की मांग बहुत ज्यादा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसकी पूर्ति मुख्य रूप से विदेशों से आयात के जरिए होती है। जब भारत सोना खरीदता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे डॉलर में भुगतान करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि सोने की कीमतों और आयात में वृद्धि के साथ देश का इंपोर्ट बिल भी तेजी से बढ़ता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने हालात को और भी कठिन बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे डॉलर की निकासी बढ़ती है और फॉरेन एक्सचेंज पर दबाव आता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों की माने तो पीएम की अपील को देशभक्ति और स्वदेशी भावना से जोड़ने की कोशिश की गई है। उन्होंने लोगों से ऊर्जा की बचत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की सलाह दी है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर देश में सोने की खपत कुछ कम होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे ट्रेड बैलेंस को सुधारने में मदद मिल सकती है और रुपये की स्थिति भी मज़बूत हो सकती है। लेकिन यह भी सच है कि भारत में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए किसी भी बदलाव का सीधा असर आम लोगों की आदतों पर पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल फॉरेक्स रिजर्व की स्थिति पूरी तरह से चिंताजनक नहीं है। मार्च </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग </span>691 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के स्तर पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कई महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट्स से यह भी पता चला है कि रिजर्व में सोने का हिस्सा धीरे-धीरे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो निवेश रणनीति में बदलाव का संकेत देता है। सितंबर </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">की तुलना में इसमें वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए आयात और खर्च दोनों पर संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि लंबे समय में आर्थिक स्थिरता बनी रह सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/why-did-pm-modi-appeal-not-to-buy-gold-for/article-53114</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/why-did-pm-modi-appeal-not-to-buy-gold-for/article-53114</guid>
                <pubDate>Mon, 11 May 2026 13:39:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-11t130237.512.jpg"                         length="193725"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        