<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/digital-security/tag-12870" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Digital Security - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/12870/rss</link>
                <description>Digital Security RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बाल यौन शोषण कंटेंट पर सरकार सख्त, इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिन में मांगा जवाब, विवादित विज्ञापन तुरंत हटाने और ऐसे कंटेंट की पहुंच रोकने के निर्देश; सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/instagram-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापनों के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए उसकी पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित कंटेंट को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक और हटाया जाए। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने 4 जुलाई को जारी नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट या विज्ञापन बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देता है या उपयोगकर्ताओं को ऐसे अवैध कंटेंट तक पहुंचने में मदद करता है, तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BBC की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ताओं को दूसरे प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों की ओर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही थी। ऐसे विज्ञापन Meta के मॉडरेशन सिस्टम से स्वीकृति मिलने के बाद ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे थे। जब इस संबंध में शिकायत की गई तो शुरुआती स्तर पर संबंधित विज्ञापन को कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं माना गया। बाद में मामला सार्वजनिक होने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाने, संबंधित अकाउंट निलंबित करने और संदिग्ध लिंक हटाने की बात स्वीकार की।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में ऐसी चूक कैसे हुई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी किया हो। इससे पहले 1 जुलाई को सरकार ने WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था। लगातार दूसरी बार नोटिस जारी होने से स्पष्ट है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर अधिक सतर्क और सख्त रुख अपना रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में क्या कहता है कानून</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कानून के अनुसार बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी प्रकार की सामग्री का निर्माण, संग्रह, डाउनलोड, खरीद, बिक्री, प्रसारण या साझा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67B के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अवैध और आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर त्वरित कार्रवाई करें। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना और शिकायत मिलने पर समयबद्ध तरीके से सामग्री हटाना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>यदि ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह है कि यदि किसी उपयोगकर्ता को इस प्रकार का कोई भी संदिग्ध या अवैध कंटेंट दिखाई देता है तो उसे किसी भी स्थिति में डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।  केवल सरकार या सोशल मीडिया कंपनियां ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन स्वीकृति प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र की अधिक सख्ती से निगरानी की जाएगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ आईटी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना और बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:31:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/instagram-news.jpg"                         length="107512"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Google जल्द ला रहा नया सिस्टम, अब QR Code स्कैन किए बिना नहीं खुलेगी कोई भी वेबसाइट</title>
                                    <description><![CDATA[Google नया QR Code Verification सिस्टम टेस्ट कर रहा है। अब वेबसाइट खोलने से पहले फोन से QR स्कैन करना पड़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/google-is-soon-launching-a-new-system-now-no-website/article-53128"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t155553.840.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Google <span lang="hi" xml:lang="hi">एक नए </span>QR Code <span lang="hi" xml:lang="hi">वेरीफिकेशन सिस्टम पर काम कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आने वाले समय में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है। ये मौजूदा </span>Captcha <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम को बदल सकता है।इसका मतलब है कि जल्द ही जब आप किसी वेबसाइट पर जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो </span>“I’m Not a Robot” <span lang="hi" xml:lang="hi">पर क्लिक करने की बजाय आपको अपने फोन से </span>QR Code <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कैन करना होगा। कंपनी इसके शुरुआती परीक्षण में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>Google <span lang="hi" xml:lang="hi">ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक रिपोर्ट्स में इसकी चर्चाएँ तेजी से बढ़ रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अभी की बात करें</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ज्यादातर वेबसाइट्स पर </span>Captcha <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें यूजर्स को ट्रैफिक लाइट पहचानने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तस्वीरें चुनने या कुछ टेक्स्ट टाइप करने जैसे टास्क दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वेबसाइट का उपयोग एक असली इंसान कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ना कि कोई ऑटोमेटेड बॉट। मगर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ सालों में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक की प्रगति ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब कई स्मार्ट बॉट्स आसानी से </span>Captcha <span lang="hi" xml:lang="hi">टेस्ट पास कर लेते हैं। इसी वजह से </span>Google <span lang="hi" xml:lang="hi">एक नया समाधान तलाश रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस नए सिस्टम के तहत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेबसाइट पर एक </span>QR Code <span lang="hi" xml:lang="hi">दिखाई देगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे यूजर को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फोन एक डिजिटल सिग्नल वेबसाइट को भेजेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सिस्टम यह निर्धारित करेगा कि क्या सामने असली यूजर है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई रिपोर्ट्स का कहना है कि यह सिस्टम डिवाइस-बेस्ड वेरिफिकेशन पर आधारित होगा। यानी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्क्रीन पर सिर्फ क्लिक करने के बजाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूजर के फोन और डिवाइस को भी वेरिफिकेशन के हिस्से के रूप में शामिल किया जाएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे फर्जी अकाउंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पैम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बॉट गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस खबर के साथ-साथ प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि अगर हर वेबसाइट के साथ फोन लिंक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ऑनलाइन गतिविधियों की ट्रैकिंग करना आसान हो जाएगा। इससे डेटा सिक्योरिटी और यूजर प्राइवेसी पर नई बहस हो सकती है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह फीचर शुरुआती दौर में है और आने वाले समय में कुछ चुनिंदा वेबसाइट्स या सेवाओं पर इसका परीक्षण किया जा सकता है। अगर यह सिस्टम सफल हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले वर्षों में इंटरनेट उपयोग करने का तरीका काफी बदल सकता है। एक खास बात यह है कि मोबाइल फोन अब सिर्फ लॉगिन डिवाइस नहीं रह जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह डिजिटल पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/google-is-soon-launching-a-new-system-now-no-website/article-53128</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/google-is-soon-launching-a-new-system-now-no-website/article-53128</guid>
                <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:12:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-11t155553.840.jpg"                         length="118715"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        