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                <title>Mahakaleshwar Temple - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Mahakaleshwar Temple RSS Feed</description>
                
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                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                <title>गुरुवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान हुआ भव्य पूजन, पंचामृत और भस्म अर्पण से सजा भगवान का स्वरूप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3386bb71ac9/article-56257"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(8).jpg" alt=""></a><br /><div class="text-base my-auto mx-auto [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p>गुरुवार तड़के उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान एक बार फिर दिव्य और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंज उठी। भस्म आरती के इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया गया। मंदिर परिसर में उस समय श्रद्धा और आस्था का माहौल ऐसा था कि हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन में लीन दिखाई दिया। पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया और इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। हरिओम जल से किए गए इस अभिषेक के दौरान वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की गई। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न की गई। बताया जा रहा है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर दिन भस्म आरती के समय इसी विधि का पालन किया जाता है।</p>
<p>इसके बाद प्रथम घंटाल के साथ ‘हरि ओम’ जल अर्पित किया गया और पूरे गर्भगृह में कपूर आरती की गूंज फैल गई। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस क्षण को अपने मोबाइल और आंखों में कैद करने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन व्यवस्था के चलते गर्भगृह के अंदर केवल सीमित लोग ही प्रवेश कर पाए। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन, रजत चंद्र और गुलाब के पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद रजत मुकुट और त्रिपुंड से भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। यह पूरा दृश्य अत्यंत मनमोहक था और ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे स्वयं कैलाश से भगवान भक्तों को दर्शन देने उतरे हों। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर परंपरागत रूप से भस्म अर्पित की गई। यह वही क्षण होता है जिसका इंतजार देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सबसे अधिक करते हैं। भस्म अर्पण के समय पूरा वातावरण शांत हो जाता है और केवल मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनाई देती है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से इस भस्म को अर्पित करने की परंपरा निभाई गई, जिसे सदियों पुरानी धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और उन्हें राजा स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। इस दौरान भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषण और सुगंधित पुष्पों से उनका भव्य श्रृंगार किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और गुलाब के विशेष हार से भगवान को सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई दे रहा था। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु इस पूरे दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे और कई लोगों की आंखों में आस्था के आंसू भी नजर आए। सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिली और हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए उत्सुक दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही मान्यता इस आरती को विशेष बनाती है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:29 +0530</pubDate>
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                <title>रविवार भस्म आरती में राजा स्वरूप सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान पंचामृत अभिषेक, भांग, चंदन और बिल्वपत्र अर्पित कर किया गया विशेष श्रृंगार, बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/devotees-had-divine-darshan-of-baba-mahakal-dressed-as-king/article-55874"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न कराया गया। तड़के से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक धार्मिक विधियों के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू से अलंकृत किया गया। परंपरा के अनुसार उन्हें भांग अर्पित की गई तथा चंदन और बिल्वपत्र से विशेष पूजन किया गया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर दिखाई दिए। ऐसा कहा जाता है कि भस्म आरती के समय बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु इस अलौकिक अनुष्ठान को देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिषेक और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया तथा कपूर आरती उतारी गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर जय महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह भस्म आरती मंदिर की सबसे प्राचीन और विशिष्ट परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार होने के कारण भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल का एक और दिव्य स्वरूप भक्तों के सामने प्रकट हुआ। उन्हें रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आध्यात्मिक वातावरण का विशेष अनुभव हुआ। श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया तथा मंदिर परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना का क्रम आगे बढ़ाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। कई श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान रखती है। इस अनूठी परंपरा को देखने और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>रविवार की भस्म आरती में भी श्रद्धा, आस्था और भक्ति का ऐसा ही संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा और बाबा महाकाल के जयघोष लगातार गूंजते रहे। दिव्य श्रृंगार, विशेष पूजा-अर्चना और भस्म आरती के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते नजर आए। धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:12:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल मंदिर पहुंचे रेमो, अंकिता और विक्की जैन, शयन आरती में दिखी भक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में रेमो डिसूजा, अंकिता लोखंडे और विक्की जैन ने शयन आरती में हिस्सा लिया। नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल के दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/remo-ankita-and-vicky-jain-reach-mahakal-temple-devotion-seen/article-54044"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-mahakal-temple-remo-d-souza--ankita-lokhande-vicky-jain.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुक्रवार रात उज्जैन के </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Shri Mahakaleshwar Temple <span lang="hi" xml:lang="hi">में भक्ति और आस्था का एक खास माहौल देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आए। मशहूर कोरियोग्राफर </span>Remo D'Souza <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि टीवी अभिनेत्री </span>Ankita Lokhande <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने पति </span>Vicky Jain <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ शयन आरती में शामिल हुईं। रात करीब 10 बजे होने वाली इस आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ मौजूद थी। जैसे ही आरती शुरू हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा नंदी हॉल </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">हर हर महादेव</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">के जयकारों से गूंज उठा। कलाकार भी आम श्रद्धालुओं की तरह शांत होकर आरती में शामिल होते हुए दिखे। इन मशहूर चेहरों पर लोगों की नजरें कुछ वक्त के लिए टिकी रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी माहौल पूरी तरह से धार्मिक बना रहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों का कहना है कि सभी कलाकार सीधे नंदी हॉल पहुंचे और वहां बैठकर बाबा महाकाल की शयन आरती देखी। आरती के दौरान मंदिर का वातावरण अत्यंत दिव्य लग रहा था। घंटों और शंख की आवाज के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार भक्ति में डूबे हुए थे। कई श्रद्धालुओं ने मोबाइल से तस्वीरें लेने की कोशिश की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते मंदिर प्रशासन ने लगातार व्यवस्था संभाली। आरती खत्म होने के बाद</span>, Remo D'Souza, Ankita Lokhande <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Vicky Jain <span lang="hi" xml:lang="hi">ने नंदी महाराज का पूजन किया। महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार सभी ने नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं। इस दौरान उनके चेहरे पर श्रद्धा और शांति साफ झलक रही थी। कुछ श्रद्धालुओं ने इस पर टिप्पणी की कि बड़े कलाकारों को इस तरह भक्ति में लीन देखकर अच्छा लगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सिर्फ यही नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये पहली बार नहीं है जब ये कलाकार बाबा महाकाल की शरण में पहुंचे हैं। </span>Remo D'Souza <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले भी कई बार उज्जैन आ चुके हैं और अपनी धार्मिक आस्था को लेकर चर्चित रहते हैं। वहीं</span>, Ankita Lokhande <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Vicky Jain <span lang="hi" xml:lang="hi">भी समय-समय पर महाकाल मंदिर में दर्शन करते नजर आते हैं। हाल के महीनों में कई फिल्म और टीवी कलाकार उज्जैन पहुंच चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे महाकाल मंदिर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। शुक्रवार रात भी मंदिर में देर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और शयन आरती के बाद पूरा परिसर भक्ति में डूबा नजर आया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:57:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>23 मई महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, उमड़े श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में 23 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रृंगार हुआ। सुबह से उमड़े श्रद्धालु।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/23rd-may-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakal-dressed-as-king/article-54005"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के 23 मई को भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का बेहद आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसके बाद गर्भगृह में पूजा और खास अनुष्ठान शुरू हुए। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कई भक्त भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही मंदिर पहुंच गए थे। महाकाल भस्म आरती के समय पूरा परिसर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हर-हर महादेव</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय बाबा महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारों से गूंजता रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक विधियों के तहत पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। आज के श्रृंगार में खास तौर पर भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित पुष्पों का उपयोग किया गया। भगवान महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें रजत का मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और मुण्डमाल आकर्षण का केंद्र बना। आरती के समय गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक लग रहा था। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु लगातार दर्शन करने की कोशिश करते नजर आए।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण से पहले परंपरा के अनुसार पहले घंटा बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़ों से ढंककर भस्म रमाई गई। इसी दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। कई लोग नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तों से पूरी तरह भर चुका था। सप्ताहांत और खास तारीख होने के कारण दर्शनार्थियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए थे। उज्जैन का सुबह का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा था और दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर भावुक दिखे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 10:09:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती में दिखा महाकालेश्वर का दिव्य रूप, त्रिशूल-त्रिनेत्र से हुआ बाबा का श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 21 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का त्रिशूल, त्रिनेत्र और त्रिपुंड से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-form-of-mahakaleshwar-seen-in-mahakal-bhasma-aarti-baba/article-53843"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-mahakal-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Ujjain Mahakal Bhasma Aarti:</strong> उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार 21 मई की सुबह भक्ति और श्रद्धा का एक विशेष माहौल था। ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती शुरू हुई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आ रही थीं। कई भक्त तो रात से ही दर्शन के इंतज़ार में बैठे थे। महाकाल आरती के समय पूरा मंदिर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के नारे से गूंज उठा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआत में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। फिर दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बनाए गए पंचामृत से अभिषेक किया गया। मंदिर के अंदर मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना रहा। बताया गया कि आज के विशेष श्रृंगार में भगवान महाकाल के मस्तक पर त्रिशूल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">त्रिनेत्र और त्रिपुंड अर्पित किए गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान खासतौर पर आकर्षित किया। भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया और कपूर आरती हुई। परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढकने के बाद भस्म लगाई गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मूंडमाल और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह की इस भस्म आरती में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी इच्छाएँ बताते नजर आए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए थे। सुबह होते-होते पूरा परिसर श्रद्धालुओं से भर गया और हर तरफ केवल बाबा महाकाल के जयकारे सुनाई दे रहे थे। महाकाल आरती के दर्शन के लिए आए लोगों का कहना था कि तड़के होने वाली यह आरती आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यही वजह है कि रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:03:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>17 मई महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजा ज्योतिर्लिंग</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 17 मई की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/17-may-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakals-supernatural-makeup-jyotirling/article-53562"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> रविवार तड़के 17 मई को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से हुई। सुबह लगभग 4 बजे जब मंदिर के कपाट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो गर्भगृह में भक्ति का माहौल बन गया। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे। बताया जा रहा है कि सप्ताहांत होने के चलते आज मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब मंदिर के पट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं की पूजा की। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ। पुजारियों ने भांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य श्रृंगार किया। बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिनेत्र अर्पित कर एक आकर्षक स्वरूप दिया गया। भस्म आरती से पहले घंटे की पहली ध्वनि गूंजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हरिओम का जल अर्पित करते हुए वैदिक मंत्रों के बीच पूजा संपन्न हुई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिपूर्वक भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित किए गए। गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक नजर आ रहा था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह होते-होते मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य की प्राप्ति की। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर में लगातार घंटियों की आवाज़ और शिव भजनों के बीच भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया। अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी भी तैनात किए गए थे। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा का भी खास ख्याल रखा गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से मन को शांति मिली और पूरा वातावरण शिवमय हो गया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में दिखा दिव्य रूप, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से हुआ विशेष श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 16 मई की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-form-seen-in-mahakals-bhasma-aarti-special-adornment-done/article-53477"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-mahakaleshwar-temple-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">16 मई को उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में भक्ति और श्रद्धा का खास माहौल देखा गया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद विधिपूर्वक भगवान महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस मौके पर भगवान का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही मंदिर के पट खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुजारी सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन करने लगे। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक पूजा हुई। बताया जा रहा है कि आरती के दौरान गर्भगृह में वैदिक मंत्रों का जाप और घंटियों की ध्वनि गूंजती रही। भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित पुष्पों से भगवान का खास श्रृंगार किया गया। माथे पर त्रिपुंड और त्रिनेत्र अर्पित कर बाबा महाकाल को दिव्य स्वरूप दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण का कार्य शुरू होने से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़ों से ढंककर विधि के अनुसार भस्म लगाई गई। आगे चलकर भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और अलग-अलग प्रकार की पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। गर्भगृह का माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। भस्म आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु लगातार बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह की भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। कई श्रद्धालु तो देर रात से ही मंदिर पहुंच गए थे। नंदी महाराज के दर्शन के लिए भी लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के पास जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी प्रबंध किए गए थे। शनिवार होने और अमावस्या की तिथि के चलते श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक थी। पूरे मंदिर परिसर में "जय श्री महाकाल" के जयकारों से माहौल गूंजता रहा और सुबह का दृश्य बेहद आध्यात्मिक नजर आया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 10:04:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, मस्तक पर सजा ॐ और त्रिशूल</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती हुई। बाबा महाकाल का ॐ और त्रिशूल से दिव्य श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-adornment-in-the-bhasma-aarti-of-mahakal-decoration-of/article-53383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-15t095238.547.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुक्रवार तड़के उज्जैन में प्रसिद्ध श्री महाकलेशवर ज्योतिर्लिंग मंदिर (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple) </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद विधिपूर्वक पूजा शुरू हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और गर्भगृह में उपस्थित देवी-देवताओं की आराधना के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें तो देर रात से ही लगनी शुरू हो गई थीं। जैसे ही मंदिर के पट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूरा परिसर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के घोष से गूंज उठा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूजा के बाद पुजारियों ने दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया। इसके बाद भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और विशेष आभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर ॐ और त्रिशूल का रुचिकर स्वरूप सजाया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रों के बीच आराधना की गई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म रमाई गई। उस समय मंदिर का दृश्य बेहद आध्यात्मिक लग रहा था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित फूलों और आभूषणों से किया गया अलंकरण भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। सुबह की भस्म आरती में देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी इच्छाएं भी बता रहे थे। मंदिर परिसर में लगातार बाबा महाकाल के जयकारे गूंजते रहे और पूरा माहौल भक्तिमय रहा। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भविष्य में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 09:55:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>महाकाल मंदिर पहुंचीं तमन्ना भाटिया, भस्म आरती में दिखीं भक्ति में लीन</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेत्री तमन्ना भाटिया उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भस्म आरती में हिस्सा लिया और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/tamannaah-bhatia-reached-mahakal-temple-and-was-seen-engrossed-in/article-53163"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t105657.087.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिल्म अभिनेत्री तमन्ना भाटिया मंगलवार सुबह उज्जैन पहुंचीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती में भाग लिया। सुबह करीब चार बजे मंदिर में हलचल बढ़ गई थी। जब तमन्ना नंदी हॉल पहुंचीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वहां मौजूद भक्तों की नजरें उन पर टिक गईं। उन्होंने माथे पर चंदन का त्रिपुंड लगाया हुआ था और हल्के पारंपरिक कपड़े पहने हुए थीं। वह करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दर्शन करती रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आ रही थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि आरती के बाद उन्होंने नंदी महाराज की पूजा भी की और अपने कान में मनोकामना कही। इसके बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। मंदिर के पुजारियों और प्रशासन ने विधि-विधान से उन्हें दर्शन कराए। सुबह से ही श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तमन्ना के पहुंचने की खबर के बाद कई लोग उन्हें देखने के लिए रुक गए। इस दौरान व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य बनी रही। अधिकारियों ने बताया कि दर्शन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही की गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दर्शन के बाद तमन्ना भाटिया ने कहा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, "<span lang="hi" xml:lang="hi">बाबा महाकाल जिसे बुलाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही यहां तक पहुंच पाता है।" उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर का माहौल बेहद ऊर्जा से भरा हुआ है और भस्म आरती में बैठना उनके लिए खास अनुभव रहा। उन्होंने माना कि इस अनुभव को शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। सुनने में आ रहा है कि उज्जैन आने का उनका कार्यक्रम पहले से तय था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तमन्ना भाटिया लंबे समय से हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों की जानी-पहचानी चेहरे रही हैं। उन्होंने कम उम्र में अभिनय की शुरुआत की थी और कई बड़ी फिल्मों में काम किया है। फिल्म </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">बाहुबली</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में निभाया गया उनका किरदार आज भी चर्चा में रहता है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे तमिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलुगु और हिंदी सिनेमा में लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई फिल्मी कलाकार और चर्चित चेहरे महाकाल मंदिर का दौरा कर रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:00:19 +0530</pubDate>
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