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                <title>MBBS admission - दैनिक जागरण</title>
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                <description>MBBS admission RSS Feed</description>
                
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                <title>NEET-UG 2027 में बड़ा बदलाव, छह दिन तक होगी परीक्षा; पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड होगा एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार, देशभर में 1000 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, JEE की तर्ज पर कई दिनों में होगा आयोजन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-change-in-neet-ug-2027-the-exam-will-be-for/article-58290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/neet-ug-2027.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा एक ही दिन के बजाय कम से कम छह दिनों तक अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाएगी। परीक्षा के लिए देशभर में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सुविधाजनक तरीके से परीक्षा दिलाई जा सके। यह बदलाव पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा में लगभग 25 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं। अब तक यह परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन पेन-पेपर मोड में आयोजित की जाती रही है। लेकिन बढ़ती परीक्षार्थियों की संख्या, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की योजना बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत परीक्षा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main की तरह कई दिनों तक आयोजित होगी। अभ्यर्थियों को अलग-अलग तिथियों और शिफ्टों में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा डिजिटल परीक्षा प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया भी अधिक तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा के लिए देशभर में 1000 से अधिक आधुनिक परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे। इन केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी सहायता उपलब्ध रहेगी। परीक्षा केंद्रों का चयन इस तरह किया जाएगा कि अभ्यर्थियों को अपने घर से बहुत दूर यात्रा न करनी पड़े। सरकार और NTA का प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवारों को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की समान सुविधा मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">NEET परीक्षा में यह बदलाव वर्ष 2024 में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों के बाद तेज हुए सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। उस समय परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठे थे। कई राज्यों से पेपर लीक, फर्जीवाड़े और परीक्षा संचालन में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने का फैसला लिया था। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर विचार कर रहे थे, लेकिन विवाद के बाद इस प्रक्रिया को गति मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष भी NEET-UG परीक्षा चर्चा में रही। वर्ष 2026 में परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इसमें करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के कुछ दिनों बाद गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की सूचना मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई। जांच के आधार पर 12 मई को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई। इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने री-एग्जाम की नई तारीख जारी की। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से कई समस्याओं का समाधान संभव है। प्रश्नपत्र डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेगा, जिससे प्रिंटिंग, परिवहन और वितरण के दौरान सुरक्षा जोखिम कम होंगे। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तरों का मूल्यांकन भी तेजी से किया जा सकेगा। हालांकि इसके साथ तकनीकी चुनौतियां भी होंगी, जिनसे निपटने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना आवश्यक होगा। नई परीक्षा प्रणाली लागू करने के लिए केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है। परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, बिजली की निर्बाध व्यवस्था, बैकअप नेटवर्क, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी ताकि किसी अभ्यर्थी को नुकसान न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा के नियम सख्त, सुप्रीम कोर्ट की शर्तें होंगी अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी और पीजी काउंसलिंग 2026-27 में वैधानिक अभिभावक का प्रमाण जरूरी, फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strict-rules-of-nri-quota-in-medical-colleges-supreme-courts/article-58055"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/nri-quota.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई (नॉन-रेजिडेंट इंडियन) कोटा के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए इस वर्ष नियम पहले की तुलना में काफी सख्त कर दिए गए हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने सभी राज्यों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नीट-यूजी और नीट-पीजी काउंसलिंग में केवल वही अभ्यर्थी एनआरआई कोटे का लाभ ले सकेंगे, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरी तरह पूरा करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य एनआरआई कोटे के दुरुपयोग पर रोक लगाना और केवल वास्तविक पात्र उम्मीदवारों को ही इसका लाभ सुनिश्चित करना है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों से फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करने की शिकायतें सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए दिशा-निर्देशों के तहत अब केवल किसी एनआरआई रिश्तेदार का नाम बताकर प्रवेश लेना संभव नहीं होगा। अभ्यर्थी को यह भी साबित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति उसका वैधानिक अभिभावक है। इसके लिए गार्जियन एंड वाड्र्स एक्ट, 1890 के तहत जारी अभिभावक होने का वैध प्रमाण और शपथ-पत्र जमा करना अनिवार्य रहेगा। यह नियम केवल एनआरआई श्रेणी के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) और वे अभ्यर्थी भी इसके दायरे में आएंगे जिन्होंने भारतीय नागरिकता से एनआरआई श्रेणी में बदलाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच पहले की तुलना में अधिक सख्ती से की जाएगी और किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर एनआरआई कोटे का लाभ नहीं दिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने राज्यों से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए और केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को पात्र माना जाए जिनके माता-पिता वास्तव में एनआरआई हों, विदेश में निवास करते हों या फिर कोई निकट संबंधी कानूनी रूप से वैधानिक अभिभावक घोषित किया गया हो। अदालत ने पहले भी अपने फैसलों में स्पष्ट किया था कि एनआरआई कोटे का उद्देश्य विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों के बच्चों को अवसर देना है, न कि इसे सामान्य प्रवेश प्रक्रिया से बचने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाए। इसी आधार पर अब दस्तावेजों की जांच और पात्रता का सत्यापन अधिक विस्तृत तरीके से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में इन नए नियमों को लागू करने को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्य में अभी भी वर्ष 2018 के नियमों के आधार पर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाती है। ऐसे में यदि केंद्र के नए दिशा-निर्देशों को लागू करना है तो पहले राज्य सरकार को संबंधित नियमों में संशोधन कर राजपत्र (गजट) में अधिसूचना जारी करनी होगी। उसके बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी। जब तक राज्य सरकार औपचारिक संशोधन नहीं करती, तब तक पुराने नियमों के आधार पर प्रक्रिया चलने की संभावना बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अधिकांश राज्यों को अपने नियमों में बदलाव करना ही पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों और गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान कई प्रवेश रद्द भी किए गए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने इस बार दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने के बाद केवल वास्तविक पात्र उम्मीदवार ही एनआरआई कोटे का लाभ उठा सकेंगे और फर्जीवाड़े की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के तहत लगभग 15 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। राज्य के छह निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर करीब 100 से 110 सीटें इस श्रेणी के लिए निर्धारित हैं। इन सीटों की वार्षिक फीस लगभग 30 लाख रुपये तक पहुंचती है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस कोटे के माध्यम से प्रवेश लेने का प्रयास करते हैं। अब नए नियम लागू होने पर उन छात्रों और अभिभावकों पर सीधा असर पड़ेगा जो एनआरआई कोटे के तहत आवेदन करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:59 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता का नवीनीकरण किया, अब 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आगामी सत्र में 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह निर्णय प्रदेश के उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर संस्थानों में प्रवेश का सपना देखते हैं। एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी आदेश के बाद सिम्स प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है। मान्यता के नवीनीकरण का अर्थ है कि संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाओं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमित रूप से 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मंजूरी नहीं बल्कि संस्थान की गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि है। उन्होंने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अस्पताल में व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के विद्यार्थियों को बाहर के राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश का प्रयास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सिम्स की 150 सीटों का नवीनीकरण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर स्थित सिम्स लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां न केवल एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार भी होता है। मेडिकल छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के उपचार की वास्तविक प्रक्रिया को भी करीब से सीखते हैं। यही व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग समय-समय पर सभी मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन करता है। इस दौरान फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, अनुसंधान सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की जाती है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों की मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है। सिम्स का इस प्रक्रिया में सफल होना संस्थान की निरंतर प्रगति का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल शिक्षा का विस्तार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ना या उनकी मान्यता का नवीनीकरण होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक माना जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिलता है। सीटों की निरंतर उपलब्धता से प्रतिस्पर्धा के बीच योग्य छात्रों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में संस्थान में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऐसे निर्णय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बनाते हैं। अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार होने से भविष्य में सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
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                <title>NEET UG 2026 परीक्षा रद्द, CBI करेगी जांच, पेपर लीक के शक में NTA ने दिया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[NEET UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी गई है। पेपर लीक के शक में CBI जांच करेगी। 22 लाख छात्रों पर असर, नई परीक्षा तिथि बाद में घोषित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/neet-ug-2026-exam-canceled-cbi-will-investigate-on-suspicion/article-53186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t132351.805.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसकी जांच अब सीबीआई करेगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (</span>NTA) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली थी। पेपर लीक के गंभीर आरोप लगने के बाद एनटीए ने ये निर्णय लिया है। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और नई परीक्षा की तारीख जल्द ही बताई जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एनटीए ने एक नोटिस में बताया कि कुछ दिन पहले पेपर लीक से संबंधित शिकायतें मिल रही थीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे उन्होंने 8 मई को केंद्रीय एजेंसियों के पास जांच के लिए भेजा। प्रारंभिक निष्कर्षों और सुरक्षा एजेंसियों की राय के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तय किया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना सही नहीं होगा। इसीलिए </span>NEET UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 को रद्द करने का निर्णय लिया गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस फैसले से लाखों छात्रों में हलचल मच गई है। खबरें हैं कि इस बार लगभग 22.05 लाख उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होने वाले थे। यह परीक्षा मेडिकल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेंटल और आयुष कोर्स जैसे एमबीबीएस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीडीएस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीएएमएस और बीएचएमएस में दाखिले के लिए आयोजित की जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसका असर पूरे देश के मेडिकल एडमिशन सिस्टम पर पड़ने वाला है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामला और गंभीर तब हो गया जब राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SOG) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह दावा किया कि परीक्षा से पहले एक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">गेस पेपर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्केट में था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 410 सवाल शामिल थे। जांच में यह पता चला है कि इनमें से लगभग 120 सवाल ठीक उसी तरह के थे जो परीक्षा में पूछे गए थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी आया है कि कई छात्रों को पहले से ही वही सवाल मिल चुके थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पेपर लीक का संदेह और बढ़ गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरा नेटवर्क विभिन्न राज्यों में फैला हुआ था। कहा जा रहा है कि यह गेस पेपर केरल से निकल कर राजस्थान तक पहुंचा। राजस्थान के सीकर और झुंझुनूं जैसे क्षेत्रों में यह कुछ कंसल्टेंसी और कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया गया। एसओजी ने देहरादून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीकर और झुंझुनूं से 20 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें अधिकांश करियर काउंसलर और कोचिंग से जुड़े लोग बताए जा रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एनटीए ने अपने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया है कि सीबीआई इस मामले की पूरी गहराई से जांच करेगी। एजेंसी ने यह भी कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग देगी और सभी जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराएगी। यह निर्णय छात्रों के हित और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए लिया गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि दोबारा परीक्षा होने से छात्रों और अभिभावकों को कुछ असुविधा होगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एनटीए ने साफ किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों को नए सिरे से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले से किया गया पंजीकरण और परीक्षा केंद्र की जानकारी मान्य रहेगी। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जाएगी। जो शुल्क पहले जमा किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे वापस किया जाएगा। नई परीक्षा की तारीख और एडमिट कार्ड से संबंधित जानकारी एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।</span></span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे मामले ने मेडिकल प्रवेश प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हुई हैं कि पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन शामिल था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:24:52 +0530</pubDate>
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