<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/indian-oil/tag-13005" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Indian Oil - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/13005/rss</link>
                <description>Indian Oil RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कच्चा तेल छह महीने के निचले स्तर पर, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर मजबूत मार्जिन कमा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/crude-oil-price-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसका फायदा अब तक देश के आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया है। अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने वाला कच्चा तेल अब करीब छह महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। इंडियन बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की कीमत घटकर 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। यह युद्ध के दौरान बने करीब 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो चुका है तो घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा हालात में सरकारी तेल विपणन कंपनियां अच्छी स्थिति में हैं। डीएएम कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा कच्चे तेल की कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 10.5 रुपए और डीजल पर लगभग 11 रुपए प्रति लीटर तक का मार्जिन हासिल कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब कंपनियां लगभग ब्रेक ईवन की स्थिति में होती हैं, यानी न उन्हें विशेष लाभ होता है और न ही नुकसान। चूंकि 1 जून के बाद से कच्चे तेल की कीमत लगातार इस स्तर से नीचे बनी हुई है, इसलिए कंपनियां पिछले कई सप्ताह से मुनाफे में कारोबार कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें धीरे-धीरे नीचे आने लगीं। शुरुआती युद्धविराम के बाद भी कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा और अब यह 70 डॉलर के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं दी है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच असंतोष भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं रहा। वर्ष 2018 में जब कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल था, तब दिल्ली में पेट्रोल लगभग 72 रुपए और डीजल करीब 70 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल की कीमत गिरकर करीब 43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, लेकिन खुदरा कीमतों में वैसी राहत देखने को नहीं मिली जैसी उपभोक्ता उम्मीद कर रहे थे। बाद में 2022 में जब कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि जनवरी 2023 में कच्चे तेल के दाम फिर करीब 75 डॉलर तक आ गए, लेकिन उस समय भी खुदरा कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया। तेल कंपनियों का तर्क था कि वे पहले हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह भी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों वाले दौर में भी तेल कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना रहा। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख तेल कंपनियों के नतीजे सकारात्मक रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चार बड़ी तेल कंपनियों का संयुक्त मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 22 प्रतिशत तक बढ़ा। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था और मार्च के दौरान इसका औसत भाव भी 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहा। इसके बावजूद कंपनियों के मुनाफे में कमी नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच निजी क्षेत्र की ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को अपने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले के बाद कई शहरों में नायरा के पंपों पर ईंधन सरकारी कंपनियों की तुलना में सस्ता मिलने लगा। भोपाल जैसे शहरों में भी नायरा के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। हालांकि इसके बाद भी सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का हवाला देते हुए चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नियंत्रण में हैं, इसलिए इन कंपनियों के फैसलों का असर सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। फिलहाल कीमतों में कटौती नहीं होने से आम लोगों की जेब पर बोझ बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/crude-oil-price-%282%29.jpg"                         length="152862"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, भोपाल में पेट्रोल 110.75 रुपये पहुंचा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल, इंदौर समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल फिर महंगा हुआ। एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े ईंधन के दाम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/petrol-diesel-again-expensive-petrol-reached-rs-11075-in-bhopal-price/article-53732"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/madhya-pradesh-petrol-diesel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मंगलवार से फिर से बढ़ा दी गई हैं। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">90<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह एक हफ्ते में दूसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी कंपनियों ने तीन-तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। भोपाल में पेट्रोल </span>110.75<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए प्रति लीटर और डीजल </span>95.91<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए तक पहुंच गया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर में पेट्रोल </span>110.79<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए और डीजल </span>95.97<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। उज्जैन में पेट्रोल की कीमत सबसे ज्यादा </span>111.27<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए तक पहुंच गई। सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लोग नए रेट पर चर्चा करते हुए नजर आए। कुछ का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और मुश्किल हो सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बनी हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। कुछ दिन पहले जो कच्चा तेल </span>70<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल के आसपास था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर के पार पहुंच चुका है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। इंडियन ऑयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पेट्रोलियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से मिली जानकारी में बताया गया कि कंपनियों को हर महीने करीब </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा था। ऐसे में कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आम लोगों को इससे राहत मिलती नहीं दिख रही। शहरों में ऑटो और बस किराए बढ़ने की चर्चा शुरू हो गई है। ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका सीधा असर सब्जियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राशन और रोजमर्रा के सामान पर पड़ेगा। किसानों की चिंता भी बढ़ी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए डीजल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोगों में यह सवाल भी उठ रहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आखिर इतनी ज्यादा क्यों हो जाती हैं। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए कच्चे तेल की कीमत केवल शुरुआत होती है। इसके बाद रिफाइनिंग खर्च</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंपनियों का मार्जिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीलर कमीशन और राज्यों का वैट जुड़ जाता है। यही वजह है कि बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा कीमत उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ती है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स की अलग-अलग दरें होने की वजह से भोपाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी रेट बदल जाते हैं। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह बयान भी चर्चा में है जिसमें उन्होंने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को जरूरत के अनुसार करने की बात कही थी। तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ईंधन का जिम्मेदारी से उपयोग करना जरूरी है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/petrol-diesel-again-expensive-petrol-reached-rs-11075-in-bhopal-price/article-53732</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/petrol-diesel-again-expensive-petrol-reached-rs-11075-in-bhopal-price/article-53732</guid>
                <pubDate>Tue, 19 May 2026 09:50:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/madhya-pradesh-petrol-diesel-price.jpg"                         length="109125"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>LPG सब्सिडी पर नया नियम, 7 दिन में जवाब नहीं दिया तो मिलना बंद जाएगा ये बड़ा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने LPG सब्सिडी नियम कड़े किए, आय जांच के बाद 7 दिन में जवाब नहीं देने पर सब्सिडी बंद होगी। जानें पूरा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t133605.638.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए सरकार ने नया और सख्त नियम लागू करने की योजना बनाई है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर दबाव के चलते यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब उन उपभोक्ताओं की पहचान की जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं लेकिन फिर भी </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां इनकम टैक्स विभाग के डेटा का सहारा ले रही हैं। कहा जा रहा है कि जिनकी सालाना आय करीब </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये या उससे अधिक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है। सबसे अहम बात ये है कि अगर किसी ग्राहक को आपत्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे केवल </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में जवाब देना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं तो सब्सिडी अपने आप बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं को मोबाइल से </span>SMS <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जाहिर है कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल कंपनियों ने उन ग्राहकों की सूची बनानी शुरू कर दी है जिनकी टैक्सेबल इनकम तय सीमा से ज्यादा पाई गई है। इन लोगों को मैसेज के जरिए बताया जा रहा है कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए पात्र नहीं माने जा सकते। संदेश में ये भी लिखा जा रहा है कि यदि किसी का डेटा गलत है या उनकी आय की जानकारी ठीक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। ये शिकायत टोल-फ्री नंबर या आधिकारिक पोर्टल पर की जा सकती है। अगर तय समय में किसी का जवाब नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं में चिंता भी दिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों में जिनके आय के रिकॉर्ड में कोई तकनीकी गलती हो सकती है या जिनके दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि ये कदम पूरी पारदर्शिता के साथ सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए उठाया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है। लगातार सब्सिडी पर होने वाले खर्च से राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नियंत्रित करने के लिए ये सख्ती जरूरी मानी जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब सब्सिडी को सिर्फ जरूरतमंद वर्ग तक सीमित करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग हो सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में और भी बदलाव देखने की चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि सरकार आयात खर्च कम करने के लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर भी निगरानी बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरा मामला देश की आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका प्रभाव सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब और रसोई पर पड़ सकता है.</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188</guid>
                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-12t133605.638.jpg"                         length="176878"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        