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                <title>Bharat Petroleum - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Bharat Petroleum RSS Feed</description>
                
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                <title>पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, भोपाल में पेट्रोल 110.75 रुपये पहुंचा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल, इंदौर समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल फिर महंगा हुआ। एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े ईंधन के दाम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/petrol-diesel-again-expensive-petrol-reached-rs-11075-in-bhopal-price/article-53732"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/madhya-pradesh-petrol-diesel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मंगलवार से फिर से बढ़ा दी गई हैं। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">90<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह एक हफ्ते में दूसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी कंपनियों ने तीन-तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। भोपाल में पेट्रोल </span>110.75<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए प्रति लीटर और डीजल </span>95.91<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए तक पहुंच गया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर में पेट्रोल </span>110.79<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए और डीजल </span>95.97<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। उज्जैन में पेट्रोल की कीमत सबसे ज्यादा </span>111.27<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए तक पहुंच गई। सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लोग नए रेट पर चर्चा करते हुए नजर आए। कुछ का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और मुश्किल हो सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बनी हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। कुछ दिन पहले जो कच्चा तेल </span>70<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल के आसपास था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर के पार पहुंच चुका है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। इंडियन ऑयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पेट्रोलियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से मिली जानकारी में बताया गया कि कंपनियों को हर महीने करीब </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा था। ऐसे में कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आम लोगों को इससे राहत मिलती नहीं दिख रही। शहरों में ऑटो और बस किराए बढ़ने की चर्चा शुरू हो गई है। ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका सीधा असर सब्जियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राशन और रोजमर्रा के सामान पर पड़ेगा। किसानों की चिंता भी बढ़ी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए डीजल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोगों में यह सवाल भी उठ रहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आखिर इतनी ज्यादा क्यों हो जाती हैं। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए कच्चे तेल की कीमत केवल शुरुआत होती है। इसके बाद रिफाइनिंग खर्च</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंपनियों का मार्जिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीलर कमीशन और राज्यों का वैट जुड़ जाता है। यही वजह है कि बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा कीमत उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ती है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स की अलग-अलग दरें होने की वजह से भोपाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी रेट बदल जाते हैं। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह बयान भी चर्चा में है जिसमें उन्होंने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को जरूरत के अनुसार करने की बात कही थी। तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ईंधन का जिम्मेदारी से उपयोग करना जरूरी है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 09:50:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>LPG सब्सिडी पर नया नियम, 7 दिन में जवाब नहीं दिया तो मिलना बंद जाएगा ये बड़ा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने LPG सब्सिडी नियम कड़े किए, आय जांच के बाद 7 दिन में जवाब नहीं देने पर सब्सिडी बंद होगी। जानें पूरा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t133605.638.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए सरकार ने नया और सख्त नियम लागू करने की योजना बनाई है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर दबाव के चलते यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब उन उपभोक्ताओं की पहचान की जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं लेकिन फिर भी </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां इनकम टैक्स विभाग के डेटा का सहारा ले रही हैं। कहा जा रहा है कि जिनकी सालाना आय करीब </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये या उससे अधिक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है। सबसे अहम बात ये है कि अगर किसी ग्राहक को आपत्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे केवल </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में जवाब देना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं तो सब्सिडी अपने आप बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं को मोबाइल से </span>SMS <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जाहिर है कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल कंपनियों ने उन ग्राहकों की सूची बनानी शुरू कर दी है जिनकी टैक्सेबल इनकम तय सीमा से ज्यादा पाई गई है। इन लोगों को मैसेज के जरिए बताया जा रहा है कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए पात्र नहीं माने जा सकते। संदेश में ये भी लिखा जा रहा है कि यदि किसी का डेटा गलत है या उनकी आय की जानकारी ठीक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। ये शिकायत टोल-फ्री नंबर या आधिकारिक पोर्टल पर की जा सकती है। अगर तय समय में किसी का जवाब नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं में चिंता भी दिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों में जिनके आय के रिकॉर्ड में कोई तकनीकी गलती हो सकती है या जिनके दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि ये कदम पूरी पारदर्शिता के साथ सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए उठाया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है। लगातार सब्सिडी पर होने वाले खर्च से राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नियंत्रित करने के लिए ये सख्ती जरूरी मानी जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब सब्सिडी को सिर्फ जरूरतमंद वर्ग तक सीमित करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग हो सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में और भी बदलाव देखने की चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि सरकार आयात खर्च कम करने के लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर भी निगरानी बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरा मामला देश की आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका प्रभाव सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब और रसोई पर पड़ सकता है.</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:49 +0530</pubDate>
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