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                <title>Stock Market Crash - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Stock Market Crash RSS Feed</description>
                
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                <title>सेंसेक्स-निफ्टी में चौथे दिन आई बड़ी गिरावट, निवेशकों के 11 लाख करोड़ डूबे</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट से निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये डूबे। जानिए सेंसेक्स-निफ्टी टूटने की बड़ी वजहें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-fall-in-sensex-nifty-for-the-fourth-day-investors-lost/article-53208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t164202.544.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारतीय शेयर मार्केट पर लगातार चौथे दिन भारी दबाव देखने को मिला। मंगलवार को सेंसेक्स लगभग 1100 अंक टूटकर 74,894 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">निफ्टी 50 भी 23,500 से नीचे गिर गया। पिछले दो दिनों में सेंसेक्स में लगभग 2400 अंक और निफ्टी में करीब 600 अंक की गिरावट हो चुकी है। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ चार ट्रेडिंग सेशंस में निवेशकों की पूंजी करीब 11 लाख करोड़ रुपये घट गई। सुबह से बैंकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली का जोर रहा। दलाल स्ट्रीट पर माहौल कुछ दबाव वाला नजर आया और छोटे निवेशकों में घबराहट साफ झलक रही थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है कि बाजार की कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील की हो रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने और सोना खरीदने में सतर्क रहने की बात कही थी। मार्केट ने इसे खपत में संभावित कमी के संकेत के रूप में लिया। इसके चलते ज्वेलरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">होटल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एविएशन और लग्ज़री सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने इस पर कोई सीधा आर्थिक संकेत नहीं दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ी है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट का मूड भी खराब कर दिया। तेल सप्लाई को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कच्चे तेल की कीमतों पर सीधे दिख रही हैं। ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भारत जैसे आयातित देश के लिए चिंता का विषय है। जानकारों का कहना है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय रुपया भी कमजोर होता जा रहा है। मंगलवार को यह डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। साल की शुरुआत से अब तक इसमें 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। कमजोर रुपये के चलते विदेशी निवेशकों का भरोसा कम हो गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मई में अब तक करीब 19,500 करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले जुलाई से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसका सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ रहा है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां के 10 साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उभरते बाजारों के लिए समस्याएँ पैदा कर रही हैं। अमेरिकी बॉंड यील्ड 4.42 फीसदी तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर भारत समेत एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। जब तक अमेरिका-ईरान का तनाव कम नहीं होता</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल में राहत नहीं मिलती और विदेशी बिकवाली धीमी नहीं पड़ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक शेयर बाजार में दबाव बना रह सकता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ जानकार इसे बड़ी गिरावट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करेक्शन मानते हैं। उनका मत है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की बजाय सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की नजर ग्लोबल संकेतों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:46:34 +0530</pubDate>
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