<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/fasting-legend/tag-13128" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Fasting Legend - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/13128/rss</link>
                <description>Fasting Legend RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वट सावित्री व्रत कथा 2026: सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा को पढ़कर ही मिलेगा व्रत का फल, जरूर पढ़ें</title>
                                    <description><![CDATA[वट सावित्री व्रत कथा 2026 में सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कहानी और व्रत का महत्व जानें। यह कथा अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/vat-savitri-vrat-katha-2026-you-will-get-the-results/article-53496"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/vat-savitri-vrat-katha-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Vat Savitri Vrat Katha 2026:</strong> वट सावित्री व्रत की कहानी को लेकर 2026 में देशभर में एक बार फिर से आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को सुहागिन महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत करती हैं। सुबह से ही वट वृक्ष की पूजा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">धागा बांधने और उपवास रखने की परंपराएं कई जगहों पर देखने को मिलती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस व्रत में वट सावित्री व्रत कथा का पाठ या श्रवण किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ बैठकर यह कथा सुनती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे माहौल भक्ति और श्रद्धा से भर जाता है। ज्योतिषचार्यों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस व्रत का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है और इसे बेहद फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि जो महिलाएं सच्चे मन से यह व्रत करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वट सावित्री व्रत कथा 2026 से जुड़ी पौराणिक कहानी में सावित्री और सत्यवान का किस्सा सबसे खास माना जाता है। कथा के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मद्र देश के राजा अश्वपति के घर यज्ञ के प्रभाव से एक तेजस्वी कन्या का जन्म हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका नाम सावित्री रखा गया। वह बचपन से ही बेहद गुणवान और धर्म परायण थी। जब विवाह के लिए तैयार हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राजा ने उसे खुद पति चुनने का अधिकार दिया। सावित्री ने वन-वन भटकते हुए शाल्व देश के निर्वासित राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपना पति चुना। देवर्षि नारद ने पहले ही राजा अश्वपति को चेतावनी दी थी कि सत्यवान की उम्र कम है और एक साल बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सावित्री ने अपने निर्णय पर कायम रही। विवाह के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने अपने ससुराल में वन में रहने का निर्णय लिया और जल्दी ही वह दिन आ गया जब सत्यवान के जीवन में केवल कुछ ही दिन बचे थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहानी में बताया गया है कि अंतिम दिन सावित्री ने बिना अन्न-जल ग्रहण किए कठोर उपवास रखा और जंगल में अपने पति के साथ गई। लकड़ी काटते समय सत्यवान के सिर में तेज दर्द हुआ और वह सावित्री की गोद में लेट गया। उसी समय</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यमराज खुद उसकी आत्मा लेने आए। सावित्री भी यमराज के पीछे गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और पतिव्रत धर्म की बातें करती रही। यमराज उसके दृढ़ संकल्प और ज्ञान से प्रसन्न हुए और उसे तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने पहले अपने सास-ससुर की आंखों की रोशनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर अपने ससुर के खोये हुए राज्य और अंत में सौ पुत्रों का वरदान मांगा। यमराज ने जब यह वरदान स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें सत्यवान की आत्मा लौटानी पड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बिना पति के सौ पुत्र संभव नहीं थे। इस तरह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म और बुद्धि से अपने पति को फिर से जीवित किया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस कथा का श्रवण और पाठ करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति की उम्र बढ़ती है। इसलिए हर साल वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं बड़ी श्रद्धा से वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और इस कथा को सुनना या पढ़ना शुभ मानती हैं। माना जाता है कि यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पारिवारिक एकता और विश्वास का भी प्रतीक है। वट सावित्री व्रत कथा का महत्व आज भी उतना ही है जितना पौराणिक काल में था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही वजह है कि यह परंपरा पीढ़ियों से लगातार निभाई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/vat-savitri-vrat-katha-2026-you-will-get-the-results/article-53496</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/vat-savitri-vrat-katha-2026-you-will-get-the-results/article-53496</guid>
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:16:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/vat-savitri-vrat-katha-2026.jpg"                         length="158488"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपरा एकादशी व्रत कथा: सुनने मात्र से मिलता है 1 हजार गोदान जितना फल</title>
                                    <description><![CDATA[अपरा एकादशी व्रत कथा का महत्व, श्रीकृष्ण द्वारा बताई गई कथा और पद्म पुराण अनुसार इसका फल 1000 गोदान के बराबर पुण्य देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/just-by-listening-to-the-story-of-apara-ekadashi-fast/article-53248"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t105256.960.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस बार ये तिथि 13 मई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुधवार को मनाई जा रही है। धर्म के हिसाब से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये दिन भगवान विष्णु को समर्पित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस दिन व्रत-उपवास करने से जीवन में किए गए सभी पाप मिट जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वो जानबूझकर किए गए हों या अनजाने। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का माहौल रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और भक्त लोग भगवान विष्णु की विशेष आराधना में लगे रहते हैं। इस दिन का अपरा एकादशी व्रत कथा का विशेष महत्व है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका जिक्र पद्म पुराण में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस कथा का पाठ करने से हजार गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे सुनना और पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस व्रत से न सिर्फ आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता भी आती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक पौराणिक कथा के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी आती है और इसका क्या महत्व है। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि इसे अपरा एकादशी कहा जाता है और ये बेहद पुण्य देने वाली होती है। उन्होंने बताया कि जो इस दिन श्रद्धा से व्रत करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके बड़े पाप भी समाप्त हो जाते हैं। कथा में आगे कहा गया है कि चाहे वह ब्रह्महत्या जैसा दोष हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झूठी गवाही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छल-कपट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या धर्म विरुद्ध कर्म - अपरा एकादशी का व्रत इन सभी पापों का नाश करने की शक्ति रखता है। पद्म पुराण में इसे इतनी महत्ता दी गई है कि इसे करने वाले को अनेक तीर्थों के पुण्य के बराबर फल मिलता है। माघ मास में प्रयाग स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काशी में शिवरात्रि व्रत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गया में पिंडदान और बदरी-केदार के दर्शन जैसे पुण्य कर्मों के समान फल इस एकादशी के व्रत से प्राप्त होता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कथा में यह भी बताया गया है कि जो श्रद्धा से भगवान वामन और विष्णु जी की पूजा करता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सभी संकटों से मुक्त हो जाता है और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति करता है। कहा गया है कि अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से उतना ही पुण्य मिलता है जितना एक हजार गायों के दान से होता है। इसलिए यह दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत करने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास करते हैं और रात में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए कथा का श्रवण करते हैं। परंपरा के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दिन दान-पुण्य का भी खास महत्व होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जरूरतमंदों को भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएं देने से पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि अपरा एकादशी को देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग इसे आत्मशुद्धि और मोक्ष के साधन के रूप में देखते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/just-by-listening-to-the-story-of-apara-ekadashi-fast/article-53248</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/just-by-listening-to-the-story-of-apara-ekadashi-fast/article-53248</guid>
                <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-13t105256.960.jpg"                         length="160606"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        