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                <title>Sewerage Project - दैनिक जागरण</title>
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                <title>इंदौर नगर निगम के 92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रेनेज और सीवरेज परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा, 43 संपत्तियां अटैच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd3c560e30/article-54838"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम से जुड़े चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर इंदौर नगर निगम का यह मामला सुर्खियों में आ गया है। ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि नगर निगम में ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला कई वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर था। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत से ऐसी योजनाओं के भुगतान स्वीकृत कराए जो या तो पूरी तरह कागजों पर थीं या जिनका वास्तविक कार्य बेहद सीमित था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण परियोजना बताकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। ईडी को जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से बड़ी रकम निकाली गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे घोटाले की परतें और खुल सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में गिरफ्तार पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख किरदार माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई परियोजनाओं की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी, लेकिन ईडी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से घोटाले से अर्जित धन के उपयोग से भी जुड़ा हुआ है। ईडी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी कड़ी में एजेंसी ने अब तक 43 संपत्तियों को अटैच किया है। इन संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक परिसंपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईडी अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। बैंक खातों, निवेश, जमीन खरीद और अन्य वित्तीय गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से निकाली गई राशि किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और उससे कौन-कौन लाभान्वित हुआ। इंदौर नगर निगम से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए और लंबे समय तक कथित अनियमितताओं का पता नहीं चल सका, उसने सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि संबंधित विभागों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रशासनिक जवाबदेही का पहलू भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। ईडी की हालिया कार्रवाई के बाद नगर निगम से जुड़े कई पुराने दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस कथित घोटाले का दायरा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित था या फिर अन्य कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुईं। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और ईडी को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:53 +0530</pubDate>
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                <title>बालोद में मिट्टी धंसने से हुआ बड़ा हादसा, 3 मजदूरों की हुई दर्दनाक मौत</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के बालोद में सीवरेज प्रोजेक्ट के दौरान मिट्टी धंसने से 3 मजदूरों की मौत। 10 फीट गड्ढे में काम करते समय हुआ दर्दनाक हादसा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-accident-due-to-mudslide-in-balod-3-laborers-died/article-53253"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t115704.051.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में मंगलवार शाम एक काफी दुखद घटना हुई। दल्लीराजहरा क्षेत्र के दास पान ठेला चौक के पास बीएसपी (भिलाई स्टील प्लांट) के सीवरेज प्रोजेक्ट में मिट्टी धंसने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में पाइपलाइन बिछा रहे थे। अचानक मिट्टी भरभराकर गिर गई और तीनों मजदूर उसके नीचे दब गए। उसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग मौके की ओर दौड़ पड़े।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह काम बीएसपी के सीवरेज लाइन के विस्तार के तहत किया जा रहा था। मृतकों की पहचान किशुन कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राकेश कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बैशाखिन के तौर पर हुई है। कहा जा रहा है कि जब हादसा हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब काम सामान्य चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अचानक गड्ढे की एक तरफ की मिट्टी खिसक गई और वह धंस गया। आसपास के लोगों ने शोर मचाया और तुरंत अन्य मजदूरों को बुलाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तब तक हालात गंभीर हो चुके थे। कुछ ही मिनटों में पूरा स्थल हड़बड़ी में बदल गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के गहरे गड्ढे में काम कराया जा रहा था। मौके पर न तो बैरिकेडिंग ठीक से की गई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही मिट्टी धंसने से बचाने के लिए कोई मजबूत सपोर्ट सिस्टम मौजूद था। लोगों ने आरोप लगाया कि अगर सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद लोग काफी गुस्से में थे और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही हादसे की सूचना मिली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और बीएसपी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तब तक तीनों मजदूरों की जान जा चुकी थी। देर रात तक गड्ढे से शव निकालने की प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान मौके पर भीड़ बनी रही और माहौल काफी गंभीर बना रहा। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह भी देखा जा रहा है कि आखिर सुरक्षा में कहां चूक हुई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ की संभावनाएं जताई जा रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:17:28 +0530</pubDate>
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