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                <title>Gas Theft - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Gas Theft RSS Feed</description>
                
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                <title>1.5 करोड़ के LPG घोटाले में बड़ा खुलासा, ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक-बेटे गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[कोल्हापुर से गिरफ्तार किए गए पिता-पुत्र, 92 टन गैस बेचने और करोड़ों के लेन-देन का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-revelation-in-15-crore-lpg-scam-owner-and-son/article-54455"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/lpg-scam-mahasamund.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">महासमुंद जिले में सामने आए करोड़ों के LPG घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उनके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाया गया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई नए नाम सामने आ सकते हैं और आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारी भी हो सकती है। इस पूरे LPG घोटाले को लेकर प्रशासन और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">बताया जा रहा है कि यह मामला करीब 1.5 करोड़ रुपए के एलपीजी गबन और कालाबाजारी से जुड़ा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब 92 टन गैस चोरी कर अलग-अलग जगहों पर बेची गई थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस गैस के सौदे के बदले करीब 80 लाख रुपए का लेन-देन हुआ था। मामले में पहले ही निलंबित जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, भाजपा नेता और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर, व्यापारी मनीष चौधरी और पेट्रोकेमिकल्स के मैनेजर निखिल वैष्णव सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक कुल 6 आरोपी पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं।</p>
<p dir="ltr">पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क की प्लानिंग तत्कालीन जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने की थी। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकारी निगरानी में रखे गए गैस कैप्सूलों को सुरक्षित रखने के नाम पर उन्हें निजी कंपनी के हवाले किया गया और बाद में उसी गैस को निकालकर बेच दिया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूरा काम बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि रिकॉर्ड में ज्यादा गड़बड़ी नजर न आए। हालांकि बाद में बिक्री और खरीद के आंकड़ों में अंतर मिलने के बाद मामला खुल गया।</p>
<p dir="ltr">जांच में यह बात भी सामने आई है कि शुरुआत में गैस बेचने के लिए करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपए की मांग रखी गई थी। कई व्यापारियों ने जोखिम देखते हुए सौदे से दूरी बना ली। इसके बाद पंकज चंद्राकर और व्यापारी मनीष चौधरी ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर से संपर्क किया। करीब एक सप्ताह तक बातचीत और मोलभाव चला, फिर जाकर लगभग 90 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। बताया जा रहा है कि रकम के बंटवारे का पूरा हिसाब पहले से तय था। पुलिस के मुताबिक करीब 50 लाख रुपए अजय यादव को, 20 लाख पंकज चंद्राकर को और बाकी रकम दूसरे लोगों के हिस्से में जानी थी।</p>
<p dir="ltr">पुलिस की जांच में ग्राम परसवानी स्थित एक कारखाने का भी नाम सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि यहीं पर पैसों का लेन-देन होता था। कुछ अधिकारियों की आवाजाही भी वहां देखी गई थी। फिलहाल पुलिस बैंकिंग ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच अब सिर्फ गैस चोरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें विभागीय मिलीभगत और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के पहलुओं की भी पड़ताल हो रही है।</p>
<p dir="ltr">फरार चल रहे पिता-पुत्र को पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं था। दोनों पिछले करीब एक महीने से लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। कभी महाराष्ट्र तो कभी दूसरे राज्यों में छिपकर रह रहे थे। पुलिस टीम ने 11 शहरों के मोबाइल टॉवर डंप, कॉल रिकॉर्ड, टोल प्लाजा और सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी की। इसके बाद तकनीकी इनपुट के आधार पर चार अलग-अलग टीमों को रवाना किया गया। आखिरकार दोनों को कोल्हापुर के एक होटल से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सीधे महासमुंद लाया गया, जहां अब उनसे पूछताछ जारी है।</p>
<p dir="ltr">पूरा मामला उस समय सामने आया था जब सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों से गैस निकालते हुए कुछ लोगों को पकड़ा गया था। सुरक्षा कारणों से इन कैप्सूलों को थाने परिसर में रखा गया था। बाद में कलेक्टर के आदेश पर उनकी जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई। यहीं से कथित साजिश शुरू हुई। जांच एजेंसियों के मुताबिक सुपुर्दनामा मिलने के बाद कैप्सूलों से गैस निकालकर अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बिना जीएसटी और कच्चे बिलों पर बेचा गया।</p>
<p dir="ltr">जांच में एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब रिकॉर्ड में एलपीजी खरीद और बिक्री के आंकड़े मेल नहीं खाए। अप्रैल महीने में जहां करीब 40 टन गैस खरीदी गई थी, वहीं 135 टन गैस बेचने का रिकॉर्ड मिला। इसके बाद पुलिस को बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका हुई। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले को वैध दिखाने के लिए फर्जी पंचनामा भी तैयार किया गया था। दस्तावेजों में उन्हीं लोगों को गवाह बताया गया जो अब खुद जांच के घेरे में हैं।</p>
<p dir="ltr"> पुलिस इस पूरे मामले में आपराधिक साजिश, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग, कालाबाजारी, फर्जीवाड़ा और आपराधिक न्यास भंग जैसी गंभीर धाराओं के तहत जांच कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:40:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>छत्तीसगढ़ में बड़ा घोटाला, 1.5 करोड़ की 92 टन गैस हुई चोरी, सुरक्षा करने वाला ही निकला मास्टरमाइंड</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ रुपये की 92 टन LPG गैस घोटाले का खुलासा। जिला खाद्य अधिकारी समेत तीन गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज और साजिश की जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-scam-in-chhattisgarh-92-tonnes-of-gas-worth-rs/article-53265"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t132924.830.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में एलपीजी गैस में हुए बड़े घोटाले ने प्रशासनिक विभाग में खलबली मचा दी है। यह मामला करीब 1.5 करोड़ रुपये की 92 टन एलपीजी गैस के कथित अवैध निपटान से जुड़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जिला खाद्य अधिकारी (</span>DFO) <span lang="hi" xml:lang="hi">अजय यादव मुख्य आरोपी हैं। पुलिस ने इस मामले में अजय यादव के साथ गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर के निवासी मनीष चौधरी को भी गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सारा खेल कुछ दिनों से काफी योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्य सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठाते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस सूत्रों और शुरुआती जांच के हिसाब से यह मामला दिसंबर 2025 में जब्त किए गए छह एलपीजी टैंकरों से जुड़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करते वक्त रोका गया था। बताया गया है कि 23 मार्च को अजय यादव और उनके साथियों ने इस गैस को बाजार में बेचने की योजना बनाई। गर्मी के बहाने सुरक्षा कारणों से इन टैंकरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की अनुमति कोर्ट से ली गई और 30 मार्च को इन्हें ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दिया गया। लेकिन यहीं से सारा मामला बदल गया। आरोप लग रहा है कि मात्र एक हफ्ते के भीतर इन टैंकरों से लगभग 92 मीट्रिक टन गैस संदिग्ध तरीके से निकालकर उसे अवैध रूप से बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में दस्तावेजों में हेराफेरी और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की बात भी सामने आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जांच टीम को शक और गहरा हुआ।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने मामले को दबाने के लिए फर्जी वजन रिकॉर्ड और जाली पंचनामा तैयार किए थे। ये देखना चौंकाने वाला है कि कई दस्तावेज कथित तौर पर उस समय के पहले ही तैयार कर लिए गए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब टैंकरों का वास्तविक वजन नहीं हुआ था। शुरुआत में इसे गैस लीकेज का मामला दिखाने की कोशिश भी की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। कॉल डिटेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल रिकॉर्ड और वैज्ञानिक पूछताछ के आधार पर पुलिस ने करीब 40 सदस्यीय टीम बनाकर इस पूरे नेटवर्क की जांच की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद इस रैकेटका खुलासा हुआ। आरोप है कि इस डील में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव की करीब 50 लाख रुपये की अवैध कमाई होने वाली थी। फिलहाल पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल थे और क्या इससे पहले भी ऐसी गतिविधियां हुई थीं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक सिस्टम में गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में एलपीजी गैस की हेराफेरी कैसे हुई और निगरानी व्यवस्था में कहां कमी रह गई। जांच अभी चल रही है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 13:42:15 +0530</pubDate>
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