<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/rajasthan-police/tag-13191" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Rajasthan Police - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/13191/rss</link>
                <description>Rajasthan Police RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>1.69 लाख का इनामी अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, चरवाहा बनकर 15 दिन रेकी के बाद ‘ऑपरेशन नीलमणि’ में मिली सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sunil-rawat-meena.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने 1.69 लाख रुपये के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर सुनील रावत मीणा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत यह बड़ी सफलता हासिल की। करीब आठ महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 वर्षीय सुनील रावत मीणा राजस्थान के नारकोटिक्स मामलों के टॉप-25 अपराधियों में शामिल था। उस पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील जंगलों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। वह किसी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकता था, जिससे पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उसकी पत्नी तय स्थान पर खाना छोड़ जाती थी और उसके सहयोगी वह भोजन जंगल में छिपे सुनील तक पहुंचाते थे। इसी नेटवर्क के कारण वह कई महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की। टीम के एक कॉन्स्टेबल को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिनों तक गांव और आसपास के इलाके में तैनात किया गया। वह स्थानीय लोगों के बीच रहकर सुनील की गतिविधियों, उसके संपर्कों और आने-जाने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाता रहा। इस दौरान पुलिस मुख्यालय से तकनीकी निगरानी भी लगातार जारी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि सुनील गांव की एक युवती के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार वह एक छोटे बच्चे के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने उसके इस संचार तंत्र पर भी नजर रखी और कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर टीम ने गिरफ्तारी की योजना को अंतिम रूप दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">7 जुलाई की रात पुलिस को सूचना मिली कि सुनील अपने घर पहुंचा हुआ है और वहां दावत चल रही है। इसी दौरान इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई। पुलिस ने आकलन किया कि मौसम खराब होने के कारण आरोपी उस रात वापस जंगल नहीं जा सकेगा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आधी रात को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने नीमच जिले के गमेरपुरा गांव स्थित उसके घर की चारों ओर से घेराबंदी कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया तो सबसे पहले आरोपी की पत्नी बाहर आई। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि घर में कोई नहीं है। हालांकि टीम पहले से मिली जानकारी के आधार पर पूरी तरह आश्वस्त थी कि आरोपी अंदर मौजूद है। इसके बाद घर की बारीकी से तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान एक कमरे में ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा सुनील अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘दिनेश’ बताया, लेकिन पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस को आशंका थी कि उसके साथी मौके पर पहुंच सकते हैं, इसलिए बिना समय गंवाए टीम आरोपी को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुनील पर कई गंभीर आरोप हैं। उस पर राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव और देसूरी क्षेत्रों के अलावा प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में पुलिस टीमों पर फायरिंग करने के मामले दर्ज हैं। इन हमलों में पुलिसकर्मी रणवीर और चंद्रपाल घायल हुए थे। इसके अलावा उसने मध्य प्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में भी पुलिस पर हमला किया था। लगातार पुलिस पर हमले और मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका के कारण उसे बेहद खतरनाक अपराधी माना जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘ऑपरेशन नीलमणि’ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को गिरफ्तार करना था। आठ महीने तक चली इस कार्रवाई में तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई रेकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि सुनील की गिरफ्तारी से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। अब उससे पूछताछ कर उसके सहयोगियों, सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंचेगी और आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/sunil-rawat-meena.jpg"                         length="188979"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमपी के दो टीआई समेत 100 पर FIR, ड्रग्स फैक्ट्री कार्रवाई पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की अदालत ने घाटाखेड़ी गांव में हुई NDPS कार्रवाई को संदिग्ध माना, जांच रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-drugs-factory-action-against-100-including-two/article-56075"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-fir.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश और राजस्थान की पुलिस व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 लोगों के खिलाफ राजस्थान में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में हुई कथित ड्रग्स फैक्ट्री कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। उस समय मध्य प्रदेश पुलिस ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया था, लेकिन अब अदालत के आदेश और जांच रिपोर्ट के बाद पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चौमहला कोर्ट ने 13 जून को दिए अपने आदेश में उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डग थाने में आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच आगे बढ़ने पर अन्य लोगों की पहचान भी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर धाराओं में भी बढ़ोतरी हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूरा मामला 21 जनवरी 2026 से शुरू हुआ था, जब आगर पुलिस ने फैजान नाम के युवक को कथित रूप से 330 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में फैजान ने बताया था कि यह मादक पदार्थ राजस्थान के घाटाखेड़ी गांव निवासी शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से लाया गया था। इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने 28 जनवरी को बड़ी कार्रवाई का दावा करते हुए 80 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ घाटाखेड़ी गांव में दबिश दी थी। उस समय पुलिस ने कहा था कि वहां से भारी मात्रा में ड्रग्स और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई है। कार्रवाई के दौरान शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा को गिरफ्तार भी किया गया था। उस समय तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे बड़ी सफलता बताया था। उन्होंने दावा किया था कि मौके से हथियार, मशीनें और ड्रग्स निर्माण से जुड़ा सामान बरामद हुआ है। लेकिन जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ी, कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पुलिस की कार्रवाई को संदेह के घेरे में ला दिया। जांच में पाया गया कि जब्त किया गया कुछ सामान बिल्कुल नया दिखाई दे रहा था, जिस पर सवाल उठे थे। इसके अलावा यह दावा भी किया गया था कि कार्रवाई में राजस्थान पुलिस शामिल थी, जबकि जांच के दौरान सामने आया कि स्थानीय पुलिस को इस कार्रवाई की कोई पूर्व जानकारी ही नहीं थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर उठा। पुलिस ने कहा था कि पूरे ऑपरेशन की रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से की गई थी, लेकिन जांच के दौरान ऐसी कोई वीडियोग्राफी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इतना ही नहीं, पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय और सीसीटीवी फुटेज में भी बड़ा अंतर पाया गया। रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तारियां और जब्ती की कार्रवाई सुबह 4:40 बजे से 5:40 बजे के बीच हुई थी, जबकि जांच में सामने आया कि मध्य प्रदेश पुलिस की टीम सुबह 5:05 बजे तक ही उस इलाके में मौजूद थी। ऐसे में इतने कम समय में NDPS अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने को लेकर सवाल खड़े हुए। गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने शुरुआत से ही कार्रवाई को फर्जी बताया था। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए उनके घर में प्रवेश किया, परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके बेटों को झूठे मामले में फंसाया। इसके बाद उन्होंने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर किया। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए झालावाड़ पुलिस अधीक्षक को जांच के आदेश दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद्र मीणा को सौंपी गई। उन्होंने मध्य प्रदेश जाकर कार्रवाई में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई दावों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों से नहीं हो सकी। इन्हीं तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। अब डग थाना पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी और रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रक्रियागत त्रुटियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-drugs-factory-action-against-100-including-two/article-56075</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-drugs-factory-action-against-100-including-two/article-56075</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/mp-police-fir.jpg"                         length="119391"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET पेपर लीक नेटवर्क के तार सीहोर तक जुड़े, यहां की यूनिवर्सिटी से पढ़ चुका है मास्टमाइंड शुभम</title>
                                    <description><![CDATA[NEET 2026 पेपर लीक मामले में सीहोर कनेक्शन सामने आया है. आरोपी शुभम खैरनार का श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से संबंध जांच के दायरे में है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/neet-paper-leak-networks-links-reach-sehore-mastermind-shubham-has/article-53277"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t154105.532.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 पेपर लीक मामले में अब मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का नाम भी उभरने लगा है। राजस्थान पुलिस की जांच से पता चला है कि गिरफ्तार हुए डॉक्टर शुभम खैरनार की सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी के साथ एक कड़ी है। कहा जा रहा है कि शुभम ने यहां बीएएमएस कोर्स में दाखिला लिया था। इस मामले के उजागर होने के बाद अब जांच एजेंसियां उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड और पुराने संपर्कों की भी छानबीन कर रही हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान पुलिस ने 3 मई को महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार को हिरासत में लिया था और तब से उसकी लगातार पूछताछ चल रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का मेडिकल शिक्षण संस्थानों से जुड़ाव रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस वजह से पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं उसने इसी नेटवर्क के तहत लोगों से संपर्क तो नहीं बनाए थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को शक है कि </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें अलग-अलग स्तर पर लोग शामिल हो सकते हैं। सीहोर कनेक्शन सामने आने के बाद अब मध्य प्रदेश पर भी ध्यान और बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोपी शुभम के मोबाइल रिकॉर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक लेनदेन और पुराने संपर्कों की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी का पेपर लीक से जुड़े दूसरे आरोपियों के साथ कोई सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध था। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी तक जांच एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि आरोपी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खुद को इस मामले से अलग रखा है। यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी ने कहा कि शुभम ने साल 2021 में बीएएमएस कोर्स में दाखिला जरूर लिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वह नियमित छात्र नहीं था। उन्होंने बताया कि आरोपी कभी कक्षाओं में नहीं आया और न ही उसने किसी परीक्षा या कैंपस गतिविधि में भाग लिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। सीहोर में लोग पूछ रहे हैं कि आखिर आरोपी ने यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के बाद पढ़ाई क्यों नहीं की और इतना समय तक उसका रिकॉर्ड कैसे बना रहा। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि उसका संस्थान से केवल नाममात्र का संबंध था। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान पुलिस पूरे मामले को एक संगठित गिरोह के रूप में देख रही है। बताया जा रहा है कि कई राज्यों में पहले भी छापेमारी की जा चुकी है और कुछ संदिग्धों से पूछताछ जारी है। शुरूआती जांच में यह भी सामने आया है कि बड़ी राशि लेकर अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाने की कोशिश की गई थी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुभम खैरनार से लगातार पूछताछ हो रही है और जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/neet-paper-leak-networks-links-reach-sehore-mastermind-shubham-has/article-53277</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/neet-paper-leak-networks-links-reach-sehore-mastermind-shubham-has/article-53277</guid>
                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:49:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-13t154105.532.jpg"                         length="156400"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        