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                <title>Dowry Case - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Dowry Case RSS Feed</description>
                
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                <title>शादी के 48 दिन बाद डॉक्टर की पत्नी ने दी जान, दहेज प्रताड़ना का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[ठाणे के अंबरनाथ में 26 वर्षीय महिला की मौत से सनसनी, पति, सास और देवर गिरफ्तार; परिवार ने लगाया मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/doctors-wife-commits-suicide-alleging-dowry-harassment/article-56328"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/thane-suicide-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां शादी के महज 48 दिन बाद एक नवविवाहिता ने कथित तौर पर प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतका की पहचान 26 वर्षीय विशाखा तिलकर के रूप में हुई है, जिसकी शादी इसी वर्ष 30 अप्रैल को अंबरनाथ निवासी डॉक्टर नितिन तिलकर के साथ हुई थी। मामले में पुलिस ने पति, सास और देवर को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, विशाखा मूल रूप से पुणे की रहने वाली थी। उसकी शादी पारिवारिक सहमति से हुई थी और शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था। लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही उसके जीवन में समस्याएं बढ़ने लगीं। परिजनों का आरोप है कि ससुराल पक्ष की ओर से लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जा रही थी। इसके अलावा दहेज को लेकर भी दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वह लगातार तनाव में रहने लगी थी। मृतका के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी में दहेज नहीं दिए जाने से ससुराल पक्ष नाराज था। शादी के कुछ समय बाद पति और उसके परिवार ने विशाखा पर मायके से 50 ग्राम सोना लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे इतनी बड़ी मांग पूरी कर पाते। विशाखा के पिता पुणे में रिक्शा चालक हैं और सीमित आय के सहारे परिवार का पालन-पोषण करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार, दहेज की मांग के साथ-साथ विशाखा को मानसिक रूप से भी परेशान किया जाता था। आरोप है कि उसके पति को उस पर लगातार शक रहता था। इसी कारण घर के अंदर और बाहर कई सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। विशाखा को किसी से बात करने या पड़ोसियों से मिलने-जुलने तक की स्वतंत्रता नहीं थी। परिवार का दावा है कि उसे लगभग हर समय निगरानी में रखा जाता था। मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि यदि विशाखा किसी से बात करती दिखाई देती थी तो उसके साथ मारपीट की जाती थी। परिजनों का कहना है कि 14 जून को पड़ोस की एक महिला से बातचीत करने पर उसके पति और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसकी पिटाई की थी। इस घटना के बाद विशाखा काफी डरी हुई और मानसिक रूप से टूट चुकी थी। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद विशाखा ने अपने माता-पिता को फोन कर पूरी स्थिति की जानकारी दी थी। उसने कथित रूप से बताया था कि वह ससुराल में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है और लगातार प्रताड़ना झेल रही है। इसके बाद उसके माता-पिता अंबरनाथ जाकर बेटी को अपने साथ वापस लाने की तैयारी कर रहे थे। परिवार का कहना है कि वे जल्द ही ससुराल पक्ष से बातचीत करने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद घटना हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">16 जून को विशाखा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआती जांच और परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति नितिन तिलकर, उसकी मां छाया तिलकर और भाई के खिलाफ मामला दर्ज किया। तीनों पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है। मृतका के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके। साथ ही पड़ोसियों और परिवार के अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर समाज में दहेज प्रथा और घरेलू प्रताड़ना जैसे गंभीर मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। शिक्षित परिवारों में भी इस तरह की घटनाएं होना चिंता का विषय है। विवाह के बाद महिलाओं के साथ होने वाली मानसिक प्रताड़ना कई बार इतनी गंभीर हो जाती है कि वे खुद को असहाय महसूस करने लगती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:55:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या उकसाने के मामले में सास बरी, हाईकोर्ट ने रद्द की 7 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- दहेज के लिए मौत से पहले प्रताड़ना के पर्याप्त सबूत नहीं, निचली अदालत के फैसले को किया निरस्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/mother-in-law-acquitted-in-case-of-dowry-harassment-and-abetment-of/article-55298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों में दोषी ठहराई गई एक महिला को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने करीब 15 साल पहले निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि मृतका को उसकी मौत से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह फैसला न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकल पीठ ने आरोपी सास द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनाया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वर्ष 2010 में आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का विस्तृत अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला दुर्ग जिले का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सोनल नामक युवती का विवाह 18 जून 2006 को मनीष के साथ हुआ था। शादी के करीब छह महीने बाद 21 दिसंबर 2006 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ समय बाद से ही उसकी सास शशिकला बाफना दहेज को लेकर असंतुष्ट थी और इसी कारण उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिजनों का आरोप था कि मृतका के पति को कोलकाता में नौकरी मिल गई थी, लेकिन सास ने बहू को उसके पास भेजने से इनकार कर दिया था। आरोप लगाया गया कि सास ने कहा था कि जब तक वह मायके से 10 से 15 लाख रुपये लेकर नहीं आएगी, तब तक उसे पति के साथ रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी कथित प्रताड़ना से परेशान होकर सोनल ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभियोजन के अनुसार घटना वाले दिन सुबह सास और बहू के बीच विवाद हुआ था। आरोप लगाया गया कि विवाद के दौरान सोनल के साथ मारपीट की गई और उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके पहुंची और शाम के समय घर की छत से कूद गई। बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने सास के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्ष 2010 में दुर्ग की फास्ट ट्रैक अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी सास को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर फैसले को चुनौती दी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई महत्वपूर्ण तर्क रखे। वकील ने अदालत को बताया कि घटना के पांच दिन बाद एफआईआर दर्ज कराई गई थी और इस देरी का कोई संतोषजनक कारण रिकॉर्ड पर नहीं है। इसके अलावा अस्पताल के शुरुआती रिकॉर्ड में परिजनों द्वारा डॉक्टरों को यह जानकारी दी गई थी कि सोनल बाथरूम में गिरने से घायल हुई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि बाद में घटनाक्रम को अलग रूप देकर मामला दर्ज कराया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम से जुड़े तथ्यों को भी अदालत के सामने रखा गया। बचाव पक्ष का कहना था कि मेडिकल साक्ष्य स्पष्ट रूप से यह स्थापित नहीं करते कि यह आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या कोई अन्य परिस्थिति। इसके अलावा मृतका के माता-पिता और भाई ने भी अपने बयानों में स्वीकार किया कि आरोपी ने कभी उनके सामने सीधे तौर पर दहेज या पैसों की मांग नहीं की थी। जो भी जानकारी थी, वह केवल मृतका द्वारा बताई गई बातों पर आधारित थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि दहेज मृत्यु के मामलों में यह साबित होना आवश्यक है कि महिला को उसकी मृत्यु से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था। यदि यह महत्वपूर्ण कड़ी स्थापित नहीं होती तो दहेज मृत्यु की धाराएं स्वतः लागू नहीं हो सकतीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि सोनल की मृत्यु छत से कूदने के कारण ही हुई थी। शुरुआती मेडिकल दस्तावेजों में बाथरूम में गिरने की बात दर्ज थी, जिससे मामले में संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों के बयान केवल सामान्य पारिवारिक विवाद और सास-बहू के बीच होने वाले झगड़ों की ओर संकेत करते हैं। इन्हें दहेज के लिए क्रूरता या आत्महत्या के लिए उकसाने का ठोस प्रमाण नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का पर्याप्त और गहन मूल्यांकन नहीं किया तथा परिस्थितियों का समुचित विश्लेषण किए बिना दोषसिद्धि का आदेश पारित कर दिया। यह आदेश कानून की कसौटी पर टिकने योग्य नहीं पाया गया। अंततः हाईकोर्ट ने आरोपी सास की अपील स्वीकार करते हुए 17 मार्च 2010 को पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से ससम्मान बरी करने का निर्देश दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:45:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जबलपुर में दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत का मामला, मेजर दामाद पर हत्या के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[3 करोड़ रुपये खर्च कर बेटी की शादी करने वाले पिता ने कोर्ट में लगाई न्याय की गुहार, पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/case-of-dowry-harassment-and-suspicious-death-in-jabalpur-major/article-54828"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jabalpur-dowry-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अभी चर्चा में बना हुआ है, इसी बीच जबलपुर से एक और गंभीर मामला सामने आया है जिसने दहेज प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। चेन्नई के रहने वाले व्यवसायी पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी 27 वर्षीय बेटी कविता नागार्जुन की मौत को हत्या बताते हुए सेना में मेजर पद पर पदस्थ अपने दामाद डॉ. ओम नागार्जुन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का दावा है कि शादी में करोड़ों रुपये खर्च करने और महंगे उपहार देने के बावजूद अतिरिक्त दहेज की मांग की गई और मांग पूरी नहीं होने पर उनकी बेटी की जान ले ली गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। परिजनों का आरोप है कि घटना को एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके चलते उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 3 जून को इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद यह प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित पिता के अनुसार उनकी इकलौती बेटी कविता पेशे से अधिवक्ता थीं। उनका विवाह 2 मार्च 2025 को तमिलनाडु निवासी डॉ. ओम नागार्जुन के साथ हुआ था, जो वर्तमान में जबलपुर के जेकेआरआरसी में मेजर के पद पर तैनात बताए जाते हैं। परिवार का कहना है कि बेटी की शादी धूमधाम से की गई थी और लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। शादी में करीब 100 तोला सोना, 25 लाख रुपये का हीरे का हार, लग्जरी कार सहित कई महंगे उपहार दिए गए थे। परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही कविता को अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। बताया गया कि मेजर दामाद नया अस्पताल स्थापित करना चाहता था और इसके लिए वह कविता पर मायके से 2 करोड़ रुपये लाने का दबाव बना रहा था। परिवार का कहना है कि कविता ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से उसके साथ व्यवहार और अधिक कठोर हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के दिन की जानकारी देते हुए परिजनों ने बताया कि कविता की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। परिजनों का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट के निशान दर्ज किए गए थे, लेकिन मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया। यही बात परिवार के संदेह को और गहरा करती है। कविता की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार चेन्नई से जबलपुर पहुंचा। यहां पहुंचकर पिता ने बेटी की मौत को संदिग्ध बताते हुए गोराबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर की मांग की। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर मामला दर्ज करने से इनकार किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। जब पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो परिवार ने अदालत की शरण ली। जिला न्यायालय में दाखिल याचिका के साथ कई दस्तावेज और कथित सबूत भी प्रस्तुत किए गए हैं। परिवार के वकील का कहना है कि शादी से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं जो दहेज प्रताड़ना की ओर संकेत करते हैं। अदालत में यह भी बताया गया कि विवाह से पहले महंगी कार की मांग की गई थी, हालांकि बाद में लड़की पक्ष ने अन्य लग्जरी वाहन और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी तथा घरेलू सामान दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिता पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश का परिणाम है। उनका कहना है कि पति और उसके परिवार ने दहेज के लालच में कविता को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने अदालत से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। यदि अदालत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देती है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस को दहेज प्रताड़ना, संदिग्ध मृत्यु और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच करनी पड़ती है। फिलहाल अदालत में दायर याचिका पर सभी की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा केस में सास गिरिबाला सिंह को झटका, हाईकोर्ट ने रद्द की अग्रिम जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[जबलपुर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही परीक्षण नहीं किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/e/article-54393"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/twisha-sharma-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतका की सास और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और केस डायरी का पर्याप्त परीक्षण किए बिना जल्दबाजी में राहत दे दी थी। कोर्ट ने साफ कहा कि मामले की गंभीरता, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के जस्टिस देव नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने यह आदेश सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए ठोस और गंभीर कारण होना जरूरी होता है और इस मामले में ऐसे कारण स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया, जिसके चलते जमानत आदेश कानूनी रूप से कमजोर हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला भोपाल निवासी ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। परिवार की ओर से आरोप लगाए गए थे कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज और अन्य मुद्दों को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार का दावा है कि पति और सास की ओर से लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता था। मामले में यह आरोप भी सामने आया कि ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव डाला जा रहा था। इन आरोपों के समर्थन में व्हाट्सऐप चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच एजेंसियों को सौंपे गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृतका के शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। अदालत ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। कोर्ट ने इसे मामले का महत्वपूर्ण पहलू बताते हुए कहा कि पूरी घटना की गहन और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष इन चोटों के संबंध में संतोषजनक जवाब देने में असफल रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। कोर्ट के अनुसार मामले से जुड़े कुछ व्यवहार ऐसे थे, जिनसे जांच प्रभावित होने की आशंका पैदा होती है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया में बयान देकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की गई, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई है। ऐसे में जांच एजेंसी को पक्षकार बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। अदालत ने माना कि मामले की संवेदनशीलता और आरोपियों की प्रभावशाली पृष्ठभूमि को देखते हुए जांच एजेंसी को स्वतंत्र तरीके से काम करने देना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर भी सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। निचली अदालत ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था और व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर जमानत दी गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से जांच करने पर तस्वीर अलग दिखाई देती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में CBI और राज्य सरकार की ओर से भी अदालत में कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं। जांच एजेंसियों ने कहा कि ट्विशा गर्भवती थी और इसी दौरान पति तथा सास ने उसके चरित्र पर संदेह जताना शुरू किया। आरोप है कि उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका जिक्र व्हाट्सऐप चैट्स में भी मिलता है। जांच एजेंसियों ने यह भी कहा कि ट्विशा लगातार अपने परिवार को मानसिक प्रताड़ना की जानकारी देती रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार की ओर से अदालत में यह तर्क भी रखा गया कि आरोपी प्रभावशाली हैं और उन्हें राहत मिलने पर जांच प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में हिरासत में पूछताछ जरूरी होती है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक और महत्वपूर्ण चरण में है, इसलिए आरोपियों को अग्रिम राहत देना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य, मामले की गंभीरता और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को राहत देना न्यायसंगत नहीं था। इस फैसले के बाद अब मामले की जांच और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:53:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा केस पर बोलीं हर्षा रिछारिया, ‘हर दिन घुटती है पीड़िता’</title>
                                    <description><![CDATA[ट्विशा शर्मा केस पर हर्षा रिछारिया ने महिलाओं की पीड़ा और दहेज प्रथा पर नाराजगी जताई, कहा- मौत से पहले हर दिन घुटती है पीड़िता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/harsha-richhariya-said-on-twisha-sharma-case-the-victim-suffocates/article-53864"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/harsha-richharia-twisha-sharma-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर जो चर्चा चल रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे अब और भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्विशा की संदिग्ध मौत ने पहले ही लोगों का ध्यान खींचा था। अब इस मामले पर कथावाचक और सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरा हर्षा रिछारिया ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दहेज प्रथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पीड़ित परिवारों की दयनीय स्थिति के बारे में अपनी नाराजगी जाहिर की। हर्षा का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। उनका कहना है कि जो लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे उससे पहले हर दिन मानसिक रूप से टूटते और घुटते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हर्षा रिछारिया ने स्पष्ट किया कि किसी महिला की मौत मात्र एक घटना नहीं होती</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके पीछे लंबे समय तक की गई पीड़ा निहित होती है। उन्होंने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">जो इंसान मौत को गले लगाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह उससे पहले हर दिन मर रहा होता है। हर दिन घुट रहा होता है और आखिरकार वह जान दे देता है।" उन्होंने यह भी कहा कि मृतक के परिवार को भी इसके बाद चैन नहीं मिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें न्याय के लिए दूसरी लड़ाई लड़नी पड़ती है। उनके अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज में आज भी महिलाओं के मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हर्षा ने हाल ही में सामने आए मामलों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ट्विशा शर्मा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलक और दीपिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। उन्होंने दहेज प्रथा को महिलाओं की मौत का एक बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि शादी के बाद बहुओं पर मानसिक दबाव और प्रताड़ना के कई मामले सामने आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अक्सर उन्हें दबा दिया जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने ये भी कहा कि किसी पीड़िता की मौत के बाद उसके चरित्र और परवरिश पर सवाल उठाना बेहद गलत है। "मौत के बाद भी लड़की को नहीं छोड़ा जाता। उसके चरित्र पर उंगली उठाई जाती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार को बदनाम करने की कोशिश होती है</span>," <span lang="hi" xml:lang="hi">हर्षा ने कहा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्विशा शर्मा के केस में अब तक अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। उनकी डेड बॉडी भोपाल एम्स की मर्चुरी में रखी हुई है। परिवार दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि कोर्ट इस मांग को खारिज कर चुका है। पुलिस ने इस मामले में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है। पति समर्थ सिंह अभी फरार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उस पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:14:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>दहेज में बुलेट और 2 लाख नहीं मिले, तो शादी छोड़ बारात लेकर भागा दूल्हा</title>
                                    <description><![CDATA[टीकमगढ़ में दहेज में 2 लाख और बुलेट की मांग पूरी नहीं होने पर दूल्हा अधूरी रस्में छोड़ बारात लेकर लौट गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/when-bullets-and-rs-2-lakh-were-not-received-as/article-53278"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t155720.549.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना क्षेत्र के बिजरौठा गांव में एक शादी उस समय टूट गई जब दूल्हा पक्ष ने दहेज में अचानक दो लाख रुपये और बुलेट मोटरसाइकिल की मांग रख दी। लड़की के परिवार का कहना है कि जब उन्होंने इसकी असमर्थता जताई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूल्हा और उसके बाराती शादी की रस्में अधूरी छोड़कर लौट गए। जिस घर में देर रात तक शादी की तैयारियां चल रही थीं और मेहमानों की चहल-पहल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां कुछ ही समय में सन्नाटा छा गया और रोने की आवाजें सुनाई देने लगीं। इस घटना के बाद से गांव में काफी चर्चा हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजरौठा गांव के निवासी शहादत खान ने अपनी बेटी की शादी टीकमगढ़ के बावरी गांव के शौकत खान के बेटे से तय की थी। उनके परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार शादी की तैयारियां की थीं। बारात भी तय समय पर पहुंची और शुरुआती रस्में सामान्य तरीके से चल रही थीं। बताया जा रहा है कि इसी दौरान वर पक्ष ने अचानक दो लाख रुपये और बुलेट बाइक की मांग रख दी। जब लड़की के परिवार ने इतनी राशि और बाइक देने में असमर्थता जताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो माहौल बिगड़ गया। हालांकि दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद दूल्हा पक्ष ने शादी से इंकार कर दिया और बारात वापस लौट गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुल्हन ने यह भी आरोप लगाया कि बारात आने के बाद लगातार दहेज की मांग की जा रही थी। परिवार के लोगों ने रिश्तेदारी और समाज का हवाला देकर शादी को बचाने की कोशिश की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि रात भर विवाद चलता रहा और कई लोगों ने बीच-बचाव भी किया। वर पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लड़की के घर का माहौल पूरी तरह से बदल गया</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शादी की खुशियां जल्द ही मायूसी में बदल गईं। रिश्तेदार और गांव की महिलाएं दुल्हन और उसके परिवार को संभालने में जुट गईं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद पीड़ित परिवार चंदेरा थाना पहुंचा और दहेज प्रताड़ना के साथ शादी तोड़ने की शिकायत दर्ज कराई। परिवार ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शिकायत मिल चुकी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर दोनों पक्षों से पूछताछ की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:00:19 +0530</pubDate>
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