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                <title>Dowry Harassment - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Dowry Harassment RSS Feed</description>
                
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                <title>खजराना मंदिर के पुजारियों को हटाने की मांग, बहू ने दहेज प्रताड़ना मामले में प्रशासन से की कार्रवाई की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची पीड़िता, जांच पूरी होने तक पुजारियों को पूजा कार्य और गर्भगृह से दूर रखने की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-removal-of-khajrana-temple-priests-daughter-in-law-appeals-administration/article-55430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khajrana-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की शिकायतकर्ता डॉ. इंद्रा भट्ट मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं और प्रशासन से मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित पुजारियों को मंदिर में पूजा-पाठ और गर्भगृह से दूर रखा जाए। इस मांग के साथ मामला धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉ. इंद्रा भट्ट ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनका विवाह मई 2025 में खजराना मंदिर से जुड़े पुजारी पुनित भट्ट के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत के अनुसार उन्हें अपमानित किया गया, मारपीट की गई और कई बार धमकियां भी दी गईं। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की शिकायत महिला थाना इंदौर में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पुनित भट्ट सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर में दहेज प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसी धाराएं शामिल हैं। पीड़िता का कहना है कि जब मामला न्यायालय और पुलिस जांच के स्तर पर पहुंच चुका है, तब तक संबंधित लोगों को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों से अलग रखा जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में डॉ. इंद्रा भट्ट ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश श्री गणपति मंदिर खजराना (इंदौर) अधिनियम, 2003 का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि मंदिर एक विशेष अधिनियम के तहत संचालित होता है और यदि किसी पुजारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, तो जांच पूरी होने तक उसे धार्मिक जिम्मेदारियों से अलग करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास भी बना रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत में केवल दहेज प्रताड़ना का मामला ही नहीं उठाया गया है, बल्कि मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि मंदिर परिसर में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जो धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास वीडियो और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में पीड़िता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने कहा कि मंदिर अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति के आचरण से मंदिर की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका हो, तो प्रशासक या जिला प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है। उनका कहना है कि यह किसी को दोषी ठहराने की मांग नहीं है, बल्कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाने की मांग है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं अधिवक्ता डॉ. रुपाली राठौर ने भी कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बाद संबंधित धार्मिक पदाधिकारियों को अस्थायी रूप से सेवा से अलग किया गया था। उनका कहना है कि इससे जांच प्रभावित नहीं होती और संस्थान की साख भी बनी रहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर मंदिर प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत का परीक्षण किया जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्णय से पहले कानूनी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो वह सामाजिक संगठनों और समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी। उनका कहना है कि वह इस मामले को राज्य स्तर तक ले जाएंगी ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:53:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या उकसाने के मामले में सास बरी, हाईकोर्ट ने रद्द की 7 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- दहेज के लिए मौत से पहले प्रताड़ना के पर्याप्त सबूत नहीं, निचली अदालत के फैसले को किया निरस्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/mother-in-law-acquitted-in-case-of-dowry-harassment-and-abetment-of/article-55298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों में दोषी ठहराई गई एक महिला को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने करीब 15 साल पहले निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि मृतका को उसकी मौत से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह फैसला न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकल पीठ ने आरोपी सास द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनाया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वर्ष 2010 में आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का विस्तृत अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला दुर्ग जिले का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सोनल नामक युवती का विवाह 18 जून 2006 को मनीष के साथ हुआ था। शादी के करीब छह महीने बाद 21 दिसंबर 2006 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ समय बाद से ही उसकी सास शशिकला बाफना दहेज को लेकर असंतुष्ट थी और इसी कारण उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिजनों का आरोप था कि मृतका के पति को कोलकाता में नौकरी मिल गई थी, लेकिन सास ने बहू को उसके पास भेजने से इनकार कर दिया था। आरोप लगाया गया कि सास ने कहा था कि जब तक वह मायके से 10 से 15 लाख रुपये लेकर नहीं आएगी, तब तक उसे पति के साथ रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी कथित प्रताड़ना से परेशान होकर सोनल ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभियोजन के अनुसार घटना वाले दिन सुबह सास और बहू के बीच विवाद हुआ था। आरोप लगाया गया कि विवाद के दौरान सोनल के साथ मारपीट की गई और उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके पहुंची और शाम के समय घर की छत से कूद गई। बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने सास के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्ष 2010 में दुर्ग की फास्ट ट्रैक अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी सास को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर फैसले को चुनौती दी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई महत्वपूर्ण तर्क रखे। वकील ने अदालत को बताया कि घटना के पांच दिन बाद एफआईआर दर्ज कराई गई थी और इस देरी का कोई संतोषजनक कारण रिकॉर्ड पर नहीं है। इसके अलावा अस्पताल के शुरुआती रिकॉर्ड में परिजनों द्वारा डॉक्टरों को यह जानकारी दी गई थी कि सोनल बाथरूम में गिरने से घायल हुई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि बाद में घटनाक्रम को अलग रूप देकर मामला दर्ज कराया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम से जुड़े तथ्यों को भी अदालत के सामने रखा गया। बचाव पक्ष का कहना था कि मेडिकल साक्ष्य स्पष्ट रूप से यह स्थापित नहीं करते कि यह आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या कोई अन्य परिस्थिति। इसके अलावा मृतका के माता-पिता और भाई ने भी अपने बयानों में स्वीकार किया कि आरोपी ने कभी उनके सामने सीधे तौर पर दहेज या पैसों की मांग नहीं की थी। जो भी जानकारी थी, वह केवल मृतका द्वारा बताई गई बातों पर आधारित थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि दहेज मृत्यु के मामलों में यह साबित होना आवश्यक है कि महिला को उसकी मृत्यु से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था। यदि यह महत्वपूर्ण कड़ी स्थापित नहीं होती तो दहेज मृत्यु की धाराएं स्वतः लागू नहीं हो सकतीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि सोनल की मृत्यु छत से कूदने के कारण ही हुई थी। शुरुआती मेडिकल दस्तावेजों में बाथरूम में गिरने की बात दर्ज थी, जिससे मामले में संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों के बयान केवल सामान्य पारिवारिक विवाद और सास-बहू के बीच होने वाले झगड़ों की ओर संकेत करते हैं। इन्हें दहेज के लिए क्रूरता या आत्महत्या के लिए उकसाने का ठोस प्रमाण नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का पर्याप्त और गहन मूल्यांकन नहीं किया तथा परिस्थितियों का समुचित विश्लेषण किए बिना दोषसिद्धि का आदेश पारित कर दिया। यह आदेश कानून की कसौटी पर टिकने योग्य नहीं पाया गया। अंततः हाईकोर्ट ने आरोपी सास की अपील स्वीकार करते हुए 17 मार्च 2010 को पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से ससम्मान बरी करने का निर्देश दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:45:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जबलपुर में दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत का मामला, मेजर दामाद पर हत्या के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[3 करोड़ रुपये खर्च कर बेटी की शादी करने वाले पिता ने कोर्ट में लगाई न्याय की गुहार, पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/case-of-dowry-harassment-and-suspicious-death-in-jabalpur-major/article-54828"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jabalpur-dowry-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अभी चर्चा में बना हुआ है, इसी बीच जबलपुर से एक और गंभीर मामला सामने आया है जिसने दहेज प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। चेन्नई के रहने वाले व्यवसायी पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी 27 वर्षीय बेटी कविता नागार्जुन की मौत को हत्या बताते हुए सेना में मेजर पद पर पदस्थ अपने दामाद डॉ. ओम नागार्जुन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का दावा है कि शादी में करोड़ों रुपये खर्च करने और महंगे उपहार देने के बावजूद अतिरिक्त दहेज की मांग की गई और मांग पूरी नहीं होने पर उनकी बेटी की जान ले ली गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। परिजनों का आरोप है कि घटना को एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके चलते उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 3 जून को इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद यह प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित पिता के अनुसार उनकी इकलौती बेटी कविता पेशे से अधिवक्ता थीं। उनका विवाह 2 मार्च 2025 को तमिलनाडु निवासी डॉ. ओम नागार्जुन के साथ हुआ था, जो वर्तमान में जबलपुर के जेकेआरआरसी में मेजर के पद पर तैनात बताए जाते हैं। परिवार का कहना है कि बेटी की शादी धूमधाम से की गई थी और लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। शादी में करीब 100 तोला सोना, 25 लाख रुपये का हीरे का हार, लग्जरी कार सहित कई महंगे उपहार दिए गए थे। परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही कविता को अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। बताया गया कि मेजर दामाद नया अस्पताल स्थापित करना चाहता था और इसके लिए वह कविता पर मायके से 2 करोड़ रुपये लाने का दबाव बना रहा था। परिवार का कहना है कि कविता ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से उसके साथ व्यवहार और अधिक कठोर हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के दिन की जानकारी देते हुए परिजनों ने बताया कि कविता की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। परिजनों का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट के निशान दर्ज किए गए थे, लेकिन मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया। यही बात परिवार के संदेह को और गहरा करती है। कविता की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार चेन्नई से जबलपुर पहुंचा। यहां पहुंचकर पिता ने बेटी की मौत को संदिग्ध बताते हुए गोराबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर की मांग की। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर मामला दर्ज करने से इनकार किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। जब पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो परिवार ने अदालत की शरण ली। जिला न्यायालय में दाखिल याचिका के साथ कई दस्तावेज और कथित सबूत भी प्रस्तुत किए गए हैं। परिवार के वकील का कहना है कि शादी से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं जो दहेज प्रताड़ना की ओर संकेत करते हैं। अदालत में यह भी बताया गया कि विवाह से पहले महंगी कार की मांग की गई थी, हालांकि बाद में लड़की पक्ष ने अन्य लग्जरी वाहन और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी तथा घरेलू सामान दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिता पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश का परिणाम है। उनका कहना है कि पति और उसके परिवार ने दहेज के लालच में कविता को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने अदालत से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। यदि अदालत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देती है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस को दहेज प्रताड़ना, संदिग्ध मृत्यु और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच करनी पड़ती है। फिलहाल अदालत में दायर याचिका पर सभी की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:31:53 +0530</pubDate>
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                <title>दहेज में बुलेट और 2 लाख नहीं मिले, तो शादी छोड़ बारात लेकर भागा दूल्हा</title>
                                    <description><![CDATA[टीकमगढ़ में दहेज में 2 लाख और बुलेट की मांग पूरी नहीं होने पर दूल्हा अधूरी रस्में छोड़ बारात लेकर लौट गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/when-bullets-and-rs-2-lakh-were-not-received-as/article-53278"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t155720.549.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना क्षेत्र के बिजरौठा गांव में एक शादी उस समय टूट गई जब दूल्हा पक्ष ने दहेज में अचानक दो लाख रुपये और बुलेट मोटरसाइकिल की मांग रख दी। लड़की के परिवार का कहना है कि जब उन्होंने इसकी असमर्थता जताई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूल्हा और उसके बाराती शादी की रस्में अधूरी छोड़कर लौट गए। जिस घर में देर रात तक शादी की तैयारियां चल रही थीं और मेहमानों की चहल-पहल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां कुछ ही समय में सन्नाटा छा गया और रोने की आवाजें सुनाई देने लगीं। इस घटना के बाद से गांव में काफी चर्चा हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजरौठा गांव के निवासी शहादत खान ने अपनी बेटी की शादी टीकमगढ़ के बावरी गांव के शौकत खान के बेटे से तय की थी। उनके परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार शादी की तैयारियां की थीं। बारात भी तय समय पर पहुंची और शुरुआती रस्में सामान्य तरीके से चल रही थीं। बताया जा रहा है कि इसी दौरान वर पक्ष ने अचानक दो लाख रुपये और बुलेट बाइक की मांग रख दी। जब लड़की के परिवार ने इतनी राशि और बाइक देने में असमर्थता जताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो माहौल बिगड़ गया। हालांकि दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद दूल्हा पक्ष ने शादी से इंकार कर दिया और बारात वापस लौट गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुल्हन ने यह भी आरोप लगाया कि बारात आने के बाद लगातार दहेज की मांग की जा रही थी। परिवार के लोगों ने रिश्तेदारी और समाज का हवाला देकर शादी को बचाने की कोशिश की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि रात भर विवाद चलता रहा और कई लोगों ने बीच-बचाव भी किया। वर पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लड़की के घर का माहौल पूरी तरह से बदल गया</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शादी की खुशियां जल्द ही मायूसी में बदल गईं। रिश्तेदार और गांव की महिलाएं दुल्हन और उसके परिवार को संभालने में जुट गईं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद पीड़ित परिवार चंदेरा थाना पहुंचा और दहेज प्रताड़ना के साथ शादी तोड़ने की शिकायत दर्ज कराई। परिवार ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शिकायत मिल चुकी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर दोनों पक्षों से पूछताछ की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:00:19 +0530</pubDate>
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