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                <title>Kerala - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Kerala RSS Feed</description>
                
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                <title>30 साल से हर दिन चीलों को दाना खिला रहे 'ईगल मैन' अजीजका, एक सीटी पर उमड़ पड़ते हैं सैकड़ों शिकारी पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[केरल के कोझिकोड बीच पर हर दोपहर देखने को मिलता है अनोखा नजारा, इंसान और वन्यजीवों के भरोसे की मिसाल बने अजीजका, आवारा जानवरों की भी करते हैं सेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/eagle-man-azizka-has-been-feeding-the-eagles-every-day/article-58438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/eagle-man.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दुनिया में इंसान और जानवरों के बीच प्रेम और विश्वास की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन केरल के कोझिकोड (कालीकट) से सामने आई एक कहानी इन सबसे अलग और बेहद प्रेरणादायक है। यहां रहने वाले अजीज, जिन्हें लोग प्यार से 'ईगल मैन' अजीजका के नाम से जानते हैं, पिछले 30 से भी अधिक वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के हर दिन सैकड़ों शिकारी चीलों और आवारा जानवरों को भोजन करा रहे हैं। उनकी यह अनूठी सेवा न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हैरान कर देती है। अजीजका का जीवन किसी नियमित दिनचर्या की तरह चलता है। चाहे मौसम कैसा भी हो, तेज बारिश हो, भीषण गर्मी हो या फिर त्योहार का दिन, वे अपनी सेवा में कभी विराम नहीं देते। हर दिन दोपहर ठीक 2 बजे वे अपनी पुरानी साइकिल पर चिकन के टुकड़ों से भरा एक बोरा लेकर अपने घर से निकलते हैं। उनका गंतव्य हमेशा एक ही होता है—कोझिकोड बीच, जहां सैकड़ों पक्षी और कई आवारा जानवर उनका इंतजार कर रहे होते हैं। बीच पर पहुंचने के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं होता। अजीजका जैसे ही अपनी खास अंदाज वाली सीटी बजाते हैं, कुछ ही क्षणों में आसमान में उड़ रही सैकड़ों चीलें उनकी ओर तेजी से आने लगती हैं। देखते ही देखते पूरा आसमान चीलों से भर जाता है और वे अजीजका के चारों ओर मंडराने लगती हैं। यह नजारा इतना अद्भुत होता है कि वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि चीलों को स्वभाव से बेहद आक्रामक और शिकारी पक्षी माना जाता है। आमतौर पर ये पक्षी अपने शिकार पर तेज गति से हमला करते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन अजीजका के साथ इनका व्यवहार बिल्कुल अलग है। वर्षों से बना विश्वास इतना गहरा हो चुका है कि सैकड़ों चीलें उनके बेहद करीब आकर आराम से भोजन करती हैं, लेकिन उन्हें कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रिश्ता एक-दो दिन या कुछ महीनों में नहीं बना। अजीजका ने लगातार तीन दशक तक बिना किसी लालच के इन पक्षियों की सेवा की है। उनकी नियमितता और समर्पण ने चीलों के मन में भरोसा पैदा किया, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने एक अनोखे उदाहरण के रूप में दिखाई देता है। अजीजका सिर्फ चीलों तक ही सीमित नहीं हैं। वे बीच के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को भी भोजन कराते हैं। उनके लिए यह केवल सेवा नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। उनका मानना है कि इंसानों की तरह जानवरों को भी भूख लगती है और यदि हम सक्षम हैं तो हमें उनकी मदद जरूर करनी चाहिए। कोझिकोड बीच पर आने वाले पर्यटक अक्सर इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सोशल मीडिया पर अजीजका के वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं। लोग उन्हें "ईगल मैन" के नाम से पहचानते हैं और उनकी तुलना प्रकृति के सच्चे मित्र से करते हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि अजीजका को चीलों की "स्पेशल सिक्योरिटी" मिली हुई है, क्योंकि उनके आसपास सैकड़ों चीलें सुरक्षा घेरे की तरह मंडराती रहती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:51:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>केरल और तमिलनाडु में राज्य चुनाव आयुक्त को लेकर बढ़ा विवाद, संवैधानिक स्वायत्तता पर फिर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया पर छिड़ी बहस, स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाले राज्य चुनाव आयोग की भूमिका फिर चर्चा में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/controversy-over-state-election-commissioner-increases-in-kerala-and-tamil/article-58313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/state-election-commission.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश में स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले राज्य चुनाव आयोग (SEC) की भूमिका एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इसकी वजह केरल और तमिलनाडु में सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रम हैं, जिन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दोनों राज्यों में उठे विवादों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को किस तरह सुरक्षित रखा जाए और राजनीतिक हस्तक्षेप से उन्हें कैसे दूर रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">केरल में राज्य चुनाव आयुक्त पद के लिए सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एन. शेषाद्रिनाथन के नामांकन को लेकर विवाद शुरू हुआ है। इस नियुक्ति का विरोध करते हुए केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के महासचिव पी.एम. नियास ने राज्य के गृह विभाग से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शेषाद्रिनाथन कथित तौर पर एक विशेष वैचारिक संगठन से जुड़े रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष सार्वजनिक किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एन. शेषाद्रिनाथन न्यायपालिका में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने एर्नाकुलम स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा वे लक्षद्वीप के कवरत्ती में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश भी रह चुके हैं। उनके प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति की गई, लेकिन राजनीतिक आरोपों के चलते यह मामला विवादों में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तमिलनाडु में राज्य सरकार और वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त बी. ज्योति निर्मलासामी के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। राज्य सरकार ने उनसे पद छोड़ने के लिए कहा है। बी. ज्योति निर्मलासामी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं। इस घटनाक्रम ने संवैधानिक पद पर कार्यरत अधिकारियों की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य चुनाव आयोग भारतीय संविधान द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है। इसका मुख्य दायित्व राज्यों में पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों जैसे स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनावों का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती में इस संस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर चुनी जाने वाली सरकारें सीधे जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, मतदान, मतगणना और परिणामों की घोषणा तक की पूरी प्रक्रिया का संचालन करता है। इसके साथ ही जहां राज्य कानून में व्यवस्था हो, वहां मतदाता सूची का पुनरीक्षण और अद्यतन कराने की जिम्मेदारी भी आयोग निभाता है। चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू कर उसका पालन सुनिश्चित करना भी आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वार्डों और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य भी कई राज्यों में राज्य चुनाव आयोग की देखरेख में किया जाता है। चुनाव से जुड़े विवादों का निपटारा संबंधित राज्य कानूनों के अनुसार नामित न्यायालयों या अधिकृत प्राधिकरणों के माध्यम से किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि संविधान में राज्य चुनाव आयुक्त बनने के लिए कोई समान या अनिवार्य योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में नियुक्ति की प्रक्रिया और पात्रता अलग-अलग दिखाई देती है। कई राज्यों में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को इस पद पर नियुक्त किया जाता है, जबकि कुछ राज्यों में पूर्व आईएएस अधिकारियों या अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाती है। केरल में राज्य चुनाव आयुक्त को एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभानी होती है। वे परिसीमन आयोग से जुड़े सदस्य के रूप में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के निर्धारण से संबंधित प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। साथ ही पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के वार्ड परिसीमन के लिए गठित राज्य परिसीमन आयोग के अध्यक्ष भी होते हैं। तमिलनाडु में भी राज्य चुनाव आयुक्त परिसीमन आयोग के पदेन अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। चुनाव से पहले स्थानीय निकायों के वार्डों की सीमाओं का निर्धारण, आरक्षण व्यवस्था और जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य उनके नेतृत्व में पूरे किए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:38:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाथी दांत मामले में फिर चर्चा में मोहनलाल, वन विभाग को 10 दांत और 13 मूर्तियों की दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 साल पुराने मामले में एमनेस्टी योजना के तहत किया खुलासा, वन विभाग करेगा जांच; डीएनए परीक्षण की भी संभावना जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/6a4cb43280040/article-58093"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohanlal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल एक बार फिर हाथी दांत रखने से जुड़े पुराने मामले को लेकर चर्चा में हैं। केरल वन विभाग के समक्ष अभिनेता ने सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत 10 हाथी के दांत और हाथी दांत से बनी 13 मूर्तियों की जानकारी दी है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर वह मामला सुर्खियों में आ गया है, जिसकी शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले अभिनेता ने केवल चार हाथी दांत होने की जानकारी दी थी, लेकिन अब उन्होंने छह और हाथी दांत के साथ कई कलाकृतियों की भी घोषणा की है। विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इन वस्तुओं का डीएनए परीक्षण भी कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता ने जिन वस्तुओं की घोषणा की है, उनमें भगवान कृष्ण, भगवान राम और तिरुपति बालाजी सहित कई धार्मिक प्रतिमाएं शामिल हैं। इन सभी हाथी दांतों और मूर्तियों का कुल वजन करीब 46 किलोग्राम बताया जा रहा है। मोहनलाल का कहना है कि ये वस्तुएं उन्हें विरासत में मिली थीं या फिर उपहार के रूप में प्राप्त हुई थीं। उन्होंने इन्हें किसी अवैध व्यापार या शिकार के जरिए हासिल नहीं किया। हालांकि वन विभाग अब इस दावे की भी जांच करेगा कि इन वस्तुओं की वास्तविक उत्पत्ति क्या है और क्या इनके पास रखने की प्रक्रिया उस समय लागू नियमों के अनुरूप थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार वर्ष 2011 में सामने आया था। उस समय आयकर विभाग की टीम कोच्चि के थेवारा इलाके में स्थित मोहनलाल के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। अधिकारियों का उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना था, लेकिन तलाशी के दौरान घर में हाथी दांत और उनसे बनी कई कलाकृतियां मिलीं। इसके बाद मामला वन विभाग तक पहुंचा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सरकार की अनुमति के बिना हाथी दांत रखना या उसका स्वामित्व रखना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर वन विभाग ने इन वस्तुओं को जब्त किया और पेरुम्बावूर की अदालत में मामला दर्ज कराया। तभी से यह प्रकरण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद मोहनलाल ने अपनी सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि जिन हाथी दांतों की बात हो रही है, वे एक ऐसे पालतू हाथी के थे जिसकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई थी। अभिनेता का दावा था कि उन्होंने उन्हें केवल स्मृति के रूप में अपने पास रखा था और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना कानून के दायरे में प्रतिबंधित है। बाद में वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने उन्हें इन हाथी दांतों की घोषणा करने की अनुमति दी और वर्ष 2016 में स्वामित्व प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। उस समय इस फैसले पर भी कई वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सवाल उठाए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया जारी रही। मोहनलाल ने निचली अदालत के आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम राहत मिली। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से मामले को वापस लेने का भी अनुरोध किया, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई। बाद में सेवानिवृत्त वन अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभिनेता को जारी स्वामित्व प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया। इसके बाद मामला फिर वन विभाग की जांच के दायरे में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत मोहनलाल द्वारा अतिरिक्त हाथी दांत और मूर्तियों की घोषणा किए जाने के बाद विभाग एक बार फिर सभी तथ्यों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि आवश्यकता पड़ी तो हाथी दांतों और उनसे बनी मूर्तियों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ये वस्तुएं किस हाथी से संबंधित हैं और इनकी वास्तविक स्थिति क्या है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी दांत से संबंधित मामलों में कानून काफी सख्त है, क्योंकि अवैध शिकार और हाथी दांत के व्यापार पर रोक लगाने के लिए देश में लंबे समय से विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति, स्वामित्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है। दूसरी ओर अभिनेता के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एमनेस्टी योजना के तहत स्वयं जानकारी देकर कानून का पालन करने की कोशिश की है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:48:03 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु-केरल में क्यों खरीदा जाता है सबसे ज्यादा सोना, जानिए वजह</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु, केरल और दक्षिण भारत में सोने की भारी खरीद के पीछे परंपरा, शादी, बचत और महिलाओं की सुरक्षा की सोच बड़ी वजह मानी जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/know-the-reason-why-most-gold-is-bought-in-tamil/article-53281"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t163255.785.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद से देशभर में इस मुद्दे पर अब चर्चा तेज़ हो गई है। सोना तो हमेशा से ही भारतीय परिवारों की ज़िंदगी का हिस्सा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन खासकर दक्षिण भारत में इसकी महत्ता थोड़ी ज्यादा ही है। जैसे तमिलनाडु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सोने की खरीद सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है। यहां यह परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की सुरक्षा से भी जुड़ा होता है। यही वजह है कि देश में जितना घरेलू सोना मौजूद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका बड़ा हिस्सा दक्षिण भारतीय राज्यों में ही है। ऐसी भी खबरें हैं कि इन राज्यों में शादी-ब्याह से लेकर छोटे-मोटे धार्मिक आयोजनों तक सोने की खरीद एक सामान्य सी बात है। कई परिवार तो हर साल थोड़ा-थोड़ा सोना जोड़ते रहते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दक्षिण भारत में सोने के प्रति लोगों की सोच बाकी हिस्सों से काफी अलग है। यहां सोना सिर्फ गहना नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बचत का एक भरोसेमंद तरीका भी माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में भी लोग इसे बैंक या शेयर बाजार से ज्यादा सुरक्षित समझते हैं। जरूरत पड़ने पर इसे गिरवी रखकर तुरंत पैसे मिल जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए परिवार इसे इमरजेंसी फंड के रूप में देखते हैं। अधिकारियों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केरल और तमिलनाडु में गोल्ड लोन का मार्केट भी काफी बड़ा है। इसी कारण लोग नकद बचत से ज्यादा सोना खरीदना पसंद करते हैं। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शादियों के चलते भी सोने की मांग बढ़ती है। दक्षिण भारत में शादी में दुल्हन के सोने के गहनों को प्रतिष्ठा और सम्मान से जोड़ा जाता है। कई समुदायों में शादी के दौरान भारी मात्रा में सोना पहनाना पारंपरिक बात है। रिपोर्ट्स के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में तो कई दुल्हनें 300 ग्राम से ज्यादा सोना पहनती हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी यही देखा जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चेन्नई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोच्चि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहर भी देश के बड़े ज्वेलरी हब माने जाते हैं। यहां बड़े-बड़े ब्रांड्स के साथ पारंपरिक ज्वेलर्स भी हैं। डिजाइन की विभिन्नता और प्रतिस्पर्धा होने से ग्राहकों के पास विकल्प भी ज्यादा होते हैं। कुछ व्यापारियों का मानना है कि दक्षिण भारत के कई शहरों के बंदरगाहों के करीब होने से सोने की सप्लाई आसान रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कारोबार भी मजबूत हुआ है। हालात ये हैं कि लोग रोज़ाना सोने की कीमतों पर नजर रखते हैं। अक्षय तृतीया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओणम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोंगल और शादी के मौसम में बाजारों में काफी भीड़ होती है। कई परिवारों में बेटियों के जन्म के साथ ही सोना जोड़ने की परंपरा शुरू हो जाती है। इसे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि मुश्किल समय में पहला काम घर के सोने को गिरवी रखना होता है। यही सोच पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में से एक है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसमें दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने की मांग केवल अमीरी का प्रतीक नहीं है। इसके पीछे सामाजिक सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक परंपरा और सुरक्षा की भावना भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि महंगाई बढ़ने या कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद भी दक्षिण भारत में सोने की खरीद पूरी तरह रुकती नहीं है। आने वाले समय में पीएम मोदी की अपील का कितना असर पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो अलग बात है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल दिखता है कि दक्षिण भारत में सोना आज भी सबसे भरोसेमंद संपत्ति माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:32 +0530</pubDate>
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