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                <title>Wedding Gold - दैनिक जागरण</title>
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                <title>तमिलनाडु-केरल में क्यों खरीदा जाता है सबसे ज्यादा सोना, जानिए वजह</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु, केरल और दक्षिण भारत में सोने की भारी खरीद के पीछे परंपरा, शादी, बचत और महिलाओं की सुरक्षा की सोच बड़ी वजह मानी जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/know-the-reason-why-most-gold-is-bought-in-tamil/article-53281"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t163255.785.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद से देशभर में इस मुद्दे पर अब चर्चा तेज़ हो गई है। सोना तो हमेशा से ही भारतीय परिवारों की ज़िंदगी का हिस्सा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन खासकर दक्षिण भारत में इसकी महत्ता थोड़ी ज्यादा ही है। जैसे तमिलनाडु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सोने की खरीद सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है। यहां यह परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की सुरक्षा से भी जुड़ा होता है। यही वजह है कि देश में जितना घरेलू सोना मौजूद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका बड़ा हिस्सा दक्षिण भारतीय राज्यों में ही है। ऐसी भी खबरें हैं कि इन राज्यों में शादी-ब्याह से लेकर छोटे-मोटे धार्मिक आयोजनों तक सोने की खरीद एक सामान्य सी बात है। कई परिवार तो हर साल थोड़ा-थोड़ा सोना जोड़ते रहते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दक्षिण भारत में सोने के प्रति लोगों की सोच बाकी हिस्सों से काफी अलग है। यहां सोना सिर्फ गहना नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बचत का एक भरोसेमंद तरीका भी माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में भी लोग इसे बैंक या शेयर बाजार से ज्यादा सुरक्षित समझते हैं। जरूरत पड़ने पर इसे गिरवी रखकर तुरंत पैसे मिल जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए परिवार इसे इमरजेंसी फंड के रूप में देखते हैं। अधिकारियों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केरल और तमिलनाडु में गोल्ड लोन का मार्केट भी काफी बड़ा है। इसी कारण लोग नकद बचत से ज्यादा सोना खरीदना पसंद करते हैं। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शादियों के चलते भी सोने की मांग बढ़ती है। दक्षिण भारत में शादी में दुल्हन के सोने के गहनों को प्रतिष्ठा और सम्मान से जोड़ा जाता है। कई समुदायों में शादी के दौरान भारी मात्रा में सोना पहनाना पारंपरिक बात है। रिपोर्ट्स के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में तो कई दुल्हनें 300 ग्राम से ज्यादा सोना पहनती हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी यही देखा जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चेन्नई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोच्चि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहर भी देश के बड़े ज्वेलरी हब माने जाते हैं। यहां बड़े-बड़े ब्रांड्स के साथ पारंपरिक ज्वेलर्स भी हैं। डिजाइन की विभिन्नता और प्रतिस्पर्धा होने से ग्राहकों के पास विकल्प भी ज्यादा होते हैं। कुछ व्यापारियों का मानना है कि दक्षिण भारत के कई शहरों के बंदरगाहों के करीब होने से सोने की सप्लाई आसान रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कारोबार भी मजबूत हुआ है। हालात ये हैं कि लोग रोज़ाना सोने की कीमतों पर नजर रखते हैं। अक्षय तृतीया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओणम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोंगल और शादी के मौसम में बाजारों में काफी भीड़ होती है। कई परिवारों में बेटियों के जन्म के साथ ही सोना जोड़ने की परंपरा शुरू हो जाती है। इसे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि मुश्किल समय में पहला काम घर के सोने को गिरवी रखना होता है। यही सोच पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में से एक है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसमें दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने की मांग केवल अमीरी का प्रतीक नहीं है। इसके पीछे सामाजिक सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक परंपरा और सुरक्षा की भावना भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि महंगाई बढ़ने या कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद भी दक्षिण भारत में सोने की खरीद पूरी तरह रुकती नहीं है। आने वाले समय में पीएम मोदी की अपील का कितना असर पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो अलग बात है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल दिखता है कि दक्षिण भारत में सोना आज भी सबसे भरोसेमंद संपत्ति माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:32 +0530</pubDate>
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