<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/rbi/tag-13209" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>RBI - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/13209/rss</link>
                <description>RBI RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, जरूरी काम समय रहते निपटाएं</title>
                                    <description><![CDATA[चार रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार समेत अलग-अलग राज्यों में छह अतिरिक्त छुट्टियां, ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाएं रहेंगी जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/banks-will-remain-closed-for-12-days-in-july-complete/article-57191"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/july-bank-holidays.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर जुलाई महीने में आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम करना है तो पहले छुट्टियों की सूची जरूर देख लें। अगले महीने देशभर में अलग-अलग राज्यों और शहरों में कुल 12 दिन बैंक बंद रहेंगे। इनमें चार रविवार और महीने के दूसरे व चौथे शनिवार की नियमित छुट्टियां शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण छह अतिरिक्त दिनों तक बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ऐसे में चेक जमा कराने, ड्राफ्ट बनवाने, नकद निकासी, केवाईसी, पासबुक अपडेट या अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए ग्राहकों को पहले से योजना बनानी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक के अवकाश कैलेंडर के अनुसार जुलाई में 5, 12, 19 और 26 जुलाई को रविवार होने की वजह से देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे। वहीं 11 जुलाई को महीने का दूसरा शनिवार और 25 जुलाई को चौथा शनिवार होने के कारण भी सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा कुछ राज्यों में स्थानीय पर्व और क्षेत्रीय आयोजनों के चलते अलग-अलग तारीखों पर बैंक बंद रहेंगे। हालांकि इन छुट्टियों का असर पूरे देश में एक समान नहीं होगा, क्योंकि अतिरिक्त अवकाश संबंधित राज्य या शहर तक ही सीमित रहेंगे। महीने की शुरुआत और अंत में ग्राहकों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे में यदि किसी को बड़ी राशि जमा करनी है, चेक क्लियर कराना है या किसी दस्तावेज से जुड़ा काम करवाना है तो छुट्टियों से पहले बैंक पहुंचना बेहतर रहेगा। कई बार लगातार छुट्टियां पड़ने से बैंक खुलने के बाद शाखाओं में लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। इसलिए जरूरी बैंकिंग कार्यों को अंतिम समय तक टालने से बचना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को डिजिटल सेवाओं में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन सामान्य रूप से जारी रहेगा। ग्राहक घर बैठे फंड ट्रांसफर, बिजली-पानी के बिलों का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज, टैक्स भुगतान और अन्य ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। डिजिटल भुगतान प्रणाली पर इन छुट्टियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बैंकों की छुट्टियों के दौरान एटीएम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा यूपीआई और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं। यदि किसी ग्राहक को केवल पैसे निकालने या ऑनलाइन भुगतान करने की जरूरत है तो उसे बैंक शाखा जाने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि चेक क्लियरेंस, डिमांड ड्राफ्ट, लॉकर संचालन, पासबुक प्रिंटिंग और दस्तावेज सत्यापन जैसे कार्य केवल बैंक शाखा खुलने पर ही किए जा सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिन लोगों को लोन की किस्त जमा करनी है या बैंक से जुड़े दस्तावेज पूरे करने हैं, वे छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए पहले ही अपना काम निपटा लें। व्यापारियों और कारोबारियों के लिए भी यह जरूरी है कि वे नकदी प्रबंधन और बैंकिंग लेनदेन की योजना पहले से बना लें ताकि कारोबार प्रभावित न हो। वेतन, पेंशन और अन्य भुगतान भी डिजिटल माध्यमों से आसानी से किए जा सकते हैं। ग्राहकों के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपने संबंधित बैंक की वेबसाइट या शाखा से स्थानीय अवकाश की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। अलग-अलग राज्यों में त्योहारों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण बैंक अवकाश की तारीखें अलग हो सकती हैं। इसलिए यदि किसी दूसरे शहर में बैंकिंग कार्य करना है तो वहां की छुट्टियों की जानकारी पहले लेना बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर जुलाई में बैंकों की कुल 12 दिनों की छुट्टियां ग्राहकों के लिए पहले से योजना बनाने का संकेत हैं। यदि समय रहते जरूरी बैंकिंग कार्य पूरे कर लिए जाएं तो किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकता है। वहीं डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी, जिससे अधिकांश वित्तीय लेनदेन बिना किसी रुकावट के किए जा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/banks-will-remain-closed-for-12-days-in-july-complete/article-57191</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/banks-will-remain-closed-for-12-days-in-july-complete/article-57191</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/july-bank-holidays.jpg"                         length="238886"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केनरा बैंक पर RBI की बड़ी कार्रवाई, KYC नियमों में चूक पर लगा 41.8 लाख रुपए का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर अपलोड नहीं करने और सक्रिय खातों को निष्क्रिय श्रेणी में डालने के मामले में रिजर्व बैंक ने केनरा बैंक पर पेनल्टी लगाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-action-by-rbi-on-canara-bank-fine-of-rs/article-55076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/canara-bank.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में शामिल केनरा बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई करते हुए उस पर 41.8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक की ओर से की गई जांच में बैंक द्वारा कुछ महत्वपूर्ण बैंकिंग नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से नो योर कस्टमर यानी KYC नियमों के अनुपालन में कमी और खातों के संचालन से जुड़े दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को लेकर की गई है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना बैंक की नियामकीय चूक के कारण लगाया गया है और इसका ग्राहकों की जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की जानकारी सामने आने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई है। RBI के अनुसार केनरा बैंक कई ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड निर्धारित समय सीमा के भीतर सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री यानी CKYCR पर अपलोड नहीं कर पाया। बैंकिंग प्रणाली में KYC प्रक्रिया को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके जरिए ग्राहकों की पहचान सत्यापित की जाती है और वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखने में मदद मिलती है। इसी उद्देश्य से सभी बैंकों को अपने नए और मौजूदा ग्राहकों का KYC डेटा निर्धारित समय के भीतर केंद्रीय रजिस्ट्री में अपडेट करना अनिवार्य होता है। जांच में पाया गया कि केनरा बैंक इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में विफल रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">RBI की कार्रवाई का दूसरा आधार खातों की संचालन स्थिति से जुड़ा है। केंद्रीय बैंक के नियमों के अनुसार यदि किसी बैंक खाते में पिछले एक वर्ष के भीतर ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन किया गया है तो उस खाते को सक्रिय माना जाता है। हालांकि जांच में यह पाया गया कि केनरा बैंक ने कुछ ऐसे खातों को भी इनऑपरेटिव या निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया था जिनमें एक वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही ग्राहक की ओर से लेनदेन दर्ज किया गया था। इस तरह की प्रक्रिया ग्राहकों के लिए असुविधा का कारण बन सकती है और बैंकिंग संचालन में पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी खड़े कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि यह मामला RBI द्वारा किए गए सुपरवाइजरी मूल्यांकन के दौरान सामने आया। केंद्रीय बैंक ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति और बैंक के संचालन की समीक्षा की थी। इसी समीक्षा प्रक्रिया में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए जिन पर नियामकीय मानकों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया था। इसके बाद रिजर्व बैंक ने केनरा बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया और बैंक से विस्तृत जवाब मांगा। बैंक द्वारा दिए गए लिखित उत्तर और अधिकारियों की मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद RBI ने यह निष्कर्ष निकाला कि नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त आधार मौजूद हैं और पेनल्टी लगाना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाल के वर्षों में RBI ने नियामकीय अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी और सख्त की है। केंद्रीय बैंक लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि बैंक केवल वित्तीय प्रदर्शन पर ही ध्यान न दें, बल्कि ग्राहकों के डेटा प्रबंधन, जोखिम नियंत्रण और नियामकीय दिशा-निर्देशों के पालन को भी प्राथमिकता दें। KYC नियमों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ धोखाधड़ी के मामलों की संभावना भी बढ़ी है। ऐसे में ग्राहकों के रिकॉर्ड का सही और समय पर अद्यतन होना बेहद आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि RBI ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जुर्माना लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए लेनदेन या अनुबंधों की वैधता पर कोई सवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय कमियों को ध्यान में रखकर की गई है। बैंक के सामान्य संचालन, खाताधारकों की जमा पूंजी और ग्राहकों की बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ग्राहक पहले की तरह बैंक की सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। इस तरह की कार्रवाई बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी होती है। इससे अन्य वित्तीय संस्थानों को भी नियमों का कड़ाई से पालन करने का संदेश मिलता है। नियामकीय संस्थाएं समय-समय पर ऐसी जांच करती रहती हैं ताकि बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों का विश्वास बना रहे और वित्तीय प्रणाली सुरक्षित बनी रहे।</p>
<p>केनरा बैंक की ओर से इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि बैंक भविष्य में ऐसी कमियों को दूर करने के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर सकता है। RBI की यह कार्रवाई एक बार फिर यह संकेत देती है कि नियामकीय अनुपालन में छोटी दिखने वाली चूक भी बैंकों के लिए वित्तीय और प्रतिष्ठागत दोनों स्तरों पर महंगी साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-action-by-rbi-on-canara-bank-fine-of-rs/article-55076</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-action-by-rbi-on-canara-bank-fine-of-rs/article-55076</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:44:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/canara-bank.jpg"                         length="192841"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI MPC Meeting 2026: आज से शुरू हुई बैठक, रेपो रेट पर टिकी बाजार और कर्जदारों की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[5 जून को आएगा फैसला, फिलहाल 5.25% पर कायम है रेपो रेट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rbi-mpc-meeting-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज 3 जून 2026 से शुरू हो गई है। यह बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद आरबीआई गवर्नर की ओर से नीतिगत दरों और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की जाएगी। इस बैठक पर बैंकिंग सेक्टर, उद्योग जगत, शेयर बाजार और आम कर्जदारों की खास नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है और केंद्रीय बैंक फिलहाल मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दरों को स्थिर रख सकता है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। इसी दर के आधार पर बैंकों के लोन और जमा योजनाओं की ब्याज दरें प्रभावित होती हैं। ऐसे में हर मॉनेटरी पॉलिसी बैठक का सीधा असर करोड़ों लोगों की जेब पर पड़ता है। गृह ऋण, वाहन ऋण, शिक्षा ऋण और व्यापारिक कर्ज लेने वाले लोग विशेष रूप से इस फैसले का इंतजार करते हैं।</p>
<p>पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर नियंत्रित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने आरबीआई के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए संतुलित नीति अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। बीते वर्ष 2025 में आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बार ब्याज दरों में कटौती की थी। फरवरी 2025 में पहली बार करीब पांच साल बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इसके बाद अप्रैल, जून और दिसंबर में भी दरों में कमी की गई। कुल मिलाकर वर्ष 2025 में चार चरणों में 1.25 प्रतिशत की कटौती हुई और रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत तक आ गया। इन फैसलों का असर यह हुआ कि कई बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरें कम कीं और उपभोक्ताओं को राहत मिली।</p>
<p>अब स्थिति पहले जैसी नहीं है। महंगाई भले ही नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को यथावत रखकर आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखना चाहेगा। कई वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट में भी अनुमान जताया गया है कि इस बैठक में रेपो रेट में कटौती की संभावना बेहद सीमित है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल छह सदस्य होते हैं। इनमें तीन सदस्य रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि होते हैं जबकि तीन सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति आर्थिक विकास, महंगाई, रोजगार, उपभोक्ता मांग और वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद नीतिगत फैसले लेती है। प्रत्येक सदस्य अपना मत देता है और बहुमत के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।</p>
<p>रेपो रेट का आम लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें भी बढ़ा देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो जाते हैं। दूसरी ओर जब रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा सकते हैं। मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। विनिर्माण गतिविधियों में सुधार, सेवाक्षेत्र की मजबूती और सरकारी निवेश योजनाओं से विकास को समर्थन मिल रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अस्थिरता और वैश्विक मांग में कमजोरी जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इसलिए आरबीआई को विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।</p>
<p>शेयर बाजार भी इस बैठक पर करीबी नजर बनाए हुए है। निवेशकों को उम्मीद है कि आरबीआई अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देगा। यदि केंद्रीय बैंक विकास दर के अनुमान को बरकरार रखता है और महंगाई को नियंत्रित बताता है तो बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। वहीं किसी अप्रत्याशित फैसले का असर बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है। 5 जून को होने वाली घोषणा के साथ यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या रहने वाली है।आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रख सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक के बयान और भविष्य के संकेत निवेशकों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/rbi-mpc-meeting-2026.jpg"                         length="195080"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI के नए प्रस्ताव से बढ़ी चिंता, अब लोन नहीं चुकाया तो नहीं कर पाएंगे मोबाइल का इस्तेमाल!</title>
                                    <description><![CDATA[RBI के प्रस्ताव के मुताबिक मोबाइल लोन की EMI नहीं चुकाने पर बैंक फोन की कुछ सुविधाएं बंद कर सकता है। नए नियमों पर चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/concern-increased-due-to-new-proposal-of-rbi-now-if/article-53875"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rbi-mobile-loans-new-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मोबाइल फोन लोन पर खरीदारी करने वाले करोड़ों ग्राहकों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक का नया प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने लोन रिकवरी से जुड़े नियमों में बदलाव का एक ड्राफ्ट जारी किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि अगर कोई ग्राहक लंबे समय तक मोबाइल लोन की ईएमआई नहीं चुकाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक उसके स्मार्टफोन की कुछ सुविधाओं को सीमित कर सकता है। जैसे ही यह खबर सामने आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गईं। कुछ इसे सख्त कदम मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ का कहना है कि इससे लोन रिकवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। हालांकि </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सिर्फ उन डिवाइस पर लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें सीधे बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन से खरीदा गया हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रस्तावित नियमों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि कोई ग्राहक 90 दिन तक लगातार </span>EMI <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक कार्रवाई कर सकता है। लेकिन इससे पहले ग्राहक को एक नोटिस देना जरूरी होगा। नोटिस मिलने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक फोन की कुछ सुविधाएं बंद या सीमित कर सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फोन को पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकेगा। </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने आश्वासन दिया है कि इंटरनेट एक्सेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनकमिंग कॉल</span>, SOS <span lang="hi" xml:lang="hi">फीचर और सरकारी इमरजेंसी अलर्ट जैसी जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी। इसका मतलब यह है कि ग्राहक पूरी तरह से संपर्क से बाहर नहीं होगा। बताया गया है कि इस सिस्टम को तकनीकी तौर पर लागू करने के लिए बैंकों और मोबाइल कंपनियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पड़ेगी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है और इस पर सुझाव मांगे गए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार को लेकर भी सख्त रुख दिखाई है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि एजेंट ग्राहकों को परेशान नहीं कर सकेंगे और न ही गाली-गलौज कर सकेंगे या सोशल मीडिया पर कोई जानकारी साझा कर सकेंगे। जरूरत से ज्यादा कॉल और मैसेज भेजना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंकों को रिकवरी से जुड़ी हर कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा। कब कॉल की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनी बार की गई और बातचीत में क्या कहा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका पूरा डेटा सुरक्षित रखना जरूरी होगा। एक और अहम बात यह है कि अगर ग्राहक बकाया </span>EMI <span lang="hi" xml:lang="hi">चुका देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक को एक घंटे के भीतर फोन की बंद की गई सुविधाएं दोबारा शुरू करनी होंगी। ऐसा नहीं करने पर बैंक को हर घंटे के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है। </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इन प्रस्तावों पर 31 मई तक लोगों और संस्थाओं से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि नए नियम अक्टूबर 2026 से लागू किए जा सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/concern-increased-due-to-new-proposal-of-rbi-now-if/article-53875</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/concern-increased-due-to-new-proposal-of-rbi-now-if/article-53875</guid>
                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:21:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/rbi-mobile-loans-new-rules.jpg"                         length="141468"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला, सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है, सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-decision-of-rbi-amid-middle-east-crisis-government-will/article-53283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t164953.547.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की योजना बना रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महीने होने वाली </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह राशि पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। जब दुनिया के कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत के सरकारी खजाने में आने वाला ये पैसा एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हर साल अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता है। यह प्रक्रिया </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>ECF <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत होती है। इसके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट का एक हिस्सा जोखिम सुरक्षा फंड के तौर पर अलग रखना होता है। बाकी की राशि सरकार को दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये था। अब जो संकेत मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके अनुसार इस बार आंकड़ा और बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार से मिली कमाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉंड बाजार और ब्याज आय ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">की कमाई को मजबूत किया है। यही वजह है कि सरकार को इस बार ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी सरकार के लिए राहत लेकर आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगातार चौथे साल अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों का कुल शुद्ध लाभ लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खराब कर्ज में कमी और लोन ग्रोथ बढ़ने का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कई सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड स्तर पर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बैंकों से भी बड़ा लाभांश मिलने वाला है। बजट में सरकार ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भी भारत के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त वित्तीय ताकत बनी रहेगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के लिए यह पैसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे बिना नए टैक्स लगाए इंफ्रास्ट्रक्चर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की स्थिति अभी संतुलित नजर आ रही है। टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो रही है और गैर-कर राजस्व लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास विकास योजनाओं को जारी रखने का अतिरिक्त स्पेस बनता दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-decision-of-rbi-amid-middle-east-crisis-government-will/article-53283</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-decision-of-rbi-amid-middle-east-crisis-government-will/article-53283</guid>
                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-13t164953.547.jpg"                         length="236664"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        