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                <title>Reserve Bank of India - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Reserve Bank of India RSS Feed</description>
                
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                <title>RBI के नए प्रस्ताव से बढ़ी चिंता, अब लोन नहीं चुकाया तो नहीं कर पाएंगे मोबाइल का इस्तेमाल!</title>
                                    <description><![CDATA[RBI के प्रस्ताव के मुताबिक मोबाइल लोन की EMI नहीं चुकाने पर बैंक फोन की कुछ सुविधाएं बंद कर सकता है। नए नियमों पर चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/concern-increased-due-to-new-proposal-of-rbi-now-if/article-53875"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rbi-mobile-loans-new-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मोबाइल फोन लोन पर खरीदारी करने वाले करोड़ों ग्राहकों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक का नया प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने लोन रिकवरी से जुड़े नियमों में बदलाव का एक ड्राफ्ट जारी किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि अगर कोई ग्राहक लंबे समय तक मोबाइल लोन की ईएमआई नहीं चुकाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक उसके स्मार्टफोन की कुछ सुविधाओं को सीमित कर सकता है। जैसे ही यह खबर सामने आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गईं। कुछ इसे सख्त कदम मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ का कहना है कि इससे लोन रिकवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। हालांकि </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सिर्फ उन डिवाइस पर लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें सीधे बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन से खरीदा गया हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रस्तावित नियमों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि कोई ग्राहक 90 दिन तक लगातार </span>EMI <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक कार्रवाई कर सकता है। लेकिन इससे पहले ग्राहक को एक नोटिस देना जरूरी होगा। नोटिस मिलने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक फोन की कुछ सुविधाएं बंद या सीमित कर सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फोन को पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकेगा। </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने आश्वासन दिया है कि इंटरनेट एक्सेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनकमिंग कॉल</span>, SOS <span lang="hi" xml:lang="hi">फीचर और सरकारी इमरजेंसी अलर्ट जैसी जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी। इसका मतलब यह है कि ग्राहक पूरी तरह से संपर्क से बाहर नहीं होगा। बताया गया है कि इस सिस्टम को तकनीकी तौर पर लागू करने के लिए बैंकों और मोबाइल कंपनियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पड़ेगी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है और इस पर सुझाव मांगे गए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार को लेकर भी सख्त रुख दिखाई है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि एजेंट ग्राहकों को परेशान नहीं कर सकेंगे और न ही गाली-गलौज कर सकेंगे या सोशल मीडिया पर कोई जानकारी साझा कर सकेंगे। जरूरत से ज्यादा कॉल और मैसेज भेजना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंकों को रिकवरी से जुड़ी हर कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा। कब कॉल की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनी बार की गई और बातचीत में क्या कहा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका पूरा डेटा सुरक्षित रखना जरूरी होगा। एक और अहम बात यह है कि अगर ग्राहक बकाया </span>EMI <span lang="hi" xml:lang="hi">चुका देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक को एक घंटे के भीतर फोन की बंद की गई सुविधाएं दोबारा शुरू करनी होंगी। ऐसा नहीं करने पर बैंक को हर घंटे के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है। </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इन प्रस्तावों पर 31 मई तक लोगों और संस्थाओं से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि नए नियम अक्टूबर 2026 से लागू किए जा सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:21:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला, सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है, सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-decision-of-rbi-amid-middle-east-crisis-government-will/article-53283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t164953.547.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की योजना बना रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महीने होने वाली </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह राशि पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। जब दुनिया के कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत के सरकारी खजाने में आने वाला ये पैसा एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हर साल अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता है। यह प्रक्रिया </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>ECF <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत होती है। इसके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट का एक हिस्सा जोखिम सुरक्षा फंड के तौर पर अलग रखना होता है। बाकी की राशि सरकार को दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये था। अब जो संकेत मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके अनुसार इस बार आंकड़ा और बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार से मिली कमाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉंड बाजार और ब्याज आय ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">की कमाई को मजबूत किया है। यही वजह है कि सरकार को इस बार ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी सरकार के लिए राहत लेकर आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगातार चौथे साल अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों का कुल शुद्ध लाभ लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खराब कर्ज में कमी और लोन ग्रोथ बढ़ने का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कई सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड स्तर पर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बैंकों से भी बड़ा लाभांश मिलने वाला है। बजट में सरकार ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भी भारत के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त वित्तीय ताकत बनी रहेगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के लिए यह पैसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे बिना नए टैक्स लगाए इंफ्रास्ट्रक्चर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की स्थिति अभी संतुलित नजर आ रही है। टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो रही है और गैर-कर राजस्व लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास विकास योजनाओं को जारी रखने का अतिरिक्त स्पेस बनता दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:23 +0530</pubDate>
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