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                <title>Health Alert - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Health Alert RSS Feed</description>
                
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                <title>इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा- प्रदेश में सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी, एहतियातन तीन विदेशी नागरिकों को 21 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-alert-regarding-ebola-no-symptoms-of-infection-found-in/article-55079"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ebola-virus-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक महीने से इबोला वायरस को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के कुछ मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए थे। दुर्ग जिले में तीन विदेशी नागरिकों को निगरानी में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश का नागरिक शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग हाल ही में ऐसे क्षेत्रों से आए थे जहां संक्रमण को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री ने कहा कि अब तक हुई चिकित्सकीय जांच में किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। न तो बुखार, न रक्तस्राव और न ही अन्य कोई गंभीर लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल सुरक्षा और सावधानी के तौर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इन लोगों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का काम करेगी। कई बार लोगों की शिकायतें और समस्याएं समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे समाधान में देरी होती है। नई हेल्पलाइन व्यवस्था के माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनकी निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री के अनुसार सरकार चाहती है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होगा और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इबोला जैसे संक्रमणों को लेकर जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। राज्य सरकार इबोला संक्रमण की आशंका को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:11:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इबोला संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, रायपुर एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीकी देशों में बढ़ते मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क, यात्रियों की स्क्रीनिंग और ट्रैवल हिस्ट्री जांच शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-alert-regarding-ebola-infection-increased-surveillance-at-raipur-airport/article-54456"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ebola-virus.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">वैश्विक स्तर पर इबोला वायरस को लेकर बढ़ती चिंता के बीच छत्तीसगढ़ में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। एयरपोर्ट पर अलग से जांच काउंटर बनाए गए हैं, जहां बाहर से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही है। साथ ही उनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल राज्य में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p dir="ltr">बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह से ही तैनात है। खासकर उन यात्रियों पर नजर रखी जा रही है जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा करके लौटे हैं या हाल के दिनों में अफ्रीकी देशों से होकर आए हैं। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी यात्री में बुखार, कमजोरी, उल्टी या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत अलग रखने और मेडिकल जांच कराने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एयरपोर्ट परिसर में ही प्राथमिक आइसोलेशन की सुविधा भी तैयार रखी गई है।</p>
<p dir="ltr">स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर एयरपोर्ट प्रबंधन के साथ बैठक कर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एयरपोर्ट के भीतर मेडिकल टीम, हेल्प डेस्क और निगरानी काउंटर सक्रिय किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि किसी भी तरह की लापरवाही हो, क्योंकि इबोला वायरस बेहद खतरनाक माना जाता है और इसके संक्रमण की दर भी काफी गंभीर रहती है। इसी वजह से हर यात्री की सामान्य जांच के साथ उसकी हाल की यात्रा संबंधी जानकारी भी दर्ज की जा रही है।</p>
<p dir="ltr">दरअसल, अफ्रीकी देशों खासकर कांगो और युगांडा में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने चिंता जताई है। इसके बाद कई देशों ने अपने एयरपोर्ट और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। भारत सरकार ने भी राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अब तक देश में इबोला का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर तैयारी में जुटी हैं।</p>
<p dir="ltr">रायपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू होने के बाद लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल है। कुछ यात्रियों ने इसे जरूरी कदम बताया, जबकि कई लोग जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछते नजर आए। एयरपोर्ट पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी यात्रियों को वायरस के लक्षण और बचाव संबंधी जानकारी भी दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा से लौटने वाले लोगों को कुछ दिनों तक अपनी सेहत पर नजर रखने की सलाह दी गई है।</p>
<p dir="ltr">केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में कहा था कि देश में फिलहाल इबोला संक्रमण का कोई मामला नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमावर्ती इलाकों में स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। साथ ही ICMR और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सर्विलांस और टेस्टिंग की तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों से भी कहा गया है कि संदिग्ध मामलों की जानकारी तुरंत साझा की जाए।</p>
<p dir="ltr">इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं, जिससे पहचान में दिक्कत भी आती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग शुरुआती स्तर पर ही सतर्कता बरत रहा है। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। अस्पतालों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी संदिग्ध मरीज की जानकारी तुरंत राज्य स्तर पर भेजी जाए। रायपुर के अलावा अन्य बड़े शहरों में भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा सकता है। राज्य में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। एयरपोर्ट पर जांच और निगरानी का यह अभियान अगले आदेश तक जारी रहेगा। अधिकारियों का कह</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:40:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अहमदाबाद में इबोला अलर्ट के बीच 11 अफ्रीकी यात्री आइसोलेशन में रखे गए</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीकी देशों से आए यात्रियों पर एहतियातन निगरानी, भारत में इबोला का कोई मामला नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a16b3a86a819/article-54319"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ebola-virus-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अहमदाबाद में अफ्रीकी देशों से लौटे 11 यात्रियों को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने शहर में निगरानी और स्क्रीनिंग तेज कर दी है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि देश में इबोला वायरस का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। युगांडा से आई एक महिला की जांच रिपोर्ट भी नेगेटिव पाई गई है। अफ्रीका में इबोला संक्रमण के मामलों के बाद भारत में सतर्कता बढ़ाई गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अफ्रीकी यात्रियों पर निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अहमदाबाद में युगांडा, दक्षिण सूडान और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से आए कुल 11 यात्रियों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। यह कदम पूरी तरह एहतियात के तौर पर उठाया गया है, क्योंकि इन देशों में इबोला संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अहमदाबाद नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में किसी भी यात्री में इबोला के संदिग्ध लक्षण नहीं मिले हैं। इसके बावजूद संक्रमण के जोखिम को देखते हुए सभी की निगरानी की जा रही है और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है। इसी बीच, युगांडा से भारत आई एक महिला को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर हल्के लक्षण दिखने के बाद आइसोलेशन में रखा गया था। बाद में उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि देश में इबोला वायरस का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में फैलाई जा रही आशंकाएं गलत हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग और थर्मल जांच को और मजबूत किया गया है। विशेष रूप से उन उड़ानों पर निगरानी रखी जा रही है जो अफ्रीकी देशों से आ रही हैं। सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत सभी संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>एयरपोर्ट और स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट पर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देश के कई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। अहमदाबाद, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इबोला जैसे संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए यात्रियों के ट्रैवल हिस्ट्री की भी जांच की जा रही है। यदि किसी यात्री में बुखार, शरीर में दर्द या अन्य लक्षण दिखते हैं तो उन्हें तुरंत आइसोलेशन में भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय अस्पतालों को भी अलर्ट मोड पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इबोला संक्रमण की पृष्ठभूमि</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह एक गंभीर और जानलेवा बीमारी मानी जाती है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या अन्य संपर्क से फैलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इबोला संक्रमण में मृत्यु दर 25% से 90% तक हो सकती है, जो स्थिति और चिकित्सा सुविधा पर निर्भर करती है। वर्तमान में अफ्रीका के कांगो और युगांडा जैसे देशों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। कांगो में हाल के महीनों में इबोला संक्रमण के कारण कई मौतें दर्ज की गई हैं, जिसके बाद WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के रूप में घोषित किया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में सावधानी और आगे की रणनीति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा बढ़ने के कारण सतर्कता बेहद जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे संदिग्ध मामलों की तुरंत रिपोर्टिंग करें और आइसोलेशन सुविधा को तैयार रखें। इबोला भारत में अभी तक नहीं फैला है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए शुरुआती पहचान और निगरानी सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं। सरकारी स्तर पर यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि अस्पतालों में आवश्यक उपकरण और ट्रेंड स्टाफ उपलब्ध रहे ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में स्वास्थ्य मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े प्रोटोकॉल और सख्त कर सकता है। अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी अवधि बढ़ाई जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और जागरूकता ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:34:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हंता वायरस को लेकर WHO ने दिया अलर्ट, क्या दुनिया पर फिर मंडरा रहा कोरोना जैसी महामारी का खतरा?</title>
                                    <description><![CDATA[WHO ने हंता वायरस के बढ़ते मामलों पर दुनियाभर को सतर्क रहने को कहा। एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों यह कोविड जैसी महामारी नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/who-gave-alert-regarding-hanta-virus-is-the-threat-of/article-53284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t170900.890.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हंता वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO) </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ने सभी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की चेतावनी के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। हाल के हालात ये हैं कि अंटार्कटिका की ओर जा रहे क्रूज जहाज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एमवी होंडियस में इस वायरस का प्रकोप सामने आया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहां तीन लोगों की मौत हो गई है। कई यात्री संक्रमित पाए गए हैं और कुछ को आइसोलेशन में रखा गया है। बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद लोग विभिन्न देशों से आए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और इस वजह से संक्रमण के वैश्विक स्तर पर फैलने की चिंता बढ़ गई है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि लंबी ऊष्मायन अवधि और लगातार होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्राएं चिंता को बढ़ा सकती हैं। फिर भी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञ इस वायरस को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी मानने से इनकार कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित स्थानों की हवा में मौजूद कणों के जरिए भी इंसान संक्रमित हो सकता है। अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में इसके कई स्ट्रेन पहले भी देखे जा चुके हैं। कुछ मामलों में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी का कारण बनता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में सांस लेने में तकलीफ तेजी से बढ़ सकती है और हालत अचानक बिगड़ जाती है। फिलहाल चर्चा में जो स्ट्रेन है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे एंडीज स्ट्रेन कहा जा रहा है। यह सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन इसके लिए अत्यधिक करीबी संपर्क जरूरी होता है। इसलिए एक्सपर्ट्स इसे कोविड-19 के समान खतरा नहीं मानते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्रूज जहाज पर सामने आए मामलों ने लोगों को कोरोना काल की याद दिला दी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ यात्री संक्रमण की पुष्टि से पहले ही विभिन्न देशों में पहुंच गए थे। इसके बाद से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रित है और इसे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीमित प्रकोप</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का भी मानना है कि हंता वायरस का फैलाव काफी धीमा होता है। यह कोविड की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता और न ही बिना लक्षण वाले रोगियों से बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वायरस की म्यूटेशन स्पीड भी कम है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसलिए इसके अचानक बेहद संक्रामक बन जाने की संभावना कम है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रही हैं। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने साफ-सफाई बनाए रखने</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चूहों और संक्रमित जानवरों से दूरी रखने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बदन दर्द</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थकान और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार निगरानी जरूरी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान किसी भी संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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