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                <title>Student Protest - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भारत में ‘कॉकरोच पार्टी’ के नेतृत्व में प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG विवाद और पेपर लीक आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/protests-under-the-leadership-of-%E2%80%98cockroach-party%E2%80%99-in-india-continue/article-56666"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-protest-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी तलाशने वाले लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। यह विरोध उस मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर है, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों के केंद्र में देखा जा रहा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एक नए और अनोखे समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ द्वारा किया जा रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी व्यंग्यात्मक राजनीति शैली के कारण तेजी से ध्यान आकर्षित किया है। इस समूह का प्रतीक ‘कॉकरोच’ है और यह नाम भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के संदर्भ में व्यंग्यात्मक तरीके से रखा गया बताया जाता है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET-UG जैसी अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में कथित पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। रविवार को देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच दोबारा परीक्षा दी, जिसमें बायोमेट्रिक जांच और निगरानी के विशेष इंतजाम किए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बाद में बयान जारी कर कहा था कि री-एग्जाम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है और किसी भी प्रकार की पेपर लीक की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए यह जवाब पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा सिस्टम की जवाबदेही का सवाल है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिषेक दीपके ने रविवार को समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा विवाद का नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार का है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्र इसी तरह सड़कों पर आवाज उठाते रहेंगे। दीपके अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी में छात्र हैं और हाल ही में भारत आकर उन्होंने इस आंदोलन की शुरुआत की थी। 19 जून को शुरू हुआ यह धरना प्रशासन की अनुमति के साथ तय समय तक चलना था, लेकिन 20 जून को समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने जगह नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी दौरान कई प्रदर्शनकारी रात भर जंतर-मंतर पर ही रुके रहे और सड़कों पर सोते नजर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">धरना स्थल पर हालात भी लगातार चर्चा में बने रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अनुमति समाप्त होने के बाद पुलिस ने लाइटें बंद कर दीं और पानी तथा शौचालय की सुविधा सीमित कर दी गई। हालांकि बाद में ये सुविधाएं बहाल कर दी गईं। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। दिल्ली के एक स्टोरकीपर ज्योति ठाकुर ने कहा कि वह इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था ही बेहतर समाज की नींव है। वहीं 39 वर्षीय वकील गौरव जैन ने कहा कि वे जवाबदेही के मुद्दे पर समर्थन देने पहुंचे हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी का उदय भी एक विवादित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी फैल गई थी। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का संदर्भ फर्जी डिग्री रखने वालों से जुड़ा था, लेकिन तब तक विरोध की लहर फैल चुकी थी।  शिक्षा मंत्रालय और सत्ताधारी पार्टी की ओर से इस आंदोलन और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>शिक्षकों की कमी पर भड़के छात्र, विरोध के बाद तीन घंटे में समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के माधवराव सप्रे स्कूल में 12वीं के 46 छात्रों को TC लेने की सलाह, प्रदर्शन के बाद DMF फंड से शिक्षकों की व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/solution-in-three-hours-after-student-protest-over-shortage-of/article-56295"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhavrao-sapre-school.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के प्रतिष्ठित माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत छात्रों के लिए परेशानी लेकर आई। 12वीं कक्षा में कॉमर्स और आर्ट्स विषय के छात्रों को यह कहकर झटका दिया गया कि स्कूल में संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेकर किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश ले लें। स्कूल प्रबंधन की इस सलाह से छात्र और उनके अभिभावक परेशान हो गए। मामला तेजी से बढ़ा और बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंच गए, जहां उन्होंने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। छात्रों के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया और कुछ ही घंटों के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था करने का फैसला कर लिया गया। माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान 12वीं कक्षा में कॉमर्स और आर्ट्स विषय के छात्रों को प्रवेश दिया गया था। उस समय जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ फंड के माध्यम से शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी। पूरे साल पढ़ाई सामान्य रूप से चलती रही और छात्रों को उम्मीद थी कि इस बार भी उनकी कक्षाएं पहले की तरह संचालित होंगी। लेकिन 16 जून से नए सत्र की शुरुआत होते ही स्थिति बदल गई। स्कूल में संबंधित विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं थे और पढ़ाई शुरू होने से पहले ही छात्रों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने की सलाह दी। यह बात जैसे ही छात्रों तक पहुंची, उनमें नाराजगी फैल गई। कई छात्रों का कहना था कि उन्होंने पिछले वर्ष इसी स्कूल में पढ़ाई की है और अब अंतिम वर्ष में उन्हें दूसरे स्कूल में जाने के लिए कहना उचित नहीं है। छात्रों का यह भी कहना था कि यदि पहले से पद स्वीकृत नहीं थे या शिक्षकों की व्यवस्था नहीं थी तो फिर प्रवेश क्यों दिया गया। इसी सवाल को लेकर छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। बुधवार को छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया। उनके साथ एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी मौजूद थे। छात्र नेता हेमंत पाल के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की कि तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा का साल होने के कारण पढ़ाई में थोड़ी भी देरी उनके भविष्य पर असर डाल सकती है। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए और मामले की समीक्षा शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> प्रदर्शन शुरू होने के कुछ समय बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्राचार्य से चर्चा की और पिछले सत्र में कार्यरत शिक्षकों को दोबारा नियुक्त करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी और छात्रों को आश्वासन दिया गया कि उनकी कक्षाएं नियमित रूप से संचालित होंगी। छात्रों ने भी प्रशासन के फैसले का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया कि यदि छह महीने से समस्या की जानकारी अधिकारियों को थी तो समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षकों की कमी कोई नई समस्या नहीं थी। प्रबंधन के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को तीन अलग-अलग पत्र भेजे गए थे। इन पत्रों में शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की गई थी ताकि नए सत्र में किसी तरह की परेशानी न आए। लेकिन समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया गया। नतीजा यह हुआ कि सत्र शुरू होते ही समस्या सामने आ गई और छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ा। कई अभिभावकों का भी कहना है कि यदि पहले से तैयारी की जाती तो बच्चों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्कूल की प्रिंसिपल अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि कॉमर्स विषय का पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद छात्रों की मांग को देखते हुए प्रवेश दिया गया था। पिछले वर्ष डीएमएफ फंड के जरिए शिक्षक उपलब्ध कराए गए थे और पढ़ाई जारी रही थी। इस बार भी उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर पूर्व में कार्यरत शिक्षक को बनाए रखने का फैसला लिया गया है और अब छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। यह पूरा घटनाक्रम शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों और योजना निर्माण की चुनौतियों को भी सामने लाता है। एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर स्कूल उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। छात्रों के विरोध के बाद समस्या का समाधान हो गया है, लेकिन यह मामला यह भी दिखाता है कि कई बार प्रशासनिक स्तर पर लंबित मुद्दों का समाधान तब होता है जब छात्र और अभिभावक खुलकर आवाज उठाते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:05:56 +0530</pubDate>
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                <title>जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद घर लौटे अभिजीत दीपके, बोले- आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज, CJP ने देशभर में आंदोलन बढ़ाने के दिए संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/abhijeet-deepke-who-returned-home-after-jantar-mantar-protest-said/article-55210"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhijeet-deepke.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">NEET पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब और व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद कहा है कि उनका अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। शनिवार को राजधानी में आयोजित प्रदर्शन के बाद रविवार सुबह अभिजीत अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित घर पहुंचे, जहां परिवार और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">घर पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन केवल शुरुआत है और सरकार को यह दिखाने का प्रयास था कि छात्र और युवा अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से भी मजबूती से रख सकते हैं। उनके अनुसार प्रदर्शन में हजारों लोगों ने भाग लिया और यह संख्या इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को देश के अलग-अलग राज्यों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिजीत ने अपने संदेश में कहा कि परिवर्तन तभी संभव है जब लोग अपनी आवाज उठाएं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में फिर से प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। हालांकि उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली। प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फॉलोअर्स की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। पार्टी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 24 घंटे के भीतर लाखों नए लोग उनके सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े। इससे यह संकेत मिला कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और युवा वर्ग के बीच उसकी चर्चा हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और वास्तविक जनसमर्थन में बड़ा अंतर होता है। यही वजह है कि अभिजीत दीपके और उनकी टीम के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। पहली और सबसे बड़ी चुनौती अपने ऑनलाइन समर्थकों को जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और संभावित मतदाताओं में बदलने की होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संगठन को लंबे समय तक प्रभावी बने रहने के लिए मजबूत स्थानीय नेटवर्क और संगठनात्मक ढांचे की जरूरत होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी चुनौती संगठनात्मक कैडर को लेकर है। कई बड़े आंदोलनों को विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों का समर्थन मिला था, जिससे वे व्यापक स्तर पर फैल सके। कॉकरोच जनता पार्टी अभी मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों पर आधारित आंदोलन के रूप में देखी जा रही है। ऐसे में जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करना उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक अनुभव की कमी भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरी चुनौती स्पष्ट एजेंडा तैयार करने की है। आंदोलन में शामिल अलग-अलग लोगों की प्राथमिकताएं अलग दिखाई दीं। कोई शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा था तो कोई बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, टैक्स व्यवस्था या बुनियादी सुविधाओं की बात कर रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनाना है तो उसके पास स्पष्ट और केंद्रित एजेंडा होना चाहिए, जिससे लोग आसानी से जुड़ सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत भी एक चर्चित बयान के बाद हुई थी। दरअसल, मई महीने में न्यायपालिका से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने इस शब्द को प्रतीक के रूप में अपनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अभियान शुरू किया और शिक्षा व्यवस्था तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद ऑनलाइन याचिकाओं और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए पार्टी ने अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में युवाओं ने इस अभियान का समर्थन करना शुरू किया। NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी संगठन लगातार सक्रिय रहा। जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन को इसी अभियान का विस्तार माना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:36 +0530</pubDate>
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                <title>पेपर लीक के खिलाफ CJP आंदोलन को बॉलीवुड समर्थन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[ऋचा चड्ढा, अतुल कुलकर्णी, प्रकाश राज और सोनम वांगचुक ने जताया समर्थन, छात्रों ने दिल्ली में पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ खोला मोर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/bollywood-supports-cjp-movement-against-paper-leak-protest-intensifies-at/article-55117"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cjp-protest-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुआ। इस आंदोलन में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में छात्रों से अपील की थी कि वे परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर एकजुट हों। जंतर-मंतर पर सुबह से ही छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और धीरे-धीरे यह प्रदर्शन एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेता दिखाई दिया। मौके पर नारेबाजी और पोस्टरों के जरिए छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाई।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस प्रदर्शन को अब बॉलीवुड और सामाजिक जगत से भी समर्थन मिलने लगा है, जिससे यह आंदोलन और अधिक चर्चा में आ गया है। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने सोशल मीडिया के जरिए इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। उन्होंने लिखा कि भले ही वह देश से बाहर हैं, लेकिन उनका मन दिल्ली और वहां आंदोलन कर रहे युवाओं के साथ है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे सच्चे देशभक्त बनें और दिखावे की देशभक्ति से दूर रहें। ऋचा चड्ढा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है और कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने भी युवाओं के इस आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी और उससे पहले की पीढ़ियों ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाने में चूक की है, जिसकी वजह से आज के युवाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अतुल कुलकर्णी ने छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि अब समय है कि युवा सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के साथ देश के पुनर्निर्माण में आगे आएं। उनके इस बयान को भी सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और कई लोग इसे एक जिम्मेदार स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक पार्टी, नेता या विचारधारा का नहीं होता, बल्कि यह उन नागरिकों का होता है जो सवाल पूछने की हिम्मत रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब लोग जागरूक रहते हैं और जवाबदेही की मांग करते हैं। कुनिका ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश भी साझा किया जिसमें उन्होंने कहा कि जब लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती, तो उन्हें अपनी बात रखने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ते हैं ताकि सिस्टम तक संदेश पहुंच सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिनेता प्रकाश राज का भी समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक ने पहले ही संकेत दिए थे कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो वे इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। वहीं प्रकाश राज भी लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। छात्रों के बीच इस समर्थन के बाद आंदोलन को और अधिक बल मिला है और जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ में उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी ने उनके भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि मेहनत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पाता, जबकि कुछ लोग गलत तरीकों से लाभ उठा लेते हैं। इसी वजह से वे एक ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है। उन्होंने देश के सभी छात्रों से इस शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी, जिसके बाद जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवा पहुंचे हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि एक जागरूकता अभियान है जो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा तय कर सकता है। दिल्ली पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की गई है। आंदोलन को मिल रहे समर्थन और बढ़ती भागीदारी के कारण यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:41:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंतर-मंतर में CJP के प्रदर्शन को JCCJ का समर्थन, अमित जोगी बोले- देश को चाहिए तीसरा राजनीतिक विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होगी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे), छात्रों के सवालों पर जवाबदेही की मांग तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/jccj-supports-cjps-demonstration-in-jantar-mantar-amit-jogi-said/article-55088"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cjp-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने घोषणा की है कि उसके प्रतिनिधि और कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी का दावा है कि वह देश की पहली मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है जिसने खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया है। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। इस घोषणा के बाद जंतर-मंतर का कार्यक्रम केवल एक छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक समर्थन मिलने से इसकी चर्चा और बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने साफ किया है कि उसका समर्थन किसी राजनीतिक गठबंधन के तहत नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों के आधार पर है। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में यदि युवा सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी बात सुनी जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने इस मौके पर कई राजनीतिक टिप्पणियां भी की हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में केवल किसी विचारधारा से जुड़े रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों से लगातार जुड़े रहना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनीति में बने रहने और संघर्ष करने के लिए जिजीविषा की जरूरत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति में टिके रहने के लिए उसी तरह की संघर्ष क्षमता चाहिए, जैसी कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने वाले जीवों में दिखाई देती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ी भाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कॉकरोच को स्थानीय तौर पर "झेंगुरा" कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर कॉकरोच बनकर नहीं बल्कि गर्व के साथ झेंगुरा बनकर पहुंचेंगे। उनका यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे प्रतीकात्मक संदेश बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने फिलहाल अपने समर्थन को केवल छात्रों और परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे तक सीमित बताया है। हालांकि पार्टी नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में समान सोच रखने वाले संगठनों और समूहों के साथ सहयोग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में छात्र आंदोलनों और छोटे राजनीतिक संगठनों के बीच नए प्रकार के राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में यदि कोई आंदोलन इन विषयों को लेकर व्यापक जनसमर्थन हासिल करता है तो उसका प्रभाव राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है। जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ अभियान अब वास्तविक धरातल पर लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है और विभिन्न राज्यों से युवाओं के इसमें शामिल होने की खबरें सामने आ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमित जोगी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा एक मजबूत तीसरे राजनीतिक विकल्प की मांग लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार बड़ी राजनीतिक पार्टियों को भी यह समझने की जरूरत है कि युवाओं और आम नागरिकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों को केवल विरोध के रूप में नहीं बल्कि आत्ममंथन के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए। कई बार ऐसे आंदोलन राजनीतिक दलों को उनकी कमियों का एहसास कराते हैं और सुधार की दिशा में सोचने के लिए मजबूर करते हैं। जंतर-मंतर लंबे समय से देश के विभिन्न जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर लोग अपनी आवाज उठाते रहे हैं। अब CJP के प्रदर्शन में एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को अतिरिक्त महत्व दे दिया है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह आंदोलन भविष्य में एक बड़े सामाजिक या राजनीतिक अभियान का रूप ले सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:12:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET पेपर लीक होने में अंदर से मदद मिलने का शक! NTA अधिकारी की जांच कर रही है CBI </title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG 2026 पेपर लीक जांच में बड़ा खुलासा, NTA अधिकारी CBI रडार पर। रद्द परीक्षा और नए आरोपों से बढ़ी हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a09608135b65/article-53582"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-ug-2026-paper-leak-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>NEET-UG </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>2026:</strong> </span>नीट <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच रही है। </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 पेपर लीक के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (</span>CBI) <span lang="hi" xml:lang="hi">का ध्यान अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (</span>NTA) <span lang="hi" xml:lang="hi">के एक अनाम अधिकारी पर केंद्रित हो गया है। मामला और भी गंभीर हो गया है क्योंकि इस मामले में पहले ही दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें मनीषा संजय वाघमारे और रसायन शास्त्र के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी शामिल हैं। इन्हें 10 दिन की </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत में भेजा गया है और उनसे लगातार पूछताछ चल रही है। 3 मई को हुई परीक्षा को इस विवाद के चलते रद्द कर दिया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे छात्रों में भारी नाराजगी और भ्रम की स्थिति बन गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों की बात करें तो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंदरूनी साजिश का पर्दाफाश होता जा रहा है। </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने अदालत में जो रिमांड आवेदन पेश किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें यह इशारा किया गया है कि यह सिर्फ बाहरी नेटवर्क का मामला नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अंदरूनी मिलीभगत भी हो सकती है। आरोप है कि वाघमारे को एक संगठित नेटवर्क के जरिए 27 अप्रैल को प्रश्न पत्र और उत्तर देकर दिए गए थे। इसमें एक </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">के अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि वाघमारे की मुलाकात कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी से एक अन्य लेक्चरर मनीषा मंडारे के जरिए हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">की पेपर सेटिंग कमेटी से जुड़ी बताई जा रही हैं और उन्हें भी 14 दिन की </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत में भेजा गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच एजेंसी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा नेटवर्क धीरे-धीरे उजागर हो रहा है और इसमें कई लोगों की भूमिका विभिन्न स्तरों पर पाए जाने की आशंका है। </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">का दावा है कि वाघमारे ने कथित तौर पर कुलकर्णी से प्रश्न पत्र प्राप्त किए और फिर धनंजय लोकहांडे समेत अन्य लोगों तक पहुंचाए। लोकहांडे को 13 मई को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार किया गया था और उस पर पेपर को फैलाने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा के बाद कई लिखित प्रश्न और दस्तावेज नष्ट कर दिए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सबूत मिटाए जा सकें। कुछ स्रोतों से मिली जानकारी में यह भी पता चला है कि हाथ से लिखे गए प्रश्न पत्र भी गायब कर दिए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जांच में और मुश्किलें आ गई हैं। इस पूरे मामले में पैसे के लेन-देन की बातें भी सामने आ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने हालात को देखते हुए </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को कराने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (</span>CBT) <span lang="hi" xml:lang="hi">मोड में कराने पर विचार किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। हालांकि इस पूरे विवाद ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों और अभिभावकों में अब भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है और जांच एजेंसियों पर जल्द और पारदर्शी निष्कर्ष निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:33:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने किया प्रदर्शन, जांच की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा में NEET पेपर लीक मामले को लेकर NSUI कार्यकर्ताओं और छात्रों ने कॉलेज चौराहे पर प्रदर्शन कर सरकार का पुतला फूंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/students-protest-against-neet-paper-leak-in-rewa-demand-investigation/article-53295"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t180917.565.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रीवा में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक के मामले को लेकर बुधवार को छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। कॉलेज चौराहे पर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं और छात्रों ने जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। टीआरएस महाविद्यालय के एनएसयूआई अध्यक्ष नितकर्ष मिश्रा की अगुवाई में इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। दोपहर के समय शुरू हुए इस विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासन का एक पुतला भी फूंका। कॉलेज चौराहे पर माहौल काफी गर्म हो गया और वहां भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि हर बार प्रतियोगी परीक्षाओं में आ रही गड़बड़ियों की वजह से युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक को लेकर छात्रों में नाराजगी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बुधवार को खुलकर सामने आई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एनएसयूआई अध्यक्ष नितकर्ष मिश्रा ने कहा कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें आना बहुत गंभीर बात है। उन्होंने बताया कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहद मेहनत करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सबसे ज्यादा नुकसान मेहनती छात्रों को होता है। प्रदर्शन के दौरान कई छात्र हाथों में तख्तियां लिए हुए थे। कुछ छात्र नारे लगा रहे थे </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक बंद करो</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">मौके पर मौजूद छात्रों ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में महीनों की मेहनत लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पेपर लीक की घटनाएं पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देती हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस बल भी एहतियातन वहां तैनात रहा ताकि स्थिति बिगड़ न सके।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छात्रों ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि केवल बयान देने से समस्या का समाधान नहीं होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना जरूरी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदर्शन करीब एक घंटे तक चला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सभी कार्यकर्ता शांति से वहां से हट गए। फिर भी छात्रों के बीच नाराजगी अभी भी बरकरार है। कई छात्रों ने कहा कि अगर जल्दी कार्रवाई नहीं होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन और बड़ा किया जा सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 10:27:14 +0530</pubDate>
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