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                <title>BRICS - दैनिक जागरण</title>
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                <title>इंदौर में कल से शुरू होगा ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी, छोटे किसानों, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि और नवाचार पर होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/brics-agriculture-ministers-conference-will-start-from-tomorrow-in-indore/article-55243"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-brics-summit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 9 जून से यहां ब्रिक्स कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की महत्वपूर्ण बैठकों की शुरुआत होगी, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सम्मेलन की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए इसे वैश्विक कृषि सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और समय के साथ यह दुनिया के सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूहों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में ब्रिक्स के 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश हैं। वैश्विक कृषि पर इसके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास है। ऐसे में इस मंच पर होने वाले निर्णय और सहयोग का असर विश्व खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत इससे पहले वर्ष 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। वर्ष 2016 में भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच की शुरुआत की गई थी, जिसने सदस्य देशों के बीच कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दी। इस बार भी भारत कृषि क्षेत्र में साझा विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल लेकर आगे बढ़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि कार्य समूह के अधिकारियों की अब तक आठ बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन, पशुपालन, कृषि व्यापार और किसानों की आय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि नीतियों के केंद्र में हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। इन्हीं किसानों को नई तकनीकों, अनुसंधान, बाजार और कृषि ऋण तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य फोकस चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा। इनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका; कृषि व्यापार और सहयोग; जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि और सतत विकास; तथा कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार और साझेदारी को मजबूत बनाना शामिल है। उनका कहना था कि कृषि विकास तभी सार्थक होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका अधिक सुरक्षित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया भर के किसान बदलते मौसम के प्रभावों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पुनर्योजी कृषि, टिकाऊ खेती की पद्धतियां और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके नेतृत्व को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में 12 जून को “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष मंत्री स्तरीय संवाद आयोजित किया जाएगा। इसमें कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को कृषि नवाचारों से जोड़ने पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">तय कार्यक्रम के अनुसार 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें आयोजित होंगी। इसके बाद 12 और 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक होगी। सम्मेलन के दौरान खाद्य हानि को कम करने, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि नवाचार, किसानों के अधिकार और सतत कृषि विकास जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव और सफल मॉडल भी साझा करेंगे, जिससे सदस्य देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को विशेष बनाने के लिए “ब्रिक्स वाटिका” का भी निर्माण किया जाएगा। इसमें सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों की सहभागिता से सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विदेशी मेहमानों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं। सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों को इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा, प्रसिद्ध छप्पन दुकान और ऐतिहासिक नगर मांडू का भ्रमण कराया जाएगा। इसके जरिए भारत की समृद्ध संस्कृति, खानपान और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा देगा। साथ ही वैश्विक स्तर पर करोड़ों छोटे किसानों के हितों को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंदौर में होने वाला यह आयोजन न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को मजबूत करेगा बल्कि कृषि क्षेत्र में साझा विकास और सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव BRICS में गूंजा, ईरान बोला- US-इजरायल की हरकतों की हो निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली BRICS बैठक में ईरान ने अमेरिका-इजरायल की निंदा की मांग की। जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताई और शांति की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/west-asia-tension-echoed-in-brics-iran-said-%E2%80%93-us-israels/article-53347"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t151151.621.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में चल रही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक के दौरान अचानक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा छा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदस्य देशों से खुलकर निंदा करने की मांग की। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने कहा कि मौजूदा हालात सिर्फ एक देश से जुड़े नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मामला बन चुके हैं। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं में अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी साफ नजर आती है और ऐसे में </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मंच को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। कई कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के इस बयान ने माहौल को गंभीर और संवेदनशील बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह मुद्दा अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भू-राजनीतिक टकराव से भी जुड़ता दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरगची ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उन्होंने </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">को इस बदलती व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया और कहा कि यह समूह अब सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है। इसी दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर कई आरोप लगाए और कहा कि इन देशों की नीतियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान की स्थिति को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह विकासशील देशों के हितों से भी जुड़ा है। बैठक में उन्होंने यह मांग की कि </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">देश बिना किसी शर्त के अमेरिका और इजरायल की उन कार्रवाइयों की निंदा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानता है। उनके बयान के बाद चर्चा का रुख कूटनीतिक तनाव की ओर मुड़ गया और कई प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहा बढ़ता तनाव</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर खतरा और ऊर्जा आपूर्ति पर असर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जरूरी मानता है। उन्होंने लेबनान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूडान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यमन और लीबिया जैसे देशों में चल रहे संकटों का भी जिक्र किया और कहा कि इन संघर्षों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयशंकर ने यह भी कहा कि शांति को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान हर देश की जिम्मेदारी है। नई दिल्ली में 14 और 15 मई को हो रही इस </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा जारी है। भारत ने इस वर्ष </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">की अध्यक्षता संभाली है और वह लगातार संतुलित और संवाद आधारित कूटनीति की वकालत कर रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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