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                <title>Israel - दैनिक जागरण</title>
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                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:03:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने NATO देशों पर लगाए गंभीर आरोप, होर्मुज में जहाज पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान का दावा—अमेरिका-इजराइल के साथ कुछ NATO देशों ने दिया सैन्य समर्थन, होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला, ब्रिज को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-nato-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। Iran ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर उसके खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में कुछ NATO सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में NATO की भूमिका की गंभीर जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक मंच पर पहले से ही कई मुद्दों को लेकर असहमति बनी हुई है। बघई ने अपने बयान में कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। हालांकि इस दावे पर अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी देश ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर और किस उद्देश्य से इस तरह के सैन्य सहयोग में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी भी NATO देश ने इस प्रकार की कार्रवाई में भाग लिया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने यह भी मांग की है कि इन देशों को न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस तरह की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। Strait of Hormuz में एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि की है। जहाज ओमान के तट के पास था, जब अचानक एक प्रोजेक्टाइल आकर जहाज के दाहिने हिस्से से टकरा गया। इस हमले से जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, जहां से जहाज का संचालन किया जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है। घटना के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और इस नए विवाद ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। NATO की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक NATO की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इन आरोपों पर चुप्पी बनी हुई है। ईरान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जबकि पश्चिमी देश इसे खारिज कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से होर्मुज क्षेत्र में हमला हुआ है, उसने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा और व्यापार बाजारों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सीजफायर के बावजूद लेबनान पर इजराइल का फिर हमला, 5 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों से बढ़ा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे प्रतिनिधि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/israel-lebanon-conflict-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम की घोषणा के महज एक दिन बाद ही मध्य पूर्व में हालात फिर तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच सीजफायर पर सहमति बनने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि लंबे समय से जारी हिंसा पर कुछ हद तक विराम लगेगा और सीमा क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटने लगेगी। लेकिन शनिवार सुबह दक्षिणी लेबनान में हुए ताजा हवाई हमलों ने इन उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। रिपोर्टों के अनुसार इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए हवाई कार्रवाई की, जिसमें कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है, हालांकि घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक नबातिएह क्षेत्र में सुबह से ही कई जगह धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इजराइली लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों की चपेट में रिहायशी इलाके भी आए, जिससे कई मकानों और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए जबकि कई इमारतों में दरारें आ गईं। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि हवाई हमलों के साथ-साथ कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में तोपों से भी गोलाबारी की गई। इससे पहले से डरे हुए लोगों में और अधिक भय का माहौल बन गया। राहत और बचाव दलों को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश का काम शुरू किया गया और घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया। स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शुक्रवार को हुए संघर्ष विराम को क्षेत्र में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस समझौते का स्वागत किया था। कई देशों ने उम्मीद जताई थी कि इससे सीमा क्षेत्रों में हिंसा कम होगी और आम लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संघर्ष विराम वास्तव में प्रभावी तरीके से लागू हो पा रहा है या फिर क्षेत्र में अविश्वास और तनाव अभी भी बरकरार है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में जारी इस तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बने संवाद को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि वहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच आगे की शर्तों और संभावित समझौतों को लेकर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पूरे क्षेत्र में स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। मेरिका की ओर से इस वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर भी इस प्रक्रिया में किसी भूमिका में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उनकी भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मध्य पूर्व से जुड़े मामलों में उनके पिछले अनुभव को देखते हुए इस संभावना पर चर्चा हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं। माना जा रहा है कि बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे, परमाणु कार्यक्रम और भविष्य के कूटनीतिक संबंधों जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। वर्तमान हालात काफी जटिल हैं। एक तरफ शांति और बातचीत के प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर हिंसा और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी भी समझौते को स्थायी रूप से लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लेबनान में हुए ताजा हमले इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और किसी भी समय स्थिति फिर गंभीर रूप ले सकती है।  संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संगठन लगातार संयम बरतने और संघर्ष विराम का सम्मान करने की अपील कर रहे हैं। वहीं लेबनान में प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है और स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:40:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, कुवैत ने बंद किया हवाई क्षेत्र; मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई का दावा, कुवैत और बहरीन अलर्ट पर; इजराइल ने भी उत्तरी सीमा पर हमले की चेतावनी जारी की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/at-the-height-of-us-iran-tension-kuwait-closed-its-airspace/article-55672"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-conflict-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। गुरुवार को कुवैत ने "ईरानी आक्रामकता" का हवाला देते हुए अस्थायी रूप से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जबकि इजराइल ने लेबनान की दिशा से उत्तरी इलाकों पर संभावित हमलों की चेतावनी जारी की। घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका को और गहरा कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुवैत सरकार के अनुसार, देश की वायु सुरक्षा प्रणालियों ने कई संदिग्ध हवाई लक्ष्यों को इंटरसेप्ट किया। सुरक्षा कारणों से नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने कुछ घंटों के लिए हवाई क्षेत्र बंद रखने का फैसला किया। बाद में स्थिति नियंत्रण में आने के बाद हवाई क्षेत्र को फिर से खोल दिया गया। हालांकि इस दौरान क्षेत्रीय उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रैफिक पर असर पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, कुवैत के अली सलेम और अहमद अल-जाबेर एयर बेस के अलावा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर भी हमले किए गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बहरीन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि लेबनान की दिशा से रॉकेट या अन्य हमले किए जाने की आशंका है। सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तनाव की यह स्थिति तब पैदा हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य और निगरानी ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इन हमलों में ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार नेटवर्क और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि ये कार्रवाई उन खतरों को समाप्त करने के लिए की गई जो अमेरिकी सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान ने इसके जवाब में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी जहाजों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। इसके साथ ही ईरान की शीर्ष सैन्य कमान ने जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर सैन्य तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रख सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर कार्रवाई रोकने की अपील की थी। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका आगे भी सैन्य कदम उठा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रंप ने ईरान से परमाणु और सुरक्षा समझौते पर सहमति बनाने की अपील करते हुए कहा कि अमेरिका एक ऐसा समझौता चाहता है जो प्रभावी और स्थायी हो। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीजी ने कहा कि यदि संघर्ष बढ़ा तो इसका दायरा केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है। निवेशक स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और वैश्विक कूटनीति सभी प्रभावित हो सकते हैं।  मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:53:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट सुरक्षित; ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री सुरक्षा मिशन के दौरान हुआ हादसा, अमेरिकी सेना ने शुरू की जांच; मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच घटना ने खींचा दुनिया का ध्यान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-apache-helicopter-crashes-near-the-strait-of-hormuz-pilot/article-55453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-helicopter-crash.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका का एक अपाचे हेलिकॉप्टर होर्मुज स्ट्रेट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना सोमवार की बताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेलिकॉप्टर क्रैश होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई है। हालांकि दुर्घटना के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल था और नियमित ऑपरेशन के दौरान हादसे का शिकार हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा चुका है। अपाचे हेलिकॉप्टरों के अलावा MQ-9 रीपर ड्रोन, F/A-18 और F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी लगातार निगरानी और सुरक्षा मिशन में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि अपाचे हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल खासतौर पर छोटी हथियारबंद नौकाओं और ड्रोन खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस हेलिकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण गिरा या फिर किसी बाहरी हमले का शिकार हुआ। हालांकि अभी तक किसी हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य इकाइयों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच ईरान और इजराइल के बीच फिर से बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। करीब दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद हालात कुछ सामान्य होते दिखाई दे रहे थे, लेकिन पिछले 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इजराइल की ओर करीब 30 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके जवाब में इजराइली सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तनाव बढ़ने के बाद भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। भारतीय दूतावास ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं और सुरक्षा स्थिति को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर यमन के हूती विद्रोहियों ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। हूती समूह ने रेड सी में इजराइल से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने रूट्स की समीक्षा कर रही हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। तेल बाजार पर भी इस तनाव का सीधा असर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों के दाम ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।  यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेदों की खबरें भी चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने नेतन्याहू से ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई से बचने को कहा है। हालांकि दोनों देशों की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ट्रम्प ने इतना जरूर कहा कि भविष्य में ईरान के साथ जो भी समझौता होगा, उसमें सभी पक्षों को सहयोग करना होगा। अमेरिकी हेलिकॉप्टर हादसे और ईरान-इजराइल तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इजराइल-ईरान जंग के बीच छत्तीसगढ़ के युवाओं को मौका, इजराइल में 3500 नौकरियों की भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[होम-बेस्ड केयर गिवर पदों पर होगी नियुक्ति, करीब दो लाख रुपये मासिक वेतन और कई सुविधाएं मिलेंगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/amid-israel-iran-war-chhattisgarhs-youth-get-opportunity-recruitment-for-3500/article-55400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/israel-jobs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">इजराइल और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य कार्रवाई और हमलों के बीच छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए इजराइल में रोजगार का बड़ा अवसर सामने आया है। दुर्ग जिला प्रशासन ने इजराइल में नौकरी के लिए भर्ती संबंधी सूचना जारी की है। यह भर्ती भारत और इजराइल के बीच हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत की जा रही है, जिसके माध्यम से हजारों भारतीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) के जरिए ‘होम बेस्ड केयर गिवर’ के 3500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को शुरुआती स्तर पर लगभग 1.99 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा। ऐसे समय में जब इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, इस भर्ती ने युवाओं के बीच उत्सुकता भी बढ़ा दी है और कई सवाल भी खड़े किए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जिला प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इस नौकरी के लिए कुछ विशेष योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। अभ्यर्थियों के पास भारतीय नियामक संस्थाओं से मान्यता प्राप्त 990 घंटे का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) सहित केयर गिविंग सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इसके अलावा जनरल ड्यूटी असिस्टेंट, एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, फिजियोथेरेपी या नर्स असिस्टेंट से संबंधित योग्यता रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इच्छुक उम्मीदवारों को छत्तीसगढ़ ई-रोजगार पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद दस्तावेजों की जांच, स्वास्थ्य परीक्षण और पुलिस सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। प्रारंभिक चरणों में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का अंतिम ऑनलाइन इंटरव्यू इजराइल के नियोक्ता द्वारा लिया जाएगा। अंतिम चयन इसी इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार चयनित उम्मीदवारों को लगभग दो लाख रुपये मासिक वेतन मिलेगा। विभिन्न मदों में होने वाली कटौतियों के बाद कर्मचारियों को करीब 1,99,770 रुपये प्रति माह शुद्ध वेतन प्राप्त होगा। इस राशि में चिकित्सा बीमा, आवास और अन्य सुविधाओं से संबंधित खर्च शामिल होंगे। नियुक्ति शुरुआत में दो साल के अनुबंध पर होगी। जरूरत पड़ने पर अनुबंध की अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भर्ती से जुड़े नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उम्मीदवार की आयु 25 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास रखी गई है, जबकि इंटरमीडिएट स्तर पर अंग्रेजी विषय का अध्ययन अनिवार्य माना गया है। उम्मीदवार के पास कम से कम तीन वर्ष की वैधता वाला पासपोर्ट होना चाहिए। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी शर्तों में शामिल है। उम्मीदवार की लंबाई 1.5 मीटर से अधिक और वजन 45 किलोग्राम से ज्यादा होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">जिला प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जिन लोगों ने पहले इजराइल में काम किया है, वे इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे। यानी यह अवसर केवल नए अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को विदेश में रोजगार का मौका मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इजराइल में काम करने वाले कर्मचारियों को कई अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाएंगी। इनमें आवास, भोजन, चिकित्सा बीमा और अन्य आवश्यक सहायता शामिल है। इसके अलावा साल में 9 राष्ट्रीय अवकाश और 16 वार्षिक छुट्टियां भी मिलेंगी। कार्य व्यवस्था सप्ताह में छह दिन की होगी। बताया जा रहा है कि वृद्ध और विशेष देखभाल की जरूरत वाले लोगों की सेवा और देखरेख का कार्य चयनित कर्मचारियों को करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश में बेरोजगारी और सीमित रोजगार अवसरों के बीच इस भर्ती को एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। खासकर स्वास्थ्य और नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवाओं में इसे लेकर रुचि बढ़ी है। हालांकि इजराइल में मौजूदा सुरक्षा हालात को लेकर कुछ अभ्यर्थी और उनके परिवार चिंतित भी नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके अच्छी सैलरी और अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव की संभावना युवाओं को आकर्षित कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभाग पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़े युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में आवेदन प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पंजीकरण करने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 13:27:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-इजराइल संघर्ष फिर भड़का, होर्मुज में 24 भारतीय नाविक फंसे</title>
                                    <description><![CDATA[दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद फिर शुरू हुई सैन्य कार्रवाई, मिसाइल हमलों से बढ़ा तनाव; भारतीय नाविकों ने वीडियो जारी कर मदद की अपील की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-israel-conflict-flares-up-again-24-indian-sailors-stranded-in/article-55316"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-israel-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के करीब दो महीने बाद ईरान और इजराइल के बीच सैन्य संघर्ष दोबारा शुरू हो गया है। रविवार देर रात ईरान ने इजराइल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य और रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर संभावित बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है।</p>
<p>ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दूसरी ओर इजराइल ने दावा किया है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि दोनों देशों की ओर से नुकसान के वास्तविक आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p>इस बीच सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय नाविकों को लेकर बढ़ गई है। ओमान के तट के पास एक जहाज पर हमले की खबर सामने आने के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने दावा किया है कि जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार हैं। संगठन के मुताबिक नाविकों ने वीडियो संदेश जारी कर तत्काल सहायता की मांग की है। बताया जा रहा है कि जहाज ऐसे क्षेत्र में मौजूद है जहां हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा खतरे लगातार बढ़े हैं। हालांकि भारतीय अधिकारियों की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मामले पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो ऊर्जा बाजारों पर इसका असर दिखाई दे सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।</p>
<p>संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान, इराक और सीरिया ने अपने हवाई क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान ने अपने पश्चिमी हिस्से का एयरस्पेस अगली सूचना तक बंद कर दिया है। इराक ने 72 घंटे और सीरिया ने 12 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्षेत्रीय हवाई यातायात पर असर पड़ने की संभावना है। कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदलने शुरू कर दिए हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी लगातार चर्चा में है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे दो ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया है। यह लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। वहीं ईरान ने अमेरिका पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए हैं।</p>
<p>ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका के बार-बार बदलते रुख के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार और विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने की मांग दोहराई है। राजनीतिक और सैन्य तनाव एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ रही हैं।</p>
<p>बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही वहां मौजूद भारतीयों को स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है, खासकर उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जो क्षेत्र में काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेतन्याहू ने गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[कॉन्फ्रेंस में बोले- धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे, गाजा में हालात और बिगड़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/netanyahu-orders-occupation-of-70-parts-of-gaza/article-54497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/netanyahu-gaza-order.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 फीसदी हिस्से पर सैन्य नियंत्रण बढ़ाने का आदेश देकर एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति और युद्ध को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने खुले तौर पर कहा कि इजराइल लगातार गाजा में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और अब नियंत्रण वाले इलाके को और बढ़ाया जाएगा। उनके बयान के दौरान मौजूद भीड़ ने जब “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग की तो नेतन्याहू ने जवाब दिया कि “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं, पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं।”</p>
<p dir="ltr">नेतन्याहू के इस बयान को गाजा युद्ध के अगले चरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इजराइल पहले ही गाजा के बड़े हिस्से में सैन्य कार्रवाई चला रहा है। इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सेना हर दिशा से हमास पर दबाव बना रही है और बाकी बचे इलाकों में भी अभियान जारी रहेगा। इस बयान के बाद गाजा में रहने वाले लाखों फिलिस्तीनियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि पहले से ही वहां हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर समझौता हुआ था। उस समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय सीमा यानी ‘येलो लाइन’ के पीछे हटना था। समझौते के बाद गाजा का करीब 53 फीसदी इलाका इजराइल के नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास लगातार आरोप लगाता रहा है कि इजराइल धीरे-धीरे अपनी सैन्य मौजूदगी और अंदर तक बढ़ा रहा है। अब कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि गाजा के करीब 60 से 64 फीसदी हिस्से पर इजराइल का नियंत्रण हो चुका है।</p>
<p dir="ltr">नेतन्याहू के हालिया बयान के बाद यह साफ माना जा रहा है कि इजराइल अब और बड़े इलाके पर कब्जा करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस कदम को सीजफायर की शर्तों के खिलाफ भी माना जा रहा है। हमास समर्थक गुटों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कहा है कि अगर इजराइल ने आगे बढ़ना जारी रखा तो क्षेत्र में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।</p>
<p dir="ltr">दूसरी तरफ गाजा में रहने वाले आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन की वजह से गाजा के कई इलाके पहले ही पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी टेंटों में रह रहे हैं। खाने, दवा और साफ पानी की कमी बनी हुई है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक अगर इजराइल 70 फीसदी इलाके पर कब्जा कर लेता है तो करीब 22 लाख लोगों को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहना पड़ सकता है।</p>
<p dir="ltr">यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि गाजा में हालात पहले ही बेहद खराब हैं। उनके मुताबिक हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर रहने की जगह और कम हुई तो हजारों परिवारों के सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में बीमारियां और भूख की समस्या और बढ़ सकती है।</p>
<p dir="ltr">सीजफायर के बावजूद गाजा में हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना लगातार कई इलाकों में कार्रवाई कर रही है। उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में टैंकों की आवाजाही बढ़ने और ड्रोन हमलों की भी खबरें सामने आई हैं।</p>
<p dir="ltr">संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल ही में गाजा की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। यूएन अधिकारियों ने कहा कि युद्धविराम के बावजूद लगातार सैन्य गगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो आने वाले दिनों में गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है।</p>
<p dir="ltr">इजरातिविधियां जारी हैं, जिससे आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अइल की तरफ से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि 70 फीसदी नियंत्रण की योजना को किस तरह लागू किया जाएगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान घरेलू राजनीति और सुरक्षा रणनीति दोनों से जुड़ा हो सकता है। नेतन्याहू पर पहले से ही हमास के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने का दबाव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:13:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा- ईरान समझौते के करीब, खुल सकता है होर्मुज मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान और कई देशों के बीच समझौता लगभग तय है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द खुलने की उम्मीद जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-hormuz-passage-may-open-closer-to/article-54126"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/donald-trump-iran-middle-east-strait-of-hormuz.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में पिछले कई महीनों से चल रहे तनाव के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर सबका ध्यान खींच लिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान और क्षेत्र के कुछ देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तय है। ट्रंप का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जल्द ही इस पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि हाल में उन्होंने मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत की है। उनके अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सऊदी अरब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त अरब अमीरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुर्की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिस्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जॉर्डन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान और बहरीन के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए राजी हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने समझौते की सभी शर्तें बताने से परहेज किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतना बताया कि बातचीत का अंतिम दौर चल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि दोनों नेताओं के बीच डील के अंतिम पहलुओं पर चर्चा हुई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बहुत जल्द इस समझौते को दुनिया के सामने लाया जाएगा। यह बताया जा रहा है कि बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और संघर्ष विराम जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। लेकिन इजरायल और ईरान की तरफ से ट्रंप के दावों पर अभी तक आधिकारिक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दुनिया हमेशा चिंतित रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हमलों के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई देशों ने सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। अगर यह समझौता होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसका असर देखा जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर तेल की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों में राहत मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले अमेरिका की तरफ से ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी। ऐसे में अचानक बातचीत और समझौते की खबरों ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम या संवर्धित यूरेनियम का सीधा जिक्र नहीं किया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान ने शनिवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के लिए एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">पर काम कर रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की नजर इस संभावित समझौते पर है। अगर बातचीत सफल रहती है तो मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव में कुछ राहत मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस पर आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:05:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायल ने हमास मिलिट्री चीफ को किया ढ़ेर, 7 अक्टूबर हमले का था मास्टरमाइंड</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल ने गाजा एयरस्ट्राइक में हमास के सैन्य प्रमुख इज्ज अल-दीन अल-हद्दाद को मार गिराने का दावा किया। 7 अक्टूबर हमले से जुड़ा बड़ा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/israel-kills-hamas-military-chief-mastermind-of-october-7-attack/article-53604"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/israel-hamas-gaza-airstrike.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इजरायल-हमास के बीच चल रहे युद्ध में गाजा से एक बड़ी खबर आई है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने हवाई हमले में हमास की मिलिट्री विंग के प्रमुख इज्ज अल-दीन अल-हद्दाद को मार गिराया है। इस एयरस्ट्राइक को बीते शुक्रवार रात को गाजा पट्टी में अंजाम दिया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें अल-हद्दाद को निशाना बनाया गया। इजरायली सेना के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल-हद्दाद उन चुनिंदा और आखिरी शीर्ष कमांडरों में से एक था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए भीषण हमले की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह हमला पूरे मध्य पूर्व में हालात को बदलने वाला साबित हुआ था और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हमास ने भी सोशल मीडिया पर अल-हद्दाद की मौत की पुष्टि की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि अल-हद्दाद लंबे समय से संगठन की सैन्य रणनीति का नेतृत्व कर रहा था और उसने कई बड़े हमलों की योजना में भी भाग लिया था। 7 अक्टूबर 2023 के इस हमले में दक्षिणी इजरायल में लगभग 1200 लोगों की जान गई थी और 250 से ज्यादा लोग बंधक बन गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। कहा जा रहा है कि अल-हद्दाद ने मोहम्मद सिनवार की मौत के बाद हमास की मिलिट्री विंग की कमान संभाली और जमीनी स्तर पर ऑपरेशन का प्रबंधन किया। इजरायल का भी आरोप है कि उसने युद्ध के दौरान कई बार बंधकों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि हमास ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाजा में हुए इस हवाई हमले में अल-हद्दाद के परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं। स्थानीय परिवारों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस हमले में उसकी पत्नी और बेटी की भी मौत हो गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कुल मिलाकर 6 अन्य लोगों की भी जान गई। अल-हद्दाद के दो बेटे पहले ही संघर्ष में मारे जा चुके थे। शनिवार को गाजा में उसका अंतिम संस्कार किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उसके शव को हमास और फिलिस्तीन के झंडों में लपेटकर दफनाया गया। इलाके में हालात काफी तनावपूर्ण रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजरायल-हमास युद्ध के बीच सीजफायर की स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के लगातार आरोप लगा रहे हैं। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीजफायर लागू होने के बाद भी गाजा में 850 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव BRICS में गूंजा, ईरान बोला- US-इजरायल की हरकतों की हो निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली BRICS बैठक में ईरान ने अमेरिका-इजरायल की निंदा की मांग की। जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताई और शांति की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/west-asia-tension-echoed-in-brics-iran-said-%E2%80%93-us-israels/article-53347"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t151151.621.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में चल रही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक के दौरान अचानक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा छा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदस्य देशों से खुलकर निंदा करने की मांग की। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने कहा कि मौजूदा हालात सिर्फ एक देश से जुड़े नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मामला बन चुके हैं। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं में अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी साफ नजर आती है और ऐसे में </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मंच को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। कई कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के इस बयान ने माहौल को गंभीर और संवेदनशील बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह मुद्दा अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भू-राजनीतिक टकराव से भी जुड़ता दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरगची ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उन्होंने </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">को इस बदलती व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया और कहा कि यह समूह अब सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है। इसी दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर कई आरोप लगाए और कहा कि इन देशों की नीतियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान की स्थिति को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह विकासशील देशों के हितों से भी जुड़ा है। बैठक में उन्होंने यह मांग की कि </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">देश बिना किसी शर्त के अमेरिका और इजरायल की उन कार्रवाइयों की निंदा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानता है। उनके बयान के बाद चर्चा का रुख कूटनीतिक तनाव की ओर मुड़ गया और कई प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहा बढ़ता तनाव</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर खतरा और ऊर्जा आपूर्ति पर असर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जरूरी मानता है। उन्होंने लेबनान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूडान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यमन और लीबिया जैसे देशों में चल रहे संकटों का भी जिक्र किया और कहा कि इन संघर्षों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयशंकर ने यह भी कहा कि शांति को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान हर देश की जिम्मेदारी है। नई दिल्ली में 14 और 15 मई को हो रही इस </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा जारी है। भारत ने इस वर्ष </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">की अध्यक्षता संभाली है और वह लगातार संतुलित और संवाद आधारित कूटनीति की वकालत कर रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:38:49 +0530</pubDate>
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