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                <title>Maharashtra - दैनिक जागरण</title>
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                <title>केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया का दूसरा मोबाइल मिला, कोडवर्ड चैट की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, पुलिस अब बरामद मोबाइल और कथित सांकेतिक चैट के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a48978572de9/article-57819"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ketan-agrawal-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में गिरफ्तार सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी को वडगांव अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों अब येरवदा जेल में रहेंगे। पुलिस ने अदालत से दोनों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी ताकि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ाई जा सके, लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। पेशी के दौरान दोनों आरोपियों ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी की सहमति के बिना ऐसे परीक्षण नहीं कराए जा सकते। इसके बाद फिलहाल इन जांच प्रक्रियाओं पर रोक लग गई है। पुलिस का कहना है कि अब डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इसी बीच सिया के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। इस मोबाइल को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है, जहां उसके डेटा की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस डिवाइस से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन आपस में कथित तौर पर कोडवर्ड और सांकेतिक भाषा में बातचीत करते थे। चैट में निकनेम, इमोजी और ऐसे संकेतों का इस्तेमाल किया गया है, जिनका वास्तविक अर्थ समझने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन चैट के जरिए दोनों कथित रूप से अपनी योजनाओं पर चर्चा करते थे। हालांकि इन संदेशों की अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसी बीच मामले में तीसरे व्यक्ति की संभावित भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक बीड जिले से एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि वह पुणे के बालेवाड़ी स्थित एक निजी कंपनी में काम करता है और सिया या केतन में से किसी एक का परिचित है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या उसे कथित योजना की पहले से जानकारी थी। फिलहाल उसकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि उसे गवाह बनाया जाए या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस जांच के अनुसार केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। दोनों की सगाई पहले हो चुकी थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। जांच में यह दावा किया गया है कि मई के आखिर में कथित हत्या की योजना बनाई गई और अगले कुछ दिनों में घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। पुलिस का आरोप है कि 14 जून को लोहगढ़ किले पर पहली बार कथित तौर पर केतन को धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद 18 जून को सिया ने प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर केतन को दोबारा लोहगढ़ फोर्ट चलने के लिए राजी किया। पुलिस का आरोप है कि उसी दिन चेतन चौधरी भी वहां मौजूद था और दोनों ने मिलकर केतन को पहाड़ी से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और फोरेंसिक रिपोर्ट के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं बचाव पक्ष ने अभी तक आरोपों पर विस्तार से सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मामले की अगली सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय तारीख पर होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय, नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई; राज्यभर में खाद्य जांच व्यवस्था भी होगी मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-maharashtra-government-ban-on-sale-of-sting/article-57786"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित खानपान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों पर <strong>'स्टिंग' (Sting) एनर्जी ड्रिंक</strong> की बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बच्चों में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर गंभीर है और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में बताया कि यदि किसी स्कूल परिसर या उसके आसपास के 500 मीटर के दायरे में छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों अथवा कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री होती पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसे उत्पादों से दूर रखना है, जिनका अधिक सेवन उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला विधानसभा में उस समय उठा जब विधायक विक्रम पचपुते ने 'स्टिंग' एनर्जी ड्रिंक के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर प्रश्न किया। इस दौरान विधायक राहुल कुल और वरुण सरदेसाई ने भी इस विषय पर पूरक प्रश्न पूछे। जवाब देते हुए मंत्री जिरवाल ने कहा कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्राचार्यों और जिला परिषदों को भी इस अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की है। यदि किसी स्कूल के आसपास प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री होती दिखाई देती है, तो उसकी जानकारी तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को देने को कहा गया है। ऐसी शिकायतों पर जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैफीन और अधिक शर्करा वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में नींद की समस्या, बेचैनी, हृदय गति बढ़ने, एकाग्रता में कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी कारण सरकार ने एहतियात के तौर पर स्कूलों के आसपास इनकी बिक्री सीमित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में मंत्री जिरवाल ने राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई, नागपुर और संभाजीनगर में खाद्य एवं दवा परीक्षण की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा रायगढ़, नासिक, यवतमाल और पुणे में नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत राज्य में 22 अतिरिक्त प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है। इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य और पेय पदार्थों के नमूनों की जांच अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने विधानसभा में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की जांच से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। मंत्री ने बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के कुल 27 खाद्य नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इनमें से 10 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न ब्रांडों के एनर्जी ड्रिंक्स के कुल 115 नमूनों की जांच की गई। इनमें 63 नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए, जबकि एक नमूना सब-स्टैंडर्ड और छह नमूने मिसब्रांडेड घोषित किए गए। शेष नमूनों की जांच अभी जारी है।  खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित जांच और सख्त निगरानी आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे उत्पाद, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर करते हैं, उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार कर रही है, ताकि संदिग्ध उत्पादों की जांच समय पर हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के आसपास जंक फूड, तंबाकू उत्पादों और अब कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर नियंत्रण की पहल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित करने के लिए स्कूल परिसर और उसके आसपास का वातावरण सुरक्षित होना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:40 +0530</pubDate>
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                <title>नागपुर फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में कार्रवाई तेज, CEO की तलाश में रायपुर पहुंची पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के सीईओ और उनके भाई की गिरफ्तारी के लिए नागपुर पुलिस ने रायपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की, दोनों आरोपी नहीं मिले।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-intensified-in-nagpur-factory-blast-case-police-reached-raipur/article-57416"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nagpur-factory-blast.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नागपुर फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के विस्फोटक निर्माण संयंत्र में हुए भीषण हादसे की जांच के सिलसिले में नागपुर पुलिस की एक टीम सोमवार को रायपुर पहुंची। टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आलोक संपत सिंह चौधरी और उनके भाई संजय संपत सिंह चौधरी की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। हालांकि दोनों आरोपी पुलिस को नहीं मिले और फिलहाल उनकी तलाश जारी है। नागपुर पुलिस ने रायपुर की देवेंद्र नगर थाना पुलिस की सहायता से दोनों आरोपियों के आवास और कंपनी से जुड़े कार्यालयों में तलाशी अभियान चलाया। पुलिस के पास दोनों के खिलाफ पहले से स्थायी गिरफ्तारी वारंट मौजूद है। अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश के पालन में यह कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान दोनों भाइयों का कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद उनकी तलाश और तेज कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला 1 मार्च 2026 को नागपुर स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के गोला-बारूद और डेटोनेटर निर्माण संयंत्र में हुए भीषण विस्फोट से जुड़ा है। इस हादसे में 23 कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री परिसर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और आसपास के क्षेत्र में भी इसका असर देखा गया था। घटना के बाद राहत एवं बचाव दल ने कई घंटों तक अभियान चलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया था। हादसे के बाद नागपुर पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था, संचालन प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कई पहलुओं की जांच की गई। पुलिस ने जांच के आधार पर कंपनी के सीईओ आलोक संपत सिंह चौधरी, उनके भाई संजय संपत सिंह चौधरी तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, सबूत छिपाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद दोनों आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया था। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद 23 मार्च 2026 को कलमेश्वर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। साथ ही उनके नाम पर लुक-आउट सर्कुलर (एलओसी) भी जारी किया गया, ताकि देश से बाहर जाने की किसी भी संभावित कोशिश को रोका जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाल के दिनों में यह मामला एक बार फिर चर्चा में आया है। इसकी वजह अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा एसबीएल एनर्जी लिमिटेड और उसके सीईओ पर लगाए गए प्रतिबंध बताए जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कंपनी पर सूडान में जारी गृहयुद्ध के दौरान कथित रूप से विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित भारतीय एजेंसियों की ओर से अलग से कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला चर्चा में आने के बाद नागपुर पुलिस ने भी अपने लंबित प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में रायपुर में छापेमारी की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के सिविल लाइन एसीपी रमाकांत साहू ने बताया कि नागपुर पुलिस की टीम स्थायी गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए रायपुर आई थी। स्थानीय पुलिस ने पूरी कार्रवाई में सहयोग किया और दोनों आरोपियों के संभावित ठिकानों पर संयुक्त रूप से तलाशी ली गई। हालांकि दोनों आरोपी मौके पर नहीं मिले। उन्होंने कहा कि आगे भी जरूरत पड़ने पर पुलिस की ओर से सहयोग जारी रहेगा। पुलिस के अनुसार आरोपियों की तलाश केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। उनके संभावित अन्य ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों आरोपी फिलहाल कहां मौजूद हैं और क्या वे लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। फैक्ट्री ब्लास्ट में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों की ओर से भी लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाती रही है। इस मामले को लेकर श्रमिक संगठनों ने भी समय-समय पर सुरक्षा मानकों के पालन और औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:34:37 +0530</pubDate>
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                <title>महाराष्ट्र TET परीक्षा पेपर लीक, एग्जाम से 24 घंटे पहले परीक्षा रद्द; कई लोग हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[ठाणे के भिवंडी से प्रश्नपत्र बरामद होने के बाद सरकार ने तत्काल परीक्षा स्थगित की, 4.28 लाख अभ्यर्थियों पर असर; नई तारीख का ऐलान बाद में होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/maharashtra-tet-exam-paper-leaked-exam-canceled-24-hours-before/article-57141"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/maharashtra-tet.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) शुरू होने से महज 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा स्थगित कर दी है। यह परीक्षा रविवार को आयोजित होनी थी, लेकिन पेपर लीक की सूचना मिलते ही महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (एमएसईसी) ने तत्काल परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। नई परीक्षा तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। इस फैसले से राज्यभर के करीब 4.28 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिलने पर ठाणे जिले के भिवंडी क्षेत्र में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान संदिग्ध प्रश्नपत्र बरामद किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने जब्त किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किया। प्रारंभिक जांच में प्रश्नपत्र असली पाए जाने के बाद प्रशासन ने परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्यभर में इस परीक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में कुल 1,729 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगभग 18,000 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। प्रत्येक परीक्षा केंद्र की निगरानी राज्य और जिला स्तर के कंट्रोल रूम से की जानी थी। अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस रिकग्निशन सिस्टम की व्यवस्था भी की गई थी। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे और मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे वैध पहचान पत्र अनिवार्य किए गए थे। इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले किस स्तर पर लीक हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में सरकारी शिक्षक बनने के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। इसके अलावा जो शिक्षक पहले से सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं, उनके लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों और शिक्षकों की योजनाओं पर असर पड़ा है। कई उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की तैयारी पूरी कर चुके थे, जबकि कुछ दूर-दराज के जिलों से यात्रा की व्यवस्था भी कर चुके थे। इस घटना ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए हैं। राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET), उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा और हाल ही में आयोजित नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा से जुड़े विवादों ने पहले ही परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। अब महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक का मामला भी इसी सूची में जुड़ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश भी इस परीक्षा को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई को अपने एक फैसले में स्पष्ट किया था कि स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। कोर्ट ने टीईटी पास करने की अंतिम समय सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी थी। हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया था कि इसके बाद किसी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। न्यायालय ने कहा था कि बिना आवश्यक योग्यता वाले शिक्षकों का सेवा में बने रहना आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाएं न केवल लाखों अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि केवल तकनीकी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक हर स्तर पर जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है। दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई से ही भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:08:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केतन अग्रवाल मर्डर केस: गार्ड का नया दावा, सिया की मां बोलीं- बेटी दोषी हो तो उसे भी कड़ी सजा मिले</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे के लोहगढ़ किले में हुई केतन अग्रवाल की मौत के मामले में जांच तेज, गार्ड के बयान और परिवार की प्रतिक्रिया के बाद कई नए पहलुओं की पड़ताल कर रही पुलिस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/ketan-aggarwal-murder-case-guards-new-claim-siyas-mother-said/article-56979"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ketan-agrawal-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए दावे और जानकारियां सामने आ रही हैं। इस बीच लोहगढ़ किले पर तैनात गार्ड धीरज जाधव के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। गार्ड का कहना है कि घटना के तुरंत बाद उसने सिया गोयल को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना था। उसके मुताबिक, वह आवाज सुनकर मौके पर पहुंचा तो सिया वहां मौजूद थी और उसने बताया कि कोई नीचे गिर गया है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस अब इस बयान को भी जांच का हिस्सा बनाकर बाकी सबूतों से मिलान कर रही है। उधर इस पूरे मामले में पहली बार सिया गोयल के माता-पिता मीडिया के सामने आए। सिया की मां पूजा गोयल ने कहा कि अगर उनकी बेटी जांच में दोषी साबित होती है तो उसे भी सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कानून जो उचित समझे, वही होना चाहिए। उनका कहना था कि परिवार को कभी अंदाजा नहीं था कि मामला इस मोड़ तक पहुंच जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चेतन चौधरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और परिवार को हमेशा यही लगा कि सिया अपनी शादी को लेकर खुश थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिया के पिता प्रवीण गोयल ने भी बेटी के पक्ष में कुछ बातें रखते हुए कहा कि सिया ने खुद केतन से शादी की इच्छा जताई थी। उनके अनुसार, केतन और सिया के बीच अच्छे संबंध थे और दोनों अक्सर साथ समय बिताते थे। उन्होंने बताया कि लोहगढ़ किला जाने का प्रस्ताव भी केतन की ओर से आया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा और यदि उनकी बेटी दोषी पाई जाती है तो कानून अपना काम करे। पुलिस की जांच में अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार, 18 जून को केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल लोहगढ़ किले पर गए थे। वहीं से केतन खाई में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। शुरुआती दौर में इसे हादसा माना गया था, लेकिन बाद में परिवार की ओर से जताए गए संदेह और जांच के दौरान मिले कुछ सबूतों के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। फिलहाल सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान मिले कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों के बीच लंबे समय तक लगातार बातचीत होती रही थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना से पहले दोनों की मुलाकात किन परिस्थितियों में हुई और क्या किसी तरह की योजना बनाई गई थी। हालांकि इन सभी पहलुओं की पुष्टि अभी अदालत में होनी बाकी है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इससे पहले भी केतन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 14 जून को भी एक घटना हुई थी, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस फिलहाल हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों की जांच हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बुधवार देर रात दोनों आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ भी की गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते रहे। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह आरोपियों की बचाव की रणनीति भी हो सकती है। इसलिए पुलिस केवल बयानों पर नहीं बल्कि डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों पर अधिक भरोसा कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है। सगाई के बाद दोनों की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वे साथ नजर आ रहे हैं। इन्हीं तस्वीरों के कारण कई तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट किसी मामले का अंतिम आधार नहीं हो सकते और हर तथ्य की स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:34:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उद्धव सेना में बगावत के संकेत, संसदीय बैठक से गायब रहे 6 सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में सिर्फ तीन सांसद पहुंचे, छह सांसदों की गैरमौजूदगी से शिवसेना (यूबीटी) में नए राजनीतिक संकट के संकेत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/signs-of-rebellion-in-uddhav-sena-6-mps-missing-from/article-56326"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक में नौ में से केवल तीन सांसदों के पहुंचने से पार्टी के भीतर नए संकट की चर्चा तेज हो गई है। बैठक में लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए, जबकि छह सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व ने बैठक से पहले सभी सांसदों को व्हिप जारी कर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सांसदों के नहीं पहुंचने को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद सांसद अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया कि अनुपस्थित सांसदों को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा। उधर, राज्यसभा सांसद और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के सांसदों पर दबाव बनाया जा रहा है। राउत ने कहा कि जो सांसद बैठक में शामिल हुए हैं, वे पार्टी के साथ खड़े हैं, जबकि जो नहीं पहुंचे, उन्हें जनता जवाब देगी। लगातार दूसरे दिन उन्होंने बागी माने जा रहे सांसदों पर तीखे शब्दों में हमला बोला।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच गृह मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र पुलिस को छह सांसदों की सुरक्षा बढ़ाकर Y+ श्रेणी करने के निर्देश दिए जाने की खबर ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने या अलग समूह के गठन की इच्छा जताई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि छह सांसद एक साथ कोई निर्णय लेते हैं तो यह दल-बदल कानून के तहत महत्वपूर्ण स्थिति बन सकती है। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार किसी भी दल में विभाजन के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। इस स्थिति में छह सांसदों का समूह कानूनी रूप से मजबूत दावा पेश कर सकता है। बीते कुछ दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। 15 जून से ही ऐसी चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस संभावित अभियान को राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया। उस समय पार्टी नेताओं ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद 16 जून को संजय राउत ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी आर्थिक प्रलोभन दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को करोड़ों रुपये का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 17 जून को घटनाक्रम और तेज हो गया जब शिंदे गुट के नेताओं ने दावा किया कि छह सांसदों ने अलग समूह बनाने से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके बाद उद्धव गुट के वरिष्ठ नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर किसी भी निर्णय से पहले उनका पक्ष सुनने की मांग की। यह घटनाक्रम केवल शिवसेना तक सीमित नहीं है। आगामी मानसून सत्र और भविष्य में संभावित संवैधानिक एवं राजनीतिक बदलावों को देखते हुए विभिन्न दलों में राजनीतिक पुनर्संरचना की कोशिशें तेज हो सकती हैं। संसद में संख्या बल बढ़ाने को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। शिवसेना के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब पार्टी बड़े विभाजन का सामना कर रही है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने बगावत कर अलग गुट बनाया था। उस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल गई थी। अब सांसदों के स्तर पर संभावित टूट की खबरें उद्धव ठाकरे के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:54:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाराष्ट्र में बम धमकी से हड़कंप, RSS मुख्यालय समेत कई सरकारी दफ्तर निशाने पर</title>
                                    <description><![CDATA[खालिस्तान के नाम से भेजे गए धमकी भरे ईमेल के बाद नागपुर, मुंबई और पुणे में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; कई इमारतों की तलाशी, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a29490e42a8f/article-55547"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/maharashtra-bomb-threat.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), मुंबई और पुणे के मेयर कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी वाले ईमेल प्राप्त हुए। धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं और कई संवेदनशील इमारतों को खाली कराकर व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। शुरुआती जांच में किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ये ईमेल खुद को "खालिस्तान नेशनल आर्मी" बताने वाले समूह के नाम से भेजे गए थे। ईमेल में महाराष्ट्र के कई प्रमुख संस्थानों और कार्यालयों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ते और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे पहले नागपुर में स्थिति गंभीर बनी, जहां शहर की मेयर नीता ठाकरे को एक ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में दावा किया गया था कि महाल स्थित RSS मुख्यालय और रेशीमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन परिसर में विस्फोटक सामग्री रखी गई है। यह सूचना मिलते ही बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) को मौके पर भेजा गया। सुरक्षा बलों ने पूरे परिसर, आसपास के क्षेत्रों और प्रवेश मार्गों की बारीकी से जांच की। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद अधिकारियों ने बताया कि कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर मुंबई में भी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों को कई ईमेल प्राप्त हुए। इन ईमेल में मुंबई के मेयर कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) भवन और नगर निगम मुख्यालय को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। ईमेल में कथित तौर पर IED से लैस वाहन के जरिए विस्फोट करने जैसी बातें लिखी गई थीं। इसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने संबंधित भवनों के आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया और जांच शुरू कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुंबई में सुरक्षा एजेंसियों ने सरकारी कार्यालयों के अलावा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों की भी जांच की। संवेदनशील इमारतों में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच और निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने बताया कि ईमेल की भाषा और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि भेजने वाले की पहचान तक पहुंचा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे में भी इसी तरह का अलर्ट जारी हुआ। नगर निगम के मुख्य प्रशासनिक भवन और मेयर कार्यालय को धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद एहतियातन पूरी इमारत खाली करा ली गई। कर्मचारियों और आम नागरिकों को भवन से बाहर निकाला गया और बम निरोधक दस्ते ने परिसर का निरीक्षण किया। पुलिस के अनुसार ईमेल में कुछ निश्चित समय का उल्लेख करते हुए विस्फोट की धमकी दी गई थी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ईमेल में कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए भड़काऊ और उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इसमें कुछ संगठनों और संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी दर्ज थीं। हालांकि सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उनका मुख्य उद्देश्य ईमेल के स्रोत का पता लगाना और संभावित खतरे का आकलन करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धमकी के बाद नागपुर, मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। महत्वपूर्ण सरकारी भवनों, प्रशासनिक कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई स्थानों पर वाहन जांच अभियान भी चलाया गया। सुरक्षा एजेंसियां साइबर विशेषज्ञों की मदद से ईमेल भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला फर्जी धमकी का प्रतीत हो रहा है, लेकिन किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी कारण सभी संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने और समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। साइबर सेल ईमेल के आईपी एड्रेस, सर्वर लोकेशन और अन्य डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है। राज्य प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है और सभी संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:29:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुणे में जहरीली शराब से 15 लोगों की मौत, कई इलाकों में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[हडपसर से पिंपरी तक मौतों के बाद कार्रवाई तेज, 8 लोग हिरासत में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/15-people-died-due-to-poisonous-liquor-in-pune-there/article-54496"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/pune-news.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली शराब पीने से पिछले 24 घंटे के भीतर 15 लोगों की मौत होने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मामला सामने आते ही पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासन की टीमों ने कई इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शराब में मेथेनॉल जैसी जहरीली सामग्री मिलाई गई हो सकती है। पुलिस ने अब तक 8 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें अवैध शराब का कारोबार करने वाले लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के मुताबिक हडपसर, फुगेवाड़ी, दापोडी और पिंपरी-चिंचवड़ इलाके में रहने वाले कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। कुछ लोगों को चक्कर आने, उल्टी और आंखों के सामने धुंधलापन जैसी शिकायतें हुईं। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां कई लोगों की मौत हो गई। कुछ मरीजों का इलाज अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी ने एक ही जगह से शराब खरीदी थी।</p>
<p dir="ltr">घटना के बाद इलाके में डर और गुस्से का माहौल है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई घरों में एक साथ दो-दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है। पुलिस टीम लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों से पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि जिस जगह से अवैध शराब तैयार की जा रही थी, वहां से कई संदिग्ध केमिकल और शराब से भरे ड्रम भी बरामद किए गए हैं।</p>
<p dir="ltr">राज्य आबकारी विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए देर रात कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीली शराब कहां तैयार की गई और किन-किन इलाकों में सप्लाई की गई।</p>
<p dir="ltr">मामला गंभीर होने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस मामले में आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच कर सकती है। क्योंकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही थी।</p>
<p dir="ltr">राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता और पूर्व महापौर योगेश बहल ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो इतनी जानें नहीं जातीं। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अवैध शराब के धंधे पर रोक लगाने में स्थानीय सिस्टम पूरी तरह नाकाम रहा है।</p>
<p dir="ltr">हालांकि पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस का कहना है कि अब तक हुई सभी मौतों को सीधे जहरीली शराब से जोड़ना जल्दबाजी होगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पांच लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से भी हो सकती है। फिर भी जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें कई लोगों को मौत से पहले चक्कर और बेचैनी की शिकायत हुई थी। इसी वजह से जहरीली शराब की आशंका को गंभीरता से लिया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">सभी शवों का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है और विसरा जांच के लिए भेजा गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि मेथेनॉल मिला शराब शरीर के लिए बेहद खतरनाक होती है। इससे आंखों की रोशनी जा सकती है और कुछ ही घंटों में इंसान की जान भी जा सकती है।</p>
<p dir="ltr">घटना के बाद कई इलाकों में पुलिस बल बढ़ा दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध शराब या बिना लाइसेंस वाली दुकानों से कोई भी शराब न खरीदें। वहीं आबकारी विभाग ने भी जिलेभर में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान शुरू कर दिया है।</p>
<p dir="ltr">स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब और मजदूर वर्ग के लोग सस्ती शराब के चक्कर में ऐसी जहरीली शराब का शिकार हो जाते हैं। कई बार उन्हें यह तक पता नहीं होता कि शराब में क्या मिलाया गया है। इस घटना के बाद पुणे के कई इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि जहरीली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए केमिकल कहां से लाए गए थे। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:19:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नीट पेपर लीक मामले में CBI ने दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार, 5 राज्यों तक फैला नेटवर्क उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र और राजस्थान में सबसे ज्यादा बिक्री, कोचिंग सेंटर से छात्रों तक पहुंचा ‘क्वेश्चन बैंक’, जांच तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cbi-arrested-two-more-accused-in-neet-paper-leak-case/article-54321"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-paper-leak-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस केस में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियों ने 49 स्थानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं। जांच में यह सामने आया है कि पेपर लीक का नेटवर्क पांच राज्यों तक फैला हुआ था, जिसमें महाराष्ट्र और राजस्थान प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आए हैं। पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए CBI लगातार सबूतों और पैसों के लेन-देन की कड़ी जोड़ रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कोचिंग सेंटर और शिक्षकों की भूमिका उजागर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए पहले आरोपी की पहचान डॉक्टर मनोज शिरूरे के रूप में हुई है, जो लातूर के रहने वाले हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने एक कोचिंग सेंटर मालिक के बेटे समेत तीन छात्रों को आरोपी पीवी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे आरोपी तेजस हर्षदकुमार शाह को भी गिरफ्तार किया गया है, जो पुणे स्थित डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी (APMA) में फिजिक्स पढ़ाता है। आरोप है कि उसे फिजिक्स के लीक हुए प्रश्न मनीषा हवलदार से मिले थे, जिन्हें आगे छात्रों तक पहुंचाया गया। CBI के अनुसार, इस नेटवर्क में कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने परीक्षा से पहले छात्रों को प्रश्नों की जानकारी देकर एक संगठित तरीके से लीक को अंजाम दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पांच राज्यों में फैला पेपर लीक नेटवर्क</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी के अनुसार, NEET पेपर लीक का मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि यह नेटवर्क महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों तक फैला हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि सबसे ज्यादा पेपर की बिक्री महाराष्ट्र में हुई, जबकि राजस्थान दूसरे स्थान पर है। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह है, जो कोचिंग सेंटरों और एजुकेशन नेटवर्क के जरिए पेपर को छात्रों तक पहुंचाता था। सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर पेपर की प्रिंट कॉपी निकालकर उसे “क्वेश्चन बैंक” के रूप में बेचा गया, जिससे छात्रों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नों की जानकारी मिल गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पैसों के लेन-देन की कड़ी खंगाल रही CBI</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI अब उन सभी अभिभावकों और छात्रों की लिस्ट तैयार कर रही है, जिनके बैंक खातों से आरोपियों के खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं। जांच में शिवराज मोटेगांवकर, पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघामारे जैसे नाम सामने आए हैं, जिनके खातों के जरिए लेन-देन हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंसी का कहना है कि यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि इसमें एक फाइनेंशियल नेटवर्क भी शामिल है, जो पूरे ऑपरेशन को सपोर्ट कर रहा था। इसी वजह से अब बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल डेटा की गहराई से जांच की जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>49 जगहों पर छापेमारी, कई डिजिटल सबूत जब्त</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI ने अब तक देशभर में 49 स्थानों पर छापेमारी की है। इस दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>छात्रों तक कैसे पहुंचा पेपर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र था, जहां से प्रश्नों की कॉपी राजस्थान और अन्य राज्यों में भेजी गई। इसके बाद कोचिंग सेंटर और बिचौलियों के जरिए इसे छात्रों तक पहुंचाया गया। इस पूरे नेटवर्क में कुछ कोचिंग संस्थानों के कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं, जिन्होंने परीक्षा से पहले ही छात्रों को तैयारी के नाम पर असली प्रश्न उपलब्ध कराए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>NTA की प्रतिक्रिया और परीक्षा प्रक्रिया</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिलने के बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया था। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और री-एग्जाम की घोषणा की गई। NTA ने अब फीस रिफंड के लिए 22 मई से 27 मई तक पोर्टल खोला है, जहां उम्मीदवार अपने बैंक विवरण जमा कर सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CBI का कहना है कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है और नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कितने छात्रों ने वास्तव में लीक हुए पेपर का लाभ उठाया। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी जल्द छापेमारी की संभावना है। जांच एजेंसियां डिजिटल ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और चैट डेटा के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ रही हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>परीक्षा प्रणाली पर सवाल और सख्ती की तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  यदि इस तरह के नेटवर्क को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। सरकारी स्तर पर अब परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल सिक्योरिटी और निगरानी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:34:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली-महाराष्ट्र समेत 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा SIR, जानिए पूरी तारीखें</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान शुरू करने की घोषणा की। जानिए सत्यापन और वोटर लिस्ट की पूरी तारीखें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/it-will-start-in-19-states-and-union-territories-including/article-53354"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t154538.096.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर में मतदाता सूची को अपडेट करने और उसे और भी सटीक बनाने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>SIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। इस बार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। आयोग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग 36.73 करोड़ मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डुप्लीकेट नामों और फर्जी प्रविष्टियों को हटाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। राज्यों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं और यह कार्य मई से सितंबर 2026 तक विभिन्न चरणों में पूरा किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस चरण में ओडिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजोरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मणिपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंजाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झारखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस बार इस कार्यक्रम को जनगणना के हाउस लिस्टिंग अभियान के साथ जोड़ा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि दोनों कार्यों में कोई टकराव न हो। प्रारंभिक चरण में ओडिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजोरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन होगा। इसके बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया है कि महाराष्ट्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झारखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर अक्टूबर तक चलेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीसरे चरण खत्म होने के बाद हिमाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरे देश में </span>SIR <span lang="hi" xml:lang="hi">का काम पूरा हो जाएगा। इन क्षेत्रों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार बूथ स्तर पर निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन को और मजबूत किया गया है। लगभग 3.94 लाख बूथ लेवल ऑफिसर यानी </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। उनके साथ राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट भी मौजूद रहेंगे। आयोग ने सभी दलों से कहा है कि हर बूथ पर अपने एजेंट तैनात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस चरण में महाराष्ट्र सबसे बड़ा राज्य होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां लगभग 9.86 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। यहां करीब 98 हजार </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">और लगभग 97 हजार </span>BLA <span lang="hi" xml:lang="hi">तैनात किए जाएंगे। कर्नाटक में 5.55 करोड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश में 4.16 करोड़ और तेलंगाना में 3.39 करोड़ मतदाता इस अभियान में भाग लेंगे। दिल्ली में भी करीब 1.48 करोड़ वोटरों का सत्यापन होगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी योग्य नागरिक का नाम छूट न जाए और फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें। पिछले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं के लिए यह अभियान चलाया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें लाखों </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>BLA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भाग लिया था। अब तीसरे चरण की तैयारियां भी राज्यों में शुरू हो गई हैं और स्थानीय प्रशासन को जरूरी निर्देश भेजे जा चुके हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:40:17 +0530</pubDate>
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