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                <title>Karnataka - दैनिक जागरण</title>
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                <title>डीके शिवकुमार आज लेंगे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने डीके शिवकुमार को सौंपी कमान, जी परमेश्वर होंगे उपमुख्यमंत्री]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/dk-shivakumar-will-take-oath-as-the-chief-minister-of/article-54879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dk-shivakumar.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में वे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायक और नेता भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। यह सत्ता परिवर्तन लंबे समय से चल रही राजनीतिक चर्चाओं और कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों का परिणाम माना जा रहा है। डीके शिवकुमार को 30 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री पद की औपचारिक घोषणा हुई। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल के बाद अब राज्य की कमान शिवकुमार के हाथों में होगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>शपथ से पहले धार्मिक आस्था और पारिवारिक आशीर्वाद</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले डीके शिवकुमार ने अपने परिवार और धार्मिक गुरुओं का आशीर्वाद लिया। शपथ ग्रहण समारोह के लिए लोक भवन पहुंचने से पहले उन्होंने अपनी मां गौरम्मा के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा उन्होंने संत-महात्माओं से भी मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक शिष्टाचार के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी शिवकुमार से मुलाकात कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जी परमेश्वर बनेंगे उपमुख्यमंत्री</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई सरकार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। उनके अलावा कई अन्य नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने जा रही है। शुरुआती चरण में कुल 13 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया का नाम भी शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे कांग्रेस नेतृत्व ने विभिन्न गुटों और सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान लिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वर्तमान मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, जबकि नए चेहरों को मौका मिलेगा। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>18 जून के बाद होगा मंत्रिमंडल का विस्तार</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस विधायक टीबी जयचंद्र के अनुसार अभी केवल कुछ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 18 जून तक जारी रहने के कारण पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन बाद में किया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जून के दूसरे पखवाड़े में सरकार का बड़ा विस्तार होगा और सभी विभागों का अंतिम आवंटन किया जाएगा। इससे कांग्रेस को विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने का अवसर मिलेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राहुल गांधी और कई राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शपथ ग्रहण समारोह को कांग्रेस शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देख रही है। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। केरल, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस मुख्यमंत्री समारोह में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा तमिलनाडु और झारखंड के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं। इससे कांग्रेस एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देना चाहती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>देश के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाते हैं डीके शिवकुमार</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डीके शिवकुमार देश के सबसे संपन्न राजनेताओं में शामिल हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 1400 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है। वे रियल एस्टेट, होटल और खनन व्यवसाय से जुड़े रहे हैं। हालांकि उनके ऊपर लगभग 263 करोड़ रुपए की देनदारियां भी दर्ज हैं। राजनीतिक जीवन के दौरान वे कई बार विवादों में भी रहे हैं और विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति मामलों में जांच</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डीके शिवकुमार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच कर चुका है। वर्ष 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। वर्ष 2019 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और लगभग 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे। इसके अलावा सीबीआई भी आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। हालांकि शिवकुमार लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेस के संकटमोचक नेता की पहचान</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस पार्टी में डीके शिवकुमार की पहचान एक प्रभावशाली संगठनकर्ता और संकटमोचक नेता के रूप में है। जब भी पार्टी को विधायकों को एकजुट रखने या राजनीतिक रणनीति तैयार करने की जरूरत पड़ी, शिवकुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी संगठन क्षमता और राजनीतिक प्रबंधन कौशल के कारण ही उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पार्टी राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सत्ता हस्तांतरण के पीछे ढाई-ढाई साल का फार्मूला</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच प्रतिस्पर्धा थी। तब पार्टी नेतृत्व ने समझौते के तहत ढाई-ढाई साल का फार्मूला तैयार किया था। इस फार्मूले के अनुसार पहले सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और बाद में शिवकुमार को जिम्मेदारी सौंपी जानी थी। अब सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद यह फार्मूला लागू हो गया है और शिवकुमार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी तेज, आज विधायक दल की बैठक में होगा नया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार सबसे मजबूत दावेदार, नई सरकार और कैबिनेट गठन पर सभी की नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-change-of-leadership-in-karnataka-intensified-new-decision/article-54573"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद राज्य में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर पहुंच गई हैं। शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी बैठक में नए नेता का चुनाव किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नाम की है। माना जा रहा है कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो जाएगा। बैठक से पहले डीके शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात भी की, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बेंगलुरु में शाम चार बजे आयोजित होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है। पार्टी हाईकमान ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बताया जा रहा है कि बैठक में सबसे पहले विधायक दल के नेता के नाम पर चर्चा होगी और उसके बाद सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के भीतर अंतिम निर्णय को लेकर अभी भी औपचारिक घोषणा बाकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। इस्तीफा देने के अगले ही दिन वे दिल्ली पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इन बैठकों को नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता संतुलन बनाए रखने और विभिन्न गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसी वजह से दिल्ली और बेंगलुरु के बीच लगातार राजनीतिक संवाद जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 1 जून को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। केवल मुख्यमंत्री का चेहरा ही नहीं बदलेगा बल्कि मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चर्चा है कि मौजूदा कैबिनेट के कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और नए चेहरों को मौका मिलेगा। पार्टी के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की स्थिति में भी सिद्धारमैया का प्रभाव सरकार में बना रह सकता है। नई कैबिनेट के गठन में उनके समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात का ध्यान रख रहा है कि सत्ता परिवर्तन के दौरान किसी भी वर्ग या गुट में असंतोष की स्थिति पैदा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधायक दल की बैठक से पहले पार्टी नेताओं के बयानों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने कहा कि यह एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही कैबिनेट भंग हो चुकी है और अब नई सरकार के गठन का फैसला पार्टी हाईकमान के मार्गदर्शन में होगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अंतिम निर्णय संगठन स्तर पर पूरी सहमति के बाद लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि लंबे समय से पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है और अब उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में शिवकुमार ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है और संगठन के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक ज्योतिषीय दावा भी चर्चा में है। डीके शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने दावा किया है कि शिवकुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। उन्होंने कुछ संभावित शपथ ग्रहण तिथियों का भी उल्लेख किया है। हालांकि राजनीतिक फैसले ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से नहीं बल्कि संगठन और विधायकों की राय से तय होते हैं, फिर भी यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:56:54 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली-महाराष्ट्र समेत 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा SIR, जानिए पूरी तारीखें</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान शुरू करने की घोषणा की। जानिए सत्यापन और वोटर लिस्ट की पूरी तारीखें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/it-will-start-in-19-states-and-union-territories-including/article-53354"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t154538.096.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर में मतदाता सूची को अपडेट करने और उसे और भी सटीक बनाने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>SIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। इस बार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। आयोग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग 36.73 करोड़ मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डुप्लीकेट नामों और फर्जी प्रविष्टियों को हटाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। राज्यों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं और यह कार्य मई से सितंबर 2026 तक विभिन्न चरणों में पूरा किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस चरण में ओडिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजोरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मणिपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंजाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झारखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस बार इस कार्यक्रम को जनगणना के हाउस लिस्टिंग अभियान के साथ जोड़ा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि दोनों कार्यों में कोई टकराव न हो। प्रारंभिक चरण में ओडिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजोरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन होगा। इसके बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया है कि महाराष्ट्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झारखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर अक्टूबर तक चलेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीसरे चरण खत्म होने के बाद हिमाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरे देश में </span>SIR <span lang="hi" xml:lang="hi">का काम पूरा हो जाएगा। इन क्षेत्रों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार बूथ स्तर पर निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन को और मजबूत किया गया है। लगभग 3.94 लाख बूथ लेवल ऑफिसर यानी </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। उनके साथ राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट भी मौजूद रहेंगे। आयोग ने सभी दलों से कहा है कि हर बूथ पर अपने एजेंट तैनात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस चरण में महाराष्ट्र सबसे बड़ा राज्य होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां लगभग 9.86 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। यहां करीब 98 हजार </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">और लगभग 97 हजार </span>BLA <span lang="hi" xml:lang="hi">तैनात किए जाएंगे। कर्नाटक में 5.55 करोड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश में 4.16 करोड़ और तेलंगाना में 3.39 करोड़ मतदाता इस अभियान में भाग लेंगे। दिल्ली में भी करीब 1.48 करोड़ वोटरों का सत्यापन होगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी योग्य नागरिक का नाम छूट न जाए और फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें। पिछले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं के लिए यह अभियान चलाया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें लाखों </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>BLA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भाग लिया था। अब तीसरे चरण की तैयारियां भी राज्यों में शुरू हो गई हैं और स्थानीय प्रशासन को जरूरी निर्देश भेजे जा चुके हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:40:17 +0530</pubDate>
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