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                <title>Narayanpur - दैनिक जागरण</title>
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                <title>नारायणपुर में 26 ईसाई परिवारों को गांव से बाहर निकाला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[धर्मांतरण विवाद में ग्रामीणों का आरोप- मूल परंपरा अपनाओ तभी लौट सकते हो, पुलिस ने गांव में तैनात किया भारी बल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/tension-increased-in-narayanpur-after-26-christian-families-were-thrown/article-56810"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरेंडा गांव में धर्मांतरण को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। मंगलवार को गांव में उस समय तनाव फैल गया जब ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें गांव से बाहर निकाल दिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि कुछ ग्रामीण अचानक उनके घरों पर पहुंचे और उन्हें गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद सभी परिवार गांव के बाहर खुले आसमान के नीचे और पेड़ों की छांव में रहने को मजबूर हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में माहौल तनावपूर्ण हो गया है और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के की गई और उन्हें केवल उनके धार्मिक विश्वास के कारण निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि वे वर्षों से इस गांव में रह रहे हैं और उनकी सामाजिक और पारिवारिक जड़ें यहीं जुड़ी हुई हैं। अचानक इस तरह गांव से बाहर निकाल दिया जाना उनके लिए बेहद कठिन स्थिति है। कुछ परिवारों ने बताया कि उन्हें सामान तक समेटने का समय नहीं दिया गया और उन्हें मजबूरी में गांव छोड़ना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रभावित लोग अस्थायी रूप से सड़क किनारे और खुले स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का पक्ष भी सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, जिससे उनकी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार यह बदलाव गांव की परंपराओं के खिलाफ है और इसी कारण विवाद लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार समझाने के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि यदि ये परिवार अपने मूल रीति-रिवाजों को स्वीकार करते हैं तो उन्हें वापस गांव में रहने दिया जा सकता है। घटना के बाद स्थिति और बिगड़ गई जब पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार सुबह कुछ ग्रामीण, जिनमें गयता और पटेल जैसे पदधारी भी शामिल बताए जा रहे हैं, कई घरों में पहुंचे और एक-एक कर 26 परिवारों को गांव छोड़ने की चेतावनी दी। इसके बाद कथित तौर पर कुछ स्थानों पर रास्तों को लकड़ियों से अवरुद्ध भी किया गया, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई। अचानक हुई इस घटना से गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई लोग डर के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईसाई धर्म मानने वाले परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ लंबे समय से भेदभाव किया जा रहा था, लेकिन मंगलवार की घटना ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। प्रभावित लोगों में संत राम दुग्गा, चैतू कुमेटी और मनायकु वट्टी समेत कई ग्रामीण शामिल हैं, जिन्होंने कहा कि वे किसी भी अवैध दबाव के बिना शांतिपूर्वक जीवन जीना चाहते हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आधार पर किसी को उसके घर और गांव से बाहर करना न केवल गलत है बल्कि यह उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग की है। दूसरी ओर ग्रामीणों का दावा है कि गांव में बढ़ते धार्मिक परिवर्तन से सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि आदिवासी परंपराएं और सामुदायिक व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही हैं और उनमें अचानक बदलाव से सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यही कारण है कि तनाव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात इस स्तर तक पहुंच गए। हालांकि इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी भी साफ दिखाई दे रही है, जिससे विवाद और गहरा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत शुरू की है ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की हिंसा या अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है। पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यह विवाद नया नहीं है। बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 से ही गांव में धार्मिक मतभेद को लेकर तनाव बना हुआ था। समय-समय पर छोटे-छोटे विवाद सामने आते रहे, लेकिन 9 जून 2026 को स्थिति अचानक बिगड़ गई थी जब दोनों पक्षों के बीच मारपीट की घटना हुई थी, जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए थे। उस समय प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला शांत तो हो गया था, लेकिन विवाद की जड़ें पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं और अब फिर से यह मुद्दा उभरकर सामने आ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 14:17:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बस्तर में NIA की विशेष अदालत शुरू, नक्सल मामलों की सुनवाई होगी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जगदलपुर को मिला विशेष अधिकार क्षेत्र, लंबे समय से लंबित संवेदनशील मामलों के निपटारे की बढ़ी उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/nia-special-court-started-in-bastar-hearing-of-naxal-cases/article-55529"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bastar-nia-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बस्तर संभाग में नक्सल मामलों की सुनवाई को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है। केंद्र सरकार ने जगदलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत की स्थापना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद जगदलपुर स्थित नामित अपर सत्र न्यायालय को अब एनआईए के विशेष न्यायालय के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस फैसले को बस्तर के न्यायिक ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेगी, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। यहां हुए कई बड़े हमले और संवेदनशील घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं। ऐसे मामलों की जांच अक्सर एनआईए को सौंपी जाती रही है, लेकिन सुनवाई के लिए अलग-अलग अदालतों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न्यायिक प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और कई बार गवाहों, जांच अधिकारियों तथा पक्षकारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन चुनौतियों में काफी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से परामर्श के बाद लिया गया है। विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों तक रहेगा। इनमें दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर जिले सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्र शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि अदालत केवल एनआईए द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई करेगी। इससे मामलों के संचालन में विशेषज्ञता भी बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर में कई ऐसे मामले हैं जो वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं। झीरम घाटी हमला, भाजपा नेता भीमा मंडावी की हत्या, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के कई नक्सली हमले जैसे मामलों को देश के सबसे संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और इनके राजनीतिक तथा सुरक्षा संबंधी प्रभाव भी काफी व्यापक रहे हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। एनआईए भी समय-समय पर इस संबंध में अपनी जरूरत जाहिर कर चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय स्तर पर अदालत स्थापित होने से सबसे अधिक राहत गवाहों और जांच अधिकारियों को मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें सुनवाई के लिए दूर-दराज के शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। कई मामलों में गवाहों की अनुपस्थिति या समय पर पेशी नहीं हो पाने के कारण सुनवाई प्रभावित होती थी। नई अदालत के गठन से दस्तावेजों की उपलब्धता, केस डायरी की प्रस्तुति और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएंगी। इससे मामलों के शीघ्र निपटारे की संभावना मजबूत हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न्यायिक संस्थाओं की मजबूत मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करती है। जब गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा होता है तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। बस्तर जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियां बनी रही हैं, वहां इस तरह की विशेष अदालत का गठन प्रशासनिक और न्यायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इससे न केवल लंबित मामलों को गति मिलेगी बल्कि पीड़ित परिवारों को भी न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि विशेष अदालत के माध्यम से जांच और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। जगदलपुर में स्थापित यह विशेष अदालत बस्तर के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यह अदालत नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई में कितनी तेजी ला पाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>धर्मांतरण के आरोप पर नारायणपुर में बवाल, दो पक्षों में मारपीट</title>
                                    <description><![CDATA[भरण्डा गांव में बाहरी लोगों के पहुंचने के बाद बढ़ा विवाद, ग्रामीणों ने धर्म परिवर्तन के प्रयास का लगाया आरोप, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ruckus-in-narayanpur-on-the-charge-of-conversion-fight-between/article-55418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/narayanpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p>नारायणपुर जिले के भरण्डा गांव में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर अचानक माहौल गर्मा गया और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दो पक्षों के बीच मारपीट की नौबत आ गई। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रेस लिखा हुआ एक चारपहिया वाहन गांव में पहुंचा था, जिसमें सवार कुछ लोग स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों से संपर्क कर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसी बात को लेकर गांव में विरोध शुरू हुआ और बाद में विवाद ने उग्र रूप ले लिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। फिलहाल क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>ग्रामीणों के मुताबिक यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब गांव में पहुंचे कुछ लोगों की गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों को संदेह हुआ। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने बाहरी व्यक्तियों से बातचीत की और उनके उद्देश्य के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। इसी दौरान यह चर्चा फैल गई कि वे लोग आदिवासी समुदाय के लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू किया, जबकि दूसरी ओर मतांतरित समुदाय के कुछ लोगों ने आरोपों को गलत बताया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गांव में कुछ समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कई लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश भी की, लेकिन स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई। मारपीट की घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पत्रकारिता की आड़ में धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति प्रेस या मीडिया से जुड़ा होने का दावा करता है, तो उसे पत्रकारिता के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। ऐसे आरोपों से पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है।</p>
<p>घटना के बाद ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप सड़क जाम कर दी। सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। ग्रामीणों की मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने धर्म परिवर्तन के लिए दबाव या प्रलोभन देने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। कुछ लोगों ने कथित तौर पर संबंधित व्यक्तियों को थाने ले जाने का भी विरोध किया और मौके पर ही कार्रवाई की मांग करने लगे। इससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।</p>
<p>प्रशासन को जैसे ही हालात बिगड़ने की सूचना मिली, पुलिस अधिकारी दल-बल के साथ गांव पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत की और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस ने भीड़ को समझाने की कोशिश की और किसी भी तरह की अफवाहों से बचने की अपील की। देर शाम तक अधिकारियों की मौजूदगी में कई दौर की बातचीत हुई। पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर गांव और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है। वाहन में मौजूद लोगों की पहचान, उनके गांव आने का उद्देश्य और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ और मारपीट की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p>नारायणपुर और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण का मुद्दा पहले भी चर्चा का विषय रहा है। ऐसे मामलों में अक्सर सामाजिक और धार्मिक भावनाएं जुड़ जाती हैं, जिससे माहौल संवेदनशील हो जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह के आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करने की अपील की गई है।</p>
<p>भरण्डा गांव में हालात सामान्य करने की कोशिश जारी है। गांव में पुलिस की मौजूदगी बनी हुई है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और जो भी तथ्य होंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 15:33:35 +0530</pubDate>
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                <title>बस्तर में 25 लाख से ज्यादा का गांजा जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[भानपुरी और नगरनार थाना क्षेत्र में पुलिस की दो अलग-अलग कार्रवाई, 51 किलो से अधिक गांजा बरामद; एक आरोपी घर से तो दूसरा बस स्टॉप पर पकड़ा गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ganja-worth-more-than-rs-25-lakh-seized-in-bastar/article-55403"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bastar-ganja-seizure.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जिले के भानपुरी और नगरनार थाना क्षेत्र में की गई दो अलग-अलग कार्रवाइयों में पुलिस ने 25 लाख 66 हजार 750 रुपए कीमत का गांजा जब्त किया है। कुल 51 किलो 335 ग्राम गांजा बरामद करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक दोनों मामलों में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। पकड़े गए आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहली कार्रवाई भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम केशरपाल आवासपारा में की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव का एक व्यक्ति अपने घर में बड़ी मात्रा में गांजा छिपाकर रखे हुए है और उसकी बिक्री कर रहा है। सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी हर्ष कुमार धुरंधर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। रविवार को पुलिस जब आरोपी के घर पहुंची तो पहले उससे पूछताछ की गई। शुरुआती पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर घर की तलाशी ली गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तलाशी के दौरान पुलिस को घर के एक कमरे में रखा नीले रंग का प्लास्टिक ड्रम मिला। जब ड्रम की जांच की गई तो उसके भीतर बड़ी मात्रा में गांजा रखा हुआ पाया गया। पुलिस ने मौके से करीब 33 किलो 250 ग्राम गांजा बरामद किया। अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए गांजे की अनुमानित कीमत 16 लाख 62 हजार 500 रुपए है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी किशोर बघेल (36) को गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय लोगों के बीच इस कार्रवाई की काफी चर्चा रही क्योंकि आरोपी के घर से इतनी बड़ी मात्रा में गांजा मिलने की जानकारी किसी को नहीं थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर दूसरी कार्रवाई नगरनार थाना क्षेत्र में की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि धनपुंजी फॉरेस्ट नाका के पास एक युवक दो बैग में गांजा लेकर बस का इंतजार कर रहा है। बताया जा रहा है कि वह जगदलपुर जाने वाली बस में सवार होने की तैयारी में था। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी संतोष सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध युवक पर नजर रखी गई। कुछ देर बाद पुलिस ने युवक को घेरकर हिरासत में ले लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूछताछ में युवक ने अपना नाम राहुल पांडेय (28) निवासी मंगला चौक, बिलासपुर बताया। उसके पास रखे दो बैगों की तलाशी लेने पर तीन अलग-अलग पैकेटों में भरा करीब 18 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने जब्त गांजे की कीमत 9 लाख 4 हजार 250 रुपए आंकी है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह गांजा ओडिशा से लेकर आया था और उसे बिलासपुर तक पहुंचाने की तैयारी थी। हालांकि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेप किसे पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे इलाकों में लंबे समय से गांजा तस्करी की गतिविधियां सामने आती रही हैं। कई बार तस्कर छोटे वाहनों, बसों और निजी साधनों का उपयोग कर नशीले पदार्थों की सप्लाई करते हैं। ऐसे में पुलिस लगातार निगरानी बढ़ा रही है। हाल के महीनों में बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में गांजा तस्करी के कई मामलों का खुलासा हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की बिक्री और तस्करी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत लगातार मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बरामद गांजा किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं। मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 13:27:49 +0530</pubDate>
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                <title>ना DJ, ना लग्जरी कार... बैलगाड़ी पर बारात लेकर गया दूल्हा, लोगों ने कहा- यही असली शादी</title>
                                    <description><![CDATA[नारायणपुर में दूल्हा बैलगाड़ी से बारात लेकर पहुंचा। पेट्रोल-डीजल बचाने और सादगी का संदेश देने वाली शादी चर्चा में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/no-dj-no-luxury-car-the-wedding-procession-arrived-with/article-53375"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t181008.679.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में एक शादी इन दिनों काफी चर्चा में है। इस बारात में न तो लग्जरी गाड़ियों का जौहर था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही डीजे का शोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस एक साधारण बैलगाड़ी। डूमरतराई गांव के कुबेर देहरी अपनी बारात लेकर बैलगाड़ी पर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे देखकर गांव के लोग दंग रह गए। कुबेर देहरी नारायणपुर पुलिस विभाग में एसपी गनमैन के पद पर हैं और उन्होंने अपनी शादी को एक अलग तरीके से मनाने का निर्णय लिया। जैसे ही बैलगाड़ी गांव की कच्ची सड़कों पर चली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने समय की यादें ताजा हो गईं। बच्चे और बुजुर्ग सभी इस अनोखी बारात को देखने के लिए बाहर आए। आसपास के गांवों में भी इसकी चर्चा होने लगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुबेर देहरी का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय सिर्फ दिखावे के लिए नहीं लिया। बताया जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और सादगी अपनाने की अपील से प्रेरित हैं। इसलिए उन्होंने पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की बजाय बैलगाड़ी को चुना। उनका मानना है कि आजकल शादियों में लोग जरूरत से ज्यादा खर्च और दिखावा करने लगे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि छोटे से प्रयासों से समाज को एक बेहतर संदेश दिया जा सकता है। बारात में शामिल सभी लोग पारंपरिक कपड़ों में थे। गांव के कई बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें ऐसी बारात देखने को मिली जैसी पहले गांवों में हुआ करती थी। कुछ ने इसे भारतीय संस्कृति से जुड़ी एक अच्छी पहल बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कई युवाओं ने भी इस सोच की तारीफ की। शादी की चर्चा इलाके में देर शाम तक चलती रही।रही। सोशल मीडिया पर बारात के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद दूसरे जिलों तक भी यह खबर पहुंच गई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि मंत्री केदार कश्यप ने भी इस पहल की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे सादगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपरा का अच्छा उदाहरण बताया। ग्रामीणों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और प्रदूषण के दौर में इस तरह की पहल लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। शादी में शामिल कई लोगों ने कहा कि अब शादियां जरूरत से ज्यादा दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पहले रिश्तों और परंपराओं को ज्यादा महत्व दिया जाता था। कुबेर देहरी ने भी कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गांव की संस्कृति से जुड़कर रहना चाहिए। फिलहाल नारायणपुर की यह </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">बैलगाड़ी वाली बारात</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे इलाके में मिसाल बन गई है और लोग इसे सादगी के साथ बड़ा संदेश देने वाली शादी बता रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:17:20 +0530</pubDate>
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