<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/environmental-protection/tag-13434" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Environmental Protection - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/13434/rss</link>
                <description>Environmental Protection RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जंगलों के 10 किमी दायरे में आरा मिलों पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने 19 याचिकाएं खारिज कीं</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को सही ठहराया, कहा- पर्यावरण और वन संरक्षण से कोई समझौता नहीं होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ban-on-saw-mills-within-10-km-radius-of-forests/article-58081"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जंगलों और संरक्षित वन क्षेत्रों के आसपास पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर के दायरे में आरा मिलों के संचालन पर लगी रोक को बरकरार रखा है। इस मामले में दायर 19 अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की 25 सितंबर 2025 की अधिसूचना को पूरी तरह वैध माना। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि राज्य में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है और ऐसी परिस्थितियां नहीं बनने दी जा सकतीं, जिनसे भविष्य में बड़े शहरों जैसी गंभीर प्रदूषण की समस्या पैदा हो। अदालत की टिप्पणी रही कि प्रदेश को ऐसी स्थिति से बचाना जरूरी है जहां पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान पहुंचे।</p>
<p>यह मामला उस अधिसूचना से जुड़ा है, जिसे राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 की धारा 5(1) के तहत जारी किया था। अधिसूचना के अनुसार अधिसूचित जंगलों और संरक्षित वन क्षेत्रों से हवाई दूरी के आधार पर 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया। इसके बाद वन विभाग ने इस दायरे में संचालित आरा मिलों के संचालन और उनके लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इस फैसले से प्रभावित कई आरा मिल संचालकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं में शाही ट्रेडर्स, अग्रवाल सॉ मिल, पटेल सॉ मिल सहित कई लकड़ी उद्योग संचालक शामिल थे। उनका कहना था कि उनकी आरा मिलें वर्ष 1996 से पहले से वैध लाइसेंस के साथ संचालित हो रही हैं और वे सभी आवश्यक नियमों का पालन करते आए हैं। उन्होंने अदालत के सामने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुल्पद मामले का हवाला भी दिया। उनका तर्क था कि पुराने और वैध लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों को अचानक इस प्रकार बंद करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से उनके व्यवसाय, कर्मचारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।</p>
<p>मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि जंगलों के आसपास लकड़ी आधारित गतिविधियों पर नियंत्रण पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है। सरकार ने अदालत को बताया कि वन क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा दायरा तय करने का उद्देश्य केवल उद्योगों को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध कटाई, जंगलों पर बढ़ते दबाव और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि औद्योगिक क्षेत्रों और नगर निगम या नगर पालिका की सीमाओं के भीतर आने वाले कुछ क्षेत्रों को इस प्रतिबंध से पहले ही छूट दी जा चुकी है, जिससे यह साबित होता है कि निर्णय संतुलित सोच के साथ लिया गया है।</p>
<p>जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार के फैसले को उचित और तार्किक माना। अदालत ने कहा कि जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि जलवायु संतुलन, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि वन क्षेत्रों के आसपास अनियंत्रित औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति दी जाती है तो उसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा। इसलिए सरकार द्वारा तय किया गया 10 किलोमीटर का बफर जोन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम माना जा सकता है।</p>
<p>अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि सरकार वैज्ञानिक तथ्यों और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए कोई नीति बनाती है तो उसमें न्यायालय तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगा, जब तक वह कानून के विपरीत न हो। अदालत ने माना कि इस मामले में सरकार का फैसला सार्वजनिक हित और पर्यावरण सुरक्षा दोनों के अनुरूप है। इसलिए इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।</p>
<p>इस फैसले के बाद अब अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली आरा मिलों के संचालन और उनके लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक जारी रहेगी। जिन मिलों का संचालन इस प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है, उन्हें वर्तमान नियमों का पालन करना होगा। वन विभाग भी इस संबंध में आगे की कार्रवाई जारी रख सकेगा। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर प्रदेश के कई जिलों में संचालित लकड़ी उद्योगों पर पड़ सकता है, जहां बड़ी संख्या में आरा मिलें वन क्षेत्रों के आसपास स्थित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ban-on-saw-mills-within-10-km-radius-of-forests/article-58081</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ban-on-saw-mills-within-10-km-radius-of-forests/article-58081</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/chhattisgarh-high-court-%289%29.jpg"                         length="133394"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊर्जा बचत की पहल, डिप्टी CM ने काफिले से हटाए फॉलो-पायलट वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ईंधन बचत के लिए अपने काफिले से फॉलो और पायलट वाहन हटाए, पीएम मोदी की अपील का असर दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/energy-saving-initiative-deputy-cm-removed-follow-pilot-vehicles-from-the/article-53380"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t182358.287.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण और पेट्रोलियम ईंधनों की बचत की अपील का असर मध्यप्रदेश में नजर आने लगा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अपने काफिले से फॉलो और पायलट वाहनों को हटाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इस व्यवस्था में शामिल स्टाफ को भी मुक्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह कदम केंद्र से मिले निर्देशों के बाद उठाया गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसे राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रीवा में मीडिया से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है। यह पर्यावरण</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की बात कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब आवश्यक है कि लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। सरकारी पहल होने पर ही इसका असर आम जनता तक पहुंचेगा। इस वक्त जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ईंधन की बचत और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उपमुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचें। छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें और अगर संभव हो तो एक ही वाहन में अधिक लोग यात्रा करें। अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार भविष्य में ऊर्जा संरक्षण को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियान चला सकती है। फिलहाल उपमुख्यमंत्री के इस निर्णय को सरकार की उस कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग खुद उदाहरण पेश करने की बात कर रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले समय में अन्य मंत्री और जनप्रतिनिधि भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सरकार का मानना है कि जरूरी सुरक्षा इंतजाम पहले की तरह बनाए रखे जाएंगे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंचों पर ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात की थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मध्यप्रदेश में कई स्तरों पर हलचल देखने को मिली। हाल ही में कुछ मंत्री ट्रेन से यात्रा करते हुए भी नजर आए थे। अब उपमुख्यमंत्री द्वारा फॉलो और पायलट वाहन हटाने का निर्णय उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार आने वाले समय में डीजल-पेट्रोल की खपत कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए और कदम उठा सकती है। फिलहाल इस फैसले की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है और इसे आम जनता तक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/energy-saving-initiative-deputy-cm-removed-follow-pilot-vehicles-from-the/article-53380</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/energy-saving-initiative-deputy-cm-removed-follow-pilot-vehicles-from-the/article-53380</guid>
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 09:41:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-14t182358.287.jpg"                         length="111981"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        