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                <title>Jyotirlinga - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ओंकारेश्वर मंदिर में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या बढ़ी, अब रोज 6 हजार श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून से नई व्यवस्था लागू, 4 हजार की जगह प्रतिदिन 6 हजार ऑनलाइन टिकट होंगे जारी; सामान्य कतारों का दबाव घटने और मंदिर की आय बढ़ने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-number-of-online-early-darshan-tickets-increased-in-omkareshwar/article-57118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/omkareshwar-temple-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने ऑनलाइन शीघ्र दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रतिदिन जारी होने वाले ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या 4,000 से बढ़ाकर 6,000 कर दी गई है। नई व्यवस्था 27 जून से प्रभावी हो गई है। प्रत्येक ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकट का शुल्क पहले की तरह 300 रुपये ही रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से अधिक श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन का अवसर मिलेगा और मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। ओंकारेश्वर मंदिर देश के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और यहां पूरे वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की सीमित संख्या के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु टिकट बुक नहीं कर पाते थे। कई लोगों को सामान्य कतार में लंबा इंतजार करना पड़ता था। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए टिकटों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और ऑनलाइन टिकटों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पहले प्रतिदिन 4,000 ऑनलाइन टिकट उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन अब 2,000 अतिरिक्त टिकट जारी किए जाएंगे। इससे रोजाना कुल 6,000 श्रद्धालु ऑनलाइन शीघ्र दर्शन सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु रूप से संचालित होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य दर्शन की कतारों पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अभी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऑनलाइन टिकट नहीं मिलने के कारण सामान्य लाइन में शामिल हो जाते थे, जिससे कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब अधिक लोगों को ऑनलाइन टिकट मिलने से सामान्य कतारों में भी भीड़ कम होगी और बिना शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं को भी पहले की तुलना में कम समय में दर्शन करने का अवसर मिल सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले से मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अब तक 4,000 ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 12 लाख रुपये की आय होती थी। टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 होने के बाद यह आय बढ़कर लगभग 18 लाख रुपये प्रतिदिन पहुंच जाएगी। यानी केवल ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से ही मंदिर को प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। यदि पूरे वर्ष इसी व्यवस्था के अनुसार टिकटों की बुकिंग होती है तो सालाना आय में करीब 21 करोड़ रुपये तक की वृद्धि संभव मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन का यह भी अनुमान है कि ऑनलाइन व्यवस्था बेहतर होने से अन्य श्रेणियों के टिकटों की बुकिंग में भी वृद्धि होगी। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 1,000 अतिरिक्त टिकट अन्य श्रेणियों में भी बुक हो सकते हैं, जिससे लगभग 3 लाख रुपये प्रतिदिन की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, स्वच्छता, पेयजल, प्रतीक्षालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन टिकटों की संख्या बढ़ने से दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले से यात्रा की बेहतर योजना बनाने में आसानी होगी। कई बार टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को सामान्य कतार में घंटों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब अधिक टिकट उपलब्ध होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। ओंकारेश्वर के पंडित नीलेश पुरोहित ने भी जिला प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला श्रद्धालुओं के हित में है और इससे दर्शन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को समय पर दर्शन का लाभ मिलेगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए समय-समय पर ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना आवश्यक है। मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में ओंकारेश्वर का विशेष महत्व है। यहां हर दिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके चलते मंदिर प्रशासन भी डिजिटल सुविधाओं और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर रहा है। ऑनलाइन टिकट व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देना और भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक करें और तय समय के अनुसार मंदिर पहुंचें। इससे अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा और सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन का लाभ मिल सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:29:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत में सजा ओंकारेश्वर, हाई अलर्ट पर तीर्थ नगरी</title>
                                    <description><![CDATA[ज्योतिर्लिंग दर्शन-पूजन के लिए आज पहुंचेंगी राष्ट्रपति, 2600 सुरक्षाकर्मी तैनात; कई घंटों तक दर्शन और यातायात रहेगा प्रभावित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/omkareshwar-pilgrimage-city-on-high-alert-to-welcome-president-draupadi/article-56282"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/president-droupadi-murmu-omkareshwar-visit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे को लेकर पूरी तीर्थ नगरी विशेष सुरक्षा घेरे में आ गई है। राष्ट्रपति 18 और 19 जून को मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। उनके आगमन को लेकर प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटी हुई हैं। ओंकारेश्वर को आकर्षक तरीके से सजाया गया है और प्रमुख मार्गों पर साफ-सफाई के साथ सुरक्षा इंतजाम भी मजबूत किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार शाम ओंकारेश्वर पहुंचकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करेंगी। इस दौरान राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने 17 जून से 19 जून तक ओंकारेश्वर क्षेत्र को नो-ड्रोन जोन घोषित किया है। इस अवधि में ड्रोन, पैरामोटर, पैराग्लाइडर और अन्य उड़ने वाले उपकरणों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप, प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड, अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त तैनाती की गई है। करीब 2600 सुरक्षाकर्मी ओंकारेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में तैनात रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति के आगमन से पहले कोठी हेलीपेड, एनएचडीसी गेस्ट हाउस और ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर तक कई बार रिहर्सल की। सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी हेलीपेड पर लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया। सुरक्षा जांच के दौरान कई बार यातायात को भी अस्थायी रूप से रोका गया। बुधवार को राष्ट्रपति के प्रस्तावित मार्ग पर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने फुल ड्रेस रिहर्सल की। निर्धारित रूट पर 25 से 30 वाहनों का काफिला निकाला गया और विभिन्न सुरक्षा बिंदुओं की समीक्षा की गई। रिहर्सल के दौरान कोठी हेलीपेड से लेकर मंदिर परिसर तक यातायात कुछ समय के लिए पूरी तरह रोक दिया गया। मोरटक्का और सनावद की ओर से आने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया। राष्ट्रपति के दौरे के चलते श्रद्धालुओं को भी कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन के अनुसार राष्ट्रपति के मंदिर पहुंचने से लगभग तीन घंटे पहले सामान्य दर्शन व्यवस्था बंद कर दी जाएगी। दोपहर से लेकर रात करीब 8 बजे तक ज्योतिर्लिंग के दर्शन प्रभावित रह सकते हैं। इसके अलावा दिनभर वीआईपी मूवमेंट के कारण कई बार ट्रैफिक रोका जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय का ध्यान रखें। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल और मंदिर परिसर के आसपास कई वस्तुओं के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। नागरिकों को हथियार, विस्फोटक सामग्री, ज्वलनशील पदार्थ, चाकू, बड़े बैग, लेजर लाइट, ड्रोन, कैमरा युक्त उड़ने वाले उपकरण और अन्य प्रतिबंधित सामग्री लेकर आने की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा जांच के बाद ही लोगों को निर्धारित क्षेत्रों में प्रवेश दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति के दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम 19 जून को आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय सिकल सेल जागरूकता कार्यक्रम है। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम की तैयारियां कोठी के पास थापना क्षेत्र में की गई हैं। राष्ट्रपति सुबह लगभग 10 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगी और वहां लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी। इसके बाद वे कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगी। राज्य सरकार इस आयोजन को जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। जिले के वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, यातायात और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां वे देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी, वहीं दूसरी ओर सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी। ऐसे में पूरे क्षेत्र में उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता भी देखने को मिल रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रविवार भस्म आरती में राजा स्वरूप सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान पंचामृत अभिषेक, भांग, चंदन और बिल्वपत्र अर्पित कर किया गया विशेष श्रृंगार, बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/devotees-had-divine-darshan-of-baba-mahakal-dressed-as-king/article-55874"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न कराया गया। तड़के से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक धार्मिक विधियों के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू से अलंकृत किया गया। परंपरा के अनुसार उन्हें भांग अर्पित की गई तथा चंदन और बिल्वपत्र से विशेष पूजन किया गया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर दिखाई दिए। ऐसा कहा जाता है कि भस्म आरती के समय बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु इस अलौकिक अनुष्ठान को देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिषेक और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया तथा कपूर आरती उतारी गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर जय महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह भस्म आरती मंदिर की सबसे प्राचीन और विशिष्ट परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार होने के कारण भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल का एक और दिव्य स्वरूप भक्तों के सामने प्रकट हुआ। उन्हें रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आध्यात्मिक वातावरण का विशेष अनुभव हुआ। श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया तथा मंदिर परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना का क्रम आगे बढ़ाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। कई श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान रखती है। इस अनूठी परंपरा को देखने और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>रविवार की भस्म आरती में भी श्रद्धा, आस्था और भक्ति का ऐसा ही संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा और बाबा महाकाल के जयघोष लगातार गूंजते रहे। दिव्य श्रृंगार, विशेष पूजा-अर्चना और भस्म आरती के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते नजर आए। धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:12:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल मंदिर में भव्य भस्म आरती, राजा स्वरूप में हुए बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 4 बजे खुलने के साथ शुरू हुई भस्म आरती, हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/grand-bhasma-aarti-in-mahakal-temple-divine-darshan-of-baba/article-55255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए देर रात से ही कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, श्रद्धालुओं में उत्साह साफ दिखाई दिया।</p>
<p>मंदिर परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से भगवान को जल अर्पित किया और फिर दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूरे गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी। धार्मिक वातावरण के बीच यह अनुष्ठान लंबे समय तक चलता रहा और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ इस दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p>अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान भगवान महाकाल को चंदन का तिलक लगाया गया और विविध आभूषण अर्पित किए गए। राजा स्वरूप में किए गए इस श्रृंगार को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रही। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है और इसी परंपरा का पालन सोमवार को भी किया गया। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और सेवक पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठानों को संपन्न करते रहे।</p>
<p>भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटा बजाकर की गई। मंदिर परिसर में घंटों की ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह आरती भगवान महाकाल के विशेष पूजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। आरती के दौरान श्रद्धालु लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे और पूरा परिसर शिवमय वातावरण में डूबा दिखाई दिया।</p>
<p>विशेष श्रृंगार के अगले चरण में भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। इसके बाद श्रृंगार पूर्ण होने पर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण भस्म आरती का सबसे प्रमुख और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी विश्वास के कारण देशभर से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट पहनाया गया। साथ ही रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न प्रकार के आभूषण अर्पित किए गए। इसके अलावा मोगरा और गुलाब के सुगंधित फूलों से बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। फूलों की खुशबू से पूरा गर्भगृह और मंदिर परिसर महक उठा। दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु इस दिव्य स्वरूप को देखकर भावविभोर नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।</p>
<p>पूजन और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परंपराओं के अनुसार प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के भोग लगाए जाते हैं और सोमवार के दिन विशेष श्रद्धा के साथ यह प्रक्रिया पूरी की गई। पुजारियों ने पूरे विधि-विधान से भोग अर्पित किया और भगवान से विश्व कल्याण की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना में शामिल रहे।</p>
<p>महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और महाकाल मंदिर की भस्म आरती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते हुए अखाड़े के संतों ने भी इस अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>
<p>सोमवार को आयोजित इस भव्य भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह के समय मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उज्जैन में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सोमवार की यह आरती भी उसी आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:59:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बुधवार की भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[भांग, चंदन, सिंदूर और रजत आभूषणों से हुआ विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakal-devotees-dressed-in-the-form-of-ganesha-had/article-54841"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य और मनोहारी स्वरूप के दर्शन हुए। ज्योतिर्लिंग महाकाल के दरबार में रोजाना होने वाली भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन बुधवार को भगवान महाकाल का गणेश स्वरूप में किया गया विशेष शृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा तथा देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">परंपरा के अनुसार तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम किया गया। इसके पश्चात स्वस्तिवाचन के साथ पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू हुई और चांदी के द्वार खोले गए। गर्भगृह में प्रवेश करने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारा और विधिवत पूजन की तैयारियां शुरू कीं। मंदिर की प्राचीन परंपराओं के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। पवित्र जल से अभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत द्वारा विशेष पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कर भगवान महाकाल का दिव्य शृंगार किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बुधवार होने के कारण भगवान महाकाल को विशेष रूप से गणेश स्वरूप में सजाया गया। भांग, चंदन और सिंदूर से अलौकिक शृंगार किया गया। इसके साथ ही रजत आभूषणों और पारंपरिक अलंकरणों से बाबा महाकाल की भव्य छवि तैयार की गई। श्रद्धालुओं को भगवान के इस विशेष स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति हुई। मंदिर में मौजूद भक्त लगातार जय महाकाल के जयघोष लगाते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। शृंगार के दौरान भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट धारण कराया गया। इसके अलावा रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों से निर्मित आकर्षक हार पहनाए गए। फूलों की सजावट ने भगवान के स्वरूप को और भी दिव्य बना दिया। गर्भगृह में दीपों की रोशनी और मंत्रों की ध्वनि के बीच बाबा महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म आरती से पहले नंदी हाल में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। यहां नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन संपन्न किया गया। मान्यता है कि भगवान शिव के परम भक्त नंदी की पूजा के बिना महाकाल की आराधना पूर्ण नहीं मानी जाती। इसी परंपरा का पालन करते हुए नंदी जी की विशेष सेवा और पूजा की गई। पूजन-अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को ड्रायफ्रूट, ताजे फल और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को पवित्र भस्म समर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशिष्ट और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर पहुंच जाते हैं ताकि उन्हें इस अद्भुत आरती का साक्षी बनने का अवसर मिल सके। बुधवार की भस्म आरती में भी हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मी लगातार सक्रिय रहे। श्रद्धालु अनुशासित तरीके से दर्शन करते हुए बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। धार्मिक दृष्टि से यह आरती केवल एक पूजा अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन परंपरा और शिव भक्ति का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। विशेष अवसरों और वारों के अनुसार भगवान महाकाल का अलग-अलग स्वरूपों में शृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह रहता है। बुधवार को गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल के दर्शन ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मंदिर में दिनभर दर्शन का सिलसिला जारी रहा और भक्त भगवान महाकाल के जयकारों के साथ अपनी आस्था व्यक्त करते रहे। महाकाल की नगरी उज्जैन में एक बार फिर भक्ति, परंपरा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मंगलवार भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[चंदन, त्रिपुंड, भांग और रजत मुकुट से हुआ दिव्य श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/baba-mahakal-dressed-as-a-king-in-bhasma-aarti-on/article-54702"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रतिदिन की तरह भस्म आरती से पहले पुजारियों ने प्रथम घंटानाद के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। आरती के पश्चात बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार प्रारंभ हुआ। जटाधारी स्वरूप में भगवान के मस्तक पर चंदन, तिलक, त्रिपुंड और भांग अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्हें रजत मुकुट धारण कराया गया और राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दिव्य स्वरूप देखते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया गया और पारंपरिक रीति से भस्म रमाई गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे देव हैं जिनकी आरती भस्म से की जाती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत और दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भक्तों के कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी गई। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु देर रात ही मंदिर परिसर पहुंच गए थे ताकि वे भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मंगलवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। मंगलवार की भस्म आरती के दौरान भी मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती में दिखा महाकालेश्वर का दिव्य रूप, त्रिशूल-त्रिनेत्र से हुआ बाबा का श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 21 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का त्रिशूल, त्रिनेत्र और त्रिपुंड से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-form-of-mahakaleshwar-seen-in-mahakal-bhasma-aarti-baba/article-53843"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-mahakal-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Ujjain Mahakal Bhasma Aarti:</strong> उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार 21 मई की सुबह भक्ति और श्रद्धा का एक विशेष माहौल था। ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती शुरू हुई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आ रही थीं। कई भक्त तो रात से ही दर्शन के इंतज़ार में बैठे थे। महाकाल आरती के समय पूरा मंदिर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के नारे से गूंज उठा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआत में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। फिर दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बनाए गए पंचामृत से अभिषेक किया गया। मंदिर के अंदर मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना रहा। बताया गया कि आज के विशेष श्रृंगार में भगवान महाकाल के मस्तक पर त्रिशूल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">त्रिनेत्र और त्रिपुंड अर्पित किए गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान खासतौर पर आकर्षित किया। भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया और कपूर आरती हुई। परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढकने के बाद भस्म लगाई गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मूंडमाल और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह की इस भस्म आरती में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी इच्छाएँ बताते नजर आए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए थे। सुबह होते-होते पूरा परिसर श्रद्धालुओं से भर गया और हर तरफ केवल बाबा महाकाल के जयकारे सुनाई दे रहे थे। महाकाल आरती के दर्शन के लिए आए लोगों का कहना था कि तड़के होने वाली यह आरती आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यही वजह है कि रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:03:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>19 मई महाकाल भस्म आरती में हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म, चंदन और रजत मुकुट से सजे बाबा महाकालेश्वर</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में 19 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार हुआ। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakaleshwar-adorned-with-ashes-sandalwood-and-silver-crown-was/article-53727"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti: </strong>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार 19 मई की सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और उसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भस्म आरती में भाग लेने के लिए भक्त देर रात से ही लाइन में खड़े दिखे। मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की प्रक्रिया शुरू हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे पूरा माहौल शिवमय हो गया। खबर है कि इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी आरती में भाग लेकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के दरवाजे खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर पंचामृत से अभिषेक हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों का रस शामिल था। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बाबा का विशेष श्रृंगार भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से किया गया। आरती से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढककर परंपरा के अनुसार भस्म अर्पित की गई। फिर शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और फूलों की माला भगवान को अर्पित की गई। गर्भगृह का दृश्य उस समय बेहद भव्य नजर आ रहा था। कई श्रद्धालु मोबाइल में इस पल को कैद करने की कोशिश में थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते गर्भगृह में खास नजर रखी गई।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह होते-होते मंदिर का परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और सभा मंडप से बाबा महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं बताते हुए नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के नारों की गूंज सुनाई देती रही। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर खास इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। उज्जैन में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और सुबह की भस्म आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में बुकिंग हो रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 09:30:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में दिखा दिव्य रूप, चंद्र और फूलों से सजा भगवान महाकालेश्वर का दरबार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-form-seen-in-mahakals-bhasma-aarti-lord-mahakaleshwars-court/article-53636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Mahakal Bhasma Aarti: </span></strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े धूमधाम के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसके बाद गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक करने के बाद दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। कई भक्त तो भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही वहां पहुंच गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण से पहले मंदिर में पहले घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। फिर कपूर आरती की गई और ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पारंपरिक तरीके से भस्म रमाई गई। पुजारियों ने बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूल अर्पित किए। इस बार मस्तक पर चंद्र अर्पित कर विशेष फूलों से श्रृंगार किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे भक्तों का ध्यान आकर्षित हुआ। गर्भगृह का वातावरण मंत्रों और घंटियों की आवाज से गूंजता रहा। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु लगातार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारे लगाते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह की भस्म आरती में देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। कई भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर प्रशासन के अनुसार आरती के दौरान सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। सावन और विशेष तिथियों की तरह इन दिनों भी महाकाल मंदिर में भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 09:39:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>17 मई महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजा ज्योतिर्लिंग</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 17 मई की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/17-may-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakals-supernatural-makeup-jyotirling/article-53562"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> रविवार तड़के 17 मई को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से हुई। सुबह लगभग 4 बजे जब मंदिर के कपाट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो गर्भगृह में भक्ति का माहौल बन गया। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे। बताया जा रहा है कि सप्ताहांत होने के चलते आज मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब मंदिर के पट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं की पूजा की। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ। पुजारियों ने भांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य श्रृंगार किया। बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिनेत्र अर्पित कर एक आकर्षक स्वरूप दिया गया। भस्म आरती से पहले घंटे की पहली ध्वनि गूंजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हरिओम का जल अर्पित करते हुए वैदिक मंत्रों के बीच पूजा संपन्न हुई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिपूर्वक भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित किए गए। गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक नजर आ रहा था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह होते-होते मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य की प्राप्ति की। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर में लगातार घंटियों की आवाज़ और शिव भजनों के बीच भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया। अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी भी तैनात किए गए थे। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा का भी खास ख्याल रखा गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से मन को शांति मिली और पूरा वातावरण शिवमय हो गया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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