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                <title>NEET Paper Leak - दैनिक जागरण</title>
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                <description>NEET Paper Leak RSS Feed</description>
                
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                <title>जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, वांगचुक की तबीयत बिगड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर 11वें दिन धरना, भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cjp-protest-continues-at-jantar-mantar-wangchuks-health-deteriorated/article-57487"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cjp-protest-jantar-mantar.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन मंगलवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे इस प्रदर्शन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कार्यकर्ता और छात्र संगठन शामिल हैं। धरना स्थल पर माहौल लगातार तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण बना हुआ है, जहां प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन का एक बड़ा चेहरा बने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि उनका ब्लड शुगर स्तर गिरकर 66 तक पहुंच गया, जो सामान्य से कम माना जाता है। वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। मेडिकल टीम की निगरानी में उनका ब्लड प्रेशर 117/60, ऑक्सीजन स्तर 96 और पल्स रेट 92 दर्ज किया गया है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं में उनकी तबीयत को लेकर चिंता का माहौल है।</p>
<p>CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है और समर्थकों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई लोगों को पहचान पत्र नहीं होने के कारण अंदर प्रवेश से रोका गया, जिससे समर्थकों में नाराजगी बढ़ी है। हालांकि मौके पर स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा है। इस बीच AISA के छह छात्र नेता भी आंदोलन में शामिल हुए हैं और उन्होंने भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को दोहराया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर चल रहा है। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि राजस्थान के एक पैरामेडिकल परीक्षा का पेपर भी जयपुर में लीक हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या व्यापक स्तर पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। वहीं प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक हैं और वे किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार सोनम वांगचुक इससे पहले भी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं और कई दिनों तक जेल में भी रहे हैं। उनके समर्थन में देशभर से लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी जुड़ रहे हैं। CJP का यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था और तब से लगातार विभिन्न शहरों में इसका विस्तार हो रहा है। संगठन का दावा है कि लाखों लोग उनकी मांगों का समर्थन कर रहे हैं और यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि उनकी मांगों पर जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:03:44 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मारपीट, विरोध प्रदर्शन के दौरान हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[शहीद स्मारक पर नीट पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में अचानक भीड़ ने किया हमला, पुलिस ने कई युवकों को हिरासत में लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cjp-founder-abhijit-deepke-assaulted-uproar-during-protest-in-jaipur/article-56037"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhijeet-deepke-jaipur-incident.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">जयपुर में सोमवार को उस वक्त माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ शहीद स्मारक पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान मारपीट की घटना सामने आई। यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति पूरी तरह बदल गई और भीड़ के बीच अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और मंच के आसपास लगातार नारेबाजी चल रही थी। इसी दौरान अभिजीत दीपके अपने कुछ समर्थकों के साथ भीड़ के बीच मौजूद थे। बताया जा रहा है कि वह अपने समर्थकों के कंधों पर बैठकर लोगों को संबोधित करने या भीड़ का अभिवादन कर रहे थे, तभी अचानक कुछ युवकों ने आगे बढ़कर उन पर हमला कर दिया। यह घटना इतनी तेजी से हुई कि शुरुआती कुछ सेकंड में किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद वहां मौजूद समर्थकों और अन्य कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया। देखते ही देखते धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। कुछ लोगों ने हमलावरों को पकड़ने की कोशिश की, वहीं कुछ ने स्थिति को शांत करने का प्रयास भी किया। मौके पर कुछ देर के लिए अव्यवस्था फैल गई और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे। आसपास मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसमें भीड़ के बीच अचानक हुई झड़प और अफरा-तफरी को साफ देखा जा सकता है। वीडियो में लोगों को एक-दूसरे की तरफ दौड़ते और चिल्लाते हुए देखा गया, जबकि कुछ लोग स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। इस वायरल वीडियो ने घटना को और अधिक चर्चा में ला दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के तुरंत बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमलावरों को पकड़कर कथित रूप से उनकी पिटाई भी की। हालांकि इसी बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से अपील की कि किसी भी तरह की हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं दिया जाना चाहिए और हमलावरों को छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाना है। मामले को लेकर सीजेपी के मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन ने दावा किया कि हमले में शामिल युवकों को पुलिस ने मौके से हिरासत में ले लिया है। वहीं जयपुर दक्षिण के डीसीपी राजर्षि राज वर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कुल पांच लोगों को डिटेन किया गया है, जिनमें तीन युवक सीधे तौर पर मारपीट की घटना में शामिल पाए गए हैं। पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि इन युवकों का किसी संगठन से कोई संबंध है या नहीं और क्या यह हमला अचानक हुआ या इसके पीछे कोई योजना थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को अब और मजबूत कर दिया गया है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। पूरे मामले की जांच अलग-अलग पहलुओं से की जा रही है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो भी शामिल किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के हमले उनकी आवाज को दबा नहीं सकते। उन्होंने इसे डर और कायरता की निशानी बताया और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। दीपके ने यह भी दोहराया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार के लिए है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी एक बार फिर से उठाई।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपके ने अपने बयान में कहा कि वह गांधी और आंबेडकर के विचारों से प्रेरित हैं और उनकी लड़ाई हमेशा अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीकों से ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हो सकती हैं, लेकिन इससे उनके इरादे नहीं बदलेंगे। सीजेपी के अन्य प्रवक्ताओं ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि हमले में शामिल कुछ लोग किसी राजनीतिक दल से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। उनका कहना है कि सभी संदिग्ध चेहरों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। कुछ नेताओं ने इस घटना की निंदा की है और इसे लोकतांत्रिक विरोध पर हमला बताया है। वहीं कुछ ने कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती, चाहे कारण कुछ भी हो। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। जयपुर पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। </p>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:34 +0530</pubDate>
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                <title>जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद घर लौटे अभिजीत दीपके, बोले- आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज, CJP ने देशभर में आंदोलन बढ़ाने के दिए संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/abhijeet-deepke-who-returned-home-after-jantar-mantar-protest-said/article-55210"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhijeet-deepke.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">NEET पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब और व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद कहा है कि उनका अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। शनिवार को राजधानी में आयोजित प्रदर्शन के बाद रविवार सुबह अभिजीत अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित घर पहुंचे, जहां परिवार और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">घर पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन केवल शुरुआत है और सरकार को यह दिखाने का प्रयास था कि छात्र और युवा अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से भी मजबूती से रख सकते हैं। उनके अनुसार प्रदर्शन में हजारों लोगों ने भाग लिया और यह संख्या इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को देश के अलग-अलग राज्यों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिजीत ने अपने संदेश में कहा कि परिवर्तन तभी संभव है जब लोग अपनी आवाज उठाएं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में फिर से प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। हालांकि उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली। प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फॉलोअर्स की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। पार्टी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 24 घंटे के भीतर लाखों नए लोग उनके सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े। इससे यह संकेत मिला कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और युवा वर्ग के बीच उसकी चर्चा हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और वास्तविक जनसमर्थन में बड़ा अंतर होता है। यही वजह है कि अभिजीत दीपके और उनकी टीम के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। पहली और सबसे बड़ी चुनौती अपने ऑनलाइन समर्थकों को जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और संभावित मतदाताओं में बदलने की होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संगठन को लंबे समय तक प्रभावी बने रहने के लिए मजबूत स्थानीय नेटवर्क और संगठनात्मक ढांचे की जरूरत होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी चुनौती संगठनात्मक कैडर को लेकर है। कई बड़े आंदोलनों को विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों का समर्थन मिला था, जिससे वे व्यापक स्तर पर फैल सके। कॉकरोच जनता पार्टी अभी मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों पर आधारित आंदोलन के रूप में देखी जा रही है। ऐसे में जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करना उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक अनुभव की कमी भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरी चुनौती स्पष्ट एजेंडा तैयार करने की है। आंदोलन में शामिल अलग-अलग लोगों की प्राथमिकताएं अलग दिखाई दीं। कोई शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा था तो कोई बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, टैक्स व्यवस्था या बुनियादी सुविधाओं की बात कर रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनाना है तो उसके पास स्पष्ट और केंद्रित एजेंडा होना चाहिए, जिससे लोग आसानी से जुड़ सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत भी एक चर्चित बयान के बाद हुई थी। दरअसल, मई महीने में न्यायपालिका से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने इस शब्द को प्रतीक के रूप में अपनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अभियान शुरू किया और शिक्षा व्यवस्था तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद ऑनलाइन याचिकाओं और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए पार्टी ने अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में युवाओं ने इस अभियान का समर्थन करना शुरू किया। NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी संगठन लगातार सक्रिय रहा। जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन को इसी अभियान का विस्तार माना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:36 +0530</pubDate>
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                <title>क्या डिजिटल टूलकिट छात्र आंदोलनों को सरकार-विरोधी अभियान में बदल रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साज़िश की कहानियों को अक्सर लोगों का वहम या कल्पना कहकर खारिज कर दिया जाता है। लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि हर साज़िश झूठ नहीं होती। कई बार जो बातें शुरुआत में अफवाह लगती हैं</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में सच साबित हो जाती हैं। इसलिए किसी भी बात को आँख बंद करके मान लेना या पूरी तरह नकार देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों ही गलत हो सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी संदर्भ में एक सवाल उठता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या यह संभव है कि कुछ छात्र आंदोलन पूरी तरह वैसे न हों जैसे वे ऊपर से दिखाई देते हैं</span><span style="font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह सवाल छात्रों की नीयत</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/are-digital-toolkits-turning-student-movements-into-anti-government-campaigns/article-55126"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/student-protests-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साज़िश की कहानियों को अक्सर लोगों का वहम या कल्पना कहकर खारिज कर दिया जाता है। लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि हर साज़िश झूठ नहीं होती। कई बार जो बातें शुरुआत में अफवाह लगती हैं</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में सच साबित हो जाती हैं। इसलिए किसी भी बात को आँख बंद करके मान लेना या पूरी तरह नकार देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों ही गलत हो सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी संदर्भ में एक सवाल उठता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या यह संभव है कि कुछ छात्र आंदोलन पूरी तरह वैसे न हों जैसे वे ऊपर से दिखाई देते हैं</span><span style="font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह सवाल छात्रों की नीयत या उनकी परेशानियों पर शक करने के लिए नहीं है। पेपर लीक</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भर्ती परीक्षाओं में धांधली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडमिशन में गड़बड़ियाँ और सरकारी नौकरियों में देरी जैसे मुद्दे करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं। जब किसी छात्र की सालों की मेहनत एक पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसका गुस्सा स्वाभाविक है। जब भर्ती परीक्षा रद्द होती है या परिणामों पर सवाल उठते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विरोध होना भी लोकतंत्र का हिस्सा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन क्या यह भी संभव है कि छात्रों के इसी असली गुस्से और नाराज़गी को कुछ संगठित राजनीतिक और डिजिटल नेटवर्क अपने बड़े राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हों</span><span style="font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के समय में जिस तथाकथित "</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दक्षिण भारत की एक पार्टी के डिजिटल मॉडल" की चर्चा हुई है</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने इस सवाल को और दिलचस्प बना दिया है। मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस मॉडल के तहत लगभग </span>34,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">व्हाट्सएप ग्रुप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई टेलीग्राम चैनल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हजारों इन्फ्लुएंसर और एक मजबूत तकनीकी नेटवर्क मिलकर काम कर रहे थे। दावा किया गया कि </span>4,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक पेड इन्फ्लुएंसर और लगभग </span>14,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्ट-टाइम इन्फ्लुएंसर विभिन्न मुद्दों पर सोशल मीडिया का माहौल बनाने में सक्रिय थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जाता है कि इसके पीछे डेटा साइंटिस्ट</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारित कंटेंट जनरेशन सिस्टम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेंटिमेंट एनालिसिस डैशबोर्ड और हजारों डिजिटल समुदायों को एक साथ संचालित करने वाली तकनीक मौजूद थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर इन दावों में सच्चाई है</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल सोशल मीडिया एक्टिविज्म नहीं है। यह लोगों की सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावनाओं और सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करने की एक बेहद संगठित व्यवस्था है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span style="font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">हर दिन सैकड़ों पोस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो स्क्रिप्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राफिक्स और संदेश तैयार कर सकता है। इन्फ्लुएंसर उन्हें अलग-अलग रूपों में लोगों तक पहुँचाते हैं। डेटा एनालिस्ट लगातार देखते हैं कि कौन-सा संदेश सबसे ज्यादा असर डाल रहा है और उसी हिसाब से नई रणनीति बनाई जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में एक बड़ा सवाल उठता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-06-at-2.36.43-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-06 at 2.36.43 PM" width="665" height="362"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर इतनी बड़ी डिजिटल मशीनरी मौजूद है</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसका इस्तेमाल सिर्फ चुनावों तक ही सीमित क्यों रहता है</span>? </span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाता है। लाखों छात्र प्रभावित होते हैं। अभिभावक परेशान हैं। मीडिया में बहस शुरू हो जाती है। शुरुआत में यह पूरी तरह एक छात्र और शिक्षा से जुड़ा मुद्दा होता है। छात्र पूछते हैं कि पेपर किसने लीक किया</span><span style="font-family:Mangal, serif;">? <span lang="hi" xml:lang="hi">कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">दोषियों को कब सजा मिलेगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आगे ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए क्या सुधार होंगे</span>?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन फिर अचानक सोशल मीडिया पर एक अलग तरह का नैरेटिव दिखाई देने लगता है। हजारों अकाउंट एक जैसी भाषा में पोस्ट करने लगते हैं। कुछ हैशटैग ट्रेंड करने लगते हैं। भावनात्मक वीडियो वायरल होते हैं। हर घटना को एक बड़े राजनीतिक निष्कर्ष से जोड़ा जाने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धीरे-धीरे चर्चा का केंद्र बदल जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पेपर लीक से ज्यादा चर्चा सरकार की वैधता पर होने लगती है। परीक्षा सुधारों से ज्यादा चर्चा राजनीतिक बदलाव पर होने लगती है। समस्या के समाधान से ज्यादा ध्यान गुस्से को बनाए रखने पर दिखाई देता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यहीं सबसे गंभीर सवाल पैदा होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><strong><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या लक्ष्य वास्तव में समस्या का समाधान है</span></strong><span style="font-family:Mangal, serif;">, <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर समस्या को लगातार जिंदा रखना</span></strong></span><span style="font-family:Mangal, serif;">? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि एक बार समस्या का समाधान हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन की ऊर्जा कम हो जाती है। लेकिन अगर नाराज़गी लगातार बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उससे राजनीतिक लाभ उठाने की संभावनाएँ भी बनी रहती हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह बात केवल किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा पर लागू नहीं होती। दुनिया भर में राजनीतिक दल</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्टिविस्ट समूह और दबाव समूह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए करते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असल चिंता यह नहीं है कि कौन ऐसा कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असल चिंता यह है कि क्या आम नागरिकों को पता है कि वे जो देख रहे हैं</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पूरी तरह स्वाभाविक जनभावना है या किसी संगठित डिजिटल नेटवर्क द्वारा उसे बढ़ाया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छात्रों को यह जानने का अधिकार है कि उनके मुद्दे को समर्थन मिल रहा है या उसका राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह सवाल उठाना </span><span style="font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक विरोध है</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">का विरोध नहीं है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि असली मुद्दा कहीं खो न जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो चर्चा का केंद्र परीक्षा व्यवस्था को ठीक करना होना चाहिए। अगर भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दोषियों को पकड़ने और व्यवस्था सुधारने की मांग सबसे आगे होनी चाहिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन जब हर मुद्दा अंततः केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन की बहस में बदल जाता है</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह पूछना स्वाभाविक है कि क्या कहीं न कहीं मूल समस्या पीछे छूट रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आज </span><span style="font-family:Mangal, serif;">AI, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा एनालिटिक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्फ्लुएंसर नेटवर्क और डिजिटल कमांड सिस्टम के दौर में जनमत को प्रभावित करना पहले से कहीं आसान हो गया है। ऐसे में नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया और छात्रों—सभी को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आखिरकार किसी भी आंदोलन की सफलता केवल उसके गुस्से से नहीं मापी जानी चाहिए। उसकी सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि वह समस्या का समाधान खोजने में कितना गंभीर है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और शायद सबसे महत्वपूर्ण सवाल आज भी वही है</span><span style="font-family:Mangal, serif;"> -</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर चिंता वास्तव में छात्रों के भविष्य की है</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर बहस का केंद्र परीक्षा व्यवस्था को सुधारना क्यों नहीं है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान पर उतनी ऊर्जा क्यों नहीं दिखाई देती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी राजनीतिक टकराव पैदा करने में दिखाई देती है</span>?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस सवाल का जवाब तलाशना जरूरी है। क्योंकि लोकतंत्र में विरोध भी जरूरी है और सुधार भी। लेकिन जब विरोध समाधान से बड़ा हो जाए</span><span style="font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह देखना जरूरी हो जाता है कि आंदोलन का असली लाभ किसे मिल रहा है</span> - <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों को या राजनीति को।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:normal;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:12:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>MP में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में की प्रेस कॉन्फ्रेंस</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हलचल। युवाओं ने इसे सिस्टम के खिलाफ आंदोलन बताया, NEET पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/entry-of-cockroach-janata-party-in-mp-press-conference-in/article-53983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/madhya-pradesh-bhopal-cockroach-janata-party-(cjp).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में शुक्रवार को एक नई राजनीतिक हलचल देखने को मिली जब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी (</span>CJP)' <span lang="hi" xml:lang="hi">के नाम से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। यह प्रेस वार्ता शहर के एक निजी कार्यक्रम स्थल पर हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा मयंक ने खुद को इस आंदोलन का हिस्सा बताते हुए कई तीखे बयान दिए। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट पेपर लीक से प्रभावित छात्र-छात्राएं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाले युवा भी वहां मौजूद थे। अचानक से उभरे इस </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">न्यू एज पॉलिटिकल पहल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भोपाल के राजनीतिक और छात्र समुदाय में चर्चा का दौर तेज कर दिया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रेस कॉन्फ्रेंस में मयंक ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी किसी पारंपरिक राजनीतिक दल के जैसे नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक आंदोलन है जो युवाओं की आवाज को व्यवस्था की खामियों और ढीले सिस्टम के खिलाफ उठाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है और अब युवा चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब युवा सवाल उठाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी रोक लगाने की बातें सामने आती हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मयंक ने बताया कि जल्द ही मध्य प्रदेश स्तर पर पार्टी की कोर कमेटी का ऐलान किया जाएगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके बाद संगठन विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विदेशी फॉलोअर्स और राजनीतिक आरोपों को लेकर आए सवालों का जवाब देते हुए इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी दुष्प्रचार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">करार दिया। उनका यह कहना रहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे सिस्टम की कमियों के खिलाफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कार्यपालिका से लेकर विपक्ष तक सभी शामिल हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह युवाओं को जागरूक करने की एक शुरुआत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि वे स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा सकें। आंदोलन के संस्थापक के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि विचार कहीं से भी आ सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थान से ज्यादा उद्देश्य महत्वपूर्ण होता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूरे कार्यक्रम के दौरान एक खास प्रतीकात्मक अंदाज भी देखने को मिला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेलोडी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">चॉकलेट पर भी चर्चा की गई। मयंक ने बताया कि यह व्यवस्था को करीब से देखने और उसके अनुभव को समझने का प्रतीक है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी तरफ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस नाम और आंदोलन के बारे में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे युवाओं की नाराजगी का प्रतीक मान रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ इसे एक डिजिटल या वैचारिक प्रयोग के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक हलकों में भी इसके प्रति अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट में युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी के बाद </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम चर्चा में आया था और अब भोपाल में इसकी सक्रियता ने इसे और भी सुर्खियों में ला दिया है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/entry-of-cockroach-janata-party-in-mp-press-conference-in/article-53983</link>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>21 जून को फिर होगी NEET परीक्षा, पेपर लीक के बाद NTA ने घोषित की नई तारीख</title>
                                    <description><![CDATA[NTA ने NEET UG 2026 री-एग्जाम की तारीख घोषित कर दी है। पेपर लीक विवाद के बाद अब 21 जून को दोबारा परीक्षा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/neet-exam-will-be-held-again-on-june-21-after/article-53384"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-15t095913.103.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>NEET Re-Exam 2026 Date:</strong> नीट यूजी 2026 री-एग्जाम की तारीख आखिरकार आ गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने बताया है कि अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को फिर से आयोजित की जाएगी। देशभर के लाखों छात्र इस फैसले का इंतजार कर रहे थे। तीन मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद काफी विवाद खड़ा हो गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चलते केंद्र सरकार और एजेंसी पर काफी दबाव बढ़ गया था। अब परीक्षा रद्द होने के बाद इसे नए सिरे से कराने का निर्णय लिया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुवार शाम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के घर पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा पर लंबी चर्चा की गई। इस बैठक में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ </span>NTA, CBSE, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति के अधिकारी भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरान परीक्षा केंद्रों की निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्नपत्र की सुरक्षा और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे कई मुद्दों पर बात की गई। हाल के दिनों में पेपर लीक के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। इसलिए इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सख्त करने की तैयारी की जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नीट परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी गई। कई शहरों में विरोध प्रदर्शन भी हुए। सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल उठ रहा था कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा का पेपर लीक कैसे हुआ। करीब 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में भाग लिया था और उनमें से कई अब दोबारा तैयारी में जुट गए हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि अचानक री-एग्जाम का दबाव मानसिक रूप से काफी भारी पड़ रहा है। वहीं कई अभिभावकों ने सुझाव दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर इस बार अधिक सुरक्षा इंतजाम किए जाएं ताकि फिर कोई गड़बड़ी न हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने गुरुवार को पांच लोगों को हिरासत में लिया है और दो अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कहीं </span>NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">से जुड़े किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही। अधिकारियों के अनुसार कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई है और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि पेपर लीक नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसमें विभिन्न स्तरों पर लोगों की संभावित संलिप्तता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NTA <span lang="hi" xml:lang="hi">जल्द ही री-एग्जाम के लिए विस्तृत नोटिफिकेशन और एडमिट कार्ड की जानकारी जारी कर सकता है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर भरोसा करें। शिक्षा मंत्रालय ने भी संकेत दिए हैं कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया के लिए निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 10:00:25 +0530</pubDate>
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