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                <title>Petrol - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Petrol RSS Feed</description>
                
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                <title>कच्चा तेल छह महीने के निचले स्तर पर, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर मजबूत मार्जिन कमा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/crude-oil-price-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसका फायदा अब तक देश के आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया है। अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने वाला कच्चा तेल अब करीब छह महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। इंडियन बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की कीमत घटकर 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। यह युद्ध के दौरान बने करीब 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो चुका है तो घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा हालात में सरकारी तेल विपणन कंपनियां अच्छी स्थिति में हैं। डीएएम कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा कच्चे तेल की कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 10.5 रुपए और डीजल पर लगभग 11 रुपए प्रति लीटर तक का मार्जिन हासिल कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब कंपनियां लगभग ब्रेक ईवन की स्थिति में होती हैं, यानी न उन्हें विशेष लाभ होता है और न ही नुकसान। चूंकि 1 जून के बाद से कच्चे तेल की कीमत लगातार इस स्तर से नीचे बनी हुई है, इसलिए कंपनियां पिछले कई सप्ताह से मुनाफे में कारोबार कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें धीरे-धीरे नीचे आने लगीं। शुरुआती युद्धविराम के बाद भी कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा और अब यह 70 डॉलर के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं दी है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच असंतोष भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं रहा। वर्ष 2018 में जब कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल था, तब दिल्ली में पेट्रोल लगभग 72 रुपए और डीजल करीब 70 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल की कीमत गिरकर करीब 43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, लेकिन खुदरा कीमतों में वैसी राहत देखने को नहीं मिली जैसी उपभोक्ता उम्मीद कर रहे थे। बाद में 2022 में जब कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि जनवरी 2023 में कच्चे तेल के दाम फिर करीब 75 डॉलर तक आ गए, लेकिन उस समय भी खुदरा कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया। तेल कंपनियों का तर्क था कि वे पहले हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह भी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों वाले दौर में भी तेल कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना रहा। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख तेल कंपनियों के नतीजे सकारात्मक रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चार बड़ी तेल कंपनियों का संयुक्त मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 22 प्रतिशत तक बढ़ा। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था और मार्च के दौरान इसका औसत भाव भी 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहा। इसके बावजूद कंपनियों के मुनाफे में कमी नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच निजी क्षेत्र की ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को अपने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले के बाद कई शहरों में नायरा के पंपों पर ईंधन सरकारी कंपनियों की तुलना में सस्ता मिलने लगा। भोपाल जैसे शहरों में भी नायरा के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। हालांकि इसके बाद भी सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का हवाला देते हुए चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नियंत्रण में हैं, इसलिए इन कंपनियों के फैसलों का असर सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। फिलहाल कीमतों में कटौती नहीं होने से आम लोगों की जेब पर बोझ बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>E20 पेट्रोल पर भूटान का बड़ा फैसला, भारत से मांगा सिर्फ नॉर्मल पेट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने फ्यूल स्टोरेज, पानी रिसाव और पहाड़ी इलाकों में इंजन पर असर की आशंका जताई; भारत से एडवांस सूचना और लीक-प्रूफ टैंक की भी मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bhutans-big-decision-on-e20-petrol-asked-for-only-normal/article-57925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhutan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत सरकार जहां देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने इस ईंधन को लेने से फिलहाल इनकार कर दिया है। भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से स्पष्ट रूप से अनुरोध किया है कि जब तक भारत में सामान्य (बिना एथेनॉल मिश्रण वाला) पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उसे वही सप्लाई किया जाए। भूटान का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में E20 पेट्रोल का उपयोग उसके लिए तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। सरकार ने इस फैसले के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण देश का पुराना फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, अंडरग्राउंड टैंकों में पानी रिसने की समस्या और पहाड़ी इलाकों में वाहनों की परफॉर्मेंस को लेकर चिंता शामिल है। भूटान का मानना है कि इन परिस्थितियों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल वाहनों और ईंधन भंडारण व्यवस्था दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पुराना स्टोरेज सिस्टम बना सबसे बड़ी चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन को जमीन के नीचे बने स्टील के टैंकों में संग्रहित किया जाता है। कई स्थानों पर ये टैंक पुराने हो चुके हैं और उनमें पानी के रिसाव की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल में नमी को तेजी से सोखने की क्षमता होती है। यदि स्टोरेज टैंक में थोड़ी भी नमी या पानी मौजूद हो तो E20 पेट्रोल उसे अपने अंदर मिला सकता है। ऐसी स्थिति में ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा स्टील टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे भविष्य में रखरखाव की लागत अधिक हो सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पहाड़ी रास्तों पर प्रदर्शन को लेकर आशंका</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान का अधिकांश भूभाग पहाड़ी है, जहां तीखी चढ़ाइयों और घुमावदार सड़कों पर वाहन चलाने के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होती है। इससे कठिन पहाड़ी मार्गों पर इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि भारत सरकार और कई ऑटोमोबाइल निर्माता E20 को सुरक्षित बताते हैं, लेकिन भूटान का कहना है कि वह अपने स्थानीय भौगोलिक हालात और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस ईंधन को अपनाने के लिए तैयार नहीं है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में भी जारी है बहस</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देश में E20 पेट्रोल को लेकर पहले से ही चर्चा और बहस जारी है। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों ने दावा किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण माइलेज में कमी आती है और कुछ मामलों में इंजन के रखरखाव की लागत बढ़ जाती है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि E20 ईंधन से प्रदूषण कम होता है, विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। सरकार का यह भी दावा है कि E20 के कारण इंजन की कार्यक्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत से ही खरीदता है पूरा ईंधन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान अपनी पेट्रोल और डीजल की लगभग पूरी आवश्यकता भारत से पूरी करता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। वर्तमान में भूटान को उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में गलती से भी E20 पेट्रोल की आपूर्ति हो जाती है तो उसकी पहचान करना कठिन नहीं होगा। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में यदि पानी मिल जाए तो उसका रंग दूधिया दिखाई देने लगता है, जिससे परीक्षण के दौरान आसानी से पता लगाया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भविष्य के लिए पहले से सूचना की मांग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाया जाता है या सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया जाता है, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। इससे भूटान को अपने स्टोरेज सिस्टम और वितरण नेटवर्क में आवश्यक बदलाव करने का समय मिल सकेगा। इसके साथ ही भूटान ने लीक-प्रूफ और आधुनिक ईंधन भंडारण टैंक उपलब्ध कराने में भी भारत से सहयोग की अपेक्षा जताई है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद भविष्य में E20 जैसे ईंधन को अपनाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:42:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फैसला 2-3 महीने बाद, महंगे कच्चे तेल के असर से सरकार ने जताई इंतजार की बात</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान संकट के दौरान खरीदे गए महंगे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग जारी, सरकारी तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/decision-on-petrol-and-diesel-prices-will-be-taken-after/article-57712"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/petrol-diesel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे या नहीं, इस पर कोई फैसला अगले दो से तीन महीनों में ही संभव होगा। फिलहाल सरकार या सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में कटौती को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं। मंत्री के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका असर घरेलू बाजार में तुरंत दिखाई नहीं देगा क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं जिसे ईरान संकट के दौरान ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जब ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात बने थे, तब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उस समय देश की तेल कंपनियों ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊंचे दामों पर कच्चा तेल खरीदा था। अब वही स्टॉक रिफाइनरियों में प्रोसेस हो रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने के बावजूद घरेलू स्तर पर तत्काल राहत देना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दो-तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नियंत्रित बनी रहती हैं, तब पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री ने सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस बेचने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है। 30 जून तक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को कुल 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान केवल मौजूदा अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले महीनों की भरपाई का असर भी इसमें शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से जून की तिमाही में केवल पेट्रोल पर लगभग 19,905 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। वहीं डीजल पर नुकसान का आंकड़ा और भी अधिक रहा। इसके अलावा घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर भी कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। मंत्री ने कहा कि यदि पिछले वर्षों और पिछली तिमाहियों के एलपीजी नुकसान को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो कुल अंडर-रिकवरी का आंकड़ा 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि विभिन्न वित्तीय समायोजनों के बाद मौजूदा कुल नुकसान 74,781 करोड़ रुपये बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इसी वर्ष मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में चरणबद्ध तरीके से 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से करीब 90 प्रतिशत पर इन्हीं तीन सरकारी कंपनियों का संचालन है। ऐसे में इनके द्वारा लिया गया कोई भी फैसला सीधे तौर पर करोड़ों उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। फिलहाल इन कंपनियों ने कीमतों में किसी तरह की कटौती की घोषणा नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कमी की है। कंपनी ने पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके बाद भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपये से घटकर 114.79 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 102.57 रुपये से घटकर 99.57 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इससे यह संकेत मिला है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो अन्य कंपनियां भी भविष्य में इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर लौट आई हैं। इससे ऊर्जा बाजार में कुछ स्थिरता आई है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पुराने महंगे स्टॉक के प्रभाव से बाहर नहीं निकली हैं। यही वजह है कि आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:09:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल खरीद पर सभी पाबंदियां खत्म, 1 जुलाई से रीटेल पंपों से मिलेगी पूरी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[1 जुलाई से कॉमर्शियल खरीदार भी रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे, 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा भी समाप्त होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/all-restrictions-on-purchase-of-petrol-and-diesel-ended-complete/article-57373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-or-diesel.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लागू सभी आपातकालीन पाबंदियों को 1 जुलाई 2026 से हटाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता भी सामान्य ग्राहकों की तरह रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक वाहन में एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून को नया आदेश जारी करते हुए पहले लगाए गए प्रतिबंध वापस ले लिए। मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति अब सामान्य हो चुकी है, इसलिए इन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रही। सरकार ने 11 जून को पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। उस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई थी। हालात को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इन नियमों के तहत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, फैक्ट्रियों, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य कमर्शियल खरीदारों को रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल बल्क सेल प्वाइंट्स या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेना पड़ता था। प्रतिबंधों के दौरान आम वाहनों और ट्रकों के लिए भी एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कृत्रिम कमी पैदा न हो और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से आपूर्ति बनी रहे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में सप्लाई की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई भी पहले की तुलना में सामान्य हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रीटेल और थोक बाजार में डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था। उदाहरण के तौर पर, रीटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत काफी कम थी, जबकि थोक खरीदारों के लिए इसकी कीमत कहीं अधिक पड़ रही थी। इसी कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, बस ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनियां सीधे रीटेल पंपों से ईंधन खरीदने लगी थीं। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बनने लगा। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। सरकार का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति सामान्य होने के कारण भारत को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति मिलने लगी है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऑयल शिपमेंट्स फिर से सुचारु होने से घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। पहले ट्रक ऑपरेटरों और बस कंपनियों को निर्धारित सीमा के कारण कई बार अलग-अलग पेट्रोल पंपों से डीजल लेना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। इसी तरह निर्माण कार्यों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को भी ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह आसान हो जाएगी। प्रतिबंध हटने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और ईंधन की खरीद की प्रक्रिया सामान्य होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। यदि भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति संबंधी चुनौती सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की बात नहीं बताई गई है। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं और बड़े व्यावसायिक खरीदारों दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर केंद्र की सख्ती, डीजल बिक्री पर नई सीमा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीद पर रोक लगाई, डीजल खरीद 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-strictness-on-bulk-purchase-of-petrol-and-diesel-new/article-55707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-diesel-restrictions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को बनाए रखने और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही डीजल की बिक्री को प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तक सीमित कर दिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में डीजल की मांग अचानक बढ़ी थी। इसके पीछे एक बड़ी वजह खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है। कई उद्योग, संस्थान और बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन खरीदने के लिए सीधे पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे उन खुदरा केंद्रों पर दबाव बढ़ने लगा जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती तो कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता था। यही कारण है कि मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आदेश के तहत औद्योगिक, संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरत का ईंधन निर्धारित थोक आपूर्ति केंद्रों या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से लेना होगा। खुदरा पेट्रोल पंपों से की जाने वाली बड़ी खरीदारी पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है। साथ ही डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य आम लोगों के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बड़े अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता खुदरा बाजार से ईंधन खरीदने लगे थे। बताया जा रहा है कि टेलीकॉम टावर संचालक, निर्माण क्षेत्र से जुड़े संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयां भी खुदरा पंपों से डीजल खरीद रही थीं। इससे सरकारी तेल कंपनियों के खुदरा बिक्री आंकड़ों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई महीने में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अपने आदेश में मौजूदा वैश्विक हालात का भी उल्लेख किया है। मंत्रालय के अनुसार दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग नेटवर्क को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में ईंधन संसाधनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव बढ़ता है तो कई देशों को ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन की अवैध बिक्री जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेनदेन को इस आदेश से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए अलग से विशेष आदेश जारी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा, 9 दिन में तीसरी बढ़ोतरी, भोपाल में पेट्रोल 111.71 रुपये लीटर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोलियम कंपनियों ने 9 दिन में तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए। भोपाल में पेट्रोल 111.71 रुपए प्रति लीटर पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/petrol-became-costlier-by-87-paise-and-diesel-by-91/article-54009"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/madhya-pradesh-petrol-diesel-rates.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं। शनिवार सुबह नए दामों के ऐलान के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल और मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत एक रुपए से ज्यादा बढ़ गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 111.71 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। कीमतों में लगातार हो रही इस वृद्धि ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। खासकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोग रोजाना गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे इसे लेकर काफी नाराज दिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्र बताते हैं कि यह मई में तीसरी बार है जब दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 15 मई को दाम में लगभग 3 रुपए और 19 मई को करीब 90 पैसे का इजाफा हुआ था। नए दामों के बाद इस महीने पेट्रोल-डीजल की कीमत लगभग 5 रुपए तक बढ़ चुकी है। सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लोग नए रेट्स पर चर्चा करते नजर आए। कुछ ड्राइवरों का कहना था कि पहले से ही महंगाई का असर उनके घर के बजट पर पड़ रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब ईंधन के महंगे होने से रोजाना के खर्चे बढ़ने की आशंका है। भोपाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में इन नई कीमतों का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और बाजार पर पड़ सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस वृद्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच का बढ़ता तनाव क्रूड ऑयल की कीमत को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार ले गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ हफ्ते पहले यही कीमत करीब 70 डॉलर थी। तेल कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कीमतों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत अपनी जरूरत के अधिकांश कच्चे तेल का आयात करता है। इसीलिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और वैश्विक बाजार का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। कच्चे तेल की खरीद के बाद उसे रिफाइनरी में प्रोसेस करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और फिर उस पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट जोड़ा जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में दाम अलग-अलग होते हैं। मध्य प्रदेश में वैट अधिक होने के कारण यहां की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में ऊंची रहती हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2024 के बाद काफी समय तक ईंधन के दाम स्थिर रहे थे। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल कंपनियां लगातार घाटे की बात कह रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और एलपीजी बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा है। इसलिए कंपनियों पर दाम बढ़ाने का काफी दबाव रहा है। अब आम जनता की नज़र इस पर है कि आने वाले दिनों में कुछ राहत मिलेगी या फिर ईंधन और महंगा होगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 10:46:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक हफ्ते में दूसरी बार झटका, पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े, देखें नए रेट </title>
                                    <description><![CDATA[देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिर बढ़ीं। 91 पैसे प्रति लीटर इजाफा, दिल्ली समेत बड़े शहरों में ईंधन महंगा, महंगाई का दबाव बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a0bf560b28a2/article-53741"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-price-hike-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Petrol Diesel Price Hike:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब देश में फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। मंगलवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में औसतन </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। ये बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब कुछ ही दिन पहले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी करीब </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। अब दिल्ली में पेट्रोल की नई कीमत </span>98.64<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि डीजल </span>91.58<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी रोजमर्रा की लागत पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ हफ्तों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊपर-नीचे हो रही थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन घरेलू स्तर पर कंपनियां लंबे समय से पुराने दामों पर ही ईंधन बेच रही थीं। इसी कारण उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ा। बताया जा रहा है कि लगभग </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> हफ्तों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (</span>OMCs) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर काफी दबाव बढ़ गया था। अब जब बढ़ोतरी शुरू हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका असर शहरों में साफ दिख रहा है। मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी ईंधन की कीमतें </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे से लेकर करीब </span>96<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर तक बढ़ी हैं। मुंबई में पेट्रोल </span>107.59<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये और डीजल </span>94.08<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कोलकाता में यह </span>109.70<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर के आसपास बताया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिछले हफ्ते हुई </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की बढ़ोतरी के बाद भी कंपनियों का पूरा घाटा नहीं कवर हो पाया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा जानकारों का मानना है। अब मंगलवार को हुई इस नई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोग ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि डीजल की कीमतों में इजाफा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका सीधा असर सब्जियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा। छोटे व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही बाजार में मांग कमजोर है और अब ईंधन के महंगे होने से लागत और बढ़ रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि बस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैक्सी और निजी वाहनों की संचालन लागत भी धीरे-धीरे ऊपर जा रही है।</span></span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बनी रहीं या और भी बढ़ गईं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले दिनों में एक और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई का दबाव और बढ़ेगा। रोजमर्रा की चीजों की कीमतें पहले से ही अधिक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में यह नई बढ़ोतरी आम बजट पर और भी भारी पड़ सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:33:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा झटका, 3 रुपये प्रति लीटर बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में नए रेट लागू, आम जनता पर असर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-shock-in-petrol-and-diesel-prices-prices-increased-by/article-53428"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-price-hike.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Petrol Diesel Price Hike:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से इजाफा होने से आम लोगों पर असर पड़ने लगा है। शुक्रवार से पूरे देश में ईंधन की कीमतों में औसतन 3 रुपये प्रति लीटर का बढ़ावा देखा गया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। दिल्ली सहित देश के चार बड़े महानगरों में नए दामों के लागू होते ही पेट्रोल-डीजल की दरें फिर से चर्चा का विषय बन गई हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमतें 3.29 रुपये बढ़कर 108.74 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। मुंबई में भी यह हालात कुछ भिन्न नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहां पेट्रोल 3.14 रुपये बढ़कर 106.68 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 2.83 रुपये बढ़कर 103.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इस अचानक आई बढ़ोतरी के बाद से सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर लोगों के बीच कीमतों को लेकर चर्चा और असंतोष का माहौल देखने को मिला।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डीजल की कीमतों में भी इसी तरह का इजाफा हुआ है। दिल्ली में डीजल 3 रुपये बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले 87.67 रुपये पर मिल रहा था। कोलकाता में डीजल की कीमतें 3.11 रुपये बढ़कर 95.13 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। मुंबई में भी डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 93.14 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में डीजल की कीमत 2.86 रुपये बढ़कर 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गई है। कई जगहों पर लोग पुराने और नए रेट को लेकर उलझन में नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पेट्रोल पंप के कर्मचारियों को ग्राहकों को समझाने में मुश्किल का सामना करना पड़ा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ती कीमतों का संकेत पहले से ही मिल रहा था। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अस्थिरता के चलते ईंधन की कीमतों में आगे बदलाव से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया था कि पिछले चार सालों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई थी और अंतिम बार 2022 में संशोधन किया गया था। मंत्रालय के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल विपणन कंपनियां अब भारी वित्तीय दबाव में हैं और उनकी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अंडर-रिकवरी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
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