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                <title>Strategic Partnership - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Strategic Partnership RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत-इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग मजबूत, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीद पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक में रक्षा, चुनावी तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/defense-cooperation-between-india-and-indonesia-strengthened-agreement-on-purchase/article-58049"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-indonesia-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। सबसे बड़ा फैसला ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद को लेकर रहा। फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। अधिकारियों के अनुसार इस समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भारत की रक्षा तकनीक पर बढ़ते वैश्विक भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान इंडोनेशिया ने भारत में विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया। यह वही मिसाइल है, जिसका उपयोग हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस फैसले से भारतीय रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी सफलता मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की लगातार बढ़ती मांग भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक देशों की सूची में और मजबूत स्थिति दिला सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है और अब उसके उत्पाद कई देशों का भरोसा जीत रहे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच चुनावी तकनीक के क्षेत्र में भी अहम सहमति बनी है। भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम विकसित करने में तकनीकी सहायता देगा। इसे भारत की चुनाव प्रणाली और तकनीकी क्षमता पर इंडोनेशिया के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस सहयोग का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है। भारत पहले भी कई देशों के साथ डिजिटल प्रशासन और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाता रहा है और अब इसमें चुनावी प्रबंधन भी शामिल हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। सुबह जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। समारोह के दौरान वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों और बच्चों ने भी उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति भवन में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग सहित कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से दुनिया का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी रक्षा प्रणालियों के निर्यात से भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी, वहीं इंडोनेशिया की रक्षा क्षमताओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जावा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर भी जाने वाले हैं। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी। सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के विमान को इंडोनेशियाई वायुसेना ने अपने एयरस्पेस में प्रवेश करते ही एस्कॉर्ट किया था। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और सम्मान का प्रतीक माना गया। दो दिवसीय यात्रा के दौरान हुए समझौते यह संकेत देते हैं कि भारत और इंडोनेशिया अब केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रक्षा, तकनीक, लोकतांत्रिक संस्थाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉ. जयशंकर और मार्क रुबियो के बीच हुई प्रेस वार्ता, भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद हाउस में डॉ. एस जयशंकर और मार्को रुबियो की बैठक में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/press-conference-between-dr-jaishankar-and-mark-rubio-laid-emphasis/article-54129"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-us-relations-s.-jaishankar-marco-rubio.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत और अमेरिका के बीच की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए रविवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की और साफ तौर पर संकेत दिए कि भविष्य में दोनों देशों का सहयोग और भी बढ़ने वाला है। यह मार्को रुबियो का अमेरिका के विदेश मंत्री के रूप में भारत का पहला दौरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ एक सामान्य रिश्ता नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सोच और हित एक समान हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर दुनिया के अन्य क्षेत्रों पर भी होता है। जयशंकर ने यह भी कहा कि इस समय बहुत सारी चुनौतियाँ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एक मजबूत साझेदार के रूप में दोनों देश मिलकर आगे बढ़ेंगे। वार्ता में वेस्ट एशिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्व एशिया के हालात पर भी चर्चा की गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्को रुबियो के बीच हुई मुलाकात में भी कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में तेज़ी से बदलती स्थितियों पर भी दोनों पक्षों ने गंभीरता से चर्चा की। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संवाद बना हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी वजह से दोनों देश बड़े पैमाने पर सहयोग को आगे बढ़ा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रुबियो के पदभार संभालने के पहले दिन से ही दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ होने के नाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई मामलों में एक-दूसरे के हितों से जुड़े हुए हैं। रुबियो ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह वैश्विक स्तर पर कई मुद्दों के लिए साझेदारी को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक रणनीतिक साझेदारी का मतलब सिर्फ सहयोग नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साझा चुनौतियों के समाधान करने के लिए मिलकर काम करना भी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी कहा कि भारत का यह दौरा उनके लिए बहुत मायने रखता है। रुबियो ने माना कि दुनिया में बदलते हालात में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और अमेरिका भारत के साथ मिलकर कई वैश्विक चुनौतियों पर काम करना चाहता है। प्रेस वार्ता के दौरान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों नेताओं ने रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने के लिए चर्चा की।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली में हुई इस बैठक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात के मद्देनज़र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों का करीबी सहयोग आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक और वैश्विक राजनीति पर असर डाल सकता है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में कई और बड़े स्तर की बैठकों और समझौतों की संभावना बनी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:57:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पांच देशों का दौरा खत्म कर दिल्ली लौटे पीएम मोदी, जानें भारत को क्या होगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा पूरी कर दिल्ली लौटे। इटली के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनी, शाम को कैबिनेट बैठक भी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-returned-to-delhi-after-completing-his-tour-of/article-53858"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/narendra-modi-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों के दौरे से दिल्ली लौट आए। इस दौरे को भारत की कूटनीतिक गतिविधियों और वैश्विक साझेदारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीदरलैंड्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वीडन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इटली में उनकी मुलाकात वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से हुई। दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर गहन चर्चा की और भारत-इटली संबंधों को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष रणनीतिक साझेदारी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के स्तर पर लाने पर सहमति जताई। इस निर्णय को आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इटली से रवाना होने से पहले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी ने यात्रा को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि भारत और इटली के रिश्तों को नई दिशा देने का यह फैसला दोनों देशों के लिए बड़ी बात है। इस दौरान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेलोडी मोमेंट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भी चर्चा में रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्होंने मेलोनी को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेलोडी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">टॉफियों का एक पैकेट भेंट किया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए और इस पर हल्की-फुल्की चर्चा हुई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरे में व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत और इटली के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। खबरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और अंतरिक्ष सहयोग पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि भारत ने इस समय अपने संतुलित कूटनीतिक रुख को दोहराया। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और भारत वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाने में लगा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस दौरे को केवल द्विपक्षीय मुलाकातों तक सीमित नहीं माना जा सकता।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली लौटने के बाद पीएम मोदी का कार्यक्रम बहुत व्यस्त रहने वाला है। गुरुवार शाम 5 बजे वे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा तीर्थ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे सरकार के कामकाज की मध्यावधि समीक्षा से जोड़ा जा रहा है। बैठक में कई मंत्रालयों के कामकाज और आगामी योजनाओं पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक हलकों में भी इस बैठक को लेकर काफी हलचल है। कहा जा रहा है कि कुछ बड़े प्रशासनिक फैसलों पर भी चर्चा हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी के इस पांच देशों के दौरे को सरकार भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानती है। विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:14:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने भारत को दिया बड़ा रक्षा तोहफा, बढ़ेगी सैन्य ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने भारत को Apache हेलीकॉप्टर और M777 तोपों के लिए 428 मिलियन डॉलर का रक्षा सपोर्ट पैकेज मंजूर किया, जिससे सेना की क्षमता बढ़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-gave-a-big-defense-gift-to-india-military-strength/article-53779"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-us-defence-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका ने भारत के साथ अपनी रक्षा भागीदारी को मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत के लिए 428 मिलियन डॉलर से अधिक का सपोर्ट और मेंटेनेंस पैकेज मंजूर किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">अटैक हेलीकॉप्टर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। ये सभी सेवाएं </span>Foreign Military Sales (FMS) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम के तहत प्रदान की जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदार देशों को सैन्य उपकरण और सपोर्ट देने के लिए उपयोग करता है। बताया जा रहा है कि इस पैकेज में </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम के लिए लगभग 198.2 मिलियन डॉलर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपों के लिए करीब 230 मिलियन डॉलर का दीर्घकालिक मेंटेनेंस सपोर्ट शामिल है। यह डील उस समय सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को लेकर पहले से ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों के लिए जो सपोर्ट पैकेज मंजूर हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें सिर्फ मशीनरी या पार्ट्स नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट की पूरी व्यवस्था शामिल है। इसमें इंजीनियरिंग सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिकेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेनिंग और फील्ड सपोर्ट जैसी सेवाएं दी जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भारतीय सेना के </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">बेड़े की ऑपरेशनल क्षमता लंबे समय तक मजबूत बनी रहे। इस प्रोग्राम में अमेरिका की दो बड़ी कंपनियाँ </span>Boeing <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Lockheed Martin <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख ठेकेदार के रूप में काम कर रही हैं। इस सपोर्ट से </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों की सर्विसिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेंटेनेंस और मिशन रेडीनेस में काफी सुधार की उम्मीद है। ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील ऑपरेशनों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही है। इसलिए इस नए पैकेज से इनकी उपलब्धता और तकनीकी निर्भरता दोनों में संतुलन आने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 </span>Ultra-Light Howitzers <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए लगभग 230 मिलियन डॉलर का लॉन्ग-टर्म सपोर्ट पैकेज भी मंजूर हुआ है। इसमें स्पेयर पार्ट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपेयर सर्विस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फील्ड सर्विस प्रतिनिधि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और डिपो स्तर का सपोर्ट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इस डील में ब्रिटेन की </span>BAE Systems <span lang="hi" xml:lang="hi">को मुख्य ठेकेदार बनाया गया है। </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपें भारतीय सेना के लिए खासकर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भारी तोपों की तैनाती मुश्किल होती है। लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्वी सीमाओं तक इनकी तैनाती ने सेना की मारक क्षमता को सटीक और तेज बना दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह सौदा भारत की मौजूदा और भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये उम्मीद जताई गई है कि इस सहयोग से भारत की रक्षा प्रणालियों में तकनीकी मजबूती आएगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और अधिक स्थिर होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>भारत और UAE के बीच हुई LPG और डिफेंस फ्रेमवर्क डील, 5 अरब डॉलर निवेश पर भी सहमति बनी</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी के UAE दौरे में LPG सप्लाई डील, डिफेंस फ्रेमवर्क और 5 अरब डॉलर निवेश पर सहमति बनी। भारत-यूएई रिश्ते और मजबूत हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lpg-and-defense-framework-deal-signed-between-india-and-uae/article-53430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-uae-relations-lpg-agreement.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संयुक्त अरब अमीरात दौरा इस बार काफी महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक निर्णयों के लिए जाना गया। पाँच देशों की यात्रा के पहले चरण में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी शुक्रवार को यूएई की राजधानी अबू धाबी पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उनका शानदार स्वागत राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने किया। यह मुलाकात उस समय हुई जब दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले से ही मजबूत थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार की बातचीत ने इसे नए स्तर पर पहुंचा दिया। प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों के बीच ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा और निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई डील और डिफेंस फ्रेमवर्क शामिल हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के दौरान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और यूएई ने एक नई रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने पर सहमति जताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर एक एमओयू साइन किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लिक्विड पेट्रोलियम गैस (</span>LPG) <span lang="hi" xml:lang="hi">की आपूर्ति पर भी एक बड़ा समझौता हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत में ऊर्जा की आवश्यकताओं को स्थिर करने में मदद मिलने की संभावना है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात के वडिनार में एक शिप रिपेयरिंग क्लस्टर विकसित करने पर भी सहमति बनी। निवेश के मोर्चे पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूएई ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर</span>, RBL <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक और सम्मान कैपिटल में करीब 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इन निर्णयों को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरे का माहौल कूटनीतिक गर्मजोशी से भरा रहा। जैसे ही </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी का विमान यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ</span>, UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">वायुसेना के </span>F-<span lang="hi" xml:lang="hi">16 लड़ाकू विमानों ने उन्हें एस्कॉर्ट किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सम्मान के रूप में देखा गया। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी का स्वागत करते हुए दोनों देशों की दोस्ती को "विशेष और ऐतिहासिक" बताया। वहीं</span>, PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने इस मुलाकात को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए कहा कि वे यूएई को अपना "दूसरा घर" मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल हालात में यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देखभाल जो तरीके से की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सराहनीय है। बातचीत के दौरान</span>, PM <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों की निंदा की और इसे अस्वीकार्य बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संयम और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। यूएई ने भी इस दौरे के दौरान भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञ इस दौरे को दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग और निवेश साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। खासकर </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">डील और डिफेंस फ्रेमवर्क को आने वाले समय में रणनीतिक साझेदारी की रीढ़ माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:14:45 +0530</pubDate>
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