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                <title>Transport - दैनिक जागरण</title>
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                <title>E20 पेट्रोल पर भूटान का बड़ा फैसला, भारत से मांगा सिर्फ नॉर्मल पेट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने फ्यूल स्टोरेज, पानी रिसाव और पहाड़ी इलाकों में इंजन पर असर की आशंका जताई; भारत से एडवांस सूचना और लीक-प्रूफ टैंक की भी मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bhutans-big-decision-on-e20-petrol-asked-for-only-normal/article-57925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhutan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत सरकार जहां देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने इस ईंधन को लेने से फिलहाल इनकार कर दिया है। भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से स्पष्ट रूप से अनुरोध किया है कि जब तक भारत में सामान्य (बिना एथेनॉल मिश्रण वाला) पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उसे वही सप्लाई किया जाए। भूटान का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में E20 पेट्रोल का उपयोग उसके लिए तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। सरकार ने इस फैसले के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण देश का पुराना फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, अंडरग्राउंड टैंकों में पानी रिसने की समस्या और पहाड़ी इलाकों में वाहनों की परफॉर्मेंस को लेकर चिंता शामिल है। भूटान का मानना है कि इन परिस्थितियों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल वाहनों और ईंधन भंडारण व्यवस्था दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पुराना स्टोरेज सिस्टम बना सबसे बड़ी चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन को जमीन के नीचे बने स्टील के टैंकों में संग्रहित किया जाता है। कई स्थानों पर ये टैंक पुराने हो चुके हैं और उनमें पानी के रिसाव की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल में नमी को तेजी से सोखने की क्षमता होती है। यदि स्टोरेज टैंक में थोड़ी भी नमी या पानी मौजूद हो तो E20 पेट्रोल उसे अपने अंदर मिला सकता है। ऐसी स्थिति में ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा स्टील टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे भविष्य में रखरखाव की लागत अधिक हो सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पहाड़ी रास्तों पर प्रदर्शन को लेकर आशंका</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान का अधिकांश भूभाग पहाड़ी है, जहां तीखी चढ़ाइयों और घुमावदार सड़कों पर वाहन चलाने के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होती है। इससे कठिन पहाड़ी मार्गों पर इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि भारत सरकार और कई ऑटोमोबाइल निर्माता E20 को सुरक्षित बताते हैं, लेकिन भूटान का कहना है कि वह अपने स्थानीय भौगोलिक हालात और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस ईंधन को अपनाने के लिए तैयार नहीं है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में भी जारी है बहस</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देश में E20 पेट्रोल को लेकर पहले से ही चर्चा और बहस जारी है। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों ने दावा किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण माइलेज में कमी आती है और कुछ मामलों में इंजन के रखरखाव की लागत बढ़ जाती है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि E20 ईंधन से प्रदूषण कम होता है, विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। सरकार का यह भी दावा है कि E20 के कारण इंजन की कार्यक्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत से ही खरीदता है पूरा ईंधन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान अपनी पेट्रोल और डीजल की लगभग पूरी आवश्यकता भारत से पूरी करता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। वर्तमान में भूटान को उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में गलती से भी E20 पेट्रोल की आपूर्ति हो जाती है तो उसकी पहचान करना कठिन नहीं होगा। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में यदि पानी मिल जाए तो उसका रंग दूधिया दिखाई देने लगता है, जिससे परीक्षण के दौरान आसानी से पता लगाया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भविष्य के लिए पहले से सूचना की मांग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाया जाता है या सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया जाता है, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। इससे भूटान को अपने स्टोरेज सिस्टम और वितरण नेटवर्क में आवश्यक बदलाव करने का समय मिल सकेगा। इसके साथ ही भूटान ने लीक-प्रूफ और आधुनिक ईंधन भंडारण टैंक उपलब्ध कराने में भी भारत से सहयोग की अपेक्षा जताई है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद भविष्य में E20 जैसे ईंधन को अपनाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:42:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल खरीद पर सभी पाबंदियां खत्म, 1 जुलाई से रीटेल पंपों से मिलेगी पूरी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[1 जुलाई से कॉमर्शियल खरीदार भी रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे, 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा भी समाप्त होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/all-restrictions-on-purchase-of-petrol-and-diesel-ended-complete/article-57373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-or-diesel.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लागू सभी आपातकालीन पाबंदियों को 1 जुलाई 2026 से हटाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता भी सामान्य ग्राहकों की तरह रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक वाहन में एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून को नया आदेश जारी करते हुए पहले लगाए गए प्रतिबंध वापस ले लिए। मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति अब सामान्य हो चुकी है, इसलिए इन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रही। सरकार ने 11 जून को पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। उस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई थी। हालात को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इन नियमों के तहत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, फैक्ट्रियों, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य कमर्शियल खरीदारों को रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल बल्क सेल प्वाइंट्स या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेना पड़ता था। प्रतिबंधों के दौरान आम वाहनों और ट्रकों के लिए भी एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कृत्रिम कमी पैदा न हो और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से आपूर्ति बनी रहे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में सप्लाई की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई भी पहले की तुलना में सामान्य हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रीटेल और थोक बाजार में डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था। उदाहरण के तौर पर, रीटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत काफी कम थी, जबकि थोक खरीदारों के लिए इसकी कीमत कहीं अधिक पड़ रही थी। इसी कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, बस ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनियां सीधे रीटेल पंपों से ईंधन खरीदने लगी थीं। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बनने लगा। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। सरकार का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति सामान्य होने के कारण भारत को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति मिलने लगी है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऑयल शिपमेंट्स फिर से सुचारु होने से घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। पहले ट्रक ऑपरेटरों और बस कंपनियों को निर्धारित सीमा के कारण कई बार अलग-अलग पेट्रोल पंपों से डीजल लेना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। इसी तरह निर्माण कार्यों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को भी ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह आसान हो जाएगी। प्रतिबंध हटने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और ईंधन की खरीद की प्रक्रिया सामान्य होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। यदि भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति संबंधी चुनौती सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की बात नहीं बताई गई है। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं और बड़े व्यावसायिक खरीदारों दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अगस्त में खुलेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का अहम हिस्सा, एमपी से मुंबई तक सफर होगा और तेज</title>
                                    <description><![CDATA[वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर पूरा होने की तैयारी, मध्य प्रदेश के उद्योग, किसानों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/an-important-part-of-delhi-mumbai-expressway-will-open-in-august/article-57318"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-mumbai-expressway.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा अहम हिस्सा अब जल्द ही आम लोगों के लिए खुल सकता है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 31 अगस्त तक वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है। इस हिस्से के शुरू होने के बाद मध्य प्रदेश से मुंबई तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का रास्ता पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि वडोदरा से मुंबई तक का महत्वपूर्ण कॉरिडोर जल्द पूरा होने वाला है। अभी तक इसी हिस्से का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा था। एक्सप्रेसवे के अधिकांश हिस्से तैयार होने के बावजूद मुंबई तक निर्बाध हाई-स्पीड यात्रा संभव नहीं थी। अब इस कमी के दूर होने के बाद पूरे कॉरिडोर की उपयोगिता काफी बढ़ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। यह करीब 1,350 से 1,400 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर 12 लेन तक की जा सकती है। मध्य प्रदेश के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्सप्रेसवे राज्य के रतलाम, मंदसौर और झाबुआ जिलों से होकर गुजरता है। अभी तक मुंबई की दिशा में अंतिम कनेक्टिविटी पूरी नहीं होने से माल परिवहन और लंबी दूरी की यात्रा में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। वडोदरा-मुंबई सेक्शन चालू होने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी और राज्य को सीधा फायदा मिलने लगेगा। सबसे बड़ा लाभ व्यापार और उद्योग जगत को मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर इंदौर, पीथमपुर और देवास से तैयार होने वाला औद्योगिक सामान पहले की तुलना में कम समय में मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक पहुंच सकेगा। इससे निर्यात करने वाली कंपनियों की परिवहन लागत घटेगी और समय की भी बचत होगी। तेज और बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मालवा क्षेत्र से फल, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। मुंबई जैसे बड़े बाजार तक कम समय में कृषि उत्पाद पहुंचने से उनकी गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने का सीधा असर किसानों की आय पर भी पड़ सकता है। पर्यटन और आम यात्रियों के लिए भी यह परियोजना राहत लेकर आएगी। दिल्ली से मुंबई और मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र की ओर जाने वाले लोगों का सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आरामदायक होगा। एक्सप्रेसवे पर नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था होने के कारण ट्रैफिक बाधाएं कम रहेंगी और यात्रा का समय काफी घट जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इस पर वाहनों की निर्धारित गति 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है। मार्ग पर आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, सर्विस रोड, इमरजेंसी सहायता, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली और पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है। एक्सप्रेसवे के किनारे भविष्य में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की भी संभावना जताई जा रही है। करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजना देश के सबसे बड़े सड़क बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल है। इसका उद्देश्य केवल यात्रा को आसान बनाना नहीं बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे अपनी पूरी क्षमता के साथ उपयोग में आ सकेगा। मध्य प्रदेश के उद्योग, व्यापार, परिवहन और कृषि क्षेत्र को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यदि निर्धारित समय के अनुसार अगस्त के अंत तक यह हिस्सा चालू हो जाता है, तो आने वाले महीनों में लाखों यात्रियों और हजारों व्यवसायों के लिए यात्रा और माल परिवहन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल-ग्वालियर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को मिली रफ्तार, 80 किमी घटेगी दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नए 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए इसी महीने डीपीआर टेंडर होंगे जारी, सफर का समय भी करीब डेढ़ से दो घंटे तक कम होने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-gwalior-greenfield-corridor-gets-speed-distance-will-reduce-by-80/article-55713"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-gwalior-greenfield-corridor.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है और इसके लिए इसी महीने टेंडर जारी किए जाने की तैयारी चल रही है। नया कॉरिडोर बनने के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की दूरी में करीब 80 किलोमीटर तक की कमी आएगी, जिससे यात्रा करने वाले लोगों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्तमान में भोपाल से ग्वालियर पहुंचने के लिए लगभग 425 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क मार्ग से यह सफर आमतौर पर सात से आठ घंटे में पूरा होता है। हालांकि प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी। अधिकारियों के अनुसार नए मार्ग के जरिए दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय भी घटकर करीब साढ़े पांच घंटे रह सकता है। इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि माल परिवहन की लागत में भी कमी आने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) इस परियोजना को बीओटी यानी बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पर विकसित करने की योजना बना रहा है। प्रारंभिक स्तर पर परियोजना की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और अब डीपीआर तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो अगले तीन वर्षों के भीतर इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे यातायात दबाव को देखते हुए नए वैकल्पिक मार्गों की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर ऐसे शहरों के बीच जहां आर्थिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक गतिविधियां अधिक हैं। भोपाल प्रदेश की राजधानी है जबकि ग्वालियर उत्तर मध्य प्रदेश का एक प्रमुख शहर माना जाता है। दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में एक तेज और आधुनिक सड़क संपर्क लंबे समय से आवश्यक माना जा रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में विकसित कुछ आधुनिक सड़क परियोजनाओं के अध्ययन के बाद मध्य प्रदेश में भी इसी तरह के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने पर सहमति बनी। राज्य सरकार और एमपीआरडीसी पहले से कई बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इनमें भोपाल-इंदौर, भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। कई परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की जा चुकी है जबकि कुछ योजनाएं प्रारंभिक चरण में हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार प्रदेश में सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन मार्गों पर यातायात का दबाव तेजी से बढ़ रहा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जा रहा है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने से यात्रा समय कम होगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और परिवहन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदेश में प्रस्तावित अन्य ग्रीनफील्ड परियोजनाएं भी काफी महत्वाकांक्षी मानी जा रही हैं। भोपाल-मंदसौर कॉरिडोर की लंबाई लगभग 256 किलोमीटर प्रस्तावित है और इसकी अनुमानित लागत 11,550 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस मार्ग पर 13 इंटरचेंज विकसित किए जाने की योजना है और वर्ष 2029-30 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह सागर-सतना कॉरिडोर की लंबाई 218.20 किलोमीटर होगी, जिस पर करीब 9,850 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा समय छह से सात घंटे के बजाय करीब साढ़े तीन घंटे रह जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जबलपुर-आशापुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर भी प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 256 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 17 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही मौजूदा सड़क नेटवर्क को भी मजबूत करने की योजना बनाई गई है ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होते बल्कि इनके आसपास आर्थिक गतिविधियों का भी विस्तार होता है। नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होते हैं, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। भोपाल-ग्वालियर कॉरिडोर के मामले में भी ऐसी ही संभावनाएं देखी जा रही हैं। सड़क बनने के बाद दोनों शहरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और मध्य प्रदेश के कई जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बीओटी मॉडल की बात करें तो इसमें परियोजना लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 20 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। शेष 60 प्रतिशत निवेश निर्माण एजेंसी या निजी भागीदार द्वारा किया जाता है। इसके बदले उन्हें तय अवधि तक टोल संग्रह का अधिकार दिया जाता है। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के तेजी से पूरे किए जा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:57:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सब्जी, दूध, किराना और कैब किराया..... पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कहां-कहां जेब पर पड़ेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, सब्जी, दूध, किराना और कैब किराए महंगे होने की आशंका, आम आदमी की जेब पर सीधा असर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/where-will-the-pockets-be-affected-due-to-increase-in/article-53437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-and-diesel-prices-hike-impact.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके परिणाम आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर आने लगे हैं। महंगे पेट्रोल-डीजल के चलते महंगाई फिर से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसका असर ट्रांसपोर्ट से लेकर किचन तक हर जगह पड़ेगा। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में सुबह जैसे ही नए दर लागू हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए देखे गए। कई लोगों का कहना था कि पहले ही उनके बजट को संभालना मुश्किल था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हालात और भी कठिन होने वाले हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी से सबसे बड़ा प्रभाव माल ढुलाई पर पड़ता है। जब ट्रक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर और डिलीवरी वाहन अधिक खर्च में चलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसका बोझ सीधे सामान की कीमतों पर पड़ता है। इससे सब्जी मंडियों से लेकर किराना दुकानों तक इसके असर धीरे-धीरे दिखने लगता है। ऐसा कहा जा रहा है कि सब्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की सप्लाई चेन पूरी तरह डीजल पर निर्भर करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी पूरे बाजार को प्रभावित कर सकती है। सुबह के समय मंडियों में इस मुद्दे पर व्यापारी आपस में चर्चा कर रहे थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई ट्रांसपोर्टर बताते हैं कि डीजल उनके काम की लाइफलाइन है और हर लीटर में बढ़ोतरी से उनके खर्च में सीधा इजाफा होता है। मजबूरी में उन्हें किराया बढ़ाना पड़ता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर अंततः आम ग्राहकों पर भी पड़ता है। कैब और बाइक एग्रीगेटर कंपनियां भी मौजूदा हालात को देखते हुए किराया बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बसों का किराया भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दवा और मेडिकल सप्लाई पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि लॉजिस्टिक्स खर्च के बढ़ने से सप्लाई कॉस्ट भी ऊपर जाती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आम उपभोक्ताओं को यह चिंता भी सता रही है कि ग्रॉसरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैकेज्ड फूड और कुछ हद तक फ्लाइट टिकट भी महंगे हो सकते हैं। किसानों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि खेती में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर और मशीनें भी डीजल पर निर्भर हैं। यानी उत्पादन लागत बढ़ेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर बाजार में महसूस किया जाएगा। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल-डीजल की यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे हर घर के बजट में एक नई चुनौती जोड़ती दिखाई दे रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:22:00 +0530</pubDate>
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